जनवरी 2017 | प्रियंका होसंगादी

'ताजनेस' संस्कृति

ताज समूह की फ्लैगशिप संपत्ति ताज महल पैलेस, मुंबई, अनुग्रह और विलासिता की एक अनूठी परंपरा का उदाहरण है जिसने मेहमानों की पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया है, तलजिंदर सिंह, महाप्रबंधक, ताज महल पैलेस, और क्षेत्र निदेशक, मुंबई, इस प्रतिष्ठित आतिथ्य श्रंखला के लिए कहते हैं।

ताज महल पैलेस एक प्रतिष्ठित संपत्ति है जो अपनी विरासत व लक्ज़री के लिए जानी जाती है। इसकी प्रबंधन शैली के बारे में विशिष्ट क्या है?
ताजमहल पैलेस एक 113 वर्ष पुराना संस्थान है जिसका अपना इतिहास व वास्तु मूल्य है। एक जीवित स्मारक के रूप में, इसे इस तरह से प्रबंधित करने की जरूरत होती है कि उसमें सभी तीन पहलू के ज्ञान शामिल हों। इसमें वह ज्ञान भी शामिल है जो होटल व्यावसायी होने व जुनून के स्तर से हासिल होता है। जैसा कि मैं अपने सहकर्मियों को अक्सर कहता हूँ कि ताज महल पैलेस कई मायनों में एक जीवंत चीज है और इसके साथ उसी तरह से व्यवहार किया जाना चाहिए, जिसमें खूबसारी देखभाल, जुनून व संवेदनशीलता शामिल है।

शामियाना फिर से नवीकृत हो कर 16 बरसों के बाद और ताज आर्ट गैलरी को 25 बरसों के बाद फिर से खोला गया है। इन प्रतिष्ठित स्थानों को पुनर्जीवित करने का क्या कारण है?
ताज महल पैलेस में आतिथ्य और देखभाल की परंपरा, दूसरे होटलों से भिन्न है। हमे इस तथ्य पर गर्व है कि बहुत सारे परिवारों की तीसरी व चौती पीढ़ी के आगंतुक भी इसका अनुभव ले रहे हैं। उदाहरण के लिए मुझे जर्मनी के वैगनर परिवार के एक सदस्य का पत्र मिला जो कुछ माह पहले हमारे साथ मेहमान के रूप में रहे थे। उन महाशय ने कहा कि उन्होने 1913 में उनकी परदादी को उनके पिता का एक हस्तलिखित पोस्टकार्ड मिला है। वे उस समय दुनिया घूमने निकली थीं और उन्होने लिखा है कि व ताज महल होटल में रुकी थीं जो कि आतिथ्य का महान संस्थान है। उन्होने इस बात का जिक्र किया है कि उनकी कितनी अच्छी सेवा व देखभाल की गयी थी और संभवतः उनके टूर में यह उनका सबसे अच्छा अनुभव था। उन मेहमान का कहना था कि वे एक शताब्दी बाद भी उसे पा कर खुश थे, जिस तरह से आतिथ्य, देखभाल व संस्कृति को संभाला गया है, वैसे ही शब्द आज भी उपयुक्त थे।

ताज महल पैलेस का आतिथ्य इसके देखभाल व जुनून के सर्वथा अनुरूप है

हम संवेदनशीलता, देखभाल और ईमानदारी की संस्कृति का संरक्षण कर रहे हैं जिसका योग वह है जिसे हम आज ‘ताजनेस’ कहते हैं। ‘ताजनेस’ की नींव टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा द्वारा तब रखी गयी थी जब 1903 में इसका उद्घाटन हुआ था। और उसी नींव पर आज हम निर्माण करने का प्रयास कर रहे हैं। इसीलिए कुछ परंपराएं चलती रहनी चाहिए और भविष्य की पीढ़ियों को सौंपी जानी चाहिए। और इसे उस रुझान को झुठलाना चाहिए कि आतिथ्य बाजार में होटल के भीतर के रेस्टोरेंट या स्थान 10-15 बरसों बाद मर जाते हैं।

शामियाना के साथ एक भाव जुड़ा है। यह 1973 में खुला था, तो हम अब इसमें तीसरी पीढ़ी का स्वागत कर रहे हैं। उनमें से कुछ गर्व के साथ कहानियां सुनाते हैं कि कैसे उनके दादा ने यहां पर आनंद लिया और उन्होने इसके बारे में बताया था। यही हाल ताज आर्ट गैलरी का है। लक्ष्मण श्रेष्ठ, भारत के सबसे अग्रणी कलाकारों में से एक ने इस गैलरी में अपनी पहली प्रदर्शनी लगाई थी।

ब्रिटिश राजसी परिवार, ऐप्पल सीईओ टिम कुक, मोरक्को के राजा और अबूधाबी के राजा — ताज महल पैलेस ने पिछले वर्ष अपने हिस्से की राजसी व वीआईपी मेहमानों का भरपूर स्वागत किया है। ऐसे मेहमानों का स्वागत करने के लिए यह होटल क्या भिन्न करता है?
प्रत्येक यात्रा चुनौतियों का एक विशिष्ट समूह होती है क्योंकि मेहमानों की जरूरतें भिन्न-भिन्न होती हैं। एक राजा और उनके दल को भोजन परोसना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि दल के सदस्य वही खाना मांगते हैं जिसे राजा ने पेश करने को कहा है। उदाहरण के लिए, 25-30 मिनट में 90 पिज्जा बनाना व पेश करना बहुत चुनौतीपूर्ण था। राजा केवल इवियान पीना व उसमें नहाना चाहते थे, जिसे वे अपने साथ लाए थे, इसलिए हमें उनके सूट के ऊपर एक वॉटर टैंक लगाना पड़ा।

दूसरी ओर आपके सामने ग्लोबल सीईओ टीम कुक हैं जो विनम्र व्यक्ति हैं जिनकी जरूरतें हल्का खाना और सहज वातावरण थी। सांस्कृतिक रूप से और हमारे प्रशिक्षण के कारण, यह अपने आप में चुनौतीपूर्ण है क्योंकि हम ऐसा कुछ करने के अभ्यस्त नहीं है।

कैम्ब्रिज के ड्यूक व डचेस, प्रिंस विलियम्स व कैथरीन

स्पेक्ट्रम के दोनो सिरों को सेवा देना अक्सर कठिन हो जाता है। आपको हमेशा संतुलन का प्रयास करते रहना होता है और उनकी अपेक्षाओं को पूरा करना होता है। यह समझना चुनौतीपूर्ण होता है कि मेहमान को किस तरह की सेवा व ध्यान की जरूरत है, विशेष रूप से यदि वह बताया न गया हो। अनुभूति व डिलेवरी के साथ आपकी सटीकता ही आपको बेहतर होटेलियर बनाती है।

इस सेगमेंट के लिए आप ताज महल पैलेस की मार्केटिंग किस तरह से करते हैं?
वैश्विक रूप से हमें अपने विनीत, विश्वस्तरीय और सर्वोत्कृष्ट भारतीय आतिथ्य के लिए जाना जाता है। हमें हर चीज में अग्रणी होना होता है — प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक संवेदनशीलता। यदि हमें आगे बने रहना है तो इन सभी घटकों को हमारे मुख्य घटक ‘ताजनेस’ के साथ रखना होता है।

दुनिया को ‘ताजनेस’ के बारे में बताने के लिए डिजिटल नवाचार महत्वपूर्ण है। चुनौती यह है कि किस तरह से हमारी अमूर्त अनुभूति जैसे आत्मा, ऊष्मता व विनयशीलता डिजिटल रूप से प्रेषित होते हैं। मुझे लगता है कि हमने इनको प्रतिष्ठित ताज होटल्स की अनेक आभासी वास्तविकता वाली फिल्मों के माध्यम से बेहतरीन तरीके से पेश किया है। फिर भी, हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डिजिटाइजेशन के प्रयास में हमारा ‘ताजनेस’ का पहलू खो न जाए।

ताज सांताक्रूज़ एक नई संपत्ति है और मुंबई एयरपोर्ट से बेहद नजदीक है। क्या आप इस होटेल के विकास में पेश आयी झलकियों और चुनौतियों को साझा कर सकते हैं?
ताज सांताक्रूज़ एक आम ‘एयरपोर्ट होटल’ नहीं है। इसे एक लक्ज़री होटल की तरह डिजाइन किया गया है, जो रनवे के ऐप्रन के बगल में स्थित है। इस होटेल को डिजाइन करते व इसकी योजना के कार्यान्वयन से पहले केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन तथा नागर विमानन महानिदेशालय से इनपुट हासिल किए गए थे। मैं अपने अनेक मेहमानों से मजाक में कहता हूँ कि यह देश का संभवतः सबसे सुरक्षित होटल है क्योंकि इसकी सुरक्षा का प्रबंधन सीआईएसएफ करती है। इस संपत्ति में ध्वनिरोधी ग्लास लगे हैं। जहाजों को आते व जाते देखते हुए आप रनवे से लगभग 300 मीटर दूर बैठे होंगे, लेकिन आपको कुछ सुनाई न देगा।

ताज में ऐप्पल सीईओ टिम कुक

निजी रूप से ताज समूह मे आपका सफर कैसा रहा है?
ताज समूह में मैने बेहतरीन 26 बरस बिताएं हैं। यह संगठन अनेक विशिष्ट अवसर प्रदान करता है जो हमें अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए और नौकरी के लिए जरूरी समर्पण से अधिक देने के लिए प्रेरित करता है। एक और पहलू है जिसका ताज समूह के साथ विशेष संबंध है। जब आप बाहर के लोगों के यह बताते हैं तो आपको जुड़ाव और गर्व का अनुभव होता है। वे फौरन आपको बहुत सम्मान के साथ देखते हैं क्योंकि उनको पता है टाटा समूह किन मूल्यों पर खड़ा है। यह उन प्रमुख तत्वों में से एक है जो इस महान संगठन का हिस्सा बने रहने के लिए मुझे प्रेरित करता है।

क्या आप अपने कुछ पसंदीदा यादों को साझा करन चाहेंगे?
एक यादगार अनुभव तब हुआ था जब मुझे श्री जेआरडी टाटा से बात करने का अवसर मिला था। मैं तब दिल्ली के ताज महल होटल का लॉबी मैनेजर था और जब वे आए थे तो मुझे उनको उनके सूट तक ले जाने का अवसर मिला था। एक दिन, मैं एक दूसरे मेहमान के साथ था जब श्री टाटा होटल आए। एक सहकर्मी उनके साथ गए लेकिन उन्होने पूछा कि मैं उनसे मिलने के लिए क्यों उपलब्ध नहीं हूँ। मेरे सहकर्मियों ने मुझे बताया तो मैं फौरन नीचे गया। उन्होने मेरा हाथ पकड़ा और मुख्य पोर्च की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए उनके सूट तक गए। मैं आज भी इसको लेकर बहुत भावुक हो जाता हूँ क्योंकि यह ऐसा पल था जिसे मैं पूरे जीवन नहीं भूलूंगा।

यह लेख टाटा रिव्यूके अक्टूबर-दिसंबर 2016 के संस्करण में पहली बार प्रकाशित हुआ था। ईबुक यहां पर पढ़ें