अगस्त 2017

सफलता का मीठा स्‍वाद चखना

एक रासायनिक जो एक तरफ टायरों को सुरक्षित और कम प्रदूषित करने और वहीं दूसरी तरफ स्वादिष्ट और स्वस्थ प्राकृतिक चीनी बनाने में मदद करता है, ये हैं सफलता की कहानियां टाटा केमिकल्स इनोवेशन सेंटर की

टायर और प्राकृतिक शर्करा में क्या समानता है? इसका उत्‍तर पुणे स्थित टाटा केमिकल्स के अत्याधुनिक नवप्रवर्तन केंद्र (IC) में मिल सकता है।

एक उत्पाद श्रेणी जिसमें सोडा ऐश, औद्योगिक रसायन, कृषि रसायन, विशिष्‍ट रसायन और भारत के कुछ हिस्‍सों में ’ सबसे प्रसिद्ध खाद्य ब्रांडों के रूप में शामिल हैं, टाटा केमिकल रसायन विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी के चौराहे पर चल रहा हैं। नवप्रवर्तन केंद्र का उद्देश्य खाद्य उत्‍पाद, समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण में नवोन्‍मेश रूप से विकसित करना है जो भविष्य की पीढ़ियों को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सके। टाटा केमिकल्स के नए कारोबार और नवप्रवर्तन केंद्र के अध्यक्ष और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी डॉ। अरुप बसु कहते हैं, “ इस ओर, हम अपने जुनून को डोमेन की गहराई और ग्राहक केंद्रितता के साथ जोड़ते हैं।”

स्पेशलिटी केमिकल्स टीम द्वारा विकसित किए गए उत्पादों में से एक उच्‍चतर डिस्पैसेबल सिलिका (एचडीएस) है, जो एक प्रकार की तलछट सिलिका है। यह ऑटो टायर कार्य प्रदर्शन को प्रभावित करती है, और कार्बन उत्सर्जन को कम करने से संबंधित है।

2020 तक, मोटर वाहन उद्योग को बहुत सख्त उत्सर्जन मानदंडों का पालन करना होगा - यात्री वाहनों को वर्तमान में 130 ग्राम / कि.मी. के की जगह 95 ग्राम / किमी के कार्बनडाइऑक्‍साइड के उत्सर्जन मानकों का पालन करना होगा। वाणिज्यिक वाहनों को मौजूदा 175 ग्राम / किमी से 147 ग्राम / किमी के कार्बनडाइऑक्‍साइड उत्सर्जन मानदंडों का पालन करना होगा। इसने टायर के कार्य प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए दुनिया भर में टायर उद्योग के विकल्प का मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित किया है।

इस परिदृश्य में एचडीएस को एक विशेष घटक के रूप में जाना जा रहा है, जिसमें टायर निर्माण प्रक्रिया में शामिल होने से चक्रण घर्षण को कम करने में मदद मिलेगी, अधिक प्रतिरोध वहन को बढ़ावा मिलेगा और तरल की पकड़ में सुधार होगा। बढ़ते व्यावसायिक अवसरों को समझना, विशेषता रसायनों की टीम ने अनुकूलित सतह की कार्यक्षमता के साथ एचडीएस को विकसित करने के लिए एक नई तकनीक का प्‍लेटफॉर्म विकसित किया है।

डॉ. बसु एचडीएस के महत्व को बताते हुए कहते हैं कि “ एचडीएस की खासियत यह है कि इसके कण के आकार को विशिष्ट सतह क्षेत्र में वांछित परिवर्तन और एक मैट्रिक्स के भीतर फैलाव में लाने के लिए अनुकूलित किया जा सकता है।” यह देखते हुए कि 2015 में तलछटी सिलिका का वैश्विक बाजार 2.5 अरब अमेरिकी डॉलर था और 2020 तक यह 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर हो जाने की उम्मीद है, यह एक ऐसा क्षेत्र है जो विकासोन्‍नमुख है। कंपनी ने पहले ही अपने आठ उत्पाद के पेटेंट के लिए आवेदन किया है।

हर तरफ हरियाली

क्या ’ यहां उल्लेखनीय है कि टाटा केमिकल्स ’ एचडीएस कई हरियाली के फायदे मुहैया करते हैं। डॉ. बसु के मुताबिक, आईसी ने चावल भूसी की राख से एचडीएस को संश्लेषित करने के लिए प्रयोगशाला-स्तरीय क्षमता “ विकसित की है, जो भारत में प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला एक कृषि अपशिष्ट है।” इस अभिनव समाधान से उत्पाद की परिवर्ती लागत (variable cost) कम हो जाएगी , विनिर्माण प्रक्रिया को हरित उन्‍नमुखी होगी, टायर की सुरक्षा विशेषताओं में सुधार होगा। किसी अपशिष्‍ट पदार्थ का उपयोग करना उसका निपटान एक बड़ी चुनौती होती है। इस सफलता में कंटेंट का योगदान नहीं है। आईसी की टीम अब ग्रेफेन और एचडीएस के संयोजन को विकसित करने के लिए काम कर रही है जो टायर के कार्य प्रदर्शन में और सुधार कर सकती है।

अपने जीवन में नवीनता/प्रवर्तन को लाने के लिए इच्छुक आईसी टीम ने भारत में अग्रणी टायर निर्माण कंपनी की R&D टीम के साथ काम किया और पहला ऑर्डर संतोषजनक रूप से पूरा किया। डॉ बसु कहते हैं, “ हमने गुजरात के जीआईडीसी दाहेज में एक ग्रीनफील्ड स्पेशलिटी केमिकल्स के इस्तेमाल की शुरूआत की है। जहां हमने 1.3 मीट्रिक टन एचडीएस का उत्पादन किया है। यह सुविधा 50,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष क्षमता वाली एचडीएस विनिर्माण इकाई के रूप में परिवर्तित करने के लिए पुनरोत्‍थान किया जा रहा है जो टायर उद्योग के भविष्य की मांग को पूरा कर सकता है। एचडीएस बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली कच्‍चा माल सोडियम सिलिकेट है, यहां कच्‍चा माल के रूप में सोडा के राख (सोडा ऐश) का उपयोग करती है। यह हमें एक्‍सटेंडेड सोडा एश की मूल्य श्रृंखला से जुड़े जोखिमों से निपटने में भी सहायता करता है।”

सफलता का स्‍वाद आईसी टीम के लिए मीठा है क्योंकि इसने इसे कई चुनौतियों से जूझ पाई है टीम के लिए टायर व्यापार बिलकुल ही नया क्षेत्र था, और टायर निर्माण से जुड़े सुरक्षा के तत्व ने विज्ञान को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। एक और चुनौती यह थी कि ग्राहक ने जोर देकर कहा कि टाटा केमिकल्स को अपने विनिर्माण इकाई में ही नए टायर बनना चाहिए। उसे किसी तीसरे पक्ष के संयंत्र में निर्मित करना स्वीकार्य नहीं था। जैसा कि डॉ. बसु कहते हैं, " हम वैश्विक दिग्गजों के आंखों में आंख डालकर खड़े हैं, इसलिए हमें इस उच्च प्रौद्योगिकी डोमेन में विश्वसनीयता हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।"

सफलता का स्‍वाद

आईसी की दूसरी नवीन/अभिनव पेशकश चीनी का एक नया रूप है जिसका स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से दूरगामी प्रभाव हो सकता है। टाटा Nx ब्रांड नाम से चीनी का विपणन किया जा रहा है। डॉ. बसु इस ब्रांड के नाम को असासाधारण बताते हैं: “Nx का अर्थ है पोषाहार का निर्धारण करना है, जैसा कि Rx औषधि का प्रतिनिधित्व करता है। उपभोक्ताओं के लिए मीठे स्‍वाद वाला दो उत्पाद हैं। यहां तक कि जो लोग मधुमेह और पूर्व मधुमेह से पीड़ित हैं, उनके लिए भी प्रतिकूल प्रभावी नही है।”

टाटा Nx ने दो उत्‍पाद लॉंच किया। शून्य चीनी, एक कम ग्लिसेमिक इंडेक्स (GI), यह 100 प्रतिशत प्राकृतिक उत्पाद है जिसका उद्देश्य कृत्रिम मिठास का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं और हल्‍का & मीठा स्‍वाद , स्वास्थ्य संबंधी जागरूक उपभोक्ताओं के लिए कम GI शर्करा उपलब्‍ध करना है, जो नियमित गन्ने की चीनी के उपयोग के बदले वैकल्पिक शर्करा इस्‍तेमाल करना चाहते हैं। यह उत्‍पाद स्वस्थ और मिठास से लबरेज है हल्‍का & मीठा पेट के स्वास्थ्य में सुधार के लिए प्रीबायोटिक होता है और आधा कैलोरी मिठास के बराबर के स्तर पर होता है। दोनों उत्पादों में स्टेविया होते हैं, जो विभिन्न अनुपातों में एक प्रकार के प्राकृतिक पौधे से प्राप्‍त सामग्री पर आधारित चीनी का विकल्प है।

कंपनी को इस बात पर गर्व है कि केवल एक महीने में दोनों उत्पादों के 500,000 रूपये मूल्य का पहला बैच ऑनलाइन शॉपिंग अमेज़ॉन पर बेच दिया गया। अधिक उत्पाद टाटा Nx पोर्टफोलियो में जल्द ही जोड़े जाएंगे।

टाटा Nx के विकास ने अपनी चुनौतियां प्रस्तुत कीं। डॉ. बसु कहते हैं, “ हमारे सामने जो सबसे बड़ी चुनौती आई थी, वह यह सुनिश्चित करने में थी कि उपभोक्ताओं को स्वाद पर हर्जाना का भुगतान करने के लिए मजबूर नहीं किया गया ’ लोग अपेक्षा करते हैं कि भोजन का अच्छे स्वाद का होना चाहिए और हम इस अपेक्षा पर समझौता करने के लिए तैयार नहीं हैं, साथ ही अच्छे स्वास्थ्य लाभ भी हो।”

इसके क्षेत्र में दो बेहतरीन सफलताओं के साथ टाटा केमिकल्स आईसी ने R&D में निवेश करना जारी रखेगा ताकि नए अभिनव उत्पादों का निर्माण किया जा सके जो बाजार और ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करते हैं। सफलता को जारी रखने के लिए नए आइडिया को अधिक-से-अधिक अभिनव बनने की जरूरत होती है।