दिसम्बर 2016 | फिलिप चाको

श्रेष्ठ बनने के लिए व्यवस्थित बनिए

रैलिस इंडिया की व्यावसायिक उत्कृष्टता के सफर में प्रक्रिया ही उसका पथप्रदर्शक और रक्षक है, जिसने कंपनी को फर्श से अर्श तक उठने में सहायता की है

Being caught by a haymaker can have an upside. समय को पीछे घुमाकर 2003-04 की ओर चलें तो देखते हैं कि रैलिस इंडिया एक क्षैतिज हैवीवेट था। भारतीय कृषि क्षेत्र में एक बहुश्रुत कॉरपोरेट नाम को 1.07 बिलियन के घाटे ने धूमिल कर दिया, जो कि इसके लंबे इतिहास की सबसे बुरी घटना थी और इसके परिणामस्वरूप प्रासंगिकता और दिशा के बारे में संदेह का माहौल बना। अब समय है कि चटाई से उतरा जाए और पींगें भरी जाए। यही काम रैलिस ने किया और मार्गदर्शन देने के लिए मौजूद था टाटा बिजनस एक्सीलेंस मॉडल (टीबीईएम)।

रैलिस के उत्पादों के लिए एक मार्केटिंग अभियान

घाटे में हमें अपने व्यवसाय के बारे में और इस बारे में कि हमें एंटरप्राइज कैसे चलाना चाहिए आत्मावलोकन करने को बाध्य किया,’रैलिस के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एक्जीक्यूटिव वीरमणि शंकर कहते हैं। ‘हमने उन चीज्जों पर ध्यान केंद्रित किया जिनमें हम उत्कृष्ट थे, और चीज थी ‘एग्रोकेमिकल्स’, और इस व्यवसाय को हम कैसे करें इस बारे में बदलाव लाना, खासतौर पर उनसे जुड़ी प्रक्रियाओं पर।’ स्वाभाविक रूप से अब ऐसा लगता है कि बिजनस एक्सीलेंस (व्यवसाय उत्कृष्टता) कंपनी की पुनरुत्थान रणनीति का मूलाधार बन गई है।

रैलिस ने संगठन को फंक्शन और टीम के संधि-योजन से नियुक्ति और कार्यपालन से लेकर संरेखन और एकीकरण की प्रक्रिया में जांची-परखी विधि का अनुसरण किया। यह सब कुछ पूरा करने के बाद जाकर हमारी व्यवसाय उत्कृष्टता (बिजनस एक्सीलेंस) की यात्रा की वास्तविक शुरुआत हो सकी’, श्री शंकर कहते हैं। ‘उसके बाद से हम अपनी प्रक्रियाओं का मूल्यांकन करते हैं और परिणामों में सुधार के लिए उसमें संशोधन करते हैं।’

तुरंत बाद के समय में, 2003 के बाद, पुनर्निर्माण के पथ पर चलना रैलिस के लिए बेहद मशक्कत भरा काम था। कर्मचारियों की नैतिकता कुंठित थी, राह अंधेरे में डूबा था और कुलमिलाकर व्यवसाय के लिए सबकुछ घोर अनिश्चितता की चादर में ढंका था। ‘हमने खुद से सामन की जा रही कई सारी समस्याओं को सुलझाया, सबसे पहले, हमने अपने भविष्य के लिए एक सुस्पष्ट रणनीति तैयार की,’ श्री शंकर समझाते हुए कहते हैं। ‘फिर हमने इस रणनीति को अपने लोगों को पहुंचाया, अपनी टीम को इसके इर्द-गिर्द एकजुट किया और अपने उद्देश्य की दिशा में पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़े।’

जल्द ही ये इन प्रयासों ने परिणाम देने शुरू कर दिए। सावधानी और समेकन के बल पर रैलिस ने अपनी नकारात्मक स्थिति को पलट कर 2005 तक एक सफल कंपनी के रूप में खुद को स्थापित कर लिया। एक साल बाद कंपनी ने अपनी उपलब्धि से परे देखने का आत्मविश्वास अर्जित किया। ‘हमने प्रगति करने का अधिकार पाया,’ श्री शंकर कहते हैं।

जानिए कि कैसे बिजनस एक्सीलेंस की ताकत के प्रगति की और रैलिस के लिए यह जीवन शैली की तरह हो गया

2007 से आज तक का दौर रैलिस के लिए निर्माण और पुनर्निर्माण का रहा है। अनेक प्रणालियों, प्रयासों और कार्यक्रमों के जरिए संगठन के हर अंग में सुधार लाया गया। ‘रैलिस प्वाइज्ड’ यहां केंन्द्रीभूत तत्व रहा; एक ऐसी रणनीति जो कंपनी की महत्वाकांक्षा को सशक्त करता है।

टीबीईएम की प्रक्रियाविधि के साथ इसे मापने और संशोधित करने वाले बिजनस एक्सीलेंस ने प्रॉसेस ओरिएंटेशन को ताकत दी, जिसे हम आज रैलिस के ईकोसिस्टम में बहुत ही सामान्य रूप से लेते हैं। प्रॉसेस और प्रोग्राम में से क्या अच्छा रहेगा इसके लिए हम किसी एक के साथ खड़े नहीं हो सकते। ‘बिजनस एक्सीलेंस में सतत सुधार की बात होती है,’ श्री शंकर बताते हैं। ‘यह कभी भी एक स्थिर अवस्था नहीं होती, यहां कोई अंत बिंदु नहीं होता। जब बिजनस एक्सीलेंस हमारी कार्यशैली बन जाती है तभी वास्तविक तरक्की होती है।’ 

रैलिस ने उड़ान भरने के लिए अंगड़ाई ले ली है। फसल सुरक्षा, संविद विनिर्माण, बीज, पौध पोषण और अनुषंगी कृषि सेवाओं (कंपनी दुनिया के विभिन्न भागों में अपने उत्पाद निर्यात भी करती है) के क्षेत्र में कंपनी अब 1 करोड़ से अधिक किसानों के ग्राहक आधार के साथ जुड़ चुकी है। इसके पास 2500 डीलर और 60,000 रिटेलर का व्यापक नेटवर्क है जिसके अंतर्गत भारत के 80 प्रतिशत हिस्से में फैला है और इसकी एग्रोकेमिकल (कृषि रासायनिक) क्षमता देश में सबसे बड़ी है। महत्वपूर्ण यह है कि रैलिस के लिए 2003-04 की डुबकी के बाद से लाभशीलता कभी एक समस्या नहीं रही।

टीबीईएम मूल्यांकन में रैलिस ने जो स्कोर बनाए हैं उससे सर्वोत्तम प्रगति की बात जाहिर होती है। 2005 में, कंपनी ने टीबीईएम का ‘सीरियस एडॉप्शन अवार्ड’ हासिल किया। 2011 में अपनी परिपक्वता और सुधार के प्रयासों के साथ रैलिस ने जेआरडी क्यूवी अवार्ड प्राप्त किया। यह अवार्ड ऐसी कंपनी के लिए एकदम उपयुक्त थी जो मॉडल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में कभी कमजोर न हुआ।

वर्तमान के लिए खुद को तैयार करने से रैलिस को भविष्य के लिए तैयार होने का अवसर मिला, फिर चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न सामने आए। ‘दीर्घ कालिकता अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता को लेकर है,’ श्री शंकर कहते हैं। ‘इन्हें और भी बेहतर तरीके से समझने के लिए हमें अपनी प्रक्रिया (प्रॉसेस) में और अधिक विस्तार करना है’।

श्री शंकर अपनी तुरही खुद बजाने वालों में से नहीं हैं, लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं कि रैलिए के नेतृत्व ने बिजनस एक्सीलेंस अपनाने में महती योगदान दिए हैं। ‘मुख्य कार्यपालक की भूमिका 100 से कम नहीं रही है, खास कर यात्रा की शुरुआत में। लेकिन ज्यों-ज्यों संगठन परिपक्व होता है और लोग एक्सीलेंस को जीवन शैली बनाते हैं, स्थितियां बदलने लगती हैं। आज ऐसा लगता है हर कोई बिजनस एक्सीलेंस अपना रहा है।’

ग्राहक की मांग पर ध्यान देना
रैलिस इंडिया से जुड़े लोगों में यह बलवती आकांक्षा है कि बिजनस एक्सीलेंस की दिशा में कंपनी को बेहतर बनाने के हर कार्यक्रम और प्रयास का वे हिस्सा बनें। जब बत ग्राहकों की आती है, जहां रैलिस ने सतत रूप से उच्च अंक हासिल किए हैं, तो यह रुझान पर्याप्त रूप से अनेक प्रयासों में दिखाई पड़ता है।

‘हमने गहन रूप से प्रक्रियाओं की रचना की है जिनके चारों ओर हमने अपनी ग्राहक पोर्टफोलियो तैयार किया है और समय के साथ यह हमारे लिए मददगार रहा है’, कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ वीरमणि शंकर कहते हैं। ‘हम शुरुआत उनकी मौजूदा और भावी जरूरतों को समझकर करते हैं। हमने किसान समुदाय में प्रभावकों की पहचान की और हम सुप्रशिक्षित टीम द्वारा परिचालित समूह परिचर्चाओं पर केंद्रित रहे।’

सलाह देने की बजाए टीम अधिक कठिन काम करती है, और वह काम है किसानों की बात सुनना। व्यवहार में यह बदलाव रणनीति और कार्यनीति के रूप में काम करता है, खासकर तब जब बात किसान समुदायों में से अधिक प्रगतिशील और प्रभावशाली समुदायों की आती है। रैलिस किसान कुंभ (आरकेके) एक किसान नेटवर्क है जिसके दस लाख से अधिक सदस्य हैं, और यह परिणाम कंपनी की मानसिकता से उपजी है।

2007 में स्थापित आरकेके एक मुख्य कार्यक्रम है जिसके जरिए कंपनी के उत्पाद, समाधान, सलाह इत्यादि भारत के किसानों को उपलब्ध कराया जाता है। संक्षेप में आरकेके का सिद्धांत इस रूप में समझा जा सकता है संपर्क, संबंध, संतुष्टि और समृद्धि। 

यह सामग्री टाटा समूह की कंपनियों में बिजनेस एक्सीलेंस की संस्कृति के बारे में टाटा रीव्यू के अक्टूबर-दिसंबर 2016 संस्करण की आवरण कथा का एक अंग है:
अवलोकन: लगातार सुधार
पांच टाटा कंपनियां बता रही हैं कि किस प्रकार बिजनेस एक्सीलेंस मूल्य निर्माण और व्यवसाय मॉडल को पुनर्गठित करने में सहायक रहा
टाटा बिजनेस एक्सीलेंस ग्रुप: एक अनोखा मॉडल तथा इसकी समग्र विधि
प्रसिद्ध टाटा बिजनेस एक्सीलेंस मॉडल (टीबीईएम) के संरक्षक के रूप में, टाटा बिजनेस एक्सीलेंस ग्रुप (टीबीईएक्सजी) टाटा कंपनियों को विभिन्न कार्य क्षेत्रों में वैश्विक मानक प्राप्त करने में सहायता प्रदान करते रहे हैं
टाटा स्टील: परिवर्तन का पथप्रदर्शन
टाटा स्टील में बिजनेस एक्सीलेंस प्रयासों से कंपनी को अनवरत रूप से एक ऐसे उद्योग के रूप में विकसित होने में सहायता मिली है जो विभिन्न मोर्चों पर परिवर्तनकारी प्रवृत्तियों द्वारा अग्रगामी हो रहा है
टाइटन कंपनी: लक्ष्य: हमेशा बेहतर की ओर
बिजनेस एक्सीलेंस ने टाइटन कंपनी को उभरने की शक्ति दी है, और इसका प्रमाण है एक बहुआयामी सफलता प्रकरण के रूप में इसका विकास
टाटा पावर डेल्ही डिस्ट्रिब्यूशन: गुणवत्ता के लिए ऊर्जा की बचत
टाटा पावर डेल्ही डिस्ट्रिब्यूशन ने अपने संगठनात्मक ढांचे का पुनर्गठन करने, चुनौतियों से निबटने और एक असाधारण उद्यम के रूप में निर्मित होने के लिए बिजनेस एक्सीलेंस पर भरोसा किया है।

स्टीली एंड स्टर्डी (फौलादी और मजबूत)
टाटा स्टील प्रॉसेसिंग एंड डिस्ट्रिब्यूशन में बदलाव की प्रक्रिया में बिजनेस एक्सीलेंस एक उत्प्रेरक रहा है, एक उद्यम जो हर बढ़ते कदम के साथ और भी परिपक्व होता गया है