दिसम्बर 23, 2014

टाटा पावर ने कलिंगनगर में आंखों की जांच हेतु एक शिविर का आयोजन किया

125 से भी अधिक मरीज़ों के इलाज एवं मार्गदर्शन के लिए रोटरी आइ होस्पिटल के साथ सहयोग

कलिंगनगर में टाटा पावर द्वारा आंखों की जांच हेतु शिविर का आयोजन

कलिंगनगर: टाटा पावर, भारत की सबसे विशाल सग्रथिक विद्युत कंपनी हमेशा से समुदायों की ज़रूरतें ध्यान में ले कर पहल करती आई है और उन्हें बढ़िया किस्म की स्वास्थ्यजतन सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं। अपनी इसी प्रतिबद्धता का पुनरोच्चार करते हुए, कटक के रोटरी आइ होस्पिटल के साथ भागीदारी करते हुए अपने परियोजना स्थल कलिंगनगर में टाटा पावर ने आंखों की जांच हेतु एक शिविर का आयोजन किया।

इस शिविर से 125 से अधिक अधिकारियों, ठेकेदारों तथा श्रमिकों को फायदा हुआ। कटक की जेपीएम रोटरी आइ होस्पिटल के आंख विशेषज्ञों, रिफ्रेक्शनिस्टों के साथ कंपनी के कर्मचारियों ने भी इसमें अपना योगदान दिया। विशेषज्ञों की टीम ने आंखों की निःशुल्क जांच की, आंखों की देखभाल के बारे में मार्गदर्शन किया और इस शिविर में आए कई मुलाकातियों को निःशुल्क ही चश्मे भी वितरित किए। इस शिविर को बहुत अच्छा प्रतिभाव मिला और कलिंगनगर परियोजना के सभी लाभार्थियोंने इस कदम की प्रशंसा की।

इस पहल पर बात करते हुए टाटा पावर उड़िशा परियोजना के हेड पुरूषोत्तम ठाकुर ने कहा, “टाटा पावर में हमारे सदैव प्रयत्न रहते हैं कि हमारे कर्मचारियों तथा इससे भी आगे दायरा बढ़ाते हुए समुदायों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं। इस प्रकार के शिविरों का आयोजन करने का हमारा लक्ष्य जागरूकता प्रसारित करना तथा समुदाय के लोगों को वैयक्तिक स्वच्छता एवं अच्छे स्वास्थ्य के बारे में सजग करना है। इस पहल को बहुत अच्छा प्रतिसाद मिला हुआ देख कर हमें बड़ी खुशी हो रही है, और हमारे सभी हितधारकों के लिए गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने की हमारी जो सोच है उसे हम यूं ही बरकरार रखेंगे।”

आंख के चिकित्सक विशेषज्ञों ने मरीज़ों को समझाया कि आंखों की नियमित जांच करवाना क्यों ज़रूरी है, उनकी देखभाल व सुरक्षा कैसे करनी चाहिए उसके कुछ गुर की जानकारी भी दी। इन्होंने शिविरार्थियों को इस बात से भी अवगत किया कि जब लंबे समय तक कम्प्यूटर के साथ काम करना हो, धूप में काम करना हो तब किस प्रकार से आंखों की विशेष देखभाल करनी चाहिए।

मुख्य शब्दः टाटा पावर, आंख जांच शिविर, कलिंगनगर, संधारणीयता