दिसम्बर 2016 | फिलिप चाको

गुणवत्ता के लिए ऊर्जा की बचत

टाटा पावर डेल्ही डिस्ट्रिब्यूशन ने अपने संगठनात्मक ढांचे का पुनर्गठन करने, चुनौतियों से निबटने और एक असाधारण उद्यम के रूप में निर्मित होने के लिए बिजनेस एक्सीलेंस पर भरोसा किया है।

खास्ताहाल बुनियादी ढांचा, 50 प्रतिशत से ज्यादा की कुल तकनीकी और वाणिज्यिक (एटी&सी) हानि, असंतुष्ट उपभोक्ता आधार, मायूस कार्यबल और एक प्राचीन कम्प्यूटर, अपने वैभव में अकेला- टाटा पावर डेल्ही डिस्ट्रिब्यूशन के अस्तित्व में आने के लिए उसे बस यही विरासत मिली थी।

यह जानने के लिए यह वीडियो देखिए कि टाटा पावर डेल्ही डिस्ट्रिब्यूशन ने किस प्रकार इस अद्भुत बदलाव में जीत हासिल की

यह जुलाई 2002 की बात है, जब टीपीडीडीएल (पहले नॉर्थ डेल्ही पावर के नाम से विख्यात) ने टाटा पावर और दिल्ली सरकार के संयुक्त उपक्रम के रूप में शुरुआत की। यह नया उद्यम दिल्ली विद्युत बोर्ड के मलबे से पैदा हुआ था, जो एक राज्य स्वामित्व का संस्थान था, जिसने, नरम शब्दों में कहें तो, भारत की राष्ट्रीय राजधानी में बिजली वितरण के अपने निर्दिष्ट कार्य में बेहद निम्न सफलता पाई थी। इस तरह के बचपन से लेकर आज की पुष्ट वयस्क अवस्था तक, टीपीडीडीएल ने तुलनात्मक रूप से बेहद कम समय में काफी लंबा सफर तय किया है।

टीपीडीडीएल की इस यात्रा का एक अमूल्य नाविक जिसने इसकी उत्पत्ति के क्षयित संधिस्थल से लेकर आज की इसकी स्थिति- एक लाभदायक, पुरस्कृत, ग्राहकों की प्रिय कंपनी, जो अपने विकास से सार्वजनिक-निजी भागीदारी का एक अनुकरणीय उदाहरण बन गई है- तक पहुंचाया है, वह बिजनेस एक्सीलेंस रहा है, इसके कई आयामों में से हर एक में तथा समस्त संगठनात्मक संचालनों में मौजूद रहा है।

टीपीडीडीएल ने बिजनेस एक्सीलेंस के रास्ते पर 2004 में अपनी यात्रा शुरू के, इस बिंदु पर मुख्य उद्देश्य टाटा की कार्य संस्कृति को एक प्रतिष्ठान में समाहित करना था, जिसे अपने पूर्व स्वरूप में इस प्रकार का कोई अनुभव नहीं रहा था। कर्मियों से लेकर अन्य सभी पहलुओं, जिनमें उनके उपभोक्ता, प्रौद्योगिकी, नेतृत्व और नीति तक सम्मिलित थे, टीपीडीडीएल ने गहन प्रयास किए और हर बीतते वर्ष के साथ बिजनेस एक्सीलेंस को कंपनी और इसके सदस्यों के लिए एक सोचने और जीने का तरीका बनाने की दिशा में काफी प्रगति की।

अनवरत सुधार के इस कार्यक्रम में पथ प्रकाशित करना ही टाटा बिजनेस एक्सीलेंस मॉडल (टीबीईएम) रहा है। जो प्रगति हुई है वह कठोर परिश्रम के बल पर अर्जित है, घनघोर संघर्ष करना पड़ा, और बहुत कुछ पूरा करना बाकी है, लेकिन टीपीडीडीएल ने दिखा दिया कि यदि प्रतिबद्धता दृढ़ हो और समग्र व्यावसायिक उद्देश्यों के साथ अनुरूप हो तो कठिन चुनौतियों से भरी परिस्थितियों से भी कितना कुछ हासिल किया जा सकता है।

‘व्यवसाय की उत्कृष्टता को हमने चरण दर चरण हासिल किया है और प्रत्येक चरण महत्वपूर्ण है’, टीपीडीडीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रवीर सिन्हा कहते हैं। ‘टीबीईएम ने हमें अपनी प्रक्रियाओं, प्रणालियों और लोगों को संवारने में मदद की है; इसने उस सांस्कृतिक बदलाव को हासिल करने में मदद की है जो टाटा समूह का अंग बनने के लिए जरूरी होता है’।

शुरुआती मुश्किलें जो थीं उनसे निबटना टीपीडीडीएल के लिए बहुत कठिन काम था। ‘यह ऐसी कंपनी थी जिसकी कोई प्रक्रिया नहीं थी; एक भी प्रक्रिया को लिख कर नहीं रखा गया था,’ श्री सिन्हा कहते हैं। ‘हमें विरासत में एक कंप्यूटर मिला था जिसका इस्तेमाल पत्र लेखन में किया जाता था। हम जिस रूपांतरण से गुजरे हैं वह इसलिए संभव हो सका क्योंकि हमने इन सभी प्रक्रियाओं और प्रणालियों को अपनाया। अब हमारे पास 330 विशिष्ट प्रक्रियाएं हैं, हमारा संपूर्ण काम अब प्रक्रिया अधारित होता है’।

कर्मचारियों के सदाचरण के अतिरिक्त जो सबसे बड़ा लाभ टीपीडीडीएल को बिजनस एक्सीलेंस हासिल करने के कारण हुआ वह है एटी&सी घाटे को कम करना। इसमें से अधिकांश बिजली की चोरी के कारण था जो कि भारत की एक सदाबहार समस्या है। कंपनी ने इस पर तीन चरणों में हमला बोला: प्रत्येक कस्टमर प्वाइंट पर इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगाया गया, दोषियों को पकड़ने के लिए उपयोग के आंकड़े का विश्लेषण किया गया और सामाजिक प्रयासों और आर्थिक पारितोषिक के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचा गया। 

एटी&सी घाटे से निबटने के अभियान में टीपीडीडीएल को महत्वपूर्ण सफलता मिली। इसे 2002 के 53.1 प्रतिशत के स्तर से कम किया गया, जिसका अर्थ था कुल वितरित बिजली के आधे भाग की क्षति, आज यह केवल 8.8 प्रतिशत है, जो कंपनी को इस मामले में इंडस्ट्री का अग्रणी बना देता है। ‘यही है हमारे रूपांतरण यात्रा की गाथा’, टीपीडीडीएल के बिजनस एक्सीलेंस प्रमुख अजित मलेयवर कहते हैं। ‘हमने एटी&सी घाटे को संकेंद्रित उपायों के जरिए लक्षित किया जो प्रक्रिया आधारित, ग्राहक केंद्रित प्रयासों, रणनीति और लीडरशिप के बीच बेहतर हासिल करने के जरिए हुआ। से सभी आईबीईएम के घटक हैं।

कई सारे बिंदु हैं जहां बिजनस एक्सीलेंस ने टीपीडीडीएल को लाभ अर्जित करने में मदद की: कार्य वातावरण और सुरक्षा, ग्राहक अनुकूलता, पर्यावरण, सामाजिक उत्तरदायित्व, प्रौद्योगिकी और नवप्रवर्तन। सूचना और अंतर्दृष्टि साझा करने के लिए संगठन के लिए अलग शाखा बनाना इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। ‘जैसे, नवप्रवर्तन यानी इनोवेशन केवल एक ही क्षेत्र में नहीं हो सकता,’ श्री मलेयवर ने बताया।  

श्री मलेयवर के अनुसार एकीकरण और संरेखन हर तरफ बिजनस एक्सीलेंस को व्यापित करना कठिन होता है। ‘जब हम प्रक्रिया की बात करते हैं तो उन प्रक्रियाओं की मॉनिटरिंग और उनका पालन महत्वपूर्ण होता है। लेकिन आपको इस बात का ध्यान रखना होता है कि आपकी प्रक्रियाएं कितनी एकीकृत हैं। यह एक चुनौती है क्योंकि किसी भी डिपार्टमेंट या संक्रिया को छोड़ा नहीं जा सकता; आपको सभी साथ लेकर आगे बढ़ना पड़ता है।’

आखिरकार ग्राहक ही टीपीडीडीएल के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। ‘जो कुछ भी परिवर्तन हमने किया है उनका लक्ष्य रहा है हमारे ग्राहक उन्मुखता को बढ़ाना,’ श्री मलेयवर कहते हैं। ‘यही हमारे लिए संचालक शक्ति है जो हमारे व्यवसाय को संचालित करती है’, श्री सिन्हा और अधिक जोर देकर बताते हैं: ‘हम दिल्ली के लोगों के आभारी हैं कि उन्होंने हमें यह अवसर दिया। जब तक हम अपने ग्राहकों से किए वादे पर खरे उतरते हैं हमें कोई नहीं रोक सकता।’

लोक शक्ति पुनर्पिर्भाषित
प्रवीर सिन्हा के दिमाग में इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं है कि बिजनस एक्सीलेंस का टाटा पावर डेल्ही डिस्ट्रीब्यूशन (टीपीडीडीएल) और उसके कर्मचारियों के ऊपर सर्वाधिक प्रभाव रहा।

‘2002 में कंपनी की स्थापना के समय हमारे लोग और उनकी कार्य संस्कृति हमारे लिए सबसे बड़े मुद्दे थे,’ टीपीडीडीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और मैनेजिंग डायरेक्टर कहते हैं। ‘उनमें से कई 40 और 50 की उम्र पार कर चुके थे। उनकी सोच और काम करने के तरीके को बदलना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ हमने उन्हें प्रक्रिया और प्रणाली से, कंप्यूटर और सूचना तकनीक से, ग्राहकों की जरूरतों और इंडस्ट्री की मांगों से परिचित कराया।’

आज टीपीडीडीएल को अपने 15 लाख ग्राहकों का मित्र और साझीदार के रूप में देखना कंपनी के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। इसका सबसे बड़ा श्रेय टीपीडीडीएल के 3500 से अधिक कर्मचारियों को जाता है जिन्हें इस तथ्य से भलीभांति परिचित कराया गया कि बिजली वितरण व्यवसाय के मूल में ग्राहक संकेंद्रित होना सबसे सबसे महत्वपूर्ण बात होती है।

यह सामग्री टाटा समूह की कंपनियों में बिजनेस एक्सीलेंस की संस्कृति के बारे में टाटा रीव्यू के अक्टूबर-दिसंबर 2016 संस्करण की आवरण कथा का एक अंग है:
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