जुलाई 2013 | tata.com

पीईटी प्रयास

ताज होटल्स रिजॉर्ट्स एंड पैलेसेज ने एक अनोखी परियोजना में योगदान किया है, जिसके अंतर्गत चेन्नई में एक समावेशी संरचना के निर्माण के लिए रद्दी पीईटी बोतलों का उपयोग किया जाता है।

प्लास्टिक विश्व ’ का सबसे खराब प्रदूषक है- क्योंकि इसे गलाया-सड़ाया नहीं जा सकता। निर्मित किए गए प्लास्टिक का प्रत्येक कण एक या दूसरे स्वरूप में इस पृथ्वी पर हमेशा बना रहता है। लेकिन पर्यावरणविदों ने जाना है कि प्लास्टिक की बोतलें इतनी खराब नहीं है और निर्माण सामग्री के रूप में इसका इस्तेमाल करने का तरीका ढ़ूंढ़ निकाला है।

ठंडे पेय के निर्माताओं तथा बोतलबन्द पानी बेचने वालों द्वारा पॉलिथिलीन टेरेप्थेलेट (पीईटी-पेट)बोतलों का इस्तेमाल करना आम बात है। होन्डुरास के पर्यावरणविद् एन्ड्रिआस फ्रोस ने 2001 में इको टेक् की स्थापना की । यह कम्पनी, विश्व भर में सरकारी तथा गैर सरकारी (एनजीओ) संस्थानों के साथ मिल कर पेट बोतलों से इमारतों का निर्माण करने का काम करती है। फ्रोस और उसकी टीम ने सबसे पहले होन्डुरास में, 8000 पेट बोतलों से एक घर बनाया, उसके बाद उन्होंने कई बस स्टॉप, किओस्क, पानी की टंकियां, अवरोधक व रक्षक दीवारें, खड़े बागीचे और मकानों बनाएं।

इमारतों के आधार हेतु पेट बोतलों का इस्तेमाल करने के कई फायदे होने के बावजूद, दुनिया भर में इस विचार के फैलाव में समय लगा। दी इन्डियम एक्सप्रेस के साथ एक साक्षात्कार में फ्रोस ने कहा कि, “बीस साल पहले कोई भी यह बात नहीं मानता कि मोबाइल द्वारा फोन कॉल की जा सकती है। समय ज़रूर लगता है, पर यदि आपने जाना कि बोतलों द्वारा निर्माण कार्य हो सकता है, तो यह विचार एक दिन तुल ज़रूर पकड़ेगा।” जल्द ही समस्त विश्व के पर्यावरणविदों, इको-डिजाइनरों और आर्किटेक्ट का ध्यान इस बात की और आकृष्ट हुआ और भारत में 2009 में इस विचारने उस समय प्रवेश किया जब एक इंजिनिअर और फ्रोस के मित्र एस श्याम कुमार ने इको टेक् इंडिया की स्थापना की। तब से दो लोग डिजाइन और स्थापत्य के छात्रों को, महीलाओं के स्वयं सहाय समूहों और अन्यों को निर्माण के इस नये तरीके की तालीम दे रहे हैं।

2006 में भारत स्थित एक गैर लाभकारी संस्थान समर्पण फाउन्डेशन, अन्य उद्देशों के साथ-साथ ग्राम एवं शहरी विकास क्षेत्र में कार्यरत है- इसके स्थापक पैट्रिक सैन फांसेस्को ने पेट बोतल परिकल्पना का परीक्षण करने के लिए एक शाला का निर्माण करना तय किया। नई दिल्ली में पेट बोतलों (6,000) के द्वारा निर्माण की गई समर्पण स्कूल, सर्व प्रथम शैक्षिक सुविधा है। जब से इसका निर्माण हुआ है, शाला ’ के ढ़ांचे में कहीं भी कोई दरार नहीं है और पूरी तरह जलप्रतिरोधक है।

अप्रैल 2012 में, समर्पण, ताज कोरोमांडल, चेन्नई के महाप्रबंधक प्रकाश नटराज के पास समर्पण पहुंचा, चेन्नई में रेडहिल में उनकी पेट बोतल परियोजना में सहायता करने।

उनका लक्ष रेडहिल में भी ऐसी ही सुविधा का निर्माण करना था। ताज कोरोमांडल ने समर्पण के साथ हाथ मिलाएं ताकि आसपास के वंचित समुदायों के लिए ऐसी ही शैक्षिक व मनोरंजक सुविधा का निर्माण किया जा सके।

परियोजना की शुरूआत कोरोमांडल के साथ हुई, लेकिन अब चेन्नई स्थित चारों ताज होटल इससे जुड़े हैं और साथ मिल कर पिछले साल इन्होंने 30,000 पेट बोतलों का दान किया है। इसके उपरांत, कर्मचारियों ने समर्पण को अन्य ढ़ांचे जैसे कि बागीचे के बेंच बनाने में तथा इस परिकल्पना का इस्तेमाल करते हुए अपने होटल में भी इसी प्रकार का निर्माण करने में स्वेच्छा से अपना समयदान दिया है।

पेट बोतलों द्वारा किए जाने जाने वाले निर्माण की प्रक्रिया सीधीसादी है। सबसे पहले बोतलों को स्वच्छ किया जाता है, फिर पूरी तरह से मिट्टी से भर दिया जाता है। बाद में एक के पास एक करके रखा जाता है और उनके बीच की खाली जगह मिट्टी तथा निर्माण अपव्यय सामग्री से भरी जाती है और फर्श तथा दीवार बनाने के लिए सब को साथ में सिमेन्ट लगा दी जाती है।

 

पेट बोतलों से निर्माण की जाने वाली इमारतों के कई फायदे हैः

  • मिट्टी से भरी प्लास्टिक बोतलें भंगुर नहीं हैं और अचानक से लगने वाले झटके सह लेती हैं। उदाहरण देखें कि 2009 में होन्डुरास में 7.1 की तीव्रता वाला भूकम्प आया और 100 से ज़्यादा घरों का नाश हुआ, लेकिन पेट बोतलों से बनी इमारतों को कोई क्षति नहीं पहुंची। 
  • अनुमान है कि पेट प्लास्टिक बोतलों से बनी इमारतें 100 से भी अधिक वर्ष चल सकती हैं क्योंकि ये बोतलें गलन या सड़न से मुक्त हैं और इनका जीवन काल लगभग 1000 वर्षों से अधिक है।
  • ईंटें जो कि भट्टी में सेंकी गई होती है, उनके द्वारा निर्माण करने की तुलना में बोतलों द्वारा निर्माण करने से कार्बन का उत्सर्जन कम होता है। यह प्रक्रिया ज़्यादा ऊर्जा-दक्ष है और मिट्टी से ईंट बनाने के मुकाबले मिट्टी से बोतलों को भरने में कम समय लगता है।
  • बोतल से बनी दीवारें ऊष्मारोधी हैं और मज़बूत, टिकाउ व बहुमुखी हैं।
  • इस प्रकार के निर्माण, बनाने में आसान, ज़मीन तथा पानी का कम इस्तेमाल करने वाले हैं और इसके परिणामस्वरूप समाज के विविध तबके के लोगों के लिए नाना प्रकार के रोज़गारों का सृजन भी होगा।