दुनिया में घर जैसा

टाटा समूह का ग्लोबल फुटप्रिंट छ: महादेशों में 100 से अधिक देशों में फैला है।

टाटा समूह अपने आरंभ से अपने बिजनेस पहुंच में अंतर्राष्ट्रीय रहा है। संथापक जमशेदजी नशेरवानजी टाटा ने अपने बिजनेस करियर की शुरुआत चीन और इंग्लैंड में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से की। बाद में उन्होंने भारत में अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों पर और विश्व-स्तरीय तकनीकियों का इस्तेमाल करते हुए बिजनेस की स्थापना की। टाटा ऐक्सपोर्ट (अब टाटा इंटरनेशनल) की स्थापना वर्ष 1962 में हुई थी और वर्तमान में टाटा कंपनियां अपने उत्पादों की निर्यात करती है और 150 से अधिक देशों को सेवाएं प्रदान करती है।

At home in the world

वर्ष 2016-17 में, टाटा समूह का अंतर्राष्ट्रीय राजस्व 64.40 बिलियन डॉलर का था, जो इसके कुल राजस्व का 64.1 प्रतिशत था जहां ब्रिटेन और अमेरिका का योगदान मुख्य था।

टाटा समूह में प्रत्येक परिचालन कंपनी ने इसके समग्र रणनीति के एक एकीकृत अंग के रूप में अपने स्वयं की अंतर्राष्ट्रीय रणनीति का विकास किया, जो इसके उद्योग की प्रकृति, उपलब्ध अवसरों और ग्लोबल स्टेल के डायनेमिक्स पर निर्भर करता है।

कुछ कंपनियों के लिए, भारतीय घरेलू बाजार पर ध्यान देना प्राथमिकता रही है। दूसरी कंपनियां व्यापार और उत्पादों के वितरण के अर्थ में अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति बना रही हैं। टाटा कंपनियां ग्रीनफील्ड परियोजनाओं की स्थापना करते हुए, अधिग्रहण करते हुए और विदेशी भूभागों के साथ संयुक्त उपक्रम करते हुए अपनी संख्या बढ़ा रही हैं और उन भूभागों के विकास और अर्थव्यवस्था का एक एकीकृत अंग बन रही हैं।

वर्ष 2000 में टाटा टी द्वारा टेटली के अधिग्रहण से आरंभ करते हुए, टाटा कंपनियों ने अनेक अहम विदेशी अधिग्रहण किए जिसमें टाटा स्टील द्वारा कोरस, टाटा मोटर्स द्वारा जगुआर और लैंड रोवर और टाटा केमिकल द्वारा ब्रुनर मोंड शामिल हैं और ये सभी ब्रिटेन में हैं; – दक्षिण कोरिया में टाटा मोटर्स द्वारा देवू कॉमर्शियल व्हेकिल; सिंगापुर में नैटस्टील और थाइलैंड में टाटा स्टील द्वारा मिलेनियम स्टील और टाटा केमिकल द्वारा जेनरल केमिकल इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स, टाटा टी द्वारा ऐट ओ क्लॉक कॉफी और यूएस में टाटा कम्युनिकेशन द्वारा टायको ग्लोबल नेटवर्क का अधिग्रहण।

वर्ष 2004 में, टाटा संस के उस समय के चेयरमेन रतन टाटा ने अपने परिचालनों को अंतर्राष्ट्रीयकृत करने के लिए टाटा समूह के प्रयासों को संयुक्त किया : “मुझे आशा है कि आज से 100 वर्षों बाद हम आज के विश्वास की उसी भावना को साथ रखते हुए भारत के बाहर अपने पंख पसारेंगे और अनेक देशों में परिचालन करते हुए एक ग्लोबल समूह बनेंगे, एक ऐसा व्यापारिक समूह जो दुनिया में घर जैसा है।”