दिसम्बर 2017

लीडरशिप फिटनेस

तीन दशकों के लिए, टाटा स्टील एडवेंचर्स फाउंडेशन ने संभावित लीडर के निर्माण में सहायता की है, और अब अपनी इस यात्रा में अगला मील का पत्थर पार करने को आतुर है

शेरपा तेनजिंग नोर्गे के साथ एडमंड हिलेरी 29 मई, 1953 को माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने इस प्रयास को इससे पहले 1951 में एक ब्रिटिश आवीक्षण अभियान का हिस्सा रहकर किया था। यह प्रयास विफल रहा, और हिलेरी ने उस समय खुद से और दुर्जेय शिखर से वादा किया। उन्होंने कहा, “मैं वापस आऊंगा और तुमपर विजय पाऊंगा क्योंकि एक पर्वत के रूप में तुम आगे नहीं बढ़ सकते’ लेकिन एक इंसान के रूप में मैं ऐसा कर सकता हूं। ”

यह वह वक्तव्य है जो टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन (TSAF) की विचारधारा का प्रतीक है, TSAF एक आउटडोर लीडरशिप संस्थान है जिसमें है 1984 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिला, बछेंद्री पाल की अगुवाई वाली एक टीम शामिल है।

TSAF द्वारा आयोजित गतिविधियों को साहसिक अनुभवों के माध्यम से नेतृत्व कौशल को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। TSAF भारत में उत्तराखंड (उत्तरकाशी), ओडिशा और झारखंड (जमशेदपुर) में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन करता है ताकि लोग एक प्रभावशाली व्यक्ति बनने की राह में आने वाली बाधाओं को पार करने में सक्षम बन सकें।

टाटा स्टील के कॉर्पोरेट सर्विसेज के उपाध्यक्ष सुनिल भास्करण कहते हैं, "यह निश्चित ही जीवन भर का एक अनुभव है। " श्री भास्करण ने व्यक्तिगत रूप से इन साहसिक गतिविधियों का अनुभव किया है, पहले एक प्रशिक्षु के रूप में और अब हाल ही में अपनी पत्नी और बेटी के साथ, जब वे वरिष्ठ अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए एक विशेष छह दिवसीय कार्यक्रम में शामिल हुए थे। कार्यक्रम का अनुभव दिलवाने के लिए वे टीम को भी साथ ले गए थे।

एक साहस का सृजन

जब अपनी महत्वपूर्ण उपलब्धि के बाद सुश्री पाल वापस लौटीं, तो उन्हें कई संगठनों“ से बधाई देने के लिए और साथ काम करने” के लिए निमंत्रण पत्र प्राप्त हुए। लेकिन इतने अधिक अवसरों को अनदेखा करते हुए उन्होंने टाटा स्टील का साथ देने का विकल्प चुना।

वे कहती हैं, “टाटा स्टील ने मेरा तब साथ दिया जब मैं कुछ भी नहीं थी। कम्पनी ने मुझे दिसम्बर 1983 में खेल विभाग में नौकरी दिलाई थी। मुझे माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने जा रही टीम में चुना गया था, लेकिन टीम में रहने पर भी यह निश्चित नहीं है कि आप शिखर तक पहुंच जाएंगे। मैं उस सहायता को कभी नहीं भूलती। मेरे माता-पिता ने मुझे उन लोगों का आदर करना सिखाया है जो हमारी तब सहायता करते जब हमने उस सहायता को प्राप्त करने योग्य कुछ न किया हो। मैं उस सलाह से अत्यंत प्रभावित हूं। ”

बछेंद्री पाल और हेमंत गुप्ता आउटडोल्डर लीडरशिप स्कूल की प्रेरक शक्ति हैं

टाटा स्टील में शामिल होने के एक दिन बाद ही सुश्री पाल माउंट एवरेस्ट ट्रेनिंग कैंप के लिए चल पड़ी और वहां से शिखर तक पहुंच गई। वे अपने साथ टाटा का झंडा लेकर गईं जिसे टाटा स्टील ने उन्हें दिया था। कम्पनी में शामिल होने के ठीक तीन महीने बाद, 23 मई 1984 को वे माउंट एवरेस्ट की शिखर पर पहुंच गईं जहां उन्होंने भारतीय तिरंगे के साथ टाटा का पताका लहराया।

जमशेदपुर लौटने पर सुश्री पाल को टाटा स्टील के तत्कालीन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रूसी मोदी द्वारा सम्मानित किया गया; इस समारोह में उन्होंने टाटा यूथ एडवेंचर सेंटर नामक एक पूर्ण विभाग की स्थापना की घोषणा की जिसका प्रबंधन सुश्री पाल द्वारा किया जाना था। यह सेंटर TSAF का पूर्ववर्ती है।

सुश्री पाल कहती हैं, “मुझे तब’बजट बनाना भी नहीं आता था। भारत में तब एडवेंचर स्पोर्ट्स इतना प्रचलित नहीं हुआ था। मैं लोगों को कैसे समझाती कि उन्हें पहाड़ पर चढ़कर क्या हासिल होगा? तब माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करके बस कुछ ही वर्ष गुजरे थे। ” सुश्री पाल के अनुसार वह अवसर मिलना ऐसा एहसास था “मानो मैं एक माउंट एवरेस्ट से होकर दूसरे की ओर जा रही हूं। ”

विकास के साथ-साथ सीखना

वहां काफी कुछ सीखने के लिए था और सुश्री पाल एक प्रतिबद्ध और उत्साही विद्यार्थी साबित हुई। उन्होंने अपने समक्ष आने वाले सभी अवसरों का लाभ उठाया। विदेश दौरे पर वे स्थानीय पर्वतारोही समूहों से भेंट करती थी। उन्होंने न्यूजीलैंड के सर एडमंड हिलेरी आउटडोर प्रशिक्षण केंद्र में तीन महीने की ट्रेन-द ट्रेनर्स के पाठ्यक्रम में भाग लिया। TSAF ने अपने लोगों को प्रशिक्षण देने के लिए अमेरिका से भी लोगों को अमंत्रित किया। इन प्रशिक्षकों ने कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण योग्दान दिया और सुश्री पाल को एक ऐसे कार्यक्रम को तैयार करने में सहायता की जो कम्पनी की आवश्यकताओं के अनुरूप होगा।

इन अभ्यास कार्यक्रमों ने उनकी प्रतिबद्धता को प्रबल किया और ऐसे तरीकों को खोजने में मदद की जिससे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए साहस का एक उपकरण के रूप में उपयोग किया जा सके। अंतत:, जोखिमों और खतरों से जुड़ी चिंताओं का हल उन्हें एक साहसिक यात्रा पर मिला। वे कहती हैं, “जोखिम तो हर जगह है। जब आप जोखिम का सामना करते हैं, तो आप सीखते हैं और प्रगति करते हैं। हमें अपने आरामदायक दायरे से बाहर निकलना सीखना होगा। प्रकृति और समुदाय से सीखने के लिए बहुत कुछ है। प्रकृति की’कक्षा अद्भूत है। ”

विस्तार की गतिविधि

शुरुआत में ‘ग्रैजुएट इंजीनियर प्रशिक्षुओं के लिए ’आउटडोर लीडरशिप कोर्स अनिवार्य कर दिया गया था। सुश्री पाल 14 दिनों तक के लिए उत्तरकाशी पर्वत तक टीम का नेतृत्व करती थीं। उस समय यह एक अत्यंत मजेदार अनुकूलन कार्यक्रम था। बाद में टीम ने नेतृत्व के सात कौशल पर ध्यान देने का निर्णय लिया: क्षमता, संचार, विवेक और निर्णय लेने का कौशल, प्रतिकूल परिस्थितियों और अनिश्चितता के लिए सहिष्णुता, आत्म-जागरूकता, दृष्टि और कार्रवाई ।

सुश्री पाल कहती हैं, “नेतृत्व के विषय में सीखने के कई तरीके हैं, लेकिन आप एक अगुआ बनना कैसे सीखते हैं? हमारा मानना है कि रोमांच और अभियान में ऐसे कौशल की आवश्यकता होती हैं जो आपकी सहायता करते हैं चाहे आप’ एवरेस्ट पर चढ़ाई कर रहे हों या एक नया व्यवसाय शुरू कर रहे हों। यह ’सूत्र जंगल और जीवन दोनों पर लागू होता है। ”

TSAF की टीम ने अपने पाठ्यक्रम, रोमांच और अनुभवों को ऐसे डिजाइन और अनुकूलित किया, जो प्रतिभागियों को उनके आसपास के लोगों का विश्वास जीतना, टीमवर्क को प्रोत्साहित करना, अलग-अलग लोगों और परिस्थितियों के लिए उचित तरीके से प्रतिक्रिया करना, स्वयं और सहकर्मी नेतृत्व कौशल विकसित करना, और इसी तरह के मूल्यों का शिक्षण देंगे।

टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन का पाठ्यक्रम साहसिक अनुभवों के माध्यम से नेतृत्व कौशल को प्रेरित करता है

प्रतिभागियों को निष्पादन से पहले नियोजन के मूल्य, एक अच्छे नेता के लक्षण, अपने’टीम के साथियों तक सही तरीके से संदेश संचारित करना, सकारात्मक दृष्टिकोण को कैसे विकसित करना और परिवर्तन और अनिश्चितता के साथ व्यवहार करना, मजबूत पारस्परिक संबंधों का महत्व, सीमित संसाधनों का प्रबंधन करने के लिए समय प्रबंधन और लचीलेपन का महत्व आदि सिखाया जाता है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण यह है कि इसके कई बहुमूल्य सबक कक्षा की चार-दीवारी के बाहर सिखाए जाते हैं। वे अपने व्यक्तिगत अनुभवों से आत्मसात कर सकते हैं।

इसका पीछे की मंशा जीवन जीने का बहुमूल्य कौशल सिखाना है और शारीरिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित करना है, जिसमें प्रतिभागी अपनी ऊर्जा वापस पा सकते हैं, तनाव कम कर सकते हैं और अपने भय पर काबू पा सकते हैं। टीमों में कार्य करने से उन्हें प्रत्येक व्यक्ति के मूल्य को समझने और सराहना करने में मदद करता है प्रकृति के बीच होने के कारण उन्हें एहसास होता है कि प्रकृति न तो पद और न ही सामाजिक स्थिति को पहचानती है। एक मजेदार और साहसिक वातावरण में पूरा कार्यक्रम आयोजित करने से लोगों को बेहतर कार्य करने में मदद मिलती है।

आज सभी टाटा स्टील प्रबंधन और व्यावसायिक प्रशिक्षुओं को इस कार्यक्रम का हिस्सा बनना होता है। दूसरे दर्जे के कर्मचारियों के लिए भी विशेष कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। इन कार्यक्रमों में एक साथ शामिल होने से संबंध स्थापित करने की भावना निर्माण होती हैं जिनका सृजन साझा अनुभवों से होता है, जिससे एक मजबूत टीम बनाने में मदद मिलती है क्योंकि कर्मचारी आसानी से उनके कार्य की भूमिका में ढल जाते हैं।

अधिक ध्यान

TSAF में सुश्री पाल के नेतृत्व में एकल महिला की टीम तब विस्तारित हुई जब पीपी कपाडिया एडवेंचर प्रोग्राम की मैनेजर के रूप में बोर्ड में शामिल हुईं। बाद में इस टीम में शामिल हुई आईआईटी बॉम्बे के मेटलर्जिकल इंजीनियर हेमंत गुप्ता, जो 2011 में टाटा स्टील में एक मैनेजेमेंट ट्रेनी के रूप में जुड़े थे। प्रकृति में सीखने और पर्वतारोहण के अपने जुनून को बरकरार रखने के लिए श्री गुप्ता 2013 में TSAF में चले गए।

इसके बाद, श्री गुप्ता ने अमेरिका में राष्ट्रीय आउटडोर लीडरशिप स्कूल गए जहां उन्होंने नेतृत्व के विकास के साथ साहसी अनुभवों को जोड़ने के तरीकों पर महत्वपूर्ण पाठ सीखा। 27 मई 2017 को उन्होंने माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई की। श्री गुप्ता TSAF को आउटडोर के माध्यम से लीडरशिप के लिए एक संस्थान के रूप में विकसित करने में एक अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। श्री गुप्ता के सिखाए गए पाठ के साथ TSAF अब अपने प्रस्तावों के आकार और दायरे का विस्तार करने के लिए तैयार है।

चूंकि TSAF टाटा स्टील में नेतृत्व विकास के लिए समर्पित एक गैर-लाभकारी संगठन है, इसलिए कम्पनी को एक अन्य संगठन - स्कूल ऑफ आउटडोर लीडरशिप (SOL) स्थापित करने की आवश्यकता महसूस हुई - जो अन्य कम्पनियों को अपनी सेवाएं प्रदान कर सकती है।

SOL की स्थापना TSAF को और अधिक क्षमता निर्मित करने में सहायता करेगी। इससे TSAF के मौजूदा बुनियादी ढांचे पर प्रतिभागियों को बेहतर अनुभव मिलेगा और बड़ी संख्या में लोगों को सहायता प्राप्त होगी। बैंडविड्थ की कमी के कारण अक्सर TSAF की सेवाएं चाहने वाले लोगों को दूर कर दिया जाता है। SOL की होने वाली कमाई को दोबारा से बेहतर बुनियादी सुविधाओं और उपकरणों के निर्माण में निवेश कर दिया जाएगा।

संगठनों में पदानुक्रम के आधार पर टीम ने कर्मचारियों के लिए कार्यक्रमों के तीन स्तरों की योजना बनाई है। ये स्तर प्रवेश स्तर के अधिकारियों, कनिष्ठ और मध्यम स्तर के अधिकारियों और वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।

कोई तामझाम नहीं, केवल रोमांच का एहसास

जब प्रतिभागी कार्यक्रम के लिए तैयारी करते हैं तो उनमें धैर्य और उत्साह भी साथ होना आवश्यक है। यह उनके लिए जीवनभर का एक अनुभव होता है, हालांकि शुरू में उन्हें इसका एहसास नहीं होता है, वे बिना उन विलासिताओं के जीवन जीने पर ध्यान केंद्रित किए रहते हैं जिनका सही मूल्य अक्सर शहरी लोग नहीं समझते। इसका मूल उद्देश्य है अपने अंतर की गहराई में झांकना और अपने भीतर की शक्ति और क्षमता के भंडार को खोजना।

प्रत्येक दिन के एजेंडे में पहाड़ चढ़ना, रिवर राफ्टिंग, रैपलिंग, ट्रेक्किंग़, आदि गतिविधियां शामिल होती हैं। प्रतिभागियों को तंबू में सोना होता है और अपना बर्तन स्वयं धोना होता है। वे अंतिम पांच दिनों के दौरान स्वयं खाना पकाते हैं। कैम्प कोई पिकनिक नहीं है; क्या करना चाहिए और क्या नहीं ’इनके सख्त नियम सही आचरण दर्शाते को हैं जिससे शिविर में से प्रतिभागियों को अपने सर्वश्रेष्ठ व्यवहार के प्रदर्शन में सहायता मिलती है।

बेहतर बातचीत और टीम की भावना का सृजन करने में सक्षम बनाने के लिए प्रतिभागियों को समूहों में बांटा गया है। एक टीम के भाव से कार्य करने से वे कार्यभार सौंपना और विभिन्न कार्य करना सीखते हैं। पर्वत पर ट्रेक्किंग का अनुभव उन्हें कम से कम साधनों में जीने का महत्व समझाता हैं, जिसमें आप केवल उन्हें चीजों को साथ ले जाते हैं जिनकी आवश्यकता हो और कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए एक दूसरे पर निर्भर रहने की कला का भी विकास होता है।

श्री भास्करन कहते हैं, “सुश्री पाल और उनकी टीम हमें प्रेरित करती है और हमें अपनी सीमाओं के पार जाने में सक्षम बनाती है। इसके अंत में घर लौटने पर आप कुछ हासिल करने की भावना साथ लेकर आते हैं। कोई भी चीज आपको इस एहसास से दूर नहीं कर सकती। ”

जंगल में नेता

झारखंड के जमशेदपुर के बाहरी इलाके में स्थित तुमुंग गांव टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन (TSAF) शिविर के लिए एकदम सही स्थान है। प्रतिभागी स्थान की मोहक सुंदरता, परिदृश्य को चिन्हित करने वाले गोल पत्थर, हरे-भरे खेत, गुफा और तालाब से रोमांचित हो उठते हैं।

लेकिन यह कोई आनंद यात्रा नहीं है। ये तस्वीर जैसी सुंदरता वाला परिवेश TSAF के कुछ नेतृत्व विकास कार्यक्रमों के लिए पृष्ठभूमि बनते हैं। शिविर में प्रतिभागी एक सख्त अनुसूची का पालन करते हैं: सुबह 5 बजे जागना, एक घंटे का शारीरिक व्यायाम, प्रशिक्षण कार्यक्रम, शाकाहारी भोजन और 9 बजे रात को सो जाना।

सवेरे उठने से लेकर रात के सोने के बीच अच्छी तरह से डिजाइन किए गए गेम और गतिविधियों शामिल हैं जैसे कि बाधा दौड़, ट्रॉली राइड, रोप क्रॉसिंग, रस्सी की सीढ़ी से चढ़ाई, रेंगना, टायरों के बीच से गुजरना, बंदर जैसे रेंगने, एक छोटी सी गुफा से गुजरना और टार्जन जैसे झूलना। ये गतिविधियां व्यक्तियों को एक टीम के रूप में सोचने और समस्याएं हल करने के लिए समरूपता से सोचने में सहायता करने के लिए डिजाइन की गई हैं। प्रतिभागी शाम को अपने शिविरों में लौटते हैं, थके हुए लेकिन और अधिक के लिए उत्सुक भी।

 

स्वयं की खोज

भास्करन के अनुसार, जब लोग शारीरिक तनाव का सामना करते हैं तो उनके वास्तविक भाव सामने आते हैं। वे कहते हैं, “जब मैंने 30 साल पहले इस कार्यक्रम में नए कर्मचारी के रूप में शामिल हुआ था, हम में से बहुत से लोग सोचते थे कि हम अपने जीवन के सबसे बुरे दिनों से गुजर रहे थे। इसका हमें बाद में बोध हुआ कि वे हमारे जीवन के सबसे बेहतरीन क्षणों में से एक थे। ”

सुश्री पाल ’के सक्षम और प्रेरक नेतृत्व के तहत व्यक्ति अपनी सीमाओं से लड़ने, अपनी क्षमताओं को विकसित करने और यात्रा के दौरान सहयोगियों के साथ संयोजन करने के महत्व को पहचानना सीखते हैं।

वह कहती है, “पिछले कुछ वर्षों में TSAF ने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए सात लोगों को प्रशिक्षित और प्रेरित किया है। इसके अलावा इससे हजारों अन्य लोगों को आउटडोर लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम के माध्यम से अपने-अपने एवरेस्ट पर विजय पाने में मदद मिली है।”

ऑस्ट्रेलियाई पर्वतारोही, लेखक और फिल्म निर्माता ग्रेग चाइल्ड ने एक बार कहा था, “चढ़ाई की तलहटी और शिखर के बीच ही हमारी चढ़ाई के कारण का रहस्य उजागर होता है। ” हजारों शारीरिक रूप से थके लेकिन पूरी तरह से पुनर्जागृत हुए लोग इस रहस्य के हल की खोज की खुशी को प्रमाणित करेंगे, जिसमें टीएसएएफ से महत्वपूर्ण सहायता प्राप्त होती है।