अगस्त 18, 2017

टाइटन ने टाटा ट्रस्ट के साथ सामाजिक बदलावों के निर्माण वाले नवाचारों को सम्मानित करने के लिए डिजाइन पुरस्कारों को शुरु किया

टाइटन का नया सीएसआर प्रोग्राम, सामाजिक परिवर्तन के लिए डिजाइन: प्रभाव पुरस्कार, समाज के लाभ के लिए टिकाऊ उत्पाद डिजाइन की हिमायत करता है

बेंगालुरू: नवाचार व डिजाइन द्वारा चलित भारत की सबसे बड़ी जीवनशैली कंपनी, टाइटन कंपनी ने आज टाटा ट्रस्ट के सहयोग से सामाजिक बदलाव के लिए, डिज़ाइन: प्रभाव पुरस्कार की शुरुआत की। सामाजिक मुद्दों का समाधान करने वाले ऐसे अभिनव उत्पाद डिजाइनों पर प्रमुखता से फोकस रखते हुए, यह पुरस्कार प्लेटफार्म एक ऐसा आंदोलन है जो सामाजिक बदलाव के लिए कुशल व टिकाऊ उत्पाद डिजाइन की हिमायत करता है। टाइटन का डिजाइन: प्रभाव पुरस्कार एक प्रोजेक्ट-आधारित अनुदान पुरस्कार है जिसका लक्ष्य, भारतीय समाजन के लाभ के लिए डिज़ाइन करने के लिए उज्ज्वल दिमागों को उत्साहित और प्रेरित करते हुए वंचित समुदायों तथा समाज की आवश्यकताओं पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ना है।

टाइटन ने डिजाइन: प्रभाव पुरस्कार शुरु किए

सारे भारत के नव अविष्कारकों के लिए खुला, टाइटन का लक्ष्य उन डिज़ाइन अविष्कारकों की पहचान करना व उनको मेंटर करना है जो अपने उत्पादों को अधिक बड़े समुदाय तक पहुंचाना चाहते हैं। यह प्रोग्राम जमीनी अविष्कारकों को भी सम्मानित करेगा विशेष रूप से उनको जो सभी उपलब्ध साधनों का उपयोग करते हुए संदर्भात्मक समस्याओं के लिए रचनात्मक उत्पाद समाधानों को डिज़ाइन करने में सक्षम हुए हैं।

टाइटन के डिजाइन: प्रभाव पुरस्कारों की ग्रांड ज्यूरी में भारत के सबसे प्रख्यात वैज्ञानिकों में से एक तथा काउंसिल ऑफ साइंटिफिक & इंडस्ट्रियल रिसर्च के भूतपूर्व महानिदेशक डॉ आरए माशेलकर; विश्वविख्यात ग्रासरूट नवाचार स्कॉलर तथा हनी बी नेटवर्क के संस्थापक प्रोफेसर अनिल गुप्ता; भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर, और आर&डी, नवाचार तथा उत्पाद विकास की दिशा में उद्योग अकादमिक संवाद में अग्रणी अशोक झुनझुनवाला; पद्मश्री वीआर मेहता, ट्रस्टी सर दोराबजी ट्र्स्ट्स; हरीश भट, ब्रांड कस्टोडियन, टाटा संस; और रामजी राघवन, विख्यात भारत स्थित सामाजिक अविष्कारक तथा उद्यमी और अन्य के साथ अगस्त्य इंटरनेशनल फाउंडेशन के संस्थापक व चेयरमैन शामिल हैं।

इस शुरुआत पर भास्कर भट, प्रबंध निदेशक, टाइटन कंपनी ने कहा कि, “पिछले 30 बरसों में टाइटन में हमारे प्रयास भारतीयों की पीढ़ियों के लिए अनुकरणीय डिजाइनों के निर्माण की दिशा में रहे हैं। हमारे साझीदार टाटा ट्रस्ट्स शुरुआती 1900 से नवाचार के माध्यम से टिकाऊ विकास पर फोकस के साथ भारत में रूपांतरकारी बदलाव में प्रेरक रहे हैं। अब, डिजाइन: प्रभाव पुरस्कार के साथ हमारा संयुक्त लक्ष्य ऐसे उत्पाद डिजाइनों को मान्यता देना है जो सामाजिक बदलाव लाते हैं। हम संयुक्त रूप से अविष्कारकों को उनकी सबसे जरूरी जरूरतों को पूरा करते हुए प्रभाव डालने में सहायता करने के लिए अपने डिजाइन अनुभव और सामाजिक क्षेत्र कनेक्ट को उपयोग करेंगे।

उत्पाद डिजाइन अविष्कारकर तथा प्रोटोटाइप व परीक्षित उत्पादों वाली टीमें इस पुरस्कार व अनुदान के लिए आवेदन की पात्र हैं। योग्य प्रविष्टियां वे हैं जिनका लक्ष्य ठोस / वास्तविक उत्पादों के साथ एक अच्छी तरह से डिजाइन उत्पाद के माध्यम से किसी सामाजिक समस्या का समाधान करना होगा। अंत में योग्य पाए गए अविष्कारकों को पक्षपोषण, सम्मान व मेटरशिप के साथ-साथ रु.65 लाख तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। बाद के चरणों में अनुदान पाने वालों को अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए सीड कैपिटल के लिए आवेदन करने हेतु अवसर भी दिए जाएंगे। पुरस्कारों के बाद टाइटन अपनी सीएसआर रणनीति के हिस्से के रूप में कुछ चुनिंदा गारंटियों के लिए बहु-वर्षीय सपोर्ट पर विचार कर सकती है।

श्री मेहता, ट्रस्टी, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट, ने इस शुरुआत पर कहा, “टाइटन के डिज़ाइन: प्राबव पुरस्कारों के साथ हमारी साझीदारी टाटा ट्र्सट्स के उस व्यापक विजन का प्रदर्शन करती है जो यह पर्दर्शित करता है कि कैसे प्रौद्योगिकी तथा नवाचारों से समुदायों के जीवनों में सकारात्मक अंतर पैदा करने  के लिए जबरदस्त  लाभ लिए जा सकते हैं। इस पहल के एक हिस्से के रूप में नवाचार तथा सामाजिक उद्यमिता के फाउंडेशन (एफआईएसई) , टाटा ट्रस्ट्स, और  टाइटन, उन उद्यमियों व अविष्कारकों को पकड़ना चाहते हैं जो अपने उत्पाद जीवनचक्र चरण के माध्यम से समाजिक बदलाव निर्माण के लिए विकास क्षेत्र की चुनौतियों को संबोधित करने पर गंभीर रूप से फोकस हैं”।

वे प्रविष्टियां योग्य हैं जिनमें उद्यमी सामाजिक उत्पाद नवाचार पर फोकस हैं, वैयक्तिक या बड़े संगठनों में ऐसी छोटी टीमें जो विशिष्ट उत्पाद नवाचार पर काम कर रही हैं, विद्यार्थी जो व्यक्तिगत रूप से या छोटी टीमों में काम कर रहे हैं, ग्रासरूपट नवाचार व विदेशी नागरिक जो भारत में सामाजिक उत्पाद नवाचार पर काम कर रहे हैं, लेकिन ये योग्यता इन तक सीमित नहीं है।