टाटा पावर

महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मौजूदगी के साथ टाटा पावर भारत की सबसे बड़ी एकीकृत ऊर्जा कंपनी है। भारत में कंपनी की स्थापित उत्पादन क्षमता 10,496 MW है और ईंधन एवं लॉजिस्टिक्स, उत्पादन (ताप, जलविद्युत, सौर और पवन ऊर्जा), पारेषण, वितरण और व्यापार जैसे ऊर्जा क्षेत्र के सभी खंडों में इसकी मौजूदगी है। भारत में ऊर्जा के उत्पादन, पारेषण और वितरण में इसकी सफल सार्वजनिक-निजी भागीदारी रही है, जैसे उत्तरी दिल्ली में बिजली पहुंचाने के लिए टाटा पावर डेल्ही डिस्ट्रीब्यूशन का दिल्ली विद्युत बोर्ड के साथ, भूटान के ताला हाइड्रो प्लांट की बिजली को दिल्ली तक लाने के लिए पावरलिंक ट्रांसमिशन का पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के साथ और झारखंड में 1,050 MW मेगा पावर प्रॉजेक्ट के लिए मैथन पावर का दामोदर घाटी निगम के साथ साझेदारी। यह भारत में नवीकरणीय ऊर्जा की सबसे बड़ी कंपनियों में एक है और इसने गुजरात के मुंद्रा में 4000 MW की क्षमता वाला देश का पहला अल्ट्रा मेगा पावर प्रॉजेक्ट विकसित किया है जो सुपर-क्रिटिकल तकनीक पर आधारित है।

व्यापार के क्षेत्र

अक्षय ऊर्जा 

  • जल विद्युत उत्पादन: भारत के महाराष्ट्र में कंपनी की स्थापित उत्पादन क्षमता 693MW है। टाटा पॉवर और नोर्वे स्थित एसएन पॉवर ने भारत तथा नेपाल में जलविद्युत परियोजनाएं विकसित करने हेतु विशिष्ट भागीदारी की। कंसोर्टियम द्वारा भारत के हिमाचल प्रदेश स्थित चेनाब घाटी में 236MW दुगर जलविद्युत परियोजना लगाई जा रही है। भूटान सरकार के साथ जेवी के जरिए टाटा पावर ने 126MW क्षमता की दागछू जल विदुत परियोजना लगाई है। कंपनी और अधिक जलविद्युत परियोजनाओं के लिए बिड के माध्यम से इस क्षेत्र में और मौके तलाश रही है। कंपनी ने 60 MW की दो यूनिट के साथ कुल 120 MW की इतेझी तेझी जलविद्युत परियोजना चंबा में लगाई है जिसमें टाटा पावर की 50 प्रतिशत साझेदारी है।
  • सौर ऊर्जा उत्पादन: टाटा पावर का 918 MW सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता का भारत में मजबूत पोर्टफोलियो है। इसने 25 MW की एक सौर ऊर्जा परियोजना गुजरात के मीठापुर में लगाई है और 28.8 MW की एक सौर परियोजना महाराष्ट्र के पलासवाडी में स्थापित है। इसने मुलशी में 3 MW की एक सौर फोटो-वोल्टिक संयंत्र स्थापित की है जो महाराष्ट्र में ग्रिड से जुड़ी सबसे बड़ी सौर परियोजनाओं में एक है। महाराष्ट्र के वल्वहान में कंपनी ने 1996 में 110 kW की अपनी पहली सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित की। एक 60.48 kWp क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र कंपनी के मुंबई स्थित एक ऑफिस की छत पर लगाई गई है।
  • पवन ऊर्जा उत्पादन: भारत में टाटा पावर की पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता 1,074 MW है और यह उत्पादन पवन ऊर्जा के क्षेत्र के अग्रणी पांच राज्यों- महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और राजस्थान स्थित संयंत्रों में किया जाता है।

    सेनर्जी टाटा पावर और दक्षिण अफ्रीकी विविधतावादी रिसोर्स कंपनी एक्जैरो (Exxaro) रिसोर्सेस के बीच एक संयुक्त उपक्रम (जेवी) है। दक्षिण अफ्रीका स्थित सेनर्जी दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना और नामीबिया में जेनरेशन प्रॉजेक्ट लगाने पर केंद्रित है ताकि उत्पादन संपदा का एक संतुलित पोर्टफोलियो तैयार किया जा सके। 134.4 MW का अमाखला एमोयनी विंड फार्म और 95.17 MW का त्सितसिकम्मा प्रॉजेक्ट ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है।
  • अवशिष्ट गैस उत्पादन: टाटा पावर ने हल्दिया और जमशेदपुर (पावर 6) में विभिन्न परियोजनाओं की स्थापना की है जो ब्लास्ट फरनेस और कोक ओवन गैसों जैसी अवशिष्ट गैसों पर आधारित है और इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में पर्याप्त कमी लाने में मदद मिलती है। टाटा पावर ने अपनी संयुक्त उपक्रम कंपनी इंडस्ट्रियल एनर्जी लिमिटेड (आईईएल) के माध्यम से 202.5 मेगावाट आईईएल, कलिंगनगर-ओडिशा प्रोजेक्ट की 67.5 मेगावाट की दो इकाइयों की सफलतापूर्वक स्थापना की है। कंपनी की अपशिष्ट गैस से उत्पादन की स्थापित उत्पादन क्षमता अब 375 मेगावाट है।

अन्य व्यापार

  • पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी टाटा पावर ट्रेडिंग कंपनी (टीपीटीसीएल) वह पहली कंपनी है जिसे केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग द्वारा ऊर्जा व्यवसाय के लिए लाइसेंस प्रदान किया गया है जिससे यह संपूर्ण भारत में अपना परिचालन करने में सक्षम हुई है।
  • स्ट्रैटेजिक इंजीनियरिंग डिविजन (एसईडी) 30 सालों से अधिक समय से परिचालन में है भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए विकास और उत्पादन गतिविधियों में संलग्न है। कंपनी रणनीति विषयक जो इलेक्ट्रोनिक उत्पाद विकसित करती है उसका 90 प्रतिशत, सुरक्षा क्षेत्र के लिए कार्यान्वित किया जाता है। यह डिविज़न बरसों से भारत के सुरक्षा बलों व डीआरडीओ के साथ रिश्ता बरकरार रखे हुए है। डिविजन ने हवाई सुरक्षा और नौसैनिक युद्धक प्रणाली के लिए विशिष्ट उपकरण विकसित किए हैं। कंपनी भारतीय हवाई सेना के लिए एयरफील्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण के लिए भी एक कार्यक्रम विकसित कर रही है।
  • टाटा पावर सोलरिस टाटा पावर की एक 100 प्रतिशत अनुषंगी कंपनी है यह भारत में सौर फोटोवोल्टिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बाजार में अग्रणी है। कंपनी की लगभग 75 प्रतिशत बिक्री युरोप तथा दक्षिण अफ्रिका को की जाने वाली निर्यात से आती है।

संयुक्त उपक्रम, सहायक कंपनियां और सहयोगकर्ता (असोशिएट्स)

भारत में ऊर्जा के उत्पादन, पारेषण और वितरण में कंपनी की सफल सार्वजनिक-निजी भागीदारी रही है, जैसे उत्तरी दिल्ली में बिजली पहुंचाने के लिए टाटा पावर डेल्ही डिस्ट्रीब्यूशन का दिल्ली विद्युत बोर्ड के साथ, भूटान के टाटा हाइड्रो प्लांट की बिजली को दिल्ली तक लाने के लिए पावरलिंक ट्रांसमिशन का पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के साथ और झारखंड में 1,050MW मेगा पावर प्रॉजेक्ट के लिए मैथन पावर का दामोदर घाटी निगम के साथ साझेदारी। यह भारत में नवीकरणीय ऊर्जा की सबसे बड़ी कंपनियों में एक है जिसने मुंद्रा (गुजरात) में 4,000MW की क्षमता वाला देश का पहला अल्ट्रा मेगा पावर प्रॉजेक्ट विकसित किया है जो सुपर-क्रिटिकल तकनीक पर आधारित है।

इसकी अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति में शामिल हैं इंडोनेशिया के कोयला खदानों और भूतापीय परियोजना में 30 प्रतिशत की भागीदारी के साथ रणनीतिक निवेश; सिंगापुर में ट्रस्ट एनर्जी रिसोर्सेस के जरिए सिक्युरिटाइज कोयला आपूर्ति और ताप ऊर्जा उत्पादन कार्यों के लिए कोयले की ढुलाई; दक्षिण अफ्रीका में सेनर्जी नामक संयुक्त उपक्रम के जरिए अफ्रीका के 16 विभिन्न देशों में संयुक्त उपक्रम; ऑस्ट्रेलिया में उन्नत भूतापीय और स्वच्छ कोयला तकनीकों में निवेश; और भूटान में भूटान सरकार के साथ साझेदारी के जरिए जलविद्युत परियोजना का संचालन। 60 MW की दो यूनिट के साथ कुल 120 MW की इतेझी तेझी जलविद्युत परियोजना चंबा में लगाई है जिसमें टाटा पावर की 50 प्रतिशत साझेदारी है।

स्थल

टाटा पावर का मुख्यालय मुंबई में है।

यह प्रोफाइल मई 29, 2017 को 15:22 भारतीय मानक समय पर अद्यतन किया गया था।
अधिक जानकारी के लिए कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट देखें (वेबसाइट लिंक इस पृष्ठ पर 'संपर्क' अनुभाग में उपलब्ध है)