जून 17, 2016

टाइटन और जनजातीय समुदायों हेतु स्वास्थ्य प्रयास द्वारा पोरगई क्राफ्ट सेंटर के शुभारंभ की घोषणा

बंगलुरू: टाइटन कंपनी ने आल पोरगई आर्टिजन एसोसिएशन सेंटर के उद्घाटन की घोषणा की जिसका लक्ष्य है तमिलनाडु के सित्तीलिंगी वैली में लंबाडी जनजाति की महिला दस्तकारों में आत्मनिर्भरता विकसित करना जो हाथ से की जाने वाली पारंपारिक लंबाडी कसीदाकारी के पेशे में संलग्न हैं।

पोरगई आर्टिजन एसोसिएशन सेंटर के उद्घाटन में दीप प्रज्वलन समारोह

टाइटन द्वारा समूह की सहायता के तहत समूह की आवश्यकता के आधार पर विशेष अभिगम में तीन साल की समग्र सहायता शामिल है। इस सहायता में शामिल है डिजायन और उत्पाद विकास, कौशल विकास, नए दस्तकारों को प्रशिक्षण, मार्केटिंग तथा ऑनलाइन रिटेलिंग में सहायता तथा मेलों और प्रदर्शनियों में सहभागिता। टाइटन ने ऐसे केन्द्र की स्थापना में भी सहायता दी है जहां महिलाएं काम कर सकती है, प्रशिक्षण ले और दे सकती हैं, अपने उत्पाद प्रदर्शित और भंडारित कर सकती हैं।

इस प्रयास पर अपने विचार व्यक्त करते हुए टाइटन के एमडी भास्कर भट ने कहा, ‘टाइटन में हम भारतीय कला और शिल्प के विकास को प्रोत्साहित करना अपना अपना महत्वपूर्ण कर्तव्य मानते हैं। हस्तशिल्प उद्योग देश के समाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन को प्रतिबिम्बित करता है और ऐसे लघु उद्योगों का विकास और संवृद्धि करना आवश्यक है। कसीदाकारी की इस विशिष्ट पारंपरिक कला के पुनरुज्जीवन हेतु पोरगई आर्टिजन एसोसिएशन की सहायता कर हम गर्व का अनुभव करते हैं, जो अन्यथा नष्ट हो जाने के कगार पर थी। हमें इन महिलाओं का सम्मान करते हुए खुशी हो रही है जो अब उन कौशलों को पुनर्जीवित रखने में सक्षम हैं’।

लंबाडी एक जनजाति समुदाय है जो तमिलनाडु के सित्तीलिंगी वैली में रहते हैं जो सैकड़ों साल पहले कभी उत्तर भारत से प्रवास कर यहां आए थे। लंबाडी बोली में ‘पोरगई’ का अर्थ होता है ‘गर्व’। टीएचआई की डॉ ललिता रेगी ने महिला समूह को उनकी पारंपरिक लंबाडी कसीदाकारी के कौशल को पुनर्जीवित करने में सहायता की जिसमें प्रत्येक पोरगई कलाकृति को हाथ से तैयार किया जाता है।

डॉ रेगी ने बताया, ‘हमारा देश हमेशा से अपनी परंपराओं और संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है और मुझे इस बात की खुशी है कि हम इस परंपरा के अंग बने हैं जो युगों पुरानी है। महिला दस्तकारों के लिए सेंटर की स्थापना ने उन्हें अपनी क्षमताओं को निखारने का अवसर प्रदान किया है। इस समुदाय को टाइटन की सहायता से महिलाओं में अपनी पारंपरिक हुनर को लेकर आत्मविश्वास का भाव जगा है

पोरगई प्रयास टाइटन के निरंतर प्रयासों को पारंपरिक भारतीय कला और दस्तकारी को पोषित और प्रोत्साहित करने से जोड़ता है। इस दिशा में कंपनी के पूर्व में किए गए प्रयाशों में शामिल है तमिलनाडु के होसुर में कारीगर पार्क की स्थापना।