दिसम्बर 2016 | गायत्री कामथ

परिवर्तन का पथप्रदर्शन

टाटा स्टील की व्यापारिक उत्कृष्टता के प्रयास ने कम्पनी को सतत रूप से विकसित होने में मदद की है जिससे वह हमेशा ही परिवर्तनीय प्रवृत्तियों से घिरे उद्योग की दौ‌ड़ में बना रहा है।

बेहतर रूप से औद्योगिक स्टील उत्पादक के नाम से प्रसिद्ध टाटा स्टील की गिनती खुदरा व्यवसाय की श्रेणी में भी की जा सकती है। कम्पनी का एक तिहाई उत्पादन — यानी लगभग 130 बिलियन रुपए की लागत का स्टील — देश भर में 8,500 रीटेल आउटलेट के जरिए लगभग 3 मिलियन खरीददारों तक पहुंचता है।

जानिए टाटा स्टील की ‘भविष्य के लिए तत्परता’ के लिए प्रौद्योगिकी के विषय में और कम्पनी को इसका लाभ कैसे पहुंचेगा

टाटा स्टील के टोटल क्वालिटी मैंनेजमेंट (टीक्यूएम) और स्टील व्यापार के अध्यक्ष आनंद सेन कहते हैं कि कम्पनी और खुदरा व्यापार का उद्गम 1990 के दशक में हुआ था जब कम्पनी ने टाटा बिजनेस एक्सीलेंसी मॉडल (टीबीईएम) को अपनाया था, एक ऐसी कार्यप्रणाली जिसका मॉडल यूएस आधारित एक गुणवत्ता ढांचा माल्कम बालड्रिज पुरस्कार पर आधारित है। “ श्री सेन बताते हैं कि टीबीईएम आंकलन के दौरान हम तब सोचने पर बाध्य हो गए जब दौरे पर आए बाल्ड्रिज के एक निर्धारक ने हमसे गैर-प्रमुख खाता व्यापार को विकसित करने के प्रयासों के विषय में प्रश्न किया, जिसका हमारे राजस्व ,” में 70 प्रतिशत योगदान है।.

जब टाटा स्टील को छोटे ग्राहकों से सीधे संपर्क के अवसर का पता चला तब कम्पनी ने एक संपूर्ण डीलर-वितरक रीटेल चैनल स्थापित किया। श्री सेन के अनुसार “इस पहल ने टाटा स्टील को विश्व में सबसे बड़े ब्रांडेड स्टील कम्पनी के रूप में परिवर्तित कर दिया,”, जहां ग्राहक स्वेच्छा से टाटा शक्ति के गैल्वेनाइज्ड शीट और टाटा टिस्कॉन रीबार्स जैसे ब्रांड के लिए प्रीमियम मूल्य तक अदा करने के लिए तैयार थे।

वैश्विक खिलाड़ी
पिछले 25 सालों तक टाटा स्टील’s के व्यापारिक सिद्धांत का केंद्र रहा है गुणवत्ता और उत्कृष्टता। “ हमने बहुत जल्द ही यह महसूस कर लिया कि गुणवत्ता ही सबसे अहम है— केवल उत्पाद के संदर्भ में ही नहीं बल्कि हमारे सभी कार्य में। श्री सेन ने कहा कि टीबीईएम और टीक्यूएम ने हमें यह हासिल करने में सहायता की।,” वर्ष 2000 में टाटा स्टील जेआरडी क्यूवी पुरस्कार जीतने वाली पहली टाटा समूह कम्पनी बन गई। वर्ष 2004 में कम्पनी ने लीडरशिप इन एक्सीलेंस पुरस्कार जीता, जब स्टील व्यापार 700 अंकों के पार पहुंच गया, ऐसा ऊंचा मुकाम अब तक किसी भी अन्य टाटा कम्पनी ने हासिल नहीं किया है। “ श्री सेन कहते हैं कि निस्संदेह टाटा स्टील द्वारा प्राप्त सफलता में टीबीईएम सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक रहा है।.

डेमिंग सम्मान
टीबीईएम के इन बड़े मील के पत्थरों को प्राप्त करने के बाद टाटा स्टील ने अपने दृष्टि को विश्व में व्यापक रूप में गुणवत्ता पुरस्कार के रूप में प्रसिद्ध जापान आधारित डेमिंग पुरस्कार के आधार पर प्रशिक्षित करने का निर्णय लिया। डेमिंग यात्रा की शुरुआत वर्ष 2005 में हुई थी और इसके पश्चात कई अनपेक्षित मोड़ आए। “ डेमिंग निर्धारकों ने हमें कुछ गहराई वाले प्रश्न पूछे — ‘ आप हमें यह आश्वासन कैसे दे सकते हैं कि जमशेदपुर की जनसंख्या अविकसित क्षेत्रों से होने वाले प्रवासन के कारण तेजी से नहीं बढ़ेगी? अगर आपके कर्मी आपके साथ दशकों से काम कर रहे हैं तो क्यों उनमें से कुछ अभी तक आधे साक्षर या अशिक्षित हैं’ श्री सेन ने कहा कि इन मूलभूत प्रश्नों ने हमारी आंखें खोल दी और हमें एक नई दिशा दी।

एक व्यापक परिदृश्य
नतीजतन टाटा स्टील के सामुदायिक पहल ने एक नई प्रेरणा की ओर कदम बढ़ाया जिसका केंद्र था जमशेदपुर और अन्य संचालन क्षेत्रों के आस-पास के सभी वंचित समुदायों का समाजिक-आर्थिक विकास। कम्पनी ने साथ ही हजारों मजदूरों को कार्यात्मक और कम्प्युटर संबंधित शिक्षा प्रदान करने का लक्ष्य बनाया।

उत्कृष्टता के सिद्धांतों को अनेक इकाइयों, स्थानों और व्यवसायों में फैले 38,000 कर्मचारियों के एक मजबूत आधार के बीच स्थापित करने में कुछ समय अवश्य लगा, लेकिन टाटा स्टील ने इसे सार्थक किया। कम्पनी ने वर्ष 2008 में डेमिंग एप्लीकेशन पुरस्कार हासिल किया और वर्ष 2012 में डेमिंग ग्रैंड पुरस्कार भी जीता, जिससे वह जापान के बाहर यह सम्मान हासिल करने वाली पहली एकीकृत इस्पात कम्पनी बन गई, एक ऐसा रिकॉर्ड जो अभी तक कम्पनी के नाम है।

11 वर्ष के अंतराल के बाद पिछले वर्ष टाटा स्टील दोबारा टीबीईएम मोड़ पर लौटा। इस बार कम्पनी ने टीबीईएम के लिए एक एकीकृत संगठन के रूप में आवेदन करने का निर्णय लिया, जो कि पहले के संभागवार दृष्टिकोण के विपरीत है। इस विशालकाय इस्पात कम्पनी के आकार और फैलाव के मद्देनजर यह काफी विशाल चुनौती थी, लेकिन फिर भी इसका अनुभव काफी अच्छा था। 657 अंक के शानदार स्कोर के साथ टाटा स्टील को औद्योगिक अगुआ के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त हुई।

टीबीईम तक लौटने से कम्पनी को अनपेक्षित लाभ मिला है, उदाहरण के तौर पर, ग्रामीण उपभोक्ताओं तक पहुंच के लिए विपणन के कई बहुमूल्य पाठ सीखना और अन्य टाटा कम्पनियों जैसे रैलिस और टाटा केमिकल्स से उत्पादों को इकट्ठा करना। श्री सेन बताते हैं कि हमारे उत्पाद ब्रांड के लिए यह सहयोग काफी लाभकारी सिद्ध हुआ, जैसे कि पाइप और वायर को साथ में उपलब्ध कराने से ग्राहकों को भी आसानी हुई और हमें भी बिक्री बढ़ाने का समार्ट तरीका मिला। हमने स्टील सोल्युशन बनाना भी शुरू कर दिया है जैसे कि स्टील के दरवाजे।”

यह प्रमुख स्टील कम्पनी समूह की अन्य कम्पनियों के साथ अपनी उत्कृष्ट प्रथाओं को बांटती है जैसे कि उसका सुधार माध्यम। टाटा स्टील में सुधार माध्यम का प्रभाव विशाल है। टाटा स्टील टीक्यूएम आधारित सुधारों — से प्राप्त बचत के मूल्यों पर नजर रखती है।— पिछले दशक में संचयी बचत के रूप में यह आंकड़ा 160 बिलियन रुपए तक पहुंच गया, जिसमें से अकेले पिछले दो वर्षों में ही 60 बिलियन रुपए की बचत हुई है। वर्तमान में जारी एक बड़ी पहल है शिखर 25, जो कि ईबीआइटीडीए मुनाफे का 25 प्रतिशत हासिल करने और कम्पनी ’s की बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने का एक प्रयास है।

स्टील वॉर रूम्स
टाटा स्टील में सुधार पर ध्यान केंद्रित करने से ‘प्रभाव केंद्रों’, का निर्माण हुआ है, जो कि स्थायी मानव युक्त स्टील युद्ध कमरे हैं जिन्हें दैनिक आधार पर व्यापारिक प्रक्रियाओं में अवरोधों से निपटने के लिए बनाया गया है। हर विभाग में एक समर्पित प्रभाव केंद्र है जिसमें खरीद, संचालन, रखरखाव और इंजीनियरिंग जैसे प्रमुख कार्यों से सदस्य शामिल होते हैं। यह संकल्पना इतनी प्रभावी साबित हुई कि अब टाटा स्टील के स्टील मूल्य श्रृंखला में 12 ऐसे प्रभाव केंद्र हैं।

इससे यह साबित होता है कि टाटा स्टील की व्यापारिक उत्कृष्टता की यात्रा कुछ वैश्विक मानदंडों तक पहुंचने वाली संकरी सड़क नहीं रह गई है। यह’एक जीवन पद्धति है जो सामयिक उन्नयन और प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया से अधिक अपने क्षेत्र में एक दीर्घकालिक अगुआ बनने की प्रक्रिया है।

टाटा स्टील की प्रदर्शन सुधार प्रणाली
उद्योग जगत में सबसे प्रतिस्पर्धात्मक स्टील कम्पनियों में से एक टाटा स्टील ने एक ‘ एकीकृत संपूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन का ढांचा तैयार किया है जो कि समूचे मूल्य श्रृंखला में सुधार के प्रति संरचित दृष्टिकोण प्रदान करता है।

  • नीति प्रबंधन ढांचा व्यापार रणनीतियों की तैनाती के जरिए भविष्य के लिए योजना बनाने में सहायता करता है।
  • समस्या के समाधान और कार्य प्राप्त करने की प्रक्रिया, शिखर 25, थ्योरी ऑफ कॉन्स्ट्रेंट्स आदि
  • जैसी सुदृढ़ कार्य पद्धतियों से इन रणनीतियों को हासिल किया जाता है। दैनिक प्रबंधन ढांचे से दीर्घकालिक सुधार प्रक्रियाओं में मदद मिलती है।
  • गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली से उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।
  • समय-समय पर सुधार योजनाओं की प्रगति की समीक्षा और आंकलन किया जाता है। नेतृत्व दल व्यक्तियों और टीम को उनकी उपलब्धियों के आधार पर पुरस्कार और मान्यता प्रदान करता है।

यह सामग्री टाटा समूह की कंपनियों में बिजनेस एक्सीलेंस की संस्कृति के बारे में टाटा रीव्यू के अक्टूबर-दिसंबर 2016 संस्करण की आवरण कथा का एक अंग है:
अवलोकन: लगातार सुधार
पांच टाटा कंपनियां बता रही हैं कि किस प्रकार बिजनेस एक्सीलेंस मूल्य निर्माण और व्यवसाय मॉडल को पुनर्गठित करने में सहायक रहा
टाटा बिजनेस एक्सीलेंस ग्रुप: एक अनोखा मॉडल तथा इसकी समग्र विधि
प्रसिद्ध टाटा बिजनेस एक्सीलेंस मॉडल (टीबीईएम) के संरक्षक के रूप में, टाटा बिजनेस एक्सीलेंस ग्रुप (टीबीईएक्सजी) टाटा कंपनियों को विभिन्न कार्य क्षेत्रों में वैश्विक मानक प्राप्त करने में सहायता प्रदान करते रहे हैं
टाइटन कंपनी: लक्ष्य: हमेशा बेहतर की ओर
बिजनेस एक्सीलेंस ने टाइटन कंपनी को उभरने की शक्ति दी है, और इसका प्रमाण है एक बहुआयामी सफलता प्रकरण के रूप में इसका विकास
रैलिस इंडिया: श्रेष्ठतम बनने के लिए व्यवस्थित होना
रैलिस इंडिया की व्यावसायिक उत्कृष्टता के सफर में प्रक्रिया ही उसका पथप्रदर्शक और रक्षक है, जिसने कंपनी को फर्श से अर्श तक उठने में सहायता की है
टाटा पावर डेल्ही डिस्ट्रिब्यूशन: गुणवत्ता के लिए ऊर्जा की बचत
टाटा पावर डेल्ही डिस्ट्रिब्यूशन ने अपने संगठनात्मक ढांचे का पुनर्गठन करने, चुनौतियों से निबटने और एक असाधारण उद्यम के रूप में निर्मित होने के लिए बिजनेस एक्सीलेंस पर भरोसा किया है।

स्टीली एंड स्टर्डी (फौलादी और मजबूत)
टाटा स्टील प्रॉसेसिंग एंड डिस्ट्रिब्यूशन में बदलाव की प्रक्रिया में बिजनेस एक्सीलेंस एक उत्प्रेरक रहा है, एक उद्यम जो हर बढ़ते कदम के साथ और भी परिपक्व होता गया है