दिसम्बर 19, 2017

आदिवासी लोकाचार का संरक्षण- टाटा स्टील सुकिंदा क्रोमाइट माइन का एक प्रगतिशील कदम

स्टार होटल के शेफ ने एग्रो फॉरेस्ट फूड डाइवर्सिटी फेस्टिवल के अपने मेनू में शामिल करने के लिए आदिवासी व्यंजनों का परीक्षण किया। देसी चावल की दुर्लभ 50 से अधिक किस्में, रागी की 40 से ज्यादा और 80 से ज्यादा किस्मों के आदिवासी भोजन यहां प्रदर्शित किए गए

सुकिंदा: जैव विविधता तथा आदिवासी संस्कृति के संरक्षण तथा प्रचार प्रसार को बढ़ावा देने के प्रयास के तौर पर, उड़ीसा के जाजपुर जिले में टाटा स्टील के सुकिंदा क्रोमाइट माइन (SCM) द्वारा 18 दिसंबर, 2017 को एक एग्रो-फॉरेस्ट फूड डायवर्सिटी फेस्टिवल ‘प्रजातीय खाद्योत्सव’ का आयोजन किया गया। यह उन प्रयासों की श्रृंखला का एक अंग है जिन्हें एससीएम द्वारा 2020 के राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य के प्रति अपने योगदान के रूप में आयोजित किया जाता रहा है।

'प्रजातीय खाद्योत्सव' के दौरान उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए गणमान्य अतिथिगण

खाद्योत्सव के द्वितीय संस्करण में इस क्षेत्र में तथा राज्य के अन्य भागों के विभिन्न जनजातीय तथा आदिवासी समूहों में प्रचलित कई किस्म की कृषि-खाद्य विविधताओं का प्रदर्शन किया गया। एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (MSSRF) की जयपुर इकाई ने धान की 50 दुर्लभ विलुप्तप्राय देसी किस्मों का प्रदर्शन किया जैसे समुद्रबाली, माछाकंता, तथा कालाजीरा। रागी की 20 से ज्यादा किस्में, जैसे बड़ा मांडिया, दशहरा मांडिया, तथा साना मांडिया के साथ फॉक्सटेल बाजरे की 2 किस्में तथा औषधीय उपयोग में आनेवाले पौधे के भागों की 41 किस्में भी प्रदर्शित की गईं। इस अवसर पर, नजदीकी गांव नागदा के सफल सब्जी उत्पादक किसानों को सम्मानित किया गया और उन्हें कृषि उपकरण प्रदान किए गए।

जनजातीय तथा प्राचीन परंपरागत तथा आदिवासी भोजन की 80 से ज्यादा किस्मों की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें पीठा (स्थानीय बोलचाल की भाषा में) के नाम से ज्ञात परंपरागत केक की 30 किस्में, चावल की 10 किस्में, कढ़ी की 25 किस्में, तथा 35 प्रकार के कंद-मूल प्रदर्शित किए गए थे, जिन्हें आदिवासी लोग सदियों से इस्तेमाल करते आ रहे हैं। अनोखे खाद्य पदार्थ, जैसे काली बढ़ई चींटी की चटनी, बांस के कोपल का अचार, देसी चिकन की खिचड़ी, महुआ के फूलों का केक आदि इस प्रदर्शनी में आनेवालों के लिए बेहद दिलचस्पी का केंद्र बने हुए थे।

भुवनेश्वर के स्टार होटलों जैसे मेफेयर, ट्राइडेंट तथा जिंजर के अनुभवी शेफ ने खाद्य पदार्थों का परीक्षण किया, प्रतिभागियों से संवाद किया और अपने मेनू में कुछ स्वादिष्ट व्यंजनों को शामिल करने की व्यवहार्यता की जांच की। नवंबर में, एससीएम ने सुकिंदा की चार महिलाओं को ताज बंगाल में अपनी पाककला का प्रदर्शन करने के लिए उनके भ्रमण का आयोजन किया था। इन चार महिलाओं ने यहां भी भोजन सामग्रियों का प्रदर्शन किया और इनका अभिनंदन किया गया।  यहां 30 स्टालों पर लगभग 200 आदिवासी महिलाओं ने अपने व्यंजनों का प्रदर्शन किया।

टाटा स्टील के इस प्रयास की सराहना करते हुए, मुख्य अतिथि प्रीति रंजन घराई, एमएलए, सुकिंदा, ने कहा, “इस प्रकार के कार्यक्रम जैव विविधता के लक्ष्य की प्राप्ति में काफी हद तक सहायक हैं और उड़ीसा के विलुप्तप्राय जनजातीय तथा आदिवासी भोजन आदतों के संरक्षण में सहायता कर रहे हैं।” ;

स्टार होटल के शेफ एग्रो-फॉरेस्ट फूड डायवर्सिटी फेस्टिवल के दौरान अपने मेनू में शामिल करने के लिए व्यंजनों का परीक्षण करते हुए

इस अवसर पर बोलते हुए, आरआर सतपथी, मुख्य प्रबंधक, संचालन, फेरोएलॉय तथा मिनरल्स डिवीजन, टाटा स्टील, ने कहा, “यह आयोजन एससीएम द्वारा आयोजित किए जाने वाले इसी प्रकार के आयोजनों की श्रेणी का एक अंग था जिन्हें यूनाइटेड नेशंस के धारणीय विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में अपने तुच्छ योगदान के तौर पर आयोजित किया जाता रहा है जिसका उद्देश्य विश्व की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासतों के संरक्षण तथा सुरक्षा की दिशा में किए जाने प्रयासों को और मजबूती प्रदान करना है। इससे इस इलाके की समृद्ध आदिवासी भोजन विविधताओं के प्रति जागरुकता के प्रसार में भी सहायता मिलेगी।”

इस कार्यक्रम के लिए टाटा स्टील की सराहना करते हुए बिजय परीदा, होटल मेफेयर के वरिष्ठ शेफ, ने कहा, “स्थानीय व्यंजन जैसे खीर काकरा, कांति (काले चने के केक से बना एक मीठा व्यंजन), मिश्ची की साग (एक प्रकार का पत्ते का व्यंजन) बहुत बेहतर हैं और इन्हें होटल के ‘उड़ीसा फूड रेस्टोरेंट’ में परोसा जा सकता है।”    

इस अवसर पर उपस्थित अन्य गणमान्य लोगों में शामिल थे प्रताप पात्रा, सदस्य, जिला परिषद, सुकिंदा ब्लॉक; राजेश पटेल, प्रमुख, माइनिंग, एससीएम; हरिहर बारिक, एससीएम वर्कर्स यूनियन के जनरल सेक्रेटरी; स्थानीय पीआरआई सदस्य, टाटा स्टील के कर्मचारी, यूनियन के सदस्य तथा ग्रामीण।