जून 2016 | प्रियंका सूद

याद रखने योग्य ब्रू

टाटा ग्लोबल बेवरेजेस का ब्रांडेड इंस्टेंट कॉफी सेगमेंट में प्रवेश घरों में प्रीमियम कैफे अनुभव लाने के लिए तैयार है

भारत में इंस्टेंट कॉफी का नाम लेते ही आपके दिमाग में कुछ स्थापित ब्रांड उभर आते हैं। लेकिन टाटा कॉफी ग्रांड नाम के अपने नए प्रीमियम उत्पाद के साथ टाटा ग्लोबल बेवरेजेस की योजना इस बाजार में उथल-पुथल करने की है। यह उत्पाद उन कॉफी पीने वाले लोगों की बढ़ती नस्ल की मांग को पूरा करता है जो अपने दैनिक जीवन में कैफे संस्कृति वाले कॉफी अनुभव की इच्छा रखते हैं।

टीजीबी भारत के क्षेत्रीय अध्यक्ष सुशांत दाश के अनुसार, पूरे भारत में कॉफी कैफे की जबरदस्त वृद्धि इस बात का संकेत है कि इंस्टेंट कॉफी श्रेणी में प्रीमियम उत्पाद को जारी करने का यह सही संकेत है। ग्रैंड के साथ टीजीबी ने घरों में प्रीमियम कॉफी खपत हासिल करने के लिए मुहिम की शुरुआत कर दी है।

“टाटा ग्रैंड के Tata Grand’s tag of being ‘सीधे प्लांटेशन से’ आने का टैग एक ऐसी संकल्पना है जो विशिष्ट है तथा भारत में कॉफी सेगमेंट के लिए महत्वपूर्ण है। इससे हम अपने ग्राहकों को ताज़गी और गुणवत्ता के एक ऐसे मिश्रण का प्रस्ताव कर रहे हैं, जिसे हमारे प्रतिस्पर्धी प्रस्तावित नहीं कर सकते हैं,” श्री दाश ने कहा।

इसके प्लांटेशन-फ्रेश टैग के अलावा ‘वर्ग में सर्वश्रेष्ठ’ स्वाद अनुभव के लिए टाटा कॉफी ग्रैंड कॉफी पाउडर और फ्रीज़्ड-ड्राइड कॉफी या 'मिश्रित क्रिस्टलों' के नाम वाले जाने वाले क्रिस्टलों का विशिष्ट ब्लेंड का प्रस्ताव करती है।

बाज़ार में उतरना
टीजीबी, पारंपरिक कॉफी से इंस्टेंट संस्करण में खपत के परिवर्तन के एक अन्य रुझान को देख रही है। यहां तक कि स्टील फिल्टर के माध्यम से भुनी व पिसी कॉफी के धीमे टपकाव वाली कॉफी को ‘असली’ मानने वाले दक्षिण भारतीय बाज़ारों में भी इंस्टेंट कॉफी नई जमीन तैयार कर रही है। “यह परिवर्तन यकीनी तौर पर सुविधा और आधुनिकता से पनप रहा है,” श्री डैश बताते हैं।

वह बाज़ार जिसे टीजीबी संबोधित कर रही है, वह लगभग रु.25 बिलियन के पैकेट बंद कॉफी बाजार में से रु.13 बिलियन का बाज़ार है। लगभग 4-5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ एक नव प्रवेशी के पास खुद को स्थापित करने के लिए पर्याप्त स्थान है। 

हालांकि टीजीबी वर्षों से चाय के सेगमेंट की लीडर रही है, इसका कॉफी पोर्टफोलियो भी बाज़ार का मजबूत प्रतिस्पर्धी है। टाटा कॉफी के पास दक्षिण भारत में प्लांटेशंस हैं जो अरबिया तथा रोबस्टा बीन्स के ब्लेंड का उत्पादन करते हैं। इनमें से कुछ ब्लेंड टाटा स्टारबक्स कैफे में उपयोग किए जाते हैं और कुछ एट ओ क्लॉक व रूस में ग्रैंड (भारतीय बाज़ार में बेचे जाने वाले नए ग्रैंड से भिन्न) जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों को निर्यात किए जाते हैं। “भारत में हम 2008 में मात्रा तथा मूल्य के मामले में चाय में बाज़ार लीडर बन गए थे। हम अपनी इस विशेषज्ञता का लाभ लेना चाहते हैं तथा गति हासिल करने के लिए अपनी दूसरी श्रेणियों में इसे लागू करना चाहते हैं,” श्री दाश समझाते हैं।

टीजीबी ने आसान रास्ता पकड़ कर, एट ओ क्लॉक कॉफी तथा ग्रैंड जैसे वैश्विक ब्रांड को जारी कर दिया होता, क्योंकि ये अपने देशों में पहले से ही स्थापित ब्रांड हैं।“ स्थानीय उत्पाद को जारी करने के पीछे का विचार बहुत सरल था। हम टाटा के ब्रांड नाम का लाभ लेना चाहते थे,” श्री दाश स्वीकार करते हैं।

जो यह साबित करता है कि क्यों नई कॉफी का मार्केटिंग मिक्स भिन्न और विस्फोटक है। “ग्रैंड के स्वाद के माध्यम से प्रस्तावित विशिष्ट अनुभव के साथ-साथ, हमारे ब्रांड की पैकेजिंग सभी श्रेणी संहिताओं को तोड़ती है,” श्री दाश कहते हैं। भूरे, हरे और लाल के स्थान पर इस पैकेजिंग की छवि जूट के थैले जैसी है जो स्पष्ट रूप से यह बताती है कि यह उत्पाद खेतों या प्लांटेशनों से ताज़ा-ताज़ा सीधे आ रहा है।

दादी माँ का रैप
प्रयोगात्मकता को विज्ञापन अभियान तक ले जाया गया है। युवा लोगों को दिखाने के स्थान पर, इस विज्ञापन के केन्द्र में एक दक्षिण भारतीय दादी माँ को हिप-हॉप पोशाक में दिखाया गया है जो सही कॉफी बनाने के लिए जो करना होता है, उसे टेक उपभोक्ताओं को रैप गाने से सिखाती है। “हमारी दादी एक प्रोटागोनिस्ट है जो पारंपरिक होने के अलावा सब कुछ है। उसके पास बहुमूल्य सामान है। उसके पास हर चीज़ पर एक राय है और वो शरारती बच्चों जैसी है,” श्री दाश कहते हैं।

उनके और उनकी टीम के पास इस चरित्र को विकसित करने की योजना है जो इसे अगले स्तर पर जाएगी। अधिक जानकारी के लिए कंपनी के ट्विटर हैंडल को देखिए। “हमारी दादी ट्विटर पर बहुत सक्रिय है। वो हर चीज पर रैप दृष्टिकोण रखती है; वह चाहे ऑस्कर हो या फिर बजट,” श्री दाश कहते हैं। इस ब्रांड ने एक वर्चुअल रिएलटी फिल्म भी जारी की है जो टाटा कॉफी प्लांटेशन का 360 डिग्री टूर प्रस्तावित करती है। 

“हम उन लोगों को लक्ष्य कर रहे हैं जो दिल से युवा हैं और खाद्य और पेय उद्योग उद्योग में होने वाली नई घटनाओं के बारे में हमेशा जिज्ञासु होते हैं,” श्री दाश कहते हैं। जबकि यह लक्ष्य समूह कुछ प्रीमियम व भिन्न चाहता है, उनके लिए अपने पारंपरिक उपभोग वाली चीज से जुदा होना तब तक आसान नहीं होगा जब तक कि उसको प्रस्तावित की जाने वाली चीज़ बेहतर न हो।

टाटा कॉफी ग्रैंड के रिटेल में उतरने से पहले, अमेज़न पर बेचने का एक मजेदार प्रयोग किया गया था। परिणाम: यह उत्पाद बेस्ट सेलर की सूची में दर्ज हुआ और उपभोक्ता प्रतिक्रिया ने टीम को काफी आत्मविश्वास दिया।

उत्पाद को कहां पर लॉच किया जाए यह निर्णय उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना कि उसको लॉन्च किए जाने का समय। कॉफी के लिए दक्षिण भारत एक परिपक्व बाज़ार है और कंपनी को अपनी 80-90 प्रतिशत बिक्री की आशा वहीं से है। “यदि हम यहां सफल रहे तो हमारे लिए यह एक अच्छा संकेत होगा कि हम कहीं भी सफल रहेंगे,” श्री दाश कहते हैं।

अगली चाल
समय के साथ, टीजीबी की योजना एक पूर्ण कॉफी पोर्टफोलियो के विकास की है। “इंस्टेंट कॉफी हमारा पहला उत्पाद है। हम अपने दूसरे प्रस्तावों का भी मूल्यांकन करेंगे,” श्री दाश कहते हैं। अभी ग्रैंड को बढ़ावा देने के लिए कंपनी की योजना, सैंपलिंग करने व प्रयोगात्मक मार्केटिंग के संदर्भ में जमीनी स्तर की गतिविधियों की एक श्रंखला को शुरु करने की है।

पारंपरिक बाज़ार में बढ़ना, स्थापित प्रतिस्पर्धियों से लड़ना, नए प्रस्तावों से वफादार ग्राहकों को जीतता तथा अन्य चुनौतियां टीजीबी के सामने खड़ी हैं। लेकिन चूंकि हम अपनी रैपिंग दादी जितने आत्मविश्वासी हैं, हमारे विजेता होने की संभावनाएं हमारे पक्ष में ही हैं।