अगस्त 2016

नवप्रवर्तन पर ध्यान

टाटा केमिकल्स अपने विभिन्न व्यवसायों तथा नवाचार के द्वारा नए क्षेत्रों में पैठ बनाकर मेक इन इंडिया कार्यक्रम के साथ सक्रियतापूर्वक जुड़े हैं।

मेक इन इंडिया रसायन उद्योग में लोकप्रिय हो रहा है क्योंकि भारत सरकार कंपनियों को शोध तथा विकास केंद्रों की स्थापना तथा भारत में नए व्यवसाय स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

टाटा केमिकल्स का गुजरात स्थित मीठापुर केमिकल कॉम्प्लेक्स में देश के कुल सोडा एश उत्पादन की 34 प्रतिशत क्षमता मौजूद है

“रसायन उद्योग के लिए, एक प्रमुख प्रयास देश के पेट्रोलियम, केमिकल और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्रों का विकास करना है, और ऐसा एक सबसे सक्रिय क्षेत्र गुजरात का दाहेज है”, कहते हैं आर मुकुंदन, जो टाटा केमिकल्स (टीसीएल) के प्रबंध निदेशक हैं, जो अपनी सहायक कंपनी रैलीज के रूप में दाहेज में मौजूद है।

टीसीएल के लिए नवाचार बेहद महत्वपूर्ण है- जिसका नवाचार केंद्र पुणे में है- क्योंकि यह अपने व्यवसाय परिदृश्य में विस्तार के लिए जैवप्रौद्योगिकी, नैनोप्रौद्योगिकी तथा प्राकृतिक विज्ञानों पर बल देता है। श्री मुकुंदन के अनुसार, यह नवाचार केंद्र कंपनी के वर्तमान व्यवसाय को सहायता पहुंचाने के साथ ही, ऐसे नवाचारी समाधानों पर भी काम करता है, जो टीसीएल के ग्राहकों के लिए फायदेमंद हों।

कृषि, उद्योग तथा भारतीयों के दैनिक जीवन के लिए भी चुनौतियों का समाधान करनेवाले नवाचारी समाधान उपलब्ध कराकर, टाटा केमिकल्स ने प्राकृतिक तथा रासायनिक समाधान के क्षेत्र में एक मजबूत स्थिति बना ली है”, कहते हैं श्री मुकुंदन। “यही वजह है कि हम मेक इन इंडिया के साथ सक्रियतापूर्वक जुड़ गए हैं।”

टीसीएल का अपना मेक इन इंडिया प्रकरण 75 वर्षों से भी ज्यादा पूर्व से प्रारंभ होता है। इसके गुजरात स्थित मीठापुर केमिकल कॉम्प्लेक्स में देश के कुल सोडा एश उत्पादन की 34 प्रतिशत क्षमता है, जो इसे दुनिया के अग्रणी एकीकृत अकार्बनिक रसायन कारखानों की श्रेणी में स्थापित करता है। मीठापुर प्रकरण की सफलता जारी रहेगी, क्योंकि कंपनी इस स्थल पर विभिन्न संवृद्धि विकल्प आजमा रही है।

बबराला, उत्तरप्रदेश में टीसीएल भारत का एक सर्वाधिक ऊर्जा-क्षम उर्वरक संयंत्र चला रही है, जो इसे इस मोर्चे पर वैश्विक रूप से श्रेष्ठ 10 प्रतिशत पर रखता है। “हम इस संयंत्र में और भी नवाचारों के जरिए ऊर्जा-सक्षमता बढ़ाने की कोशिशें कर रहे हैं”, श्री मुकुंदन कहते हैं। टीसीएल का सबसे हालिया निवेश चेन्नई के निकट एक अत्याधुनिक न्यूट्रास्यूटिकल संयंत्र में किया गया है।

रसायन क्षेत्र को गति देने के लिए, कंपनी पुणे स्थित राष्ट्रीय रसायन प्रयोगशाला तथा भावनगर स्थित नमक तथा समुद्री अनुसंधान संस्थान के साथ मिलकर काम कर रही है। अतिरिक्त रूप से, इसे विभिन्न भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) तथा रसायन प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई का सहयोग प्राप्त है। अलीगढ़ स्थित कंपनी के सेंटर फॉर एग्री-सॉल्यूशन एंड टेक्नोलॉजी से इसे कृषि समाधानों तथा फसल पोषण व्यवहारों पर सलाह मिलती है।

“टाटा केमिकल्स रसायन, कृषि व्यवसाय, तथा उपभोक्ता क्षेत्र में नवीनतम नवाचार विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है”, श्री मुकुंदन कहते हैं। कंपनी के विविधीकृत उत्पादों में एक बड़ी संख्या में विनिर्माण तथा उत्पाद नवाचार मौजूद हैं, जैसे पहला ब्रांडेड आयोडाइज्ड नमक टाटा साल्ट; के अलावा टाटा स्वच्छ, जो निम्न-लागत का नैनोप्रौद्योगिकी युक्त वाटर-प्यूरीफायर है; खास उद्देश्यों से निर्मित उर्वरक; हमारा ‘ज्यादा दाल उगाएं’ कार्यक्रम तथा अन्य अनेक।

“अपने उत्पाद तथा समाधानों के जरिये, हमने लाखों भारतीयों की जिंदगी को प्रभावित किया है”, श्री मुकुंदन यह तथ्य रखते हैं।

मीठापुर से विश्व तक
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सोडा ऐश कंपनी, जिसकी विनिर्माण इकाइयां चार देशों में फैली हैं, टाटा केमिकल्स (टीसीएल) मेक इन इंडिया की अवधारणा को साकार कर रही है।

कंपनी ने समुद्री रसायनों का दोहन करते हुए, 1939 में गुजरात के मीठापुर में अपना परिचालन प्रारंभ किया था। आज, टीसीएल उन व्यवसायों पर केंद्रित एक वैश्विक कंपनी है, जो लाइफ पर बल देते हैं: लिविंग, इंडस्ट्री एंड फार्म एसेंशियल्स।

टीसीएल ने अपने उपभोक्ता उत्पादों के जरिए अपने क्षेत्र का विस्तार किया है। ब्रांडेड और आयोडाइज्ड नमक के क्षेत्र में यह सर्वप्रथम तथा अग्रणी प्रस्तुतकर्ता रहा है, इसके अलावा एक नवीन, कम खर्च पर नैनोप्रौद्योगिकी युक्त वाटर प्यूरीफायर उपलब्ध कराकर, यह जनता को सस्ता और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध करा रहा है।

कंपनी की औद्योगिक उत्पाद श्रेणी में कुछ महत्वपूर्ण वस्तुएं सम्मिलित हैं जिनमें दुनिया के सबसे बड़े कांच, डिटरजेंट तथा अन्य औद्योगिक उत्पाद हैं।

तथा कृषि उत्पाद क्षेत्र में, यह फॉस्फेटिक उर्वरकों का अग्रणी विनिर्माता होने के अलावा, अपनी सहयोगी कंपनी रैलीज के माध्यम से, फसल-सुरक्षा व्यवसाय में भी एक मजबूत स्थिति में है।

यह आलेख टाटा कंपनियों में ‘मेक इन इंडिया’ की धारणा के उद्भव और भविष्य पर एक विशेष प्रतिवेदन का अंश है, जो टाटा रीव्यू के अप्रैल 2016 अंक में प्रकाशित है:
अवलोकन: बदलता भारत
प्रगति पथ पर भारत
टाटा मोटर्स: पथ का नायक
टाइटन कंपनी: इस क्षेत्र पर नजर डालने का समय
टाटा एलेक्सी: डिजाइन नियम
TAL मैन्युफैक्चरिंग सॉल्यूशंस: स्रोत कोड
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स: विश्वमंच संकेत