फरवरी 05, 2018

टाटा पावर-डीडीएल भारत में GPS मानचित्रण प्रौद्योगिकी तथा सक्रिय RFID मार्कर्स लागू करने वाली पहली कंपनी बन गई है

  • इस प्रौद्योगिकी से केबल फॉल्ट को ढूंढने में लगने वाला समय आधा हो जाता है (औसतन 90 मिनट से घटकर 45 मिनट)
  • 1200 केबल रूटों की मैपिंग तथा 1,000 RFID मार्कर्स के अधिष्ठापन कार्य का प्रथम चरण पूरा कर लिया गया है
  • शेष केबल रूटों में इस प्रौद्योगिकी को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा

नई दिल्ली: टाटा पावर डेल्ही डिस्ट्रिब्यूशन (टाटा पावर-डीडीएल), भारत में ऊर्जा वितरण क्षेत्र की अग्रणी कंपनी, नवाचारी समाधान तथा आधुनिकतम प्रौद्योगिकी हस्तक्षेपों को अपनाकर अपने ग्राहकों को विश्वस्तरीय सेवाएं प्रदान करने के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहे हैं। अपनी इसी नीति के अनुसार, कंपनी द्वारा तेजी से फॉल्ट को ढूंढने तथा सुधारने के लिए अपने भूमिगत केबलों की मैपिंग के लिए इसके साथ RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटीफिकेशन डिटेक्टर) मार्कर के अधिष्ठापन द्वारा GPS मैपिंग प्रौद्योगिकी को लागू किया गया है। टाटा पावर-डीडीएल देश की पहली कंपनी है जिसने उपर्युक्त प्रौद्योगिकी को लागू किया है।

बिजली वितरण में प्रौद्योगिकी क्रांति– GPS मैपिंग तथा सक्रिय RFID मार्करों को लागू करना

  • केबल फॉल्ट को ढूंढने में लगने वाला समय आधा हो जाएगा (औसतन 90 मिनट से घटकर 45 मिनट)
  • किसी भी स्थल पर भूमिगत बिजली केबल नेटवर्क मार्ग को आसानी और तेजी से अंकित करना और उसका विवरण प्राप्त करना
  • यदि भूमिगत केबल में कोई फॉल्ट आए तो उसका तुरंत निदान करना
  •  प्रथम चरण में लगभग 1,200 केबल रूटों की मैपिंग तथा 1,000 RFID मार्कर के अधिष्ठापन का कार्य पूरा किया गया। इसे शेष संपूर्ण केबल रूटों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा

टाटा पावर-डीडीएल द्वारा फिलहाल प्रथम चरण में लगभग 1,200 केबल रूटों की मैपिंग तथा 1,000 RFID मार्करों के अधिष्ठापन का कार्य संपन्न किया गया है और योजना है कि इसे शेष रूटों पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। टाटा पावर-डीडीएल के पास, सबसे ज्यादा शहरी भौगोलिक विस्तार के साथ, एक विस्तृत भूमिगत नेटवर्क है, जिसके तहत 3,100 सर्किट किमी. में फैले 66केवी, 33केवी तथा 11 केवी भूमिगत केबल के द्वारा इसके मूल्यवान उपभोक्ता आधार को विश्वसनीय तथा गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति की जाती है। इस महत्वपूर्ण बिजली वितरण व्यवस्था में किसी असमय व्यवधान के परिणामस्वरूप ग्राहकों में असंतोष पैदा होता है और अनापूर्तित बिजली तथा उपकरणों की मरम्मत और बदलने के व्यय के कारण राजस्व की हानि होती है।

इस प्रौद्योगिकी का उद्देश्य है किसी भी इच्छित स्थल पर भूमिगत पावर केबल के मार्ग की पहचान करना और RFID डिटेक्टरों के द्वारा भूमि के ऊपर तथा नीचे किसी भी जोड़ की जांच करना। इससे भूमिगत केबल में अगर कोई फॉल्ट आ जाए तो उसका तुरंत निदान करने में सहायता मिलेगी।

GPS मैपिंग तकनीक में रूट के स्थानिक डेटा टैग प्राप्त किए जाते हैं और उपग्रह से प्राप्त सटीक स्थान के विवरण द्वारा इसका मानचित्रण किया जाता है। इस डेटा को टाटा पावर-डीडीएल के वर्तमान भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) नेटवर्क में भी डाला जाता है। कंपनी इस प्रौद्योगिकी के द्वारा अपने केबल रूटों को टैग कर, जोड़ों पर RFID मार्करों के साथ केबल रूटों की सटीक मैपिंग कर रही है, जिससे न केवल केबल फॉल्ट की स्थिति में इसे तुरंत सही किया जा सकेगा बल्कि इससे जोड़ों के बारे में पहले से उपलब्ध विवरण की पड़ताल भी हो सकेगी (जोड़, जोड़ का निर्माण, इसकी स्थापना की तिथि आदि से संबद्ध विवरण)। फॉल्ट लोकेटर तथा RFID डिटेक्टरों के उपयोग से भूमिगत केबल तथा केबल के रूट में किसी भी फॉल्ट की जांच आसानी से की जा सकती है।

इस प्रयास के बारे में बताते हुए, प्रवीर सिन्हा, सीईओ तथा एमडी, टाटा पावर-डीडीएल ने कहा, “टाटा पावर-डीडीएल में हम, अपने ग्राहकों को विश्वस्तरीय सेवाएं प्रदान करने के लिए हमेशा नवाचारी नए तकनीकी प्रयास प्रस्तुत करने के प्रयास करते रहते हैं। मुझे विश्वास है, कि जोड़ों पर RFID मार्कर अधिष्ठापन के साथ जीपीएस मैपिंग तकनीक से न केवल सटीक केबल रूट और इसके फॉल्ट स्थान का पता लगाना आसान होगा बल्कि इससे विश्वसनीयता में वृद्धि के लिए भूमिगत पावर केबल में किसी भी समस्या का तुरंत समाधान करने में भी सहायता मिलेगी। इस तकनीक के लागू होने के बाद से, टाटा पावर-डीडीएल ने बड़े तथा मामूली भूमिगत केबल फॉल्टों (66 केवी, 33केवी तथा 11केवी में प्रतिवर्ष लगभग 1,000 केबल फॉल्ट) का एक सटीक और त्वरित तरीके से समाधान किया है जिससे इसके संचालन में कम से कम व्यवधान आया है। हमने इस तकनीक को लागू करने के बाद केबल फॉल्ट को ढूंढने में लगने वाले समय को औसतन 90 मिनट से घटाकर 45 मिनट कर दिया है।”

टाटा पावर-डीडीएल कुछ और प्रमुख समस्याओं का समाधान करने के लिए निकट भविष्य में कुछ और नवाचारी उत्पाद, प्रक्रियाएं तथा तकनीक लेकर आ रहे हैं, जैसे केबल की ऊपरी क्षति, जिससे आपूर्ति में असमय तथा अनपेक्षित बाधा उत्पन्न होती है।