जुलाई 2013 | संगीता मेनन

स्वास्थ्य सुविधा के लिए ललक

कोलकाता का टाटा मेडिकल सेंटर पूर्वी भारत और पड़ोसी देशों के कैंसर रोगियों के लिए जीवनरेखा के समान है और इसने इस रोग से जूझ रहे रोगियों के उपचार और सेवा के नए मानदंड प्रस्तुत किए हैं।

अनीता शेषाद्री [बदला हुआ नाम] की चमकती आँखें इस गर्मी में भी उत्साह से भरी थी जो उसके बचपन के अनूठे दिनों को बयान करती है: दोस्तों के साथ खेलने लिए ढ़ेर सारा समय, कला शिल्‍प कार्य - रंगीन कागज से बनी कठपुतलियों जिसे उसने अभी अभी बनाया है, जिसे वह गर्व से प्रदर्शित करती है - और अपने पसंदीदा कार्टून टेलीविजन शो देखती है। एक दिन सुबह, अनीता और उसके माता-पिता उसकी कीमोथेरेपी के लिए समय लेने या अस्पताल में बाल चिकित्सा ऑकोलिस्‍ट से फॉलोअप करने के लिए कोलकाता में टाटा मेडिकल सेंटर (टीएमसी) गए ।

धनबाद, झारखंड की इस 11 साल की उम्र की छठी कक्षा की छात्रा का इस वर्ष फ़रवरी से ही टीएमसी में ल्यूकेमिया का इलाज चल रहा है। धनबाद में स्थानीय अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा उसकी स्थिति का निदान करने में विफल रहने के बाद, अनीता के माता पिता ने उसे जमशेदपुर में टाटा मुख्य अस्पताल में आगे की जांच के लिए ले गए, जहां से उसे टीएमसी में भेजा गया है। तब से ही वह अस्पताल के बच्‍चा वार्ड में उपचार के प्रारंभिक सप्ताह बिताने और टीएमसी में टीम की देखरेख में है। और अब वह पास के सेंट जूड इंडिया चाइल्ड केयर सेंटर में रह रही है ताकि वह एक आउट पेशेंट के रूप में अपना इलाज पूरा कर सके।

अनीता भारत के पूर्वी क्षेत्र से कैंसर रोगियों में से एक है जो टीएमसी में अक्सर मुफ्त या रियायती गुणवत्तायुक्‍त कैंसर की चिकित्‍सा पाने के लिए अपने गांवों और कस्बों से कोलकाता आते हैं ।

कोलकाता के बाहरी इलाके, राजरहाट में अस्पताल की स्थापना का कारण जानने के लिए मुंबई में टाटा मेमोरियल अस्पताल के विगत अनुभव को देखे सकते हैं जहां देश के पूर्वी हिस्सों से लगभग 30 प्रतिशत रोगी आया करते थे । उनके अपने राज्यों में गुणवत्तायुक्‍त कैंसर का ईलाज नहीं होने के कारण, रोगियों और उनके परिवारों के इलाज कराने के लिए काफी दूरी की यात्रा करनी पड़ती थी और उनके काफी व्यवधान एवं असुविधा से निपटने के लिए मजबूर होना पड़ता था ।

पूर्वी कंफ़र्ट
रु 3.5 बिलियन की लागत से बनी टीएमसी की कल्पना भारत के पूर्वी एवं पूर्वोत्‍तर भागों के साथ-साथ बांग्लादेश और भूटान जैसे पड़ोसी देशों से उन लोगों के लिए कैंसर रोगियों की सेवा के लिए एक परोपकारी पहल के रूप में की गई थी। वास्तव में, भूटान से कैंसर रोगियों की एक बड़ी संख्या - अपने तम्बाकू की आदत के कारण भूटानी मुंह के कैंसर के लिए एक उच्‍च जोखिम की श्रेणी में आते हैं- टीएमसी में उपचार के लिए आते हैं क्‍योंकि भूटान सरकार उनका चिकित्सा खर्च उठाती है।

"हमने देश के पूर्वी भाग- पश्चिम बंगाल, असम, ओडिसा, बिहार, और उससे परे- भूटान, बांग्लादेश और कई जगहों में कैंसर के इलाज की सुविधा के मामले में एक बड़ा अंतर देखा " टाटा सन्स के निदेशक आर के कृष्ण कुमार जो टीएमसी की स्थापना और उसके संचालन के पीछे की प्रेरणा शक्ति एवं टाटा इस्‍टर्न मेडिकल ट्रस्ट के ट्रस्‍टी हैं, जो अस्पताल के दैनंदिन परिचालनों को नियंत्रित करता है, कहते हैं। "मरीजों को इलाज के लिए मुंबई की यात्रा करनी पड़ती थी और उनमें से कई और उनके रिश्तेदारों के अस्पताल के बाहर फुटपाथ पर रहना पड़ता था। यह तब की बात है जब हमारे पूर्व चेयरमैन, रतन टाटा ने कहा कि क्‍या हम कोलकाता में ही एक कैंसर अस्पताल की स्थापना पर विचार कर सकते हैं "

टीएमसी ने न केवल उस क्षेत्र के रोगियों के लिए व्यापक कैंसर चिकित्‍सा लेकर आया बल्कि यह रोग से लड़नेवाले आर्थिक संसाधनों की कमी से जूझ रहे मरीजों के लिए एक जीवन रेखा बन गया है । क्‍योंकि अस्पताल की 50 प्रतिशत सेवाएं मुफ्त या रियायती उपचार हेतु निर्धारित है। इस प्रकार, यदि ल्यूकेमिया रोगी के उपचार हेतु रु 200,000 से अधिक का व्यय होता है और उसे यदि सब्सिडीयुक्‍त उपचार प्राप्त हुआ है तो एक रोगी को रु 20,000 जैसी कम राशि का भुगतान करना पड़ेगा और कभी कभी यह राशि भी माफ कर दी जाती है।

टीएमसी के निदेशक डॉ मेमन चांडी, इस तरह के तरीके उदारता और लाभ का उल्‍लेख करते हैं । "कुछ माह पूर्व, हमें एक बच्‍चे का बोन मैरो प्रत्यारोपण करना था," उन्‍होंने कहा। "यह एक महंगी प्रक्रिया है जिसमें लगभग रु 1.5 मिलियन की लागत आती है और अस्पताल प्रबंधन ने हमें निशुल्क प्रत्यारोपण करने की इजाजत दे दी। यह डॉक्टरों की हमारी टीम के लिए बेहद संतोषजनक और हमारे लिए प्रेरणादायक है कि इस तरह के निर्णय की व्याख्या करने के लिए हम पर कोई दबाव नहीं होता। टीएमसी में, हम वास्तव में अपने रोगियों के लिए सर्वोत्तम संभव ईलाज प्रदान करने पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं "

अनीता के पिता,एक बढ़ई हैं जो अपनी बेटी के इलाज का खर्च नहीं उठा सकते थे यदि टीएमसी की भारी सब्सिडी वाली चिकित्सा सेवा उसके लिए उपलब्‍ध नहीं होती । या फिर बिमल मुंडु [बदला हुआ नाम] का ही मामला ले लें, जो एक साढ़े तीन वर्षीय बच्‍चा है जो एक्‍यूट लिम्फोब्लासटिक ल्यूकेमिया से पीडि़त है एवं विगत दिसंबर से ही टीएमसी में इलाजरत है। " वापस धनबाद में, हमारे यहां कैंसर के इलाज के लिए आवश्यक सुविधाओं वाले अस्पतालों नहीं है। इलाज के लिए कोलकाता जाना हमारी पहुँच से बाहर हो गया होता, यदि हमें इस प्रकार का समर्थन नहीं मिलता "उसके पिता कहते हैं

समर्थन के लिए कोष
इस अस्पताल में यह इस तरह से ग्रस्त मरीजों के इलाज के लिए एक 'रोगी देखभाल' कोष बनाया गया है जिसमें व्यक्तियों और कंपनियों से दान के जरिए निधियां प्राप्त हो रही हैं -और वित्तीय सहायता के अन्य स्रोतों के पास भी उन्हें संदर्भित किया जाता है।

टीएमसी में कार्यक्रम प्रबंधक तृष्णा डे का कहना है कि,एक कुशल रोगी नेविगेशन प्रणाली के अन्‍तर्गत अस्पताल की ओर से अस्‍पताल में मरीज की यात्रा के लिए सहायता की जाती है। रोगी नेविगेटर,मुख्य रूप से चिकित्सा सामाजिक कार्यकर्ता, न केवल रोगियों की सहायता के लिए उन्‍हें आवश्यक जानकारी प्रदान करते हैं और उनका परिवार सूचनायुक्‍त‍ निर्णय लेते हैं बल्कि मरीज की सामाजिक आर्थिक स्थिति से संबंधित जानकारी भी इकट्ठा करते हैं जो मरीज की प्रदान की जानेवाली वित्‍तीय समर्थन के स्‍तर का पता लगाने में अस्‍पताल की मदद करता है ।

टीएमसी की सेवाओं की श्रृंखला में कैंसर निदान,चिकित्सा, पुनर्वास और पैलिएटिव चिकित्‍सा भी शामिल है और निवारक सेवाएं शीघ्र ही जोड़े जाने की उम्मीद है। इस अस्पताल में 167 बेड हैं जिसके विभिन्न वार्डों में प्रतिमाह औसतन 500 रोगियों को भर्ती कराया जाता है। बाह्य रोगी विभाग प्रति दिन इस सेवा का उपयोग करते हुए 450-500 रोगियों को देखता है।

शल्य चिकित्सा, विकिरण कैंसर विज्ञान, चिकित्सा कैंसर विज्ञान, पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, मनोरोग विज्ञान और चिकित्सा सामाजिक कार्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों से युक्‍त बहु अनुशासनिक रोग प्रबंधन टीम है जो साक्ष्य आधारित चिकित्सा रणनीतियों और उचित नैदानिक ​​दिशा निर्देशों का उपयोग करते हुए उपचार प्रोटोकॉल हेतु निर्णय लेते हैं ।

इस केंद्र ने अत्याधुनिक उपकरणों, प्रौद्योगिकी और अस्पताल प्रबंधन प्रणालियों में निवेश किया है और इसे देश में सबसे अच्छे सुसज्जित कैंसर उपचार सुविधाओं से युक्‍त बना दिया है। टीएमसी में आठ सामान्य ऑपरेशन थियेटर, ब्रैकीथेरेपी के लिए एक ऑपरेशन थिएटर (एक प्रक्रिया जिसमें रेडियोधर्मी स्रोतों के भीतर या कैंसर ऊतकों के पास   तैनात रखा जाता है) और अत्‍याधुनिक केंद्रीय बाँझ आपूर्ति विभाग के साथ एक एकीकृत सर्जिकल सूट हैं।

व्‍यापक माहौल में बड़ी संख्‍या और जटिल कैंसर सर्जरी की सुविधा के लिए, मैगनस ऑपरेशन थिएटर टेबल्स (टीएमसी इन का उपयोग करने के लिए भारत में ही अस्पताल है) सहित प्रत्येक थियेटर अंतरराष्ट्रीय मानक वाले उपकरणों से सुसज्जित है। अपनी अनोखी परिवहन प्रणाली के साथ यह टेबल, ऑपरेशन के पूर्व एवं बाद दोनों ही स्थितियों में स्ट्रेचर और ट्रॉलियों के बीच मरीजों को हस्तांतरण करने की जरूरत को समाप्‍त करता है।

टीएमसी का दर्शन लाभ कमाना नहीं है, टाटा से जुड़े होने के कारण इसे विशेषज्ञता के विभिन्न क्षेत्रों से सबसे अच्छे कैंसर चिकित्सकों में से कुछ को आकर्षित करने में मदद मिली है: कई डॉक्टरों ने इस केन्द्र की टीम में शामिल होने के लिए भारत और विदेश में प्रतिष्ठित अस्पतालों को छोड़ चुके हैं। "हम अपने रोगियों को सर्वोत्तम संभव देखभाल प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो डॉक्टरों, नर्सों और सहयोगी स्टाफ की एक समर्पित टीम के साथ यहाँ समुदाय की भावना पैदा की है," डॉ चांडी कहते हैं।

उपचार के लिए डिज़ाइन की गई
टीएमसी की इमारतें और वार्ड कैंसर के इलाज हेतु इस केंद्र के समग्र दृष्टिकोण के साथ सिंक में तैयार की गई हैं । 13 एकड़ भूमि में फैले, 325,000 वर्ग फुट के निर्मित क्षेत्र वाले इस अस्पताल में काफी खुली जगह, संवार कर रखे गए लॉन और रंगीन फूलों की क्यारी है । और इसके वार्ड जिनमें ऊंची छत और बड़ी खिड़कियां हैं जो उपचार के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करते हुए और नैसर्गिक प्रकाश की प्रचुर मात्रा, जगह एवं खुशनुमा माहौल प्रदान करते हैं ।

टीएमसी ने अप्रैल 2014 तक, रोगियों के लिए अपनी प्रस्‍तुतियों में एक अन्‍य कोमल, केयरिंग स्पर्श जोड़ेगा। अस्पताल से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर, रोगियों और उनके परिवारों को मुफ्त या रियायती दर पर सेवाएं प्रदान करनेवाली एक छात्रावास सुविधा प्रेमाश्रय, टाटा समूह द्वारा दान की गई 1 एकड़ भूमि पर बनाया जा रहा है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त राज्य अमेरिका में होप लॉज की संकल्‍पना से प्रेरित होकर, प्रेमाश्रय मरीजों पर आर्थिक बोझ कुछ कम करने और उनके और उनके परिवार के लिए एक घरेलू माहौल बनाने के लिए 300 रोगियों और उनके अटेंडेंट्स को स्वच्छ एवं आरामदायक आश्रय प्रदान करेगा ।

टीएमसी में शिक्षा एवं प्रशिक्षण के साथ निरंतर जुड़े रहने के लिए और डॉक्टरों और सहयोगी स्टाफ के कैंसर रिसर्च और उपचार के क्षेत्र में नवीनतम घटनाक्रमों के साथ संपर्क में रहने के लिए प्रतिबद्धता सुनिश्चित करता है। "हम अपने कर्मचारियों को नवीनतम पद्धतियों के साथ संपर्क में निरंतर बने रहने के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय अस्पतालों के विशेषज्ञों के साथ कई वर्कशॉप संचालन करते हैं" टीएमसी उप निदेशक, डॉ. वी.आर. रमनन, कहते हैं। "उदाहरण के लिए, हमारे यहां हाल ही में एक वरिष्ठ गैस्‍ट्रोइंस्‍टेटिनल सर्जन ने एक सर्जरी की, जिसे हमने अपने डॉक्टरों की टीम को दिखाने के लिए सम्मेलन कक्ष में लाइव स्ट्रीम किया था "

यह अस्पताल सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, हेमेटोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, रेडियेशन ऑन्कोलॉजी, पेडिएट्रिक ऑन्कोलॉजी, ऐनेस्थिशियोलॉजी, डॉयग्‍नॉस्टिक ​​इमेजिंग एव्र पैथोलॉजी विज्ञान जैसे क्षेत्रों में चिकित्सकों के लिए एक फैलोशिप कार्यक्रम प्रस्‍तुत करता है। "अस्पताल संचालन के तीन वर्ष पूर्ण करने के बाद, हमने विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों को अपग्रेड करने की योजना बनाई है," टीएमसी के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ.असीम महाजन कहते हैं।

कैंसर चिकित्‍सा में नर्सिंग जनरल नर्सिंग के साथ तुलना में एक पूरी तरह से अलग अनुपात है, टीएमसी भी ऑन्कोलॉजी नर्सिंग में एमएससी पाठ्यक्रम भारत में पेश करने पर भी काम कर रहा है जो भारत में उपलब्ध होनेवाली ऐसी पहली पाठ्यक्रम होगी। "हमने पश्चिम बंगाल राज्य विश्वविद्यालय और राज्य सरकार से इसके लिए मंजूरी प्राप्‍त कर ली है," डॉ. रमनन कहते हैं। "हमें भारतीय नर्सिंग परिषद से अंतिम मंजूरी प्राप्त होते ही, हम पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए तैयार हो जाएंगे." टीएमसी लंदन के किंग्स कॉलेज के साथ पाठ्यक्रम को डिज़ाइन एवं कार्यान्वित करने में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए साझेदारी करेगी। इस अस्‍पताल में सेवाएं, प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्टता के के लिए ड्यूक विश्वविद्यालय, मैनचेस्टर विश्वविद्यालय और चिकित्सा अनुसंधान परिषद, यूके जैसी संगठनों के साथ अन्य भागीदारी भी प्रक्रिया में हैं।

रिसर्च पुश
अस्पताल के निकट- रु 500 मिलियन की टाटा ट्रांसलेशन कैंसर रिचर्स सेंटर- एक समर्पित अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की योजना अपने उन्नत स्तर पर है जिसके साथ ही टीएमसी अनुसंधान को और वृहत स्‍थान देगी । इस परियोजना के लिए भूमि पहले से ही खरीदी जा चुकी है और टीएमसी टीम इस केन्द्र हेतु धन जुटाने के लिए कार्यरत है। डॉ. चांडी को भरोसा है कि यह अनुसंधान केंद्र टीएमसी के लिए एक बहुत बड़ा परिवर्तक साबित होगा । "हम ऑक्सफोर्ड जीन टेक्नोलॉजीज के साथ एक संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए बातचीत कर रहे हैं," वे कहते हैं। "जब ऐसा होगा तब हम भारत में जीनोम के परीक्षण के लिए एकमात्र केंद्र होंगे."

इस बीच, अस्पताल पहले से ही दो वर्ष से कम की अवधि में अपनी क्षमता से कार्य कर रहा है और इसकी सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए टीएमसी विस्तार की योजना बना रहा है जिसमें इसे एक 400 बिस्तरों वाले अस्पताल तक बढ़ते देखा जा सकेगा जोकि कई और मरीजों को गुणवत्तायुक्‍त उपचार दे सकता है। अगला चरण टीएमसी को अपनी कुछ सुविधाओं में वृद्धि के लिए सक्षम बनाएगा वहीं इसकी कुछ विद्यमान इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर की अधिकतम क्षमता के उपयोग करने हेतु योग्‍य बनाएगा।

यह विस्तार तीन साल के भीतर पूरा होने की उम्मीद है परन्‍तु टीएमसी टीम को पता है कि यह कभी भी अधिक नहीं होगी क्‍योंकि इलाज की मांग में केवल वृद्धि ही होगी । इसीलिए यह केंद्र एक हब-एंड-स्‍पोक मॉडल बनाने यह विचार कर रही है जिसमें यह जटिल प्रोटोकॉल का प्रबंधन करना जारी रखते हुए विशेष सेवाएं प्रदान करेगी और इस क्षेत्र के अन्य अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों को अनुवर्ती कार्रवाई संचालित करने एवं बाह्य रोगी एवं डे केयर और नैदानिक एवं बुनियादी इम्‍पेशेट सेवाएं प्रबंधित करेगी ।

इससे इस अस्पताल में, बहुत अधिक संख्‍या में लोगों को कैंसर उपचार करने, क्‍वालिटी कैंसर चिकित्‍सा के लिए एक इकोसिस्‍टम बनाने और खुद पर दबाव को कम करने में मदद करेगा। इन कैंसर चिकित्‍सा केन्‍द्रों का निर्माण टीएमसी को इन सभी राज्यों में एडवांस प्रीवेंटिव ऑन्कोलॉजी एवं शैक्षिक आउटरीच कार्यक्रम अन्‍य अस्पतालों के साथ हाथ मिलाने के लिए सक्षम बनाएगा । जब भी ऐसा होगा तब अनिता जैसे रोगियों को कैंसर के इलाज के लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं होगी। घर के करीब आएगा कैंसर चिकित्‍सा