मई 2016

‘हमारे लोगों के जरिए ब्रांड जीवंत है’

हॉवर्ड शुल्ज़ और स्टारबक्स एक दूसरे के पर्याय हैं, जिन्हें अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। सुप्रसिद्ध अमेरिकी कारोबारी और स्टारबक्स के अध्यक्ष एवं सीईओ ने कंपनी को संवारा है और उसे नया जीवन प्रदान किया है जिसके अब दुनिया भर में 23,450 आउटलेट हैं और इसकी बिक्री 2015 में 19 अरब डॉलर की हुई।

टाटा समूह के सफलतम बिजनस लीडरों के साथ संवाद के आधार पर निर्मित शिक्षण मंच ‘डायलॉग्स इन कस्टमर सेंट्रिसिटी एंड लीडरशिप’ टाटा संस के ग्रुप एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य तथा ब्रांड कस्टोडियन डॉ मुकुन्द राजन की मि. शुल्ज़ के साथ नवप्रवर्तन पर, कैसे कॉफी अच्छी है लेकिन कॉफी पर अच्छा करना और भी बेहतर है, और टाटा एवं स्टारबक्स को आपस में जोड़ने वाले उद्देश्य के साझा अनुभव पर बातचीत हुई।

मि. शुल्ज़ के साथ बातचीत में अन्य हस्तियों के अलावा समूह के अध्यक्ष साइरस पी मिस्त्री, टाटा समूह के निदेशकों एवं मर्केटिंग प्रमुखों ने भाग लिया। इस साक्षात्कार के कुछ अंश:

कॉफी के बारे में आपकी कल्पना को किस बात ने अकृष्ट किया?
1983 में मैं इटली में था जब मैंने इटैलियन कॉफी बार का आकर्षण महसूस किया। कॉफी की गुणवत्ता के अलावा जिस चीज ने मुझे प्रभावित किया वह थी कॉफी बार में पाई जाने वाली सामुदायिक भावना। इससे प्रभावित होकर मेरे मन में अमेरिकी संस्कृति के अनुरूप अमेरिकी लोगों के लिए इसकी प्रतिकृति तैयार करने की इच्छा जागी और यहीं से हुई
स्टारबक्स की शुरुआत।

बतौर सीईओ स्टारबक्स अपनी वापसी के आपके निर्णय का एक मुख्य प्रेरक कारक वह था जिसे आपने स्टारबक्स के अनुभव के कमोडिटाइजेशन के रूप में वर्णन किया है। क्या आप इसे समझाएंगे?
उस समय स्टारबक्स के लीडर परिचालनीय दक्षता का मापन और प्रतिफलन कर रहे थे। स्टारबक्स दक्षता आधारित नहीं है; यह रोमांस, आकांक्षा और थिएटर आधारित है। हम लाभ के अर्जन और पैसा बनाने के मूल उद्देश्य से काम नहीं करते।

हमारे होने का मूल उद्देश्य और मूल कारण है लाभ और अंतःकरण के बीच संतुलन हासिल करना। हां, हमें धन की जरूरत है और हमें शेयरधारी मूल्य का निर्माण करना है लेकिन हमें अपने समाज की भी सेवा करना है। मैं अपने जीवन और प्रतिदिन के अपने काम को इस पर आधारित रखता हूं। जिस नवप्रवर्तन के बारे में मैं बात कर रहा हूं वह न केवल ग्राहक उन्मुख हैं बल्कि हमारे लोगों के साथ नवप्रवर्तनकारी भी जिन्हें हम साझेदार कहते हैं।

सीईओ के रूप में वापस आकर आप अपने साझेदारों को दुबारा कैसे जोड़े? 2008 में अपने बरिस्ता को फिर से ट्रेन करने के लिए आपने अपने सभी यूएस स्टोर्स को क्यों बंद किया?
2008 में हमारा मार्केट कैप 6 अरब से नीचे गिर गया और हमारे स्टॉक की कीमत 6.81 डॉलर थी। दो कारणों से मैं इस कठिन समय में वापस आया: प्रेम और जिम्मेदारी।

मुझे स्टारबक्स कॉफी कंपनी से उतना ही लगाव है जितना अपने परिवार से और मेरी जिम्मेदारी स्टारबक्स के लोगों और उनके परिवारों के प्रति थी। मैंने लीडरशिप टीम को कहा कि मुझे हर एक स्टोर मैनेजर से प्रत्यक्ष मिलना है। उस समय 9000 स्टोर मैनेजर थे और लोगों ने सोचा कि मैं मेरा दिमाग फिर गया है।

उन्होंने कहा, ‘हॉवर्ड तीन दिनों के अंदर 9000 लोगों को लाने में 3 करोड़ डॉलर खर्च होंगे’। इस पर मैंने कहा, अपने लोगों पर खर्च करने से अधिक अच्छा और क्या हो सकता है। हमारी मुलाकात शानदार रही; यह एक तरह से विरेचनकारी था
और उपचारात्मक भी।

हॉवर्ड शुल्ज़, स्टार बक्स के अध्यक्ष और सीईओ की टाटा संस के ग्रुप एक्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य तथा ब्रांड कस्टोडियन डॉ मुकुन्द राजन से वार्ता

उस दिन के बाद से फिर हमने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। लीडर्स के नाते हमें एक ऐसा माहौल तैयार करना पड़ता है जहां लोगों के ऐसा महसूस हो कि वे किसी बड़े उद्देश्य के अंग हैं।

इसलिए हम सबके लिए प्रश्न यह है कि हम एक कंपनी की भूमिका और उत्तरदायित्व का अन्वेषण कैसे करें?
मुझे लगता है हमें अपने लोगों के लिए, समाज के लिए और अधिक करना चाहिए और अपनी अच्छाइयों का उपयोग समाज पर असर छोड़ने के लिए करना चाहिए।

अपने बरिस्ता को प्रशिक्षित करने के लिए 2008 में स्टोर्स को बंद करना क्या एक फैसला चुनौतीपूर्ण था?
लोगों को लगा मैं पागल हूं। मैं सचाई और ईमानदारी की बात करता था। जब सीईओ के रूप में मेरी वापसी हुई और मैंने स्टोर्स के दौरे किए तो मुझे कॉफी की क्वालिटी पसंद नहीं आई। मुझे लगा हमारे लोग ऐसी प्रक्रिया अपना रहे थे जो क्वालिटी को कम करने वाली थी। मैंने कहा, ‘हमें अपने लोगों को दुबारा प्रशिक्षित करना होगा; हमें बिल्कुल शून्य से, पहले दिन से यानी कॉफी को भूनने से शुरू करना होगा। इसलिए हमने 800 स्टोर को पूरे एक दिन के लिए बंद किया ताकि हम अपने लोगों को प्रशिक्षित कर पाएं और इसका परिणाम अविश्वसनीय जन संपर्क के रूप में सामने आया और आखिरकार यह लाभ में परिणत हुआ।

स्टारबक्स मिशन की रूपरेखा बनाना आपके लिए कितना महत्वपूर्ण था?
मुझे लगता है यह बहुत ही महत्वपूर्ण था क्योंकि ‘ब्रांड’ हमारे लोगों के जरिए ही तो जीवंत होता है। हम लोगों के रोजमर्रा के अहसास को निखारने के पेशे में हैं और मेरा मानना है कि कॉफी की गुणवत्ता और ब्रांड की इक्विटी ग्राहकों और हमारे लोगों के बीच के नाजुक संबंध के कारण अस्तित्व में आई हैं।

घर वह पहली जगह होती है, कार्य स्थल वह दूसरी जगह तथा कॉफी हाउस वह तीसरी जगह जहां लोग दूसरों से जुड़ते हैं। यह तीसरी जगह हमारे जीवन में कितना महत्वपूर्ण है और स्टारबक्स ने कैसे इस अंतर्दृष्टि का फायदा उठाया?
लोग मानवीय जुड़ाव के इच्छुक होते हैं और मुझे लगता है कॉफी संवाद और सामाजिक अंतर्क्रिया के लिए कॉफी एक बेहतरीन जरिया होती है। हमने ऐसे स्टोर स्थापित करने की कोशिश की जो लोगों को कॉफी के लिए बल्कि वहां वक्त गुजारने के लिए भी आकर्षित करे। हम बेचते हैं माहौल और कॉफी का रोमांस। साथ ही हम स्टारबक्स ब्रांड के मूल घटक के रूप में मानवीयता को अपनाते हैं।

आपने एक वर्चुअल चौथी जगह के बारे में भी बताया जो हर तीसरी जगह के ऊपर मंडराती है। इस चौथी जगह को हम क्या समझें?
तीन साल पहले, मैंने कहा कि हम घरेलू और वैश्विक स्तर पर एक युगांतकारी बदलाव का अनुभव कर रहे थे और वह बदलाव शॉपिंग के स्रोत के रूप में ग्राहक आधारित ई-कॉमर्स और मोबाइल फोन को अपनाने का परिणाम था। इसका परिणाम इस रूप में सामने आया कि सड़क पर लोगों की संख्या में कमी आई और मुख्य सड़कों और मॉलों में भीड़ घटी। ‘ब्रिक-एंड-मोर्टार’ रिटेलर, यानी ग्राहक के साथ प्रत्यक्ष संपर्क वाले खुदरा विक्रेता के रूप में हमें यह जरूर समझना चाहिए कि हमें आगे उस नवप्रवर्तन के संदर्भ में निवेश करना होगा जो प्रासंगिकता का निर्माण करे और ग्राहक के डिवाइस पर एक प्रकार का भावनात्मक संपर्क हो। हम यह मानते हैं कि हमें एक अवसर मिला जो ग्राहक विजिट की आवृति के कारण संभव हुआ था। लोग कितनी बार आते हैं इस लिहाज से स्टारबक्स अमेरिका का सबसे अधिक पसंद किया जाने वाला रिलेटर है। हमारी औसत टिकट बहुत कम बस 5 डॉलर की है, लेकिन ब्रांड और अनुभव के लिहाज से लोगों का हम पर भरोसा बहुत मजबूत है।

‘ब्रिक-एंड-मोर्टार’ रिटेलर के लिए मोबाइल ट्रांजेक्शन के रूप में हम विश्व में अग्रणी हैं। हमने हाल ही में स्पॉटीफाई, न्यू यॉर्क टाइम्स और उबेर के प्रतिस्पर्धी लिफ्ट के साथ साझेदारी की घोषणा की है जिससे हम अपने साथ उनके संपर्क और संबंध के जरिए अन्य कंपनी के ग्राहकों को फायदा पहुंचाएंगे। हमारा कैलेंडर साल बहुत ही बढ़िया रहा जबकि ज्यादातर ‘ब्रिक-एंड-मोर्टार’ रिटेलर गिरावट से जूझ रहे हैं।

आपके हिसाब से क्या नवप्रवर्तन नहीं है?
संपूर्ण बोर्ड में हम ग्राहक व्यवहार में एक बदलाव का अनुभव कर रहे हैं और हम प्रबंधकों और लीडर्स को महत्वपूर्ण नवप्रवर्तनों को आगे बढ़ना है। नवप्रवर्तन का अर्थ किसी कोर प्रॉडक्ट में लाइन विस्तार जोड़ना नहीं है, जैसे एक नया फ्लेवर, नई पैकेजिंग आदि।

इसकी बजाए हमें अपनी कंपनी का पूरी तरह नया अनुसंधान करना होता है, यदि हम ऐसा न करें तो प्रतिस्पर्धियों के सामने हम टिक नहीं पाएंगे। हमें खुद अपने आप से प्रतिस्पर्धा करना होता है और सही मायने में महत्वपूर्ण नवप्रवर्तन लाना होता है।

क्या आप इस बात से सहमत हैं कि स्टारबक्स और टाटा समूह के साझे मूल्य हैं।
हम टाटा के मूल्यों, इतिहास, संस्कृति और निर्देशक सिद्धांतों को बेहद सम्मान और सराहना के साथ देखते हैं। जब पहली बार रतन टाटा और कृष्ण कुमार से मेरी मुलाकात हुई तो मैं उनकी सत्यनिष्ठा और सरलता देखकर विस्मित था। टाटा संगठन और साइरस मिस्त्री तो हमारी उम्मीदों से बढ़कर हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि हम उनकी अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे। टाटा समूह एक शानदार संगठन है और भविष्य में हम उन जैसा बनने के उम्मीद रखते हैं।

कोरमंगला, बंगलुरू में टाटा स्टारबक्स का आउटलेट

आपने ‘पब्लिक-फॉर-प्रॉफिट’ कॉरपोरेशनों की भूमिका के पुनर्निर्धारण के बारे में बात की। आपके जेहन में दरअसल क्या है?
पिछले दो वर्षों में मैंने अन्य बिजनस लीडर्स को यह समझाने की कोशिश की है कि उन सामाजिक मुद्दों पर हमारे साथ जुड़ें जिनके बारे में हमें लगता है कि सरकार उनपर ध्यान नहीं दे रही है। मुझे लगा कि हम जागरुकता जगाकर एक राष्ट्रीय संवाद तैयार कर सकते हैं।

दो साल पहले अमेरिका में बेरोजगारी बहुत अधिक थी और बैंकों से कर्ज मिलना मुश्किल था। हम जो कर सकते थे वह था अच्छे के लिए अपने पैमाने का इस्तेमाल और रोजगार का सृजन करना और ऋण उपलब्ध कराते हुए छोटे व्यवसायों के लिए अवसर का निर्माण करना; हमने ऐसा ही किया।

आपने अपने साझेदारों के लिए कुछ बेहतरीन कार्यक्रम किए हैं। क्या आप उनके बारे में बताएंगे?
अमेरिका में आज एक मुद्दा यह है कि छात्र भारी व्यक्तिगत ऋण के ऊपर बैठे हैं। युवा कॉलेजों को नहीं लौट रहे क्योंकि वे उन वित्तीय समस्याओं में घिरे हैं जिन्हें वे संभाल नहीं पा रहे। हमने अपने साझेदारों से पूछा कि हम ऐसा क्या कर सकते हैं जो सही मायने में सार्थक हो और उनमें से ज्यादार ने पूछा कि क्या कोई ऐसा तरीका है जिससे उन्हें कुछ ट्यूशन पुनर्भुगतान मिल सके। इस बीते साल, स्टारबक्स से यदि कोई कॉलेज में आवेदन करना चाहे तो ऐरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के साथ अपने संबंध के जरिए चार साल की कॉलेज ट्यूशन फी मुफ्त उपलब्ध कराने वाली हम अमेरिका की पहली कंपनी बन गए।

कैसे स्टारबक्स मानकीकृत दक्ष प्रक्रियाओं की जरूरत तथा विविन्न बाजारों में स्थानीय स्तर पर प्रासंगिक आवश्यकता के बीच संतुलन बनाता है?
70 देशों में 23,000 से अधिक स्टोरों के साथ हम सफल नहीं होते यदि सिएटल में बैठे लोग ही सारे निर्णय लेते। भारत में, यदि आप मुंबई के हमारे स्टोर्स में जाएं तो आप पाएंगे वे पूरी तरह स्टारबक्स हैं लेकिन दुनिया के अन्य स्टोर्स से वे पूरी तरह अलग भी हैं। स्टारबक्स स्टोर होने और स्थानीय प्रासंगिकता को अपनाने के बीच यह बहुत ही नाजुक संतुलन है, और निर्णय स्थानीय बाजार के हिसाब से लिए जाते हैं।

जब आप वरिष्ठ टीम बनाते हैं तो आप किस तरह की विशेषताओं के तलाश करते हैं?
2008 में मैं स्टीव जॉब्स से मिलने गया। उन्होंने कहा, ‘आपके नीचे कितने लोग काम करते हैं?’ मैंने कहा 11. उन्होंने कहा, ‘सबको निकाल दीजिए’। ‘वे आपका समर्थन करने वाले नहीं।’ मैंने उनकी सलाह नहीं मानी। छह महीने बाद उनमें से केवल एक बचा था। मैं लोगों को निकालने की वकालत नहीं कर रहा, लेकिन आपको ऐसे लोगों को रखना चाहिए जिनका कौशल आधार और अनुभव आपसे अधिक हो।

दूसरी बात, ग्राहक अनुभव से जुड़े हर व्यक्ति का आपके और आपकी कंपनी के साथ साझा अनुभव होना चाहिए। मुझे ऐसे लोग चाहिए जिनके अंदर आग हो, जिनके पास हृदय हो, समझ हो, करुणा हो और आगे बढ़ने के लिए कौशल का आधार हो।

अंतिम बात, आपको ऐसे लोग चाहिए जो अहंकार से मुक्त हों। नेतृत्व और व्यवसाय एक टीम कार्य है। यदि टीम में ऐसे लोग होंगे जिनकी भावना टीम के साथ नहीं है, तो उन्हें चले जाना चाहिए।

प्रासंगिक सामाजिक मुद्दों पर बोलने का विकल्प चुनने के लिहाज से स्टारबक्स एक गैर-पारंपरिक ब्रांड है। आपको क्या लगता है दूसरे ब्रांड ऐसा क्यों नहीं करते?
मुझे लगता है एक घबड़ाहट और चिंता होती है कि किसी प्रकार का संघर्ष न हो जाए। मैं भूमिका को थोड़ी अलग तरीके से देखता हूं। हम केवल लाभ अर्जिक करने के लिए नहीं आए। मैं फिर से अपना मूल उद्देश्य और अपने होने का कारण बताता हूं।

यह हॉवर्ड शुल्ज़ के गर्व के लिए नहीं है यह हमारे समाज की बेहतरी के लिए जरूरी है। जब हर कुछ ठीक हो तब कुछ करना आसान होता है; लेकिन जब आपके ऊपर दबाव हो तब आपका काम बहुत ही कठिन और असुविधाजनक हो जाता है। मुझे लगता है ऐसी स्थिति में ही आपको मजबूती से खड़ा होकर अपनी क्षमता का इस्तेमाल करना होता है।