जून 2016 | समोद सारंगन

शू्न्य क्षति लक्ष्य

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी चाय कंपनी टाटा ग्लोबल बेवरेजेस – केवल चाय, कॉफी या पानी बनाने में ही – अंतर नहीं पैदा कर रही है। सतत प्रयासों के माध्यम से यह कंपनी पूरी दुनिया में फैले अपने संयंत्रों के कार्य वातावरण में स्वास्थ्य और सुरक्षा को बेहतर करने में सफल रही है व अधिक उच्च लक्ष्यों को हासिल करने की महत्वाकांक्षा रखती है

समुदाय तथा पर्यावरण के लिए सही काम करना तथा हितधारकों के साथ न्यायप्रिय व नैतिक होना टाटा ग्लोबल बेवरेजेस (टीजीबी) के 2009 में इसकी शुरुआत के समय से टिकाऊ एजेंडे के प्रमुख इरादों में से एक है। इसके ऑफिसों तथा कारखानों में सुरक्षित तथा स्वस्थ कार्यस्थल का निर्माण करना, कंपनी के अपने व्यवसाय को चलाने के मूलभूत तरीके में शामिल है।

टीजीबी के लिए एक सुरक्षित व स्वस्थ कार्यस्थल के लाभ अनेक हैं। दुर्घटना की दरें कम हो गयी हैं तथा बाल-बाल बचने के मामले पर्याप्त रूप से बढ़े हैं – स्वास्थ्य और सुरक्षा (एच&एस) – के बारे में जागरूकता में वृद्धि की मिसाल जो प्रमुख बेवरेजेस निर्माता के यहां उच्च कर्मचारी संतोष में इजाफा कर रहा है।

उत्तरोत्तर वृद्धि
2009 में कंपनी की शुरुआत के समय टीजीबी का जोर सभी भौगोलिक क्षेत्रों में विधिक अनुपालन और जहां उपयुक्त हो अधिक उंचे मानकों के कार्यान्वयन पर था। लेकिन 2014 में कंपनी ने अपने एच&एस मानकों तथा बेंचमार्क को ऊपर उठाने का निर्णय लिया। टीजीबी की ‘शून्य क्षति’ नीति, जिसका लक्ष्य एक ऐसा कार्यस्थल बनाना था जहां पर कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की चोट का सामना न करना पड़े, कंपनी के उद्देश्यों के लिए बुनियादी बात है।

“हमारा विश्वास है कि सभी दुर्घटनाएं रोकने योग्य होती हैं। अपेक्षाएं निर्धारित करने, मानक ऊंचा करने तथा सही संसाधनों व प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने में स्वास्थ्य तथा सुरक्षा सुधार एक बड़ी नेतृत्व चुनौती है। विधिक मानकों से सैद्धांतिक अनुपालनों से शून्य क्षति के प्रति अधिक अग्रसक्रिय दृष्टिकोण की ओर हम अपने रुख को बदलना चाहते थे। हम अपने प्रत्येक कर्मचारी को अपने कारखाने से उसी तरह से फिट निकलते देखना चाहते हैं जैसे कि वह दिन की शुरुआत में आया था और यही हमारे शून्य क्षति उद्देश्य का मूल है,” टीजीबी के परिचालन नियोजन, वीपी जॉन बर्डेट कहते हैं।

सफलता की कहानी
टीजीबी ने अपनी समय हानि दुर्घटनाओं को पिछले चार वर्षों में आधा कर दिया है। यह दुर्घटना दर (एआईआर, प्रति 1,000 कर्मचारी समय हानि दुर्घटनाएं) वित्तीय वर्ष 2013 में 4.64 से घट कर वित्तीय वर्ष 2016 में 1.91 हो गयी है। दुर्घटना आवृत्ति दर (एएफआर, प्रति 1,00,000 कार्य घंटे में दुर्घटनाओं की संख्या) में भी समान कमी देखी गयी है – जो वित्तीय वर्ष 2013 में 1.97 से घट कर वित्तीय वर्ष 2016 में 0.61 हो गयी है।

हरियाणा, भारत में संपला में टाटा ग्लोबल बेवरेजेस की पैकेजिंग इकाई

पिछले 12 महीनों में सभी दुर्घटना दरें आधी हो गयी हैं। बाल-बाल बचने की रिपोर्टिंग, जो कि एच&एस मामलों के बारे में बढ़ती जागरूकता की मिसाल है, पिछले वर्ष की तुलना में वित्तीय वर्ष 2016 में 3,043 की संख्या के साथ 50 प्रतिशत की उछाल दिखा रही है।

“सुरक्षा के प्रति शून्य क्षति दृष्टिकोण अधिक सकारात्मक सोच तथा व्यवहार तथा एक ऐसी संस्कृति की ओर ले जाती है जहां पर हर एक को सुरक्षित रूप से काम करने के बारे में पता होता है,” ï»¿श्री बर्डेटकहते हैं।

चुनौतियों का सामना करना
हालांकि, आरंभ में नई एच&एस रणनीति को स्वीकार करने व इसका अनुपालन करने के लिए कर्मचारियों को प्रेरित करना टीजीबी के लिए चुनौतीपूर्ण था। विभिन्न संस्कृतियों से आने वाले तथा एच&एस के प्रति विभिन्न दृष्टिकोणों वाले और विभिन्न भौगोलिक स्थानों में स्थित 3,000 कमर्चारियों में व्याप्त विविधताओं ने इस चुनौती में जटिलताओं को और बढ़ा दिया।

“आप एक ऐसे परिवर्तन का प्रबंध कर रहे हैं, जिससे हर एक व्यक्ति प्रभावित हो रहा है। पूरे संगठन में प्रतिबद्धता व्याप्ति को सुनिश्चित करने में काफी सारा समय व प्रयास लगता है,” श्री बर्नेट कहते हैं।

हालांकि सतत प्रयासों के कारण वित्तीय वर्ष 2016 में बाल-बाल बचने वाली घटनाओं की संख्या में पर्याप्त इजाफा हुआ है। यह एच&एस के बारे में बढ़ी हुई जागरूकता का प्रमाण है जिसने कंपनी में अपनी जड़ें गहरी कर ली है। “यह हमारी टीमों में सुरक्षा जागरूकता को मापने का उपाय है। खतरों तथा बाल-बाल बचने की रिपोर्टिंग उनके मूल कारणों की जांच करने तथा भविष्य में लोगों को चोटों से बचाने के लिए की जाने वाली कार्रवाइयों को यथास्थान करने में सक्षम करती है।

टेटली चाय, यूनाइटेड किंगडम के स्टॉकटन-ऑन-टीस में ईगलस्क्लिफ विनिर्माण संयंत्र में लोड किए जा रहे हैं

कंपनी को इससे दूसरे लाभ भी हासिल हुए हैं। “कर्मचारी संलिप्तता सर्वे खुलासा करते हैं कि हमारे टीजीबी सहयोगी एच&एस तथा व्यवसाय से उनके संबंधों के बारे अधिक सकारात्मक हैं,” वे आगे जोड़ते हैं।

शून्य क्षति की दिशा में
इस प्रगति के बावजूद कंपनी का विश्वास है कि अपनी उपलब्धियों पर खुश होकर बैठना जल्दीबाजी होगी। “हमारा लक्ष्य लोगों के व्यवहार को परिवर्तित करना है न कि केवल उस वातावरण को जिसमें वे काम कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में सुरक्षा के प्रति हम और अधिक व्यवहारिक दृष्टिकोण रखेंगे, जिससे कि हम एच&एस में अपने चल रहे निवेश को समर्थन दे सकें। हमारा विश्वास है कि इससे हमें अपने शून्य क्षति के लक्ष्य को हासिल करने में सहायता मिलेगी,” श्री बर्डेट कहते हैं।

टीजीबी के लिए, अंतिम लक्ष्य केवल चाय, कॉफी तथा पानी के साथ-साथ इसके कर्मचारियों के जीवन में भी स्थायी अंतर पैदा करना है।