जनवरी 2017 | सिंथिया रोड्रिग्स

अति विशिष्ट ब्रू

भारतीय कॉफी के लिए यह पहला है। टाटा कॉफी का नुल्लोर माइक्रोलॉट, स्टारबक्स रिज़र्व द्वारा दुनिया में दुर्लभ से दुर्लभतम कॉफी माइक्रोलॉट में से एक चुना गया है

भारतीय कॉफी के लिए एक बड़े कदम के रूप में, कोडागू कर्नाटक के टाटा कॉफी के 19 बागानों में से एक नुल्लोर ने खुद को वैश्विक कॉफी परिदृष्य पर स्थापित लिया है। नुल्लोर का एक कॉफी का माइक्रोलॉट भारत में पहली बार, जून 2016 में स्टारबक्स रिज़र्व द्वारा चुना गया था और नवंबर मेंसियाटल में स्टारबक्स रिज़र्व रोस्टरी में टाटा नुल्लोर इस्टेट कॉफी के रूप में बेचा व सेवित होगा।

माइक्रोलॉट कॉफी का एक सीमित संस्करण प्रकार है जो अपनी विशिष्टता के कारण रुचि जागृत करता है। यह एक ऐसी कॉफी है जो किसी विशेष इकोसिसट्म के लिए विशिष्ट होती है। ऐसा पहली बार है कि किसी भारतीय ब्रांड को दुनिया में दुर्लभ से दुर्लभतम माना गया है।

गर्व का पल
टाटा कॉफी के प्रबंध निदेशक, संजीव सरीन ने इस उपलब्धि के महत्व को समझाया, “पूरी दुनिया में ग्राहक बेहतर, भिन्न स्वाद की मांग करते हैं और रोस्टरीस विशिष्ट स्वादों वाले विशेष माइक्रोलॉट की खोज करती रहती हैं। हमारे लिए यह कॉफी के जन सप्लायर होने से, कॉफी का क्रेम दे ला क्रेम से स्टारबक्स द्वारा चुना जाना वाकई महत्वपूर्ण है।”

नुल्लोर माइक्रोलॉट का निर्माण ‘अहा’ पलों की एक श्रंखला थी, जिसमें उस ब्लॉक की पहचान जहां पर कॉफी उगायी जानी थी से लेकर कॉफी को चुननें और उस समय की मौसमी परिस्थितियां से लेकर उन बीन्स से कॉफी के सर्वश्रेष्ठ गुण हासिल करने के लिए उनको स्टारबक्स द्वारा मीडियम रोस्ट करने का निर्णय शामिल थे। ये हर एक तत्व सही समय पर हुए और जिससे सटीक माइक्रोलॉट का निर्माण हुआ।

बेहद शानदार कॉफी पैदा करने का प्रयास पिछले बरस शुरु हुआ, जब टाटा कॉफी ने बागान मैनेजरों को माइक्रोलॉट पर काम करने के लिए आमंत्रित किया। चूंकि इस संकल्पना की जानकारी नहीं थी, इसलिए बागान पर हर एक को कोच किए जाने की जरूरत थी। यहीं पर टाटा कॉफी की निदेशक सुनालिनी मेनन सटीक माइक्रोलॉट की खोज में दिशानिर्देश के लिए शामिल हुईं, साथ ही उन्होने एक अज्ञात भारतीय कॉफी के स्वाद के लिए स्टारबक्स को प्रोत्साहित किया।

'माइक्रोक्लाइमेट'
सुश्री मेनन ने भारतीय कॉफी बोर्ड के अपने बरसों के अनुभव के साथ बागान मैनेजरों को वनस्पति, जंतु व मिट्टी की स्थितियों के एक विशेष संयोजन द्वारा निर्मित ‘माइक्रोक्लाइमेट’ की खोज के लिए कहा जो वहां पर होने वाले माइक्रोलॉट को प्रभावित करेगी। आरंभ में संशय की स्थिति थी, लेकिन जल्दी ही सभी बागान मैनेजर अपने काम के बारे में पूरी तरह से उत्साहित हो गए।

बागान मैनेजरों और निर्यात बिक्री, आर&डी तथा अन्य फंक्शन के सदस्यों की एक क्रॉस फंक्शनल टीम बनाई गयी, जिसमें एमबी गणपति, वरिष्ठ महाप्रबधक (प्लांटेशंस) को शीर्ष पर रखा गया। इस नए अनुभव में संभावित माइक्रोलॉट की पहचान की लर्निंग भी शामिल थी, और यह आसान काम न था। 505 हेक्टेयर बागानों को 27 ब्लॉकों में विभाजित किया गया, वास्तव में काफी सारा काम किया जाना था। बागान मैनेजरों ने अपने ब्लॉकों को स्काउट करना शुरु किया और टीमों ने अपनी बांह समेट कर काम शुरु कर दिया।

जल्दी ही सभी बागानों से प्रविष्टियां आन लगीं। अंततः श्री गणपति की टीम ने 19 बागानों में से 42 ब्लॉकों का चयन किया, जहां पर नमूनों से संभावनाएं दर्शाई थी। संदूषण न होना सुनिश्चित करने के लिए बागान की टीमों ने अपने लॉट के साथ काम करना और उनका रखरखाव शुरु कर दिया और वे अपने माइक्रोलॉट से सर्वश्रेष्ठ निकालने में सक्षम हो रहे थे। संसाधित कॉफी को रोस्टिंग के लिए क्यूसी विभाग में भेजा गया, ये एक ऐसा टेस्ट था जो सर्वश्रेष्ठ कॉफी की पहचान को निर्धारित करेगा।

नुल्लोर बागान में कॉफी बेरीस

सर्वश्रेष्ठ नमूने मूल्यांकन के लिए सुश्री मेनन के पास भेजे गए। अंतिम चयनित सूची में चार भिन्न बागानों से चार माइक्रोलॉट शामिल थे। इनमें से तीन को उनकी अलग तरह की प्रसंस्करण तकनीकों के लिए चुना गया था और एक को कॉफी की विशिष्टता के लिए चुना गया था। ये नमूने सुक्षी मेनन व सुनील पिंटो द्वारा चुने गए थे, जो गुणवत्ता आश्वासन देखते हैं और टाटा कॉफी के लाइसेंस प्राप्त क्यू ग्रेडर हैं।

अच्छी कॉफी की पहचान अंतत स्वाद होता है, जो मिट्टी, माइक्रोक्लाइमेट, इसे उगाने के रुझान, बागान की भौगोलिक स्थिति, कॉफी को पकाने में दिया गया समय और कॉफी बीन का मूल स्थान जैसे अनेक कारण पर निर्भर करता है। नुल्लोर बागान की कॉफी का विशिष्ट स्वाद इस ब्लॉक में फ्रूट बैट और कोडागू के घने जंगल वाले स्थान के कारण उपलब्ध छाया के कारण था। “हम इस क्षेत्र में फ्रूट बैट की प्रचुरता को देख कर आश्चर्यचकित थे। इन बैट्स के कारण, अन्य क्षेत्रों के आम 2.4 से 2.5 प्रतिशत जैविक तत्वों की तुलना में यहां की मिट्टी के जैविक तत्व उच्च 3.35 प्रतिशत होते हैं,”नुल्लोर बागान के वरिष्ठ मैनेजर पीए मंदाना ने बताया।

इसे सही ट्रैक करना
इच्छित परिणाम हासिल करने का कारण नजदीकी निगरानी था। “कॉफी बीन चुनने से लेकर अंतिम उत्पाद के हमारे बागानों से भेजे जाने तक हमने हर समय कॉफी की ट्रेसिबिलिटी को बनाए रखा,” श्री मंदाना ने बताया, जिन्होने जनवरी में परिपक्तवता के स्तर के उच्चतम होने होने का आंकलन करते हुए कामगारों को बीन्स को जनवरी में चुनने के लिए कहा।

इस ब्लॉक का कॉफी के प्रत्येक लॉट की हार्वेस्टिंग व प्रसंस्करण को अलग-अलग किया गया था। अगला चरण, फसल की गुणवत्ता और प्रसंस्करण मानकों में स्थिरता की जांच के लिए कॉफी का स्वाद चखना था। सुश्री मेनन सहित, वरिष्ठ अधिकारियों ने निजी रूप से कॉफी को अनेक बार चखा जिससे यह सुनिश्चित हो कि वह विशिष्ट स्वाद स्थिर बना रहे। फीडबैक के आधार पर दो नमूनों को गुणवत्ता जांच के लिए स्विटज़रलैंड में स्टारबक्स फेसिलिटी के लिए एक-एक हफ्ते के अंतर पर भेजे गए।

नुल्लोर बागान ने इस ब्लॉक से आरंभ में 4,200 किलो पार्चमेंट कॉफी संसाधित की गयी और सिएटल (स्टारबक्स मुख्यालय) को 2,000 किलो भेजा गया। हर समय, टीमों ने हार्वेस्टिंग और प्रसंस्करण विवरणों का विस्तृ लॉग बनाया, जिसमें फील्ड के चयन से लेकर इसकी मिलिंग वाले स्थान, टाटा कॉफी के कुशलनगर वर्क्स तक भेजा जाना शामिल था। अत में कॉफी को भली भांति बंद सील बैगों में पैक किया गया और सिएटल की 13,000 किमी. की अंतिम यात्रा के लिए उनको भेजा गया। अतिरिक्त देखभाल व सावधानी को स्टारबक्स द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप रखा गया, जो मिट्टी की संरचना, जैविक जल मात्रा, उस ब्लॉक के भौगोलिक निर्देशांकों के विवरण चाहते थे जहां से माइक्रोलॉट मूल रूप से स्थित था साथ ही उनको इसकी विशिष्टता का कारण आदि भी चाहिए था।

टाटा कॉफी अब नुल्लोर कॉफी की प्रसन्नता के साथ जागृत होने के लिए गहन रूप से प्रतीक्षा कर रही है। माइक्रोलॉट, एकल मूल कॉफी तथा अन्य विशेषज्ञताओं वाली कॉफियों की बढ़ती मांग ने टाटा कॉफी के लिए प्रयोगात्मकता तथा जुनून के लिए नई दुनिया को खोल दिया है। यह कंपनी अपने दशकों के ज्ञान और टिकाऊ अभ्यासों की परंपरा के साथ इस मांग का लाभ लेने के लिए और अपने व्यवसाय के लिए एक अधिक मजबूत भविष्य का ब्रू लेने के लिए अच्छी तरह से तैयार है।

'एक स्वाद जिसे साझा करके हम सम्मानित महसूस कर रहे हैं'
टाटा नुल्लोर इस्टेट कॉफी का वर्णन स्टारबक्स ने कुछ इस तरह से किया: “हमारी आज तक की पहली भारत की स्टारबक्स रिज़र्व कॉफी सुदूर स्थित स्टोरीबुक सेटिंग से हाथों से चुना उत्पाद है। टाटा नुल्लोर बागान में स्थानीय कटहल और सिल्वर ओक गहन छाया व सीढीदार कैनोपी की हरीभरी दुनिया का निर्माण करते है, जो कि हाथियों और कस्तूरी बिलाव, उड़ती लोमड़ियों और चीखते हिरण, फ्रूट बैट और जंगली मुर्गियों का घर है। संतरों व लीचियों के बीच यहां पैदा होने वाली पुरस्कृत अरेबिका जैव-विविधता का एक उत्सव जैसा है, जो एक ऐसा कप होता है जो दुनिया के सबसे अधिक आकर्षक कॉफी क्षेत्रों में से एक की कहानी बताता है। हर चुस्की इस क्षेत्र के जीवों और वनस्पतियों जितनी जीवमत है, ये कॉफी संतुलन है, फलों की अम्लता के साथ दिलकश अंडरटोन व गोल आकार का — एक स्वाद जिसे साझा करके हम सम्मानित महसूस कर रहे हैं।.”

 

यह लेख टाटा रिव्यूके अक्टूबर-दिसंबर 2016 के संस्करण में पहली बार प्रकाशित हुआ था। ईबुक यहां पर पढ़ें