अगस्त 30, 2015

टाटा केमिकल्स, भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट तथा गुजरात राज्य वन विभाग ने अंतरराष्ट्रीय व्हेल शार्क दिवस मनाया

नई दिल्ली: दशक भर पुरानी संरक्षण परियोजना को मनाने के लिए, भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट (डब्लूटीआई), गुजरात वन विभाग तथा टाटा केमिकल्स (टीसीएल) आज अंतरराष्ट्रीय व्हेल शार्क दिवस तथा 2004 में इस परियोजना के शुरु होने से लेकर व्हेल शार्क के संरक्षण में सफलता को मनाने के लिए एक साथ आए। उनके संयुक्त प्रयासों ने यह सुनिश्चित किया कि 'बैरल' के नाम से लोकप्रिय मछली को गुजरात के वन्य जीव मानचित्र पर एशियाई शेर के बाद, व्हाली, प्रिय के रूप में, इसका गौरवशाली स्थान हासिल हो। जुलाई 2015 तक, 498 व्हेल शार्कों को बचाया जा चुका है और स्वैच्छिक रूप से मछुआरों द्वारा समुद्र में वापस छोड़ा गया है। धार्मिक संत मुरारी बापू द्वारा इनके शिकार के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने के साथ, व्हेल शार्क आज गुजरात की विशाल समुद्री तटरेखा में संरक्षण तथा गौरव का प्रतीक बन गयी है।

यह जाति पूरे ग्लोब के उष्णकटिबंधीय समुद्रों में फैली है, लेकिन अनेक क्षेत्रों में इसकी जनसंख्या तेजी से घट रही है। इसकी जनसंख्या को होने वाले खतरे को देखते हुए, भारत सरकार ने व्हेल शार्क को भारतीय वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की सूची I में रख दिया है जिससे इस जीव को बाघ, शेर और हाथी को 2001 में मिले संरक्षण के बराबर का संरक्षण मिल गया है। इस के जवाब में, 2004 में भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट ने टाटा केमिकल्स तथा गुजरात वन विभाग के साथ मिलकर इस प्रजाति की रक्षा और इसकी दुर्दशा पर गुजरात में जागरुकता के विस्तार के लिए एक वृहद-स्तरीय अभियान की शुरुआत की थी। इस आयोजन में आदर्श राहत कार्यक्रम भी शुरु हुआ जो उन मछुआरों को वित्तीय सहायता देने के लिए हैं जिनके जाल, व्हेल शार्कों को बचाने व मुक्त करने के दौरान काटने से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।

बचाव टीम के प्रयासों के बावजूद, व्हेल शार्कों की एक बड़ी संख्या, बचाव टीम के साइट पर पहुंचने में व्यापक यात्रा के समय से प्रेरित तनाव व उलझाव के कारण मर रही थी। मुक्ति की गति को बढ़ाने के लिए, 2012 से आत्म-फोटो दस्तावेजीकरण प्रक्रिया को शुरु किया गया और सूत्रपदा, धामलेज तथा वेरावल में मछुआरों को 1,200 जल रोधी कैमरे वितरित किए गए। मछुआरों द्वारा बचाव की ली गयी फोटो ने जालों की क्षति के साक्ष्य का प्रदान किए और सरकार से वित्तीय दावे में सहायता की।

व्हेल शार्क संरक्षण कार्यक्रम के अगले चरण में भारत का पहला व्हेल शार्क सैटेलाइट तथा मार्कर टैगिंग कार्यक्रम शुरु किया गया है। इस प्रजाति के प्रवास पैटर्न को समझने तथा इस रहस्यमयी जीव को और समझने के लिए, अभी तक चार व्हेल शार्कों को सैटेलाइट ट्रांसमीटरों से टैग किया गया है। इसके अलावा, 132 मछुआरों को बचायी गयी मछलियों पर टैग लगाने के प्रशिक्षण दिए गए हैं जो कि इस रहस्यमयी जीव की जनसंख्या के बारे में अधिक खुलासा करेगा।

इस पहल पर बोलते हुए अलका तलवार, हेड, कारपोरेट स्थायित्व, टीसीएल ने कहा, “जैव विविधता संरक्षण, टाटा केमिकल के व्यावसायिक सिद्धांत में भीतर तक समाहित है और हम हमेशा संरक्षण के बारे में लोगों को शिक्षित करने व इस महान कार्य को आगे ले जाने के लिए पहलों व अभियानों का संचालन करते रहेंगे। आज, हमें यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि एक दशक पुराना व्हेल शार्क संरक्षण अभियान सफलता के साथ 498 व्हेल शार्कों को बचा चुका है। हमेशा की तरह, टाटा केमिकल्स हमारी प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए व्हेल शार्क अभियान को तथा समुदायों को व्हेल शार्क संरक्षण के बारे में और अधिक सीखने में मजबूती का साथ समर्थन देना जारी रखेगा।”

“हमें वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की सूची I में शामिल इस प्रजाति के प्रवास तथा व्यवहार के बारे में और अधिक जानने की जरूरत है, जिसके बारे में दूसरी श्रेणियों जितना अध्ययन अभी तक नहीं किया गया है। यह भी एक कारण है कि इन शानदार जीवों के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। विज्ञान हमें इन जीवों के बारे में बेहतर समझने में और बेहतर संरक्षण रणनीति का निर्माण सहायता कर सकती है, जो गहरे नीले समुद्र में उनकी उत्तरजीविता सुनिश्चित करेगा,” वरिष्ठ सलाहकार तथा परियोजना जांचकर्ता, डब्लूटीआई, बीसी चौधरी ने कहा।

गुजरात की तटरेखा पर व्हेल शार्क निवास के पारिस्थितिकी तंत्र को समझने तथा प्लवक व जल के भीतर के जीवन से मजबूत वैज्ञानिक डाटासेट पैदा करने के लिए डब्लूटीआई ने हाल ही में भारतीय विज्ञान शिक्षआ तथा शोध संस्थान, कोलकाता (आईआईएसईआर-के) के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया है। मछुआरों, गुजरात वन विभाग तथा टीसीएल के साथ सहयोग में, डब्लूटीआई ने पेंटिंग प्रतियोगिताओं, प्रश्नोत्तरियों, रंगोली आदि जैसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से गुजरात के हजारों विद्यार्थियों तक अपनी पहुंच बनाई है, जिससे व्हेल शार्क संरक्षण में भविष्य की पीढ़ियों का हितधारक बनना सुनिश्चित हो सके।

इसके अलावा, डब्लूटीआई, आंध्र प्रदेश वन विभाग तथा एग्री फाउन्डेशन के समर्थन से व्हेल शार्क संरक्षण को पश्चिमी तट से पूर्वी तट की ओर ले जा रहा है तथा यह काकीनाड़ा में अंतरराष्ट्रीय व्हेल शार्क दिवस पर एक एमओयू पर हस्ताक्षर भी कर रहा है। इस एमओयू में एपी के तट पर स्थानीय मछुआरों की सहायता से व्हेल शार्क के ऐतिहासिक वितरण तथा वर्तमान स्थिति को समझने के लिए सर्वेक्षण करना शामिल है। भारत के वन्यजीव संस्थान के साथ एक अन्य एमओयू पर भी हस्ताक्षर किया जाएगा जो कि टिशू नमूने के जेनेटिक विश्लेषण पर आधारित व्हेल शार्क के मॉलीक्यूलर मेक-अप को समझने के लिए होगा।

30 अगस्त को हर साल, अंतरराष्ट्रीय व्हेल शार्क दिवस पर इस महान संरक्षण सफलता की कहानी से सभी हितधारक समुद्री संरक्षण के इस प्रतीक को मनाने के लिए एक साथ एकत्रित होते हैं। पिछले साल, डब्लूटीआई तथी टीसीएल ने गुजरात में समुद्री संरक्षण के लिए टीसीएल के समर्थन को जारी रखने के लिए भी एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए।