अगस्त 19, 2016

टाटा केमिकल्स के एमडी आर मुकुंदन, स्थिरता को आकार देने व नेतृत्व देने में व्यापार की भूमिका को रेखांकित किया

डीएस सेठी स्मारक भाषण देते हुए, श्री मुकुंदन ने व्यापार लीडरों के लिए लाभ कमाने के अलावा समाज को आकार देने के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की जरूरत पर जोर दिया

आज डीएस स्मारक भाषण में बोलते हुए मुझे वाकई बहुत खुशी हो रही है। टाटा केमिकल्स के लिए वे विराट थे।

सबसे पहले मैं यहां पर आकर अपने विचारों को साझा करने के लिए निमंत्रित करने पर डॉ माथुर को धन्यवाद देना चाहता हूँ।

यह एक उपयुक्त और अप्रत्याशित है कि आदरणीय मंत्री जयंत सिन्हा हमारे बीच आज उपस्थित हैं। उन्होने ही पिछले वर्ष ‘इस धरती का नमक’ ─ शीर्षक वाली किताब का विमोचन करते हुए टाटा केमिकल्स के 75वें वर्ष के समारोहों का शुभारंभ किया था, यह शीर्षक डीएस सेठी जैसी शख्सियत पर एकदम सटीक बैठता है।

इससे पहले कि मैं विषय पर बोलना शुरु करूं, मैं इस किताब – इस धरती का नमक के कुछ अंश पढ़ना चाहता हूँ। पेज संख्या 79 पर एक एपीसोड है, जो इस तरह है।

जेआरडी, दरबारी से सबसे पहले 1950 के आसपास, कंपनी की समीक्षा बैठक में बॉम्बे में मिले और वे उनके जुनून व व्यक्तित्व की ताकत से तत्काल प्रभावित हो गए। जेआरडी ने महसूस कर लिया कि मीठापुर परिचालन को गति देने के लिए वे एकदम सही व्यक्ति हैं। “उन्होने उस जगह को लगभग तहस नहस कर दिया लेकिन फिर काम चलने लगा,” उन्होने कहा।

एक बार दरबारी ने अपने डिजाइन जेआरडी को भेजे, जिन्होने उसे एक अमरीकी विशेषज्ञ ज़ोला ड्यूश के पास इसे सलाह के लिए भेज दिया। एक सप्ताह बाद जेआरडी न्यूयार्क में थे और उन्होने उस अमरीकी के विचार सुने: “आपको इस युवा शख्स को और अधिक आत्म-विश्वास देना चाहिए, क्योंकि एक व्यक्ति जो इस तरह से डिजाइन कर सकता है, उसे मेरी या किसी और की सलाह की जरूरत नहीं है। दरबारी की क्षमता ऐसी थी।

वे एक असाधारण केमिकल इंजीनियर थे, लेकिन उनमें और भी बहुत कुछ था। वे एक प्रेरक लीडर, बहुआयामी समाधान प्रदाता थे। विपरीत परिस्थितियां उनमें से सर्वश्रेष्ठ निकाल लाती थी। ऐसी ही एक घटना मेरे भाषण के शीर्षक से जुड़ी है।

टाटा केमिकल्स, में 1960 में पानी समाप्त होने की बेहद गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा। अपनी शुरुआत से समय से लेकर यह सबसे कठिन चुनौती थी। यह स्थिति तब एक ज्वलंत समस्या में बदल गयी जब मीठापुर में मानसून की बारिश हुई ही नहीं। दरबारी और उनकी टीम ने ने तेजी से प्रतिक्रिया की और ताजे पानी के संरक्षण, समुद्र के पानी से इसका प्रतिस्थापन, समुद्र जल से ताजे पानी का उत्पादन जैसी 200 योजनाओं को लागू किया। उन प्रयासों के चलते टाउनशिप व फैक्ट्री बच गए और अब यह संयंत्र ताजा पानी कतई उपयोग नहीं करता है। स्थिरता शब्द के फैशन में आने से बरसों पहले वे काफी सारी स्थिरता बरतते थे!

तो अब चलते हैं आज की चर्चा के विषय पर!

स्थिरता को आकार देने व नेतृत्व प्रदान करने में व्यवसाय क्या कर सकते हैं। सबसे पहले, हमें टिकाऊ बनने की जरूरत का तथ्य हमारे व्यापार के फलसफे, मूल सिंद्धांत और मूल्यों से आना चाहिए। वे व्यापार जो लघु अवधि के स्थान पर दीर्घ अवधि, केवल शेयरधारकों के कल्याण के विपरीत हितधारकों के कल्याण, मूल्य प्रतिधारण के स्थान पर साझा मूल्य निर्माण के विचार रखते हैं, अच्छे कारपोरेट नागरिक की तरह सोचते हैं; उनके लिए कोई अन्य विकल्प नहीं है। ऐसे व्यापारों के लिए अस्थिर होना स्थिरता नहीं है।

मेने विचार से व्यापारों को न केवल टिकाऊ परिचालनों के निर्माण पर ध्यान देना चाहिए बल्कि उससे कहीं आगे सोचना चाहिए। मैं कुछ ऐसे क्षेत्रों को रेखांकित करुंगा जहां पर आगे जाने की जरुरत है:

  1. उपभोक्ता चुनावों व व्यवहारों को प्रभावित करना: मेरे विचार से व्यापारों की यह ड्यूटी है कि वे उपभोक्ताओं को चुनाव उपलब्ध कराएं और उनके किए गए चुनाव के प्रभावों के प्रति जागरूक भी बनाएं। उपभोक्ता व्यवहार को प्रेरित करने का यह कार्य फिर पूरी प्रतिस्पर्धा को भी उसी दिशा में ले जाता है। कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:
    1. एयरकंडीशनर व एप्लाएंसेस में स्टार रेटिंग।
    2. एलईडी बल्ब चुनें
    3. चावल के उत्पादन में कम पानी उपयोग के लिए एसआरआई
  2. सप्लाई चेन को प्रभावित करना: व्यवसाय को सीमाओं से परे जाना है और सप्लाई चेन के टिकाऊपन को सुनिश्चित करना है। शीर्ष 100 कंपनियां, विशेष रूप से ट्रेडिंग फर्म, वस्तुओं के अनुपातहीन हिस्सों का नियंत्रण करती हैं ये फर्म स्पष्ट रूप से टिकाऊ उत्पादन प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती हैं और कई मामलों में उनको ब्रांड कर सकती हैं:
    1. चाय व कॉफी के लिए वर्षावन सहयोग
    2. वेंडर स्थलों पर सर्वश्रेष्ठ श्रम अभ्यास आदि।
    3. टिकाऊ केपीआई को वेंडर रेटिंग का अभिन्न अंग बनाना।
  3. प्रदर्शन के बारे में पारदर्शिता तथा प्रतिबद्धता बेहतर होनी चाहिए: व्यापारों को जीआरआई, प्राकृतिक पूंजी मूल्यांकन, एकीकृत रिपोर्टिंग आदि के माध्यम से टिकाऊपने की रिपोर्टिंग में अग्रणी होना चाहिए। मुख्य मामला यह नहीं है कि कौन कहां पर स्थित है बल्कि रोडमैप का बेहतर होना मुख्य मामला है।
  4. समुदाय तथा स्कूलों तक पहुंच: व्यापारों को उनकी सीमाओं से परे जाने की जरूरत है और कम से कम नजदीकी समुदाय को टिकाऊ अभ्यासों की ओर प्रभावित करना शुरु करने की जरूरत है:
    1. पानी समितियां।
    2. गोबर गैस संयंत्र।
    3. ग्रामीण-स्तर पर उद्यमिता।
  5. पक्षपोषण: टिकाऊपने को सुनिश्चित करने के लिए विनियामकों के साथ काम करने में सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध तकनीकें व प्रौद्योगिकी को अपनाना शामिल है।
    1. भारतीय क्लोर एल्कली उद्योग में मरकरी से मेम्ब्रेन की ओर का स्वैच्छिक शिफ्ट
    2. ऊर्जा बचत वाली युक्तियां।

आज कंपनियों के पास एक लाभकारी बिंदु है जहां पर वे प्रतिस्पर्धी बाजार और अपने उपभोक्ताओं के बीच प्रासंगिक रहने के लिए कठोर व्यापारिक निर्णय ले सकती है। जहां पर किसी भी व्यापार का अंतिम लक्ष्य लाभ कमाना व अपनी बाजार हिस्सेदारी को बढ़ाना है, वहीं पर सामाजिक जरूरतों पर प्रभाव दिए जाने पर भी गंभीर विचार की जरूरत है।

मेरी राय में हम ऐसे उत्प्रेरक हैं जिनमें समाज के विकास को डिजाइन करने की जन्मजात क्षमता होती है। वैश्वीकृत विश्व में व्यापार तटस्थ खड़े हो कर काम नहीं कर सकते हैं। 21वीं सदी में किसी व्यावसायिक समूह को न केवल बाजार के उतार चढ़ाव या उपभोक्ता मांग व जनसांख्यिकी में लगातार परिवर्तनों के प्रति बल्कि उसे समाज के प्रति भी चौकन्ना रहना है। फर्मों को उनकी व्यापार प्रक्रियाओं तथा उत्पादों या सेवाओं के समाज पर होने वाले असर पर नजदीकी निगाह रखने की जरूरत होती है। मजबूत समुदायों का निर्माण व पर्यावरण को मजबूत करना किसी संगठन के अस्तित्व का एकीकृत हिस्सा होना चाहिए।

टाटा केमिकल्स में समाज के व्यापक हित पर हमारे प्रभाव के प्रति हम बहुत गंभीर हैं। जब समाज में योगदान की बात आती है तो हम $100 बिलियन वाले टाटा समूह द्वारा स्थापित लोकाचार का पालन करते हैं। इसमें हमारे द्वारा सेवित समाज के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता शामिल है। इस समूह की सभी कंपनियां ऐसा करने के लिए उन व्यावसायिक क्षेत्रों में अग्रणी बनने व वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए प्रयास करती हैं। हम जो कुछ अर्जित करते हैं उसे समाज को वापस देने का हमारा अभ्यास, हमारे उपभोक्ताओं, कर्मचारियों, शेयर धारकों तथा समुदायों में विश्वास पैदा करता है। हम विश्वास के साथ नेतृत्व की इस विरासत के संरक्षण के लिए उसी प्रकार से प्रतिबद्ध हैं जिस तरह से हम अपने व्यवसाय का संचालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

इसीलिए टाटा केमिकल्स ने ‘विज्ञान के माध्यम से समाज की सेवा’ मिशन का आत्मसात किया है। व्यापार से परे जाने वाले लक्ष्यों के लिए विज्ञान के फलों का दोहन करके समाज के सम्मुख उपस्थित चुनौतियों का समाधान प्रदान करना हमारी प्रतिबद्धता है। जिसके परिणामस्वरूप, विज्ञान के माध्यम से भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और अधिक हरित विश्व के निर्माण का प्रयास करना हमारा लक्ष्य है। और अधिक सामाजिक रूप से उत्तरदायी कारपोरेट नागरिक बनने के हमारे विज़न को हासिल करने में हमारी सहायता करने व प्रमुख स्थिरता चुनौतियों की पहचान करने के लिए हमने अनेक कदम उठाए हैं। सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन तथा ऊर्जा, हमारे पूरे संगठन में साझा फोकस बिंदु हैं।

हमारे कारपोरेट सामाजित उत्तरदायित्व कार्यक्रम, हमारे द्वारा समर्थित विभिन्न संगठनों के माध्यम से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमारे प्रमुख समुदायों के साथ संलिप्त होते हैं व उनका समर्थन करते हैं। टाटा केमिकल्स सोसाइटी फॉर रूरल डवलप्मेंट, उदय फाउंडेशन, ओखाई - सेंटर फॉर इम्पावरमेंट (कलाकारों को बढ़ावा देने वाली एक सामाजिक संस्था), टाटा केमिकल्स गोल्डेन जुबली फाउंडेशन ऐंड मगाडी सोडा फाउंडेशन उनमें से प्रमुख हैं। यहां पर यह बताते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है कि, होप व टाटा इन्गेज जैसे स्वयंसेवा कार्यक्रमों के माध्यम से हमारे कर्मचारी हमारी सीएसआर गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं।

अनेक सोशल मीडिया फोरमों की उपस्थिति के साथ, कारपोरेट समाज के साथ सतत संवाद में संलग्न हैं। ये प्लेटफार्म किसी संगठन के ग्राहक केन्द्रीय दृष्टिकोण का एकीकृत हिस्सा भी होते हैं। यह अनावरण, कई बार कंपनियों को उनकी गतिविधियों के लिए आंके जाने के लिए अतिसंवेदनशील हो जाते हैं। एक तरह से सामाजिक संवाद का यह जटिल वेब, व्यावसायिक लीडरों के लिए समाज के साथ मजबूत संबंध विकसित करना आवश्यक कर देता है।

इसीलिए मैं यहां पर अपनी व्यापार प्रक्रियाओं में सामाजिक विकास को आत्मसात करने की जरूरत को बताना चाहता हूँ जो कि इस संबंध के निर्माण का एक बेहतरीन तरीका है। टाटा केमिकल्स की अश्वशाला से एक उदाहरण देने के लिए, हमारी प्रत्येक व्यापार इकाई ने गहन तात्त्विकता अध्ययनों के माध्यम से उनसे जुड़े विशिष्ट मामलों की पहचान के प्रयास किए हैं। इनमें जैव विविधता, सप्लाई चेन संलिप्तता, जल, तथा आजीविका को बढ़ावा, कौशल विकास, विविधता तथा समावेशन शामिल हैं। आने वाले वर्षों में हमें इन क्षेत्रों में से प्रत्येक पर अपने फोकस को और अधिक गहन करने के लिए अपने प्रयासों के साथा काम जारी रखना होगा। इसके अतिरिक्त, हम यहां पर सीओपी 21 के यूएन विकास लक्ष्यों व प्रतिबद्धताओं जैसी प्रक्रियाओं के उपजी वैश्विक चिंताओं के प्रति भी उत्तरोत्तर संवेदनशील हो रहे हैं।

निष्कर्ष रूप में मैं इस बात पर मजबूती से जोर दूंगा कि व्यापार लीडरों को मात्र लाभ कमाने पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए बल्कि उनको समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। यह समझना महत्वपूर्ण है कि समाज के व्यापक हित पर बढ़ता हुआ ध्यान टिकाऊ लाभदायी प्रगति को सक्षम करता है। सामुदायिक विकास तथा पर्यावरणीय स्थिरता को शुरु करना कंपनियों को एक ऐसे व्यापार मित्रवत समाज के निर्माण में सक्षम करेगा जो उनके प्रयास से मजबूत होगा और उनको टिकाऊ भविष्य भी प्रदान करेगा।