सितम्बर 2017

'नवाचार आम लोगों के बीच विकसित हो सकता है'

सामाजिक विकास के लिए जेनिया टाटा की प्रतिबद्धता दक्षता में बहुगुणित वृद्धि करने की दिशा में नवाचार की भूमिका में उनकी धारणा से मेल खाती है। दुनिया भर में सामाजिक विकास की आवश्यकताओं को पूरा करने में तकनीकी विकास केंद्रित गैर-लाभकारी संगठन XPRIZE (ग्लोबल एक्पैंशन) की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर एशिया, अफ्रीका और लैटिक अमेरिका में पिछले दो दशकों के दौरान अनेक क्षेत्रों में किए गए कार्यों के बारे में बताती हैं।

सुश्री टाटा दुनिया भर में महिला सुरक्षा, नवाचार, खाद्य, ऊर्जा आदि क्षेत्रों में XPRIZE प्रयासों का नेतृत्व करती हैं। जो बात यहां सबसे अलग उभर कर सामने आती है, और बड़े कमाल की है, वह है वाटर अबंडंस XPRIZE के प्रयास जो टाटा समूह की सहायता से चलने वाली एक 1.75 मिलियन डॉलर की प्रतियोगिता है जो टीमों को वायुमंडल से ताजे पानी के उत्पादन को संभव बनाने वाली तकनीक विकसित करते हुए दुनिया भर में पानी के संकट को दूर करने के उपायों में सहयोग करने की चुनौती देती है। इसका अर्थ है कि विरल हवा से पानी का निर्माण और इसमें कुछ भी लाभ कमाने वाली बात नहीं है।

मुंबई की लड़की जो कम उम्र में अमेरिका चली गई — और अब "कुदरती खूबरती के बीच कोलोरैडो रॉकीज में 10,000 फीट की ऊंचाई पर रहती हैं" — सुश्री टाटा जल, खाद्य, आजीविका, जलवायु परिवर्तन, भूमि अधिकार, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे मुद्दों पर काम करती हैं।

क्रिसाबेल नोरोन्हा से वह अपने कार्य और वाटर अबंडंस XPRIZE कंटेस्ट द्वारा जल-वंचित लोगों और समुदायों के जीवन में आने वाले फर्क के बारे में बताती हैं। संपादित अंश:

अपनी पृष्ठभूमि के बारे में बताइए और आप सोशल सेक्टर के साथ कैसे जुड़ीं।
मैं मुंबई की रहने वाली हूं और जेवियराइट हूं, [सेंट जेवियर कॉलेज से पढ़ाई की है] और मध्य मुंबई के गोवालिया टैंक इलाके में पली-बढ़ी। 22 साल की उम्र में मैं भारत से बाहर चली गई। शुरुआती दिनों में मेरे ऊपर सबसे गहरा प्रभाव अपनी नानी गूल वाडिया का रहा है। वह बेहद बुद्धिमान महिला थीं, उनका रुझान दर्शन, साहित्य और प्रकृति की तरफ था। गूल ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा सामाजिक सेवा करते हुए बिताया और इसका मेरे ऊपर गहरा असर पड़ा।

छोटी लड़की के रूप में मैं हमेशा नई और अलग किस्म की तकनीकों से आकर्षित रही। मैं स्पेस और तकनीक से प्रभावित थी लेकिन यह मेरी पहुंच से बाहर की बात थी। यह लगाव उड्डयन के प्रति मेरे प्रेम के रूप में सामने आया है। अपनी पारिवारिक विरासत के अनुरूप, जब मैं केवल 18 की थी तभी मुझे लाइसेंस मिल गया था। मेरी बुआ रुबी कपाडिया भारत की शुरुआती महिला पायलटों में थी और जेआरडी टाटा के साथ उड़ान भरी थीं।

मैंने जाना कि कैसे तकनीक दुनिया में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बड़े और साहसी कदम उठाने में सहायक तत्व के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है। लेकिन टेक्नोलॉजीज एक प्रेरक तत्व है। अनेक कारक हैं, उनमें सामाजिक रीति और बाजार स्वीकार्यता सामाजिक विकास क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तकनीक अपनाने से जुड़ी है।

जैसा कि मैंने पिछले 20 सालों में सीखा है यह काम प्रायः ट्रायल और एरर (प्रयास और त्रुटि) पर आधारित होता है। कभी-कभी सफलता मिलती है और कभी-कभी उसी विधि को अपनाकर भी हम विफल रहते हैं; कोई एक सूत्र नहीं है। आपको बस कोशिश करते रहना पड़ता है, हमेशा गतिशील रहना होता है और जिन लोगों की आप मदद करते हैं उनकी बात सुननी पड़ती है।

अपने काम में किस तरह की महत्वपूर्ण चुनौतियों का आपको सामना करना पड़ता है और किन बातों से आपको प्रेरणा मिलती है?
उभरती अर्थव्यवस्थ में सरकार द्वारा निर्मित नियम और कानून प्रायः नगण्य प्रभाव डालते हैं; बल्कि वे तो हर काम की गति को धीमी कर देते हैं। परिणामस्वरूप आप, सरकार के साथ कोई करोबार नहीं करना चाहते। म्यानमार के खुलने से पहले, जहां मैं आर्थिक विकास के लिए काम कर रही थी, हमें सैन्य शासन की ताकतों से बचने के लिए हमें राडार के तहत उड़ान भरना पड़ता था।

दूसरी चुनौतियां होती हैं जब आपके डोनर्स और बोर्ड मेंबर ऐसी दुनिया से आते हों जिनके पास विकासशील देशों की जमीनी हकीकत की समझ सीमित हो। आपका ज्यादातर समय इन सरकारों और डोनर्स को चीजें समझाने में ही चली जाती हैं जबकि आपको फील्ड में काम में जुटा होना चाहिए था। यहां एक चीज सकारात्मक है कि जब आपकी टीम के कामों से लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने लगें तो फिर वापस मुड़ना नहीं पड़ता है। मैं अक्सर कहती हूं, “यदि अभी नहीं तो कब; यदि आप नहीं तो कौन।”

आपको विकास के मुद्दों पर एक ‘उद्यमी और बाजार-आधारित अभिगम’ लाने का श्रेय दिया जाता है। इसका क्या अर्थ है?
कई परिस्थितियों में, हमने सीखा कि चैरिटी से काम नहीं चलता, खासकर आज की दुनिया में। विशाल चैरिटेबल कार्यों के लिए समय और स्थान होता है; मैं इससे इनकार नहीं करती। हालांकि, यदि आप ऐसा कुछ करना चाहते हैं जिससे सबका जीवन आर्थिक रूप से ऊपर उठे तो आपको बाजार-आधारित तरीके अपनाने पड़ते हैं। आप जिन लोगों के लिए काम कर रहे हैं उन्हें आपको चैरिटी पाने वाले लोगों की बजाए बराबरी का साझेदार मानना पड़ता है।

यदि आपको सर्वाधिक महत्वपूर्ण विकास की चुनौतियों पर काम करने का अवसर मिले तो आपकी प्राथमिकता सूची किस तरह की होगी? अथवा क्या यह बिल्कुल बंधा हुआ होता है?
एक अलग किस्म का प्रश्न लेकिन मैं हमारी दुनिया और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों से सीधे-सीधे निबटूंगी। और जब आप यह सोचना शुरू करते हैं कि पर्यावरण की मुक्ति के लिए क्या किया जाए तो आपको अपशिष्ट (क्षति या बरबादी) की समस्या से रू-ब-रू होना पड़ता है। अपशिष्ट, ऊर्जा, जल और खाद्य के बीच गहरा संबंध होता है। हमें उस दायरे के अंदर होने घटित होने वाली चीजों को बदलना होगा: हमें सोचना है कि हम ऊर्जा कैसे और कहां से प्राप्त करें।

खाद्य की समस्या पर काम करते हुए आपको कचरे की समस्या को भी देखना पड़ता है क्योंकि सभी खाद्य से जुड़े मुद्दों का 30% अपशिष्ट से संबंधित है। इसे ‘खाद्य अंतराल/फुड गैप’ कहते हैं, जहां उत्पादन और उपभोग के बीच 30% क्षति होती है, जो कि उपभोग-पश्चात की क्षति नहीं है। ये मुद्दे आंतरिक रूप से जुड़े हुए हैं और पहले इन्हीं से निबटना है।

सामाजिक क्षेत्र के संदर्भ में आप नवाचार (इनोवेशन) को किस तरह परिभाषित करते हैं?
मैं इसे XPRIZE में किए जा रहे कामों के संदर्भ में परिभाषित करूंगी: साहसपूर्ण और हासिल करने योग्य। नवाचार के जरिए, अनोखे समाधान विकसित करने हेतु आप विभिन्न प्रकार के ज्ञान और अनुसंधान को समन्वित कर सकते हैं। रूपांतरकारी नवाचार कहीं से भी आ सकता है- आम लोगों से भी जो समस्याओं से जूझ रहे हैं या इजीनियरों, समाज वैज्ञानिकों, नीतिनिर्धारकों तथा अन्य से निर्मित बहुप्रतिभायुक्त टीमों से भी।

‘वाटर अबंडंस XPRIZE' प्रतियोगिता किस बारे में है?
मानव अस्तित्व, हमारी जलवायु प्रणाली तथा धारणीय वैश्विक विकास के बीच जल सार्वभौमिक कड़ी है। 43 देशों के कुछ 78 करोड़ लोगों को जल के अभाव के साथ जीना पड़ रहा है और स्वच्छ पेयजल तक पहुंच की समस्या वैश्विक है जो दुनिया की 40% से अधिक आबादी को प्रभावित करती है।

तीन अतिमहत्वपूर्ण चुनौतियां जो जलाभाव की समस्या में योगदान देती हैं, वे हैं उपलब्धता की कमी, असमान वितरण तथा पहुंच, एवं प्रदूषण। डिसैलिनेशन तथा अपशिष्ट जल का उपचार जैसे समाधान या तो पर्यावरण के लिहाज से नुकसानदेह या अव्यावहारिक तौर पर खर्चीले हैं। फिर भी, 1,40,000 खरब [14,000 ट्रिलियन] लीटर पानी वायुमंडल में अदृश्य जल-वाष्प के रूप में मौजूद है, और हवा से पानी निकालने के लिए पर्याप्त आर्द्रता होती है।

वायुमंडल से पानी निकालने का काम लंबे समय से हो रहा है, लेकिन इसकी तकनीक काफी खर्चीली है, इसमें अनावश्यक ऊर्जा लगती है और यह बहुत जटिल है, जिस कारण व्यावहारिक रूप से प्रचलित नहीं हो पाई है। हमने जो किया वह ये कि पानी के लिए पसंदीदा भावी अवस्था की कल्पना और फिर 1.75 मिलियन डॉलर के साहसपूर्ण वाटर अबंडंस XPRIZE को तैयार किया जिसमें हर कोई भाग ले सकता है जिसने हवा से पानी निकालने की दिशा में उल्लेखनीय काम किया हो। यह गूढ़ मगर हासिल-योग्य है।
यह पुरस्कार भाग लेने वाली टीमों को वायुमंडल से ताजा पानी निकालने वाली ऊर्जा-दक्ष तकनीकों की मदद से वैश्विक जल संकट को सुलझाने की चुनौती पेश करता है। 2 सेंट से कम (लगभग 1.3) प्रति लीटर की मामूली लागत पर, केवल नवीकरणीय ऊर्जा की मदद से हवा से प्रतिदिन न्यूनतम 2000 लीटर पानी निकालने वाले यंत्र विकसित कर हम ताजे पानी की उपलब्धता की दिशा में क्रांति लाना चाहते हैं।

इस प्रतियोगिता से टाटा समूह किस प्रकार जुड़ा है?
कई वर्षों तक रतन टाटा XPRIZE के बोर्ड में रहे हैं। जिस समय वह शामिल हुए, हम स्पेस में, गहरे समुद्र में और वाहन क्षेत्र में ढेरों काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह सब कुछ तो बहुत अच्छा है लेकिन धरती पर रहने वाले 6 अरब लोगों के लिए क्या? बड़े विकासात्मक मुद्दों के समाधान हेतु हम टाटा से फंड चाहते थे।

श्री टाटा की शर्त थी कि समूह से मिलने वाले फंड - जो कि 2012 की बात है- का इस्तेमाल जिस भी काम के लिए हो उसकी शुरुआत भारत से होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "तुम लॉस एंजेल्स [जहां XPRIZE का हेडक्वार्टर है] में बैठकर विकासशील दुनिया के लिए पुरस्कार अभिकल्पित नहीं कर सकते।" वह चाहते थे कि हम भारत में रहकर यहां के स्थानीय विशेषज्ञों की मदद लें और यहीं कुछ शुरू करें। इससे मुझे वाटर अबंडस XPRIZE की अभिकल्पना की प्रेरणा मिली।

पुरस्कार की अभिकल्पना से लेकर वास्तविक रूप से विजेताओं की प्राप्ति और क्रियान्वयन की कितनी लंबी प्रक्रिया रही?
आम तौर पर, पुरस्कार की अभिकल्पना में छह माह का समय लगा और इसमें एक्टीविस्ट सहित पारंपरिक तथा गैर-पारंपरिक विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। वाटर अबंडस प्राइज के लिए, 18 महीने की तकनीक विकास अवधि होती है। विकास के क्षेत्र में तकनीकियां ऐसी होनी चाहिए कि उन्हें तत्काल स्केल अप किया जा सके; अन्यथा वे सर्वोत्तम रूप से कूल प्रोटोटाइप होती हैं।

सामाजिक विकास के क्षेत्र में गैर-लाभकारी कार्यों का योगदान और प्रभाव में इन वर्षों के दौरान किस तरह बदलाव आया है?
औपचारिक सामाजिक क्षेत्र (सोशल सेक्टर) उच्च प्रभाव वाला क्षेत्र है जिसमें सरकार तथा अन्य द्वारा खरबों डॉलर लगाए जा रहे हैं। पानी का मुद्दा स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है। यदि आप सामाजिक क्षेत्र में काम करते हैं और स्वास्थ्य आपका कार्य विषय है तो आपको जल के क्षेत्र में भी काम करना ही पड़े शायद। भारत में, जल के क्षेत्र में बेहतरीन एंटरप्राइजेज द्वारा अत्याधुनिक काम किए जा रहे हैं। सरकार और उद्योग जगत यह काम न कर सकते हैं, और न ही करेंगे, जिसका अर्थ यह हुआ कि यह काम आम आदमी और अनौपचारिक सामाजिक क्षेत्र के लिए छोड़ दिया गया है।

सामाजिक समस्याओं को दूर करने में बाजार-आधारित अभिगम कैसे काम कर सकते हैं, जबकि तथाकथित बाजार दुनिया भर में गरीबों और जरूरतमंदों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिहाज से विफल साबित हुआ है?
मुझे नहीं लगता कि गरीबों के संदर्भ में बाजार हमेशा असफल रहा है। यदि बाजार व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए शिक्षा, ज्ञान और अवसरों के साथ न केवल उपभोक्ता के रूप में अधिकार-वंचित लोगों को सशक्त किया जाए बल्कि सप्लायर और वितरकों को भी जागरुक किया जाए तो स्थिति बदल सकती है।

क्या आप अब भी मुंबई से जुड़ी हुई हैं? जिस शहर को आप कभी जानती थीं उसकी तुलना में चीजें अब कैसे अलग लगती हैं?
मुझे मुंबई से प्यार है और मैं हमेशा उसके सपने देखती हूं। यह शहर मेरे अस्तित्व के रेशे-रेशे में समाया हुआ है। शायद हर आदमी अपने शहर के बार में यही कहे, लेकिन मुंबई मेरे लिए एक महानगर से बढ़कर है। इसने मुझे पहचान दी, इतनी क्षमता और लोचशीलता दी कि मैं आधी रात को विदेशी सरजमीं पर उतर पाई दिमाग में उस स्पष्ट तस्वीर के साथ कि मुझे करना क्या है।

आप एक उत्साही हाइकर और स्कूबा डाईवर के रूप में भी जानी जाती हैं, साथ ही आप एक लाइंसेसशुदा पायलट भी हैं। इन शौकों का आपके लिए क्या महत्व है?
मैं एक खोजी आत्मा हूं जिसका कोई सामाजिक जीवन नहीं बल्कि आउटडोर लाइफ है। मुझे डाइविंग, हाइकिंग तथा कुदरत से जुड़ी हर गतिविधि में मजा आता है। यह उड़न कीट किसी ऐसी चीज से बंधी है जिसे मैं बता नहीं सकती; शायद यही मैं हमेशा से करना चाहती थी। यह अंतरिक्ष में जाने जैसा है, यद्यपि मैं [नासा के]सिटिजन एस्ट्रोनॉट प्रोग्राम में नाम दर्ज करवाने की सोच रही हूं।