अगस्त 2016 | नितिन राव

इस क्षेत्र पर नजर डालने का समय

टाइटन कंपनी को उम्मीद है कि अपना आयात कम करने और उत्पादन अधिकतम करने के अपने प्रयास से उसे मेक इन इंडिया की बयार का लाभ मिलेगा।

भारतीय कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने हेतु प्रोत्साहित करने से व्यवसाय माहौल को बढ़ावा मिलेगा और यह सरकार के मेक इन इंडिया अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है। ‘इस अभियान का लक्ष्य है नवोन्मेष को बढ़ावा देना और बिना गुणवत्ता से समझौता किए कुशल श्रम तैयार करना', टाइटन कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर भास्कर भट कहते हैं।

टाइटन के लेंस निर्माण इकाई में अत्याधुनिक उपकरण

श्री भट के अनुसार मेक इन इंडिया अभियान की शुरुआत देश के लिए बहुत ही समयोचित है, खासकर जब कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ‘भारत को आर्थिक विकास परिदृश्य में अग्रणी स्थिति में ले जाने के लक्ष्य के साथ हम इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि यह महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रयास, जो कि अवसंरचना विकास पर विशेष रूप से बल देता है, इस चुनौती से निबटने में मदद करेगा।’

नवोन्मेष और श्रेष्ठ कारीगरी के जरिए विश्वस्तरीय उत्पाद तैयार करने की टाइटन कंपनी की परंपरा रही है। कंपनी के घड़ी और एक्सेसरीज डिविजन की निर्माण इकाई होसूर में है और साथ ही इसकी एसेम्बलिंग इकाइयां रूड़की, पंतनगर, देहरादून और गोवा में स्थित हैं जबकि इसके चश्मा व्यवसाय का अत्याधुनिक लेंस उत्पादन संयंत्र बेंगलुरू के निकट चिक्कबल्लापुर में स्थापित है।

टाइटन कंपनी की विकास गाथा में नवोन्मेष एक महत्वपूर्ण विशेषता है। इसने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास में एक इनोवेषण हब की स्थापना की है जिसका लक्ष्य है वहां के शोध फैकल्टी की प्रतिभाओं का लाभ उठाना। इधर, अपने तनिष्क कारीगर पार्क के जरिए कंपनी स्थानीय कारीगरों के कौशल के समुन्नयन हेतु और उच्च स्तरीय आभूषणों के निर्माण के लिए उन्हें जरूरी उपकरण और प्रशिक्षण उपलब्ध कराती है।

अपनी विकास यात्रा के एक अंग के रूप में टाइटन कंपनी अपने घड़ी एवं आभूषण निर्माण उद्योग का विस्तार कर रही है और चार अन्य लेंस विनिर्माण संयंत्रों में निवेश की योजना है। कंपनी की योजना एक हाई-टेक फ्रेम निर्माण इकाई की स्थापना करने की भी है जिसमें आयात किए जाने वाले आईवियर के विकल्प तैयार किए जाएंगे।

‘यह इकाई टाइटन आईप्लस को विशिष्ट उत्पाद तैयार करने में सक्षम बनाएगा, जैसे कि निकेल-फ्री और लेड-फ्री फ्रेम, हल्के टाइटेनियम और एल्युमिनियम उत्पाद,’ श्री भट कहते हैं। साथ ही इससे कंपनी बेहतर प्रिसीजन और परिशुद्धता के लिए 100 प्रतिशत लेजर वेल्डिंग की स्थापना करने तथा पारंपरिक हार्ड टूलिंग तकनीक के स्थान पर हाई-टेक लेजर और मशीनिंग अपनाने में सक्षम बनेगी।

स्वदेशीकरण अथवा आयात के विकल्प पर टाइटन ने अपना ध्यान केंद्रित किया है। ‘वाच डिविजन में हम एक त्वरित स्वदेशीकरण की यात्रा पर चल रहे हैं जिसके तहत हमने कोयंबटूर में एक स्टेनलेस स्टील केस निर्माण संयंत्र में निवेश किया है जिसका जो खास तौर इस उद्देश्य को सपर्मित है कि चाइनीज आयात पर निर्भरता कम हो,’ श्री भट कहते हैं।

टाइटन एजेंडे में इसके प्लास्टिक आयात भार कम करना भी शामिल है। जापानी कंपनियों ने घड़ियों में प्लास्टिक के इस्तेमाल को लोकप्रिय बनाया था और टाइटन द्वारा सुपर फाइबर, TEES और Zoop सहित ऐसे उत्पादों की श्रेणी प्रस्तुत करना है जो प्लास्टिक निर्मित होते हैं।

2013-14 तक टाइटन ने 30 लाख प्लास्टिक घड़ी केस चीन से आयात किए, लेकिन अब इसकी खुद का उत्पादन संयंत्र है। 2015-16 में टाइटन का उत्पादन बढ़कर 4,00,000 घड़ी केस तथा 9,00,000 घड़े स्ट्रैप हो गया। इस प्रयास के परिणामस्वरूप विदेशी मुद्रा की बचत हुई, भारत का क्षमता निर्माण बढ़ा और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए।

एक्सेसरीज के अलावा टाइटन ने प्रिसीजन इंजीनियरिंग पर भी ध्यान दिया है। यह इस उत्पादन आधार का विस्तार एयरोस्पेस और मेडिकल उपकरण सेक्टर के वैश्विक उपक्रमों से ऑर्डर हासिल करने के लिए भी कर रहा है।

‘किसी भी विकासशील देश के लिए एक महत्वपूर्ण कारक मजबूत अवसंरचना होती है। प्रभावी अवसंरचना सप्लाई चेन की सुचारू संक्रिया सुनिश्चित करती है और उत्पादन केंद्रों और अंत बाजारों के बीच एक सामंजस्यपूर्ण, निर्बाध कड़ी का निर्माण होता है,’ श्री भट बताते हैं।

‘मुझे इस बात का यकीन है कि भारत में अवसंरचना में निवेश पर अधिक से अधिक बल दिया जाएगा और इससे भारत को धीरे-धीरे एक विनिर्मान केंद्र के रूप में प्रतिष्ठा हासिल होगी,’ उन्होंने कहा। ‘यहां कार्यबल में शामिल भारतीयों को बड़े पैमाने पर रोजगार मुहैया करने में सफलता महत्वपूर्ण होगी’

टाइटन के लिए मेक इन इंडिया अभियान इसकी दीर्घकालीन व्यवसाय रणनीति और देश की क्षमता में इसकी आस्था की पुष्टि और सत्यापन है।

अग्रणी यात्रा
2015 में टाइटन कंपनी ने विश्वस्तरीय स्टेनलेस स्टील केस के निर्माण हेतु कोयंबटूर में सीको एप्सन कॉरपोरेशन जापान की सहभागिता में एक नया विनिर्माण संयंत्र का निर्माण किया। यह संयंत्र इससे कम समय में नहीं लगाया जा सकता था।

‘इससे हमारे ब्रांडों के भारतीय मध्य वर्ग की चाहत पूरी करने में अपनी 'अग्रणी’ यात्रा पर आगे बढ़ने से हमें अपनी क्षमता में वृद्धि करने में मदद मिल रही है', टाइटन कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर भास्कर भट कहते हैं। ‘इस संयंत्र से चाइनीज आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है जिससे स्वदेशीकरण को बल मिल रहा है। इसके अलावा, यह हमारे तकनीकी साझेदार सीको इप्सन कंपनी को केस की आपूर्ति भी करेगा और इससे हमारे निर्यात में वृद्धि होगी।’

हाल की एक अन्य उपलब्धि है भारत में डिजायन की गई टाइटन की स्मार्ट घड़ी जक्स्ट का लॉन्च। जक्स्ट में एक एनालॉग, जो उन्नत 'स्मार्ट’ फंक्शनैलिटीज वाला टाइटन-निर्मित 'वाच मूवमेंट' है, जिसका विकास तकनीकी साझेदार एचपी के साथ मिलकर किया गया है। यह प्रॉडक्ट भारत और विदेशों में सफल रहा है।

यह आलेख टाटा कंपनियों में ‘मेक इन इंडिया’ की धारणा के उद्भव और भविष्य पर एक विशेष प्रतिवेदन का अंश है, जो टाटा रीव्यू के अप्रैल 2016 अंक में प्रकाशित है:
अवलोकन: बदलता भारत
प्रगति पथ पर भारत
टाटा मोटर्स: पथ का नायक
टाटा केमिकल्स: नवप्रवर्तन पर ध्यान
टाटा एलेक्सी: डिजाइन नियम
TAL मैन्युफैक्चरिंग सॉल्यूशंस: स्रोत कोड
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स: विश्वमंच संकेत