जनवरी 12, 2017

टाइटन कंपनी के पैराडॉक्स पैनल के अध्ययन से निहित अंतर्विरोधों से सजे मिलेनियल संबंधों का खुलासा हुआ

टाइटन कंपनी के पैराडॉक्स पैनल का चौथा संस्करण दर्शाता है कि किस तरह से मिलेनियल, अपने बनाए संबंधों में समष्टिवाद और व्यक्तिवाद दोनो को वजन देते हैं

मुंबई: संबंधों को लेकर मिलेनियल्स मात्रा से अधिक गुणवत्ता को मूल्य देते हैं और मित्रता के निर्धारण में उम्र अब कोई कारक नहीं है। 21-35 वर्ष की उम्र वाले भारतीयों में शोध, वाद-विवाद और अंतःदृष्टि के विकास के लिए एकत्र हुए थिंक टैंक, शोध टाइटन कंपनी के पैराडॉक्स पैनल द्वारा प्रकाशित एक नए शोध के अनुसार, मिलेनियल मित्रता में अब पैक मानसिकता का विकास हो रहा है और साथी के दबाव ने अब साथी शक्ति को स्थान दे दिया है जहां पर ये डिजिटल साथी बढ़ने व हासिल करने के लिए एक दूसरे की शक्ति का लाभ लेते हैं।

बाएं से: कौस्तव सेन गुप्ता, एसोसिएट प्रोफेसर, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी; सचिन तलवालकर, रीजनल क्रिएटिव डायरेक्टर, एसएएमईए, एल्डेमैन; एस रविकांत, सीईओ, वॉचेज़, तथा ईवीपी, कारपोरेट संचार, टाइटन कंपनी; सैम अहमद, फिल्म निदेशक और बिनो पॉल, प्रोफेसर व चेयरपर्सन, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान

मिलेनियल्स के बीच संबंध सर्किलों में फैले हैं और उनके लिए प्रत्येक संबंध स्पष्ट है, सबसे भीतरी सर्किल के परिवार को सबसे अधिक मूल्य दिया जाता है, जिसके बाद, दोस्त, रूमानी रुचि तथा शेष दुनिया1आती है।

मिलेनियल्स अपने माता-पिता के साथ असाधारण संबंध साझा करते हैं। 88 प्रतिशत, लगभग दस में से नौ मिलेनियल्स अपने माता-पिता का अपने जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पाते हैं। यद्यपि जब उनके माता-पिता द्वारा लिए गए पथ का पालन करने की बात आती है तो मिलेनियल्स अपनी जड़ों से जुदा होकर, भिन्न रूप से सोचते हैं। और रीयल इस्टेट कंसल्टेंसी सीबीआरई द्वारा कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार हालांकि मिलेनियल्स स्वतंत्रता चाहते हैं, उनमें से 82 प्रतिशत अपने माता-पिता के साथ रहते हैं2 और उनमें से केवल 23 प्रतिशत अलग होना चाहते हैं।

दोस्ती की बात करें तो मिलेनियल्स का दोस्ती का नेटवर्क सबसे बड़ा है3 जिसका कारण सोशल मीडिया व कनेक्ट होने की उनकी इच्छा है। मिलेनियल्स में सोशल मीडिया में पैक मानसिकता का उभार हो रहा है जहां पर इश्यू आधारित संबंध बन रहे हैं। वे भले ही एक दूसरे से न मिले हों लेकिन वे एक दूसरे का साथ देते हैं। हालांकि व्यक्तिवाद तब आ जाता है जब मामला सफलता या आकांक्षा का हो। साथी का दबाव अब साथी की शक्ति हो गयी है जहां पर ये डिजिटल साथी एक दूसरे की शक्ति का बढ़ने व हासिल करने में उपयोग करते हैं। जब मिलेनियल्स महसूस करते हैं कि भाग्य, धन और सफलता निजी कहानियां हैं और उनको स्वयं ही बनाना होता है तो वे अपने फोकस को समूह से हटा देते हैं।

कार्यस्थल पर भी अंतर्विरोध है। लिंक्डइन अध्ययन के अनुसार मिलेनियल्स का 67 प्रतिशत वेतन, संबंध और पारिवारिक मामलों जैसे विवरणों को साथी-कर्मियों से साझा करता है, जो कार्यस्थल पर बेहतर मित्रवत संबंधों का इशारा करता है। हालांकि मिलेनियल्स का 68 प्रतिशत इस बात पर भी सहमत होता है कि प्रमोशन के लिए वे साथी के साथ दोस्ती को कुर्बान कर सकते हैं। मिलेनियल्स यह मानते हैं कि उनके कैरियर में विफल संबंध, सफलता के मार्ग के हिस्से हैं।4.

एक संबंध @ कार्य अध्ययन बताता है कि मिलेनियल्स इस बात पर भी विश्वास करते हैं कि सहयोगात्मक वातावरण उनको व्यक्तिपरक मानसिकता को छिपा कर उनके वरिष्ठ प्रबंधन के सामने नेतृत्व कौशल का प्रदर्शन करने का अवसर देता है। मिलेनियल्स के मन में यह विश्वास पक्का होता है कि लीडर की भूमिका केवल एक व्यक्ति द्वारा निभाई जा सकती है और उस पद के लिए संघर्ष किया जाना चाहिए।

मिलेनियल्स विवाह को भी अलग ढ़ंग से देखते हैं। जबकि 65 प्रतिशत मिलेनियल्स को यह महसूस होता है कि शादियां लोगों को उनके रहने के इच्छित तरीके से रहने में बाधा पैदा करती है, उनमें से 83 प्रतिशत ये मानते हैं कि शादी जीवन का एक महत्वपूर्ण कदम है। माता-पिता के रूप में विपरीत रूप से नजदीकी निगाह डालने पर, मिलेनियल्स अच्छे अभिभावकत्व को “अपने परिवार के साथ बने रहने” और “अपने बच्चे की जरूरतों’s को अपनी जरूरतों से ऊपर रखना मानते हैं।” इस बात की भी काफी संभावना है कि अभिभावकत्व संबंधी सलाह के लिए वे अपनी माताओं के पास जाएंगे लेकिन इस बात की दुगनी संभावना है कि वे अपने सर्किल में दूसरों से सलाह की बजाय5 इंटरनेट पर खोजेंगे।

एस रविकांत, सीईओ, वॉचेस और ईवीपी, कारपोरेट कम्युनिकेशन्स, टाइटन कंपनी ने मिलेनियल्स द्वारा अपने आसपास के लोगों के साथ कनेक्ट करने के व्यवहार की समझ के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा,“डीकोड करने के लिए ब्राडों के लिए मिलेनियल्स एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकी हैं। कारपोरेट के रूप में हमें यह समझने की जरूरत है कि वे कहां से आ रहे हैं और वे किस तरह से लोगों से जुड़ रहे हैं। यह हमें उनके कार्यस्थल की डायनामिक्स को मापने में और एक ऐसा वातावरण बनाने में सहायता देगा जो उनके अनुरूप होगा।  सामूहिक व्यक्तिवाद, इस बात के केन्द्र में है कि मिलेनियल्स किस तरह सेस व्यवहार करते हैं और इस विरोधाभास की बारीकियों को समझने से आने वाले सालों में इस पीढ़ी के साथ कंपनियों व ब्राडों के कनेक्ट होने का निर्धारण होगा।”

टाइटन कंपनी का पैराडॉक्स पैनल

  • डॉ बिनो पॉल, प्रोफेसर व चेयरपर्सन, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़

डॉ बिनो पॉल जीडी, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ के मानव संसाधन प्रबंधन व श्रम संबंधों के केन्द्र में प्रोफेसर हैं।  उनके पास आईआईटी बॉम्बे से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की डिग्री है और वे मानव संसाधन प्रबंधन व श्रम संबंधों, नवाचार व शोध सुविधाओं: लेबर मार्केट रिसर्च फैसिलिटी एंड द स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड लेबर स्टडीज से संबद्ध हैं। 

  • कौस्तव सेन गुप्ता, एसोसिएट प्रोफेसर, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी

कौस्तव एक प्रख्यात युवा विश्लेषक, वैकल्पिक मीडिया विशेषज्ञ और फैशन थ्योरिस्ट हैं। वे युवा भारतीयों की अनुसंधान व मार्गदर्शन टीम की अगुवाई कर रहे है, जो तेजी से बढ़ती जा रही है और अब इसके पास भारत भर के 1,500 से अधिक युवा ट्रेंड-स्पॉटर का एक नेटवर्क है। इस प्रयास का नाम इनजेन (आइएनजीईएनई) रखा गया है, जो भारत में युवाओं के रुझानों पर ऊपर किया जाने वाला पहला अनुसंधान है, जिसे कई अंतराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा भारत के युवाओं के ट्रेंड को जानने का सर्वोतम स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। वे नियमित रूप से भारतीय युवा रुझान, फैशन भविष्यवाणी, उपभोक्ता विश्लेषण पर कार्यशालाएं आयोजित करते हैं, लेक्टर देते हैं और पेपर प्रस्तुत करते हैं।
ट्विटर @kaustavsengupta
वेबसाइट http://www.kaustavsengupta.com/

  • सैम अहमद, फिल्म निदेशक

सैम अहमद विज्ञापन की दुनिया के सबसे बड़े नामों में से एक है और इस समय वे एक फिल्म निदेशक हैं। वह दुनिया के सबसे सम्मानित क्रिएटिव लोगों में से एक हैं। सैम ने वाई & आर, दुबई में 14 बरस व्यतीत किए हैं जहां पर उनको वाई&आर को दुबई में क्रिएटिव रैंकिंग में नंबर 1 एजेंसी बनाने का श्रेय दिया जाता है। बीते समय में सैम ने 200 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किए हैं जिनमें कैन्स लाएंस, वन शो, क्लिओ, न्यूयार्क फेस्टिवल तथा इपिका आदि शामिल हैं।

  • सचिन तलवालकर, रीजनल क्रिएटिव डायरेक्टर, एसएएमईए, एल्डेमैन

सचिन के पास इस उद्योग में 16 बरसों का अनुभव है और उन्होने विभिन्न एजेंसियो व भौगोलिक क्षेत्रों में काम किया है, हाल ही में मुंबई कॉमनवेल्थ / मैक्केन में उन्होनें मई 2012 से एक्जीक्यूटिव क्रिएटिव डायरेक्टर (एपीएसी) के रूप में काम किया है। सचिन ने लगातार सीमाओं को पार करते, सकारात्मक रूप से ग्राहक संबंध रूपांतरण करते और व्यावसायिक प्रभाव बनाते हुए अपनी पहचान बनाई है। सचिन के काम को अनेक प्रमुख पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है जिनमें ऐड क्लब जर्मनी, मोबियस, यूरोबेस्ट, इपिका, क्रेस्टा, कान्स, एनवाई फेस्टिवल, क्लिओ आदि शामिल हैं।


1 एमटीवी क्यूरियस माइंड्स स्टडी
2 https://qz.com/844610/for-indias-millennials-home-is-where-mom-and-dad-are/
3 http://www.debeersgroup.com/en/reports/insight/insight-reports/insight-report-2016/millennial-trends.html
4 http://www.businessinsider.in/Millennials-take-on-friendship-is-not-selfish-it-just-has-a-new-avatar/articleshow/49076471.cms
5 http://www.adweek.com/socialtimes/report-90-of-millennial-parents-find-social-media-helpful/633479