दिसम्बर 2016

सुरक्षा के लिए एक जुनून

टाटा पावर ने अपने प्रतिदिन संचालनों में ‘शून्य हानि’ का लक्ष्य हासिल करने में उत्कृष्टता से भी अधिक परिणाम प्राप्त किए हैं

मुंबई में यहां लगभग 60,000 परिवार हैं जो टाटा पावर की हाई-वोल्टेज वितरण लाइनों के आसपास फैली हुई झुग्गियों में रहते हैं। इन लोगों की जिंदगी को सुरक्षित बनाए रखना, खासतौर पर जब वे पर्व-त्योहारों के मौसम में उत्सव मनाते रहते हैं, टाटा पावर के सर्व-सम्मिलित सेफ्टी, हेल्थ तथा इनवारमेंट (एसएचई) एजेंडे का एक अंग है।

जिस उद्यम का संचालन टाटा पावर करते हैं, उसके जोखिम कारकों को मद्देनजर रखते हुए, टाटा पावर को सभी तरह की आकस्मिकताओं के लिए पहले से तैयार रहना पड़ता है

टाटा पावर के लिए सुरक्षा एक नीति के साथ ही एक जुनून भी है। वैधानिक सरकारी अपेक्षाओं से लेकर ढांचागत सुरक्षा प्रवर्तन प्रशिक्षण तक, उपकरण अनुरक्षण से औजारबक्स निर्देशों तक, संवेदक सुरक्षा नियमों से जैविक चिकित्सकीय कचरे के निपटान तक, नवीकरणीय ऊर्जा से लेकर सामुदायिक जागरुकता कार्यक्रमों तक- कंपनी की एसएचई प्रतिबद्धता को उत्कृष्टता से भी आगे तक जाने के लिए तैयार किया गया है।

‘शून्य क्षति’ वैश्विक रूप से स्वीकृत उद्योग मानक, वह है जिसे टाटा पावर में लक्ष्य माना गया है और यहां कंपनी के इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक कॉरपोरेट सेफ्टी, हेल्थ तथा इनवायरमेंट (सी-एसएचई) विभाग काम करता है। सी-एसएचई एक सहसंयोजित प्रयत्न है, जो अन्य विभागों से जुड़ा है और टाटा पावर के लक्ष्यों तथा प्रक्रमों के साथ समंजित है। यह संगठन के प्रतिदिन के संचालनों तथा संपूर्ण प्रगति के प्रारूप का एक महत्वपूर्ण अंग है।

“सी-एसएचई हमारी संचालन नीति को प्रदर्शित करता है, जहां पर्यावरण और सुरक्षा के समस्त लक्ष्यों का अनुपालन किसी परियोजना के अनुमोदन से बहुत पहले से ही शुरू कर दिया जाता है”, बताते हैं प्रशांत कोकिल, जो टाटा पावर के औद्योगिक पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन, औद्योगिक धरणीयता के प्रमुख हैं। “सी-एसएचई हमारी प्रक्रियाओं, लक्ष्यों के अनुपालन, उचित कर्मठता, वैधानिक अपेक्षाओं, निर्माणों तथा संचालनों के साथ अंतर्संबद्ध है।”

नियमों के लिए प्रतिबद्ध
एक ऐसे उद्योग में, जहां सुरक्षा का मुद्दा सर्वव्यापी हो, अपनी प्रमुख उपस्थिति से, टाटा पावर नियमों के अनुपालन में प्रतिबद्ध और बेहद सतर्क बन गए हैं। लेकिन कंपनी कानून द्वारा निर्धारित मानकों से काफी आगे है क्योंकि इसने सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा पर्यावरण के विविध कार्यनिष्पादन मानदंडों पर खरा उतरने के प्रयास किए हैं।

पर्यावरण के मोर्चे पर, टाटा पावर ने स्वयंनिर्धारणों द्वारा अपने सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड तथा निलंबित कण तत्वों के उत्सर्जन को कम किया है। यह कंपनी की रणनीति का एक भाग बन गया है, जिसने इसे वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए कॉनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के उच्चतम धारणीयता श्रेणीकरण ‘सस्टेनेबल प्लस प्लैटिनम’ को प्राप्त करने में सक्षम बनाया है।

‘उत्कृष्टता से परे’ के लिए ली गई परियोजनाओं में, श्री कोकिल के अनुसार, जल उपयोग, पारा उत्सर्जन तथा राख से विकिरण का पर्यवेक्षण है। टाटा पावर ने मुंबई स्थित अपने ट्रांबे ताप ऊर्जा परिसर में प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के लिए रु.1 बिलियन से ज्यादा का निवेश किया है। इस संयंत्र की चिमनियों द्वारा प्रदूषक तत्वों भूतल-स्तर पर जमाव को नियंत्रित किया जाता है तथा इसका नाइट्रोजन ऑक्साइड बर्नर प्रदूषण को कम कर देता है। कंपनी के ऊर्जा संयंत्र नवरत रूप से प्रदूषण उत्सर्जन तथा आसपास के वातावरण में वायु की गुणवत्ता का पर्यवेक्षण करते रहते हैं।

चूंकि विश्व तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा की तरफ अग्रसर हो रहा है, टाटा पावर भी आगे के लिए पर्यावरण हितैषी ऊर्जा संसाधनों की तलाश कर रहे हैं। “अबतक उपलब्ध प्रौद्योगिकी अत्यंत सीमित है, लेकिन हमने कुछ नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं तथा सस्ते उत्पाद प्रस्तुत किए हैं”, श्री कोकिल कहते हैं।

इसके ऊर्जा संयंत्र तथा वितरण का मूलभूत ढांचा टाटा पावर की बड़ी चुनौतियां बनी रहेंगी।* इनके साथ ही इसमें वे उच्च-जोखिम के कार्य जोड़ें, जो कंपनी के लोग करते हैं, कार्यावधि समयनिर्धारण, कार्य श्रेणीकरण- स्थायी केसाथ ही ठेके पर- और मुंबई जैसे एक शहर में बिजली की आपूर्ति करने का एक बेहद कठिन कार्य भी।

“यह एक तथ्य है कि हमारा एक विशालतम संयंत्र और शहर के बीच से गुजरती उच्च-वोल्टेज लाइनें एक बड़ी चुनौती हैं”, कहते हैं विजय चौरे, जो कंपनी के कॉरपोरेट सुरक्षा प्रमुख हैं। “हमने प्रणाली सुरक्षा तथा जन सुरक्षा को अलग-अलग कर दिया है। पहले पर डिजाइन के चरण में ही सावधानी रखी जाती है; दूसरा एक जारी कार्य है।” ;

सभी तरह का प्रशिक्षण
टाटा पावर के सुरक्षा एजेंडा का मूल भाग इसका सुरक्षा प्रवर्तन प्रशिक्षण है। हर कर्मी, चाहे स्थायी हो या ठेके पर, कार्यबल में शामिल किए जाने से पहले एक सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम में सम्मिलित होता है। कर्मियों को कार्यस्थल तथा निर्दिष्ट कार्य के अनुसार सुरक्षा प्रशिक्षन दिया जाता है, जो केवल आपात स्थिति में किए जाने वाले कार्यों तक ही सीमित नहीं होता। उपकरणों का नियमित निरीक्षण किया जाता है, तथा उसी प्रकार कर्मियों के स्वास्थ्य का चिकित्सकीय मूल्यांकन भी किया जाता है। इसके अलावा, ठेका कर्मियों को टाटा पावर स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (टीपीएसडीआई) में प्रशिक्सण प्रदान किया जाता है।

हर टाटा पावर कर्मी को एक सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम से होकर गुजरना पड़ता है

कार्य सुरक्षा विश्लेषण संभावित खतरों, उन्हें समाप्त करने के तरीकों तथा प्रक्रियाओं के अनुपालन की व्याख्या करता है। टाटा पावर ने अपने घटनाओं के प्रतिवेदन और प्रबंधन में टाटा स्टील यूरोप की ‘रेड स्ट्रिप’ कार्यप्रणाली का मानदंड अपनाया है। यदि और जहां कोई सुरक्षा घटना होती है, तो उस घटना के विवरण सहित एक ‘रेड स्ट्रिप’ सूचना तैयार कर लाइन के नीचे प्रदर्शित की जाती है।

“इससे अन्य लोगों को चेतावनी देने में सहायता होती है जो इसी प्रकार की स्थितियों में हो सकते हैं”, कहते हैं श्री चौरे, वह व्यक्ति जो टाटा पावर की नई सुरक्षा नीतियों के पीछे मौजूद है। “हमारी सुरक्षा रणनीति, पर्यवेक्षकों, सुरक्षा अधिकारियों तथा संयंत्र के प्रमुख द्वारा स्पष्ट रूप से विभाजित है, जो सभी मिलकर उच्चतम सुरक्षा मानदंडों के अनुपालन के लिए कार्य करते हैं।”

नई सुरक्षा नीतियों में से, ‘ठेकेदार सुरक्षा नियमावली’, जिसे कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन के परामर्श से तैयार किया गया है, अत्यंत सावधानी की मांग करनेवाली है। ठेके दिए जाने के लिए एक अतिरिक्त स्तर का निर्धारण करते हुए, इस नए नियम में इच्छुक ठेकेदारों से पेशागत स्वास्थ्य तथा सुरक्षा मूल्यांकन अनुक्रम तथा अन्य अनिवार्य प्रमाणपत्रों की मांग की गई है। ठेकों को एक सुरक्षा क्रम-सूची के आधार पर मूल्यांकित किया जाता है; यहां बिल के एक भाग के रूप में सुरक्षा निष्पादन गारंटी की धारा है, और यहां सुरक्षा के उच्चतम निष्पादन के लिए प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान है।

टाटा पावर विस्तृत समुदायों के लिए अपने ‘जनजागृति अभियान’ (लोक जागरुकता) कार्यक्रम के माध्यम से सुरक्षा अभियान भी चलाते हैं, खासतौर पर झुग्गियों में जो इसकी वितरण लाइनों के नीचे जहां-तहां उग आते हैं। “लाइन अभियंता, लाइन कर्मचारी तथा स्थानीय सामुदायिक कार्यकर्ता मिलकर लोगों को उन सावधानियों के प्रति जागरुक बनाते हैं जो उन्हें इन लाइनों के इतने निकट रहते हुए अपनानी चाहिए”, कहते हैं श्री चौरे। “हम पर्व-त्योहारों तथा मानसून के महीनों में खासतौर पर सावधान रहते हैं क्योंकि इसी अवधि में ज्यादातर दुर्घटनाएं देखी जाती हैं।”

सुरक्षा के समान ही, स्वास्थ्य भी टाटा पावर में एक मुख्य उद्देश्य रहा है। कंपनी के सभी कार्यस्थलों पर प्रशिक्षित मेडिकल कर्मी हैं, और इसके सभी ऊर्जा संयंत्रों में संभावित स्वास्थ्य खतरों से निपटने के लिए क्लिनिक मौजूद हैं। स्वास्थ्य का नियमित परीक्षण किया जाता है और हमारे कर्मचारियों में से कई प्राथमिक चिकित्सा में प्रशिक्षित हैं”, कहते हैं डॉ. उत्पल चक्रवर्ती, जो टाटा पावर में मुख्य चिकित्सा अधिकारी हैं। “सुरक्षा और स्वास्थ्य के संदेश प्रायः लीडर्स अपने घर में अभी अपनाते हैं।”