अक्तूबर 2016

'ताजनेस का अभिप्राय इंद्रिय तत्वों व भावनाओं से है'

अपने अंतस के नजदीक जाना अच्छा लगता है। आतिथ्य की इस कला को पहचान देने वाले गुणों के समूह 'ताजनेस' के फलसफे को गले लगाने के साथ ताज समूह के नाम से विख्यात इंडियन होटल का यही मकसद है।

ताजनेस को भविष्य के लिए एक ब्रांड तथा परिचालन फलसफे के रूप में पहचाना गया है जो ताज के अतीत से सर्वश्रेष्ठ को लेकर इसके भविष्य के लिए पुनः परिभाषित करता है। ताजनेस को अपनी प्रेरणा जमशेदजी टाटा तथा ताज की भारतीय विरासत से मिलती है और यह इसे अपने दुनिया भर के होटलों में वहां की स्थानीय संस्कृति के साथ मिश्रित करेगा। सारांश यह है कि ताजनेस अनुभवों का वह जोड़ है जो अपनी प्रेरणा भारतीय परंपरा व विरासत से हासिल करता है।

ताज समूह में इस बदलाव के कर्णधार तथा केन्द्र बिंदु कंपनी के मुख्य कार्यकारी तथा प्रबंध निदेशक, राकेश सरना हैं, जो tata.com से इस विषय पर बात करेंगे कि अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे इस उद्योग में खुद को पुनःपरिभाषित करने के लिए क्या करना पड़ता है। कुछ अंश:

ताजनेस का विचार किस तरह से विकसित हुआ?
लगभग 21 माह पहले हमने थोड़ा रुक कर खुद से कुछ सरल सवाल पूछे: हम कौन हैं, हम कहां हैं और हम कहां पहुंचना चाहते हैं? इतनी समृद्ध परंपरा तथा श्रंखला व दशकों के इतिहास वाले एक होटल समूह होने के बावजूद हमें खुद से ये सवाल पूछने पड़े विशेष रूप से तब जबकि भारतीय बाजार में अनके महत्वपूर्ण वैश्विक प्रतिस्पर्धी प्रवेश कर रहे हैं।

उच्च स्तर के होटल आज ‘समानता’ के समुद्र में हैं; कोई ऐसी विशिष्ट डिजाइन या सेवा पहलू नहीं है जो इन सब को एक दूसरे से अलग करता हो। बस यहीं पर ताजनेस आया। ताजनेस वह फलसफा है जो भारत की परंपरा व विरासत से प्रेरणा हासिल करके हमारे मेहमानों व सभी हितधारकों को एक विशिष्ट अनुभव प्रदान करता है। ताज के साथ हमेशा से कुलीनता का एक भाव जुड़ा रहा है। जमशेदजी टाटा के समय से इसकी समृद्ध विरासत व धरोहर है। यह वो भारतीय विरासत, धरोहर तथा कुलीनता है जो पूरे ताजनेस फलसफे के माध्यम से प्रस्तुत होगा।

ताजनेस वास्तव में क्या है?
ताजनेस अनुभवों का मिश्रण है और यह सिर्फ हमारे मेहमानों या मालिकों के लिए नहीं है। हमारा ब्रांड वादा — हम ईमानदारी से आपकी देखभाल करते हैं — वह आश्वासन है जो हम अपने मेहमानों, सहयोगियों व वेंडरों, हमारे स्वामियों व दूसरे हितधारकों को व समुदाय व व्यापक समाज को देते हैं। हमने ताजनेस की व्याख्या में काफी समय लिया है और अब इस संदेश को फैलाने का समय आ गया है।

हम एक ऐसे होटल समूह हैं जो परंपरा में डूबे हैं लेकिन हमारा यह आशय नहीं है कि प्रत्येक ताज होटल एक भारतीय होटल होगा। हम उस स्थान से प्रेरणा लेंगे जहां पर हम होंगे, लेकिन हमारे होटलों में साझा तत्व होंगे जो इंद्रिय तत्वों व भावनाओं से भरपूर होंगे। यही हमें भिन्न करेगा। मेहमानों को महक, संगीत तथा फूलों की व्यवस्था, कर्मचारियों की वेशभूषा व सबसे अधिक महत्वपूर्ण रूप से हर ताज होटल के आहार व पेय में ताजनेस का अनुभव होगा। रस्मों का विशिष्ट समूह जो भारतीय विरासत से प्रेरणा तो लेगी लेकिन स्थानीय संस्कृति व परंपराओं के साथ मिश्रित होगी, जो एस ऐसा अनुभव प्रदान करेगा जो दूसरे होटलों से भिन्न होगा व हमारे होटलों के सहयोगियों को हमारे सभी होटलों में देखभाल व सहृदयता के साथ हमारे उत्पादों व सेवाओं को प्रदान करने के लिए प्रेरित करेगा।

सबसे पहले हम अपने होटलों में पारंपरिक होटल लॉबियां समाप्त कर रहे हैं। होटल उद्योग में चेक इन व चेक आउट करना काफी दुश्कर है। मेहमानों को तीसरे दर्जे की पूछताछ से गुजरना बुरा लगता है जिससे हम एक उद्योग के रूप में उनको गुजारते हैं, इसलिए हमारे पास एक प्रौद्योगिकी है जो हमारे मेहमानों को स्वयं ही चेकइन कराने में सक्षम करती है। हमने इसे ताजमहल पैलेस, मुंबई में शुरु किया है, हालांकि हमारे कर्मचारी रहेंगे जो मेहमानों की देखभाल करेंगे।

हमारी लॉबियां शीघ्र ही आरामदायक लिविंग रूप जैसी दिखेंगी। हमने यथा संभव शीघ्रता से इलेक्ट्रिक कारों के उपयोग की शपथ ली है क्योंकि हमें अपने पर्यावरण की चिंता है। हम अपने प्रत्येक ब्रांड के मूल गुणों को निर्धारित करने का निर्णय लिया है: चौबीसों घंटे नाश्ते से लेकर, वर्ल्ड ऑफ ताज के आहार उपलब्ध होंगे तथा मेहमानों के कमरे में आने से पहले उनके विस्तृत निजी पसंद को शामिल किया जाएगा।

सटीक कमरे; सटीक नींद अनुभव; सटीक शावर; सटीक गद्दे, तकिया व ड्यूवेट और सटीक पठन व अन्य प्रकाश व्यवस्था के निर्माण के लिए हम काफी पूंजी लगा रहे हैं। हम हर उस छोटे से छोटे से विवरण पर ध्यान दे रहे हैं जो हमारे मेहमान के आवाज, देखने, सूंघने, छूने व स्वाद को छुएगा।

ताजनेस को संभव करने में आपको किस तरह की चुनौतियां पेश आ रही हैं?
हमने ताजनेस को 5 अगस्त को जारी किया था और इस अवसर पर श्री रतन टाटा व श्री साइरस मिस्त्री उपस्थित थे। मुझे उन दोनो से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं हासिल हुई थीं, हमने अपने सभी होटलों को बदल कर 2017 तक ताजनेस के सिद्धांत के साथ संरेखित करने का वादा किया है। यह महत्वकांक्षी है; परिचालन व व्यवहार के स्तर पर हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। यह एक सतत प्रयास है तथा मुझे विश्वास है कि हम इसे हासिल कर लेंगे।

ताज के लिए आहार व पेय कितने महत्वपूर्ण हैं?
आहार व पेय महत्वपूर्ण हैं और इसमें नाटकीय बदलाव हुए हैं। अब हमारे ग्राहक केवल ताज में नहीं आ रहे हैं। अब हमारे पास प्रतिभासंपन्न शेफों के साथ अनेक मुक्त खड़े रेस्टोरेंट हैं जिनके पास पूरी दुनिया का आहार है। पहले लोग ताज में दिखना चाहते थे, यह एक तरह की आकांक्षा सी थी, लेकिन आज लोगों के पास इंडिगो या टेबुल (मुंबई में) आने का विकल्प या साथी का दबाव होता है, जो कि उनके द्वारा प्रस्तुत करने की शैली की उत्कृष्टता को दर्शाता है। आज मेहमान पांच सितारा होटलों को उस तरह से नहीं देखना चाहते जैसे दो दशक पहले देखा करते थे।

ऐसे परिदृष्य में हमें यह देखना होता है कि हमें वास्तव मे कितने रेस्टोरेंट चाहिए और हमारे मेहमानों को किस तरह की पाक शैली की इच्छा है। मूल्य का हमें आंकलन करना है। ताज महल पैलेस में एक बार का खाना काफी महंगा है। इसी कारण से हमने मुंबई के होटलों, शामियाना में मूल्य निर्धारण को तार्किक किया है, और यह अभी अच्छी तरह से काम कर रहा है।

स्वादिष्ट भोजन देना हमारी प्रतिबद्धता है। हम ऐसा करने के लिए सरल आहार, अपेक्षाकृत छोटे मेनू व ऐसे मूल्य पर जा रहे हैं जो तार्किक लगते हैं।

डिजिटल प्रौद्योगिकी व इंटरनेट के प्रभाव ने आतिथ्य उद्योग को किस तरह से प्रभावित किया है?
डिजिटल प्लेटफार्म की जरुरत कोई छिपा तथ्य नहीं है। आप ऑनलाइन हुए बिना इस समय कुछ भी नहीं कर सकते हैं। लोग इसी तरह से उत्पादों को देख व खरीद रहे हैं और लक्ज़री होटल भी इनमें शामिल हैं।

पारंपरिक रूप से इस उद्योग में अपने मेहमानों और ट्रैवेल एजेंटों के साथ स्पष्ट व सरल संबंध होता था। लेकिन अब प्रौद्योगिकी के साथ ‘यहां रुकने के लिए’ तरीके में तथा आतिथ्य व्यवसाय में काफी उतार-चढ़ाव हुआ है। मेकमाईट्रिप, यात्रा, एक्सपेडिया, ट्रिपएडवाइज़र तथा ऐसे अन्य का मूल्य अनेक होटल व्यवसायों से अधिक है।

ये लोग ‘ऑनलाइन यात्रा समाधान’ प्रदान करते हैं तथा पारंपरिक दस प्रतिशत मॉडल की तुलना में 15-23 प्रतिशत कमीशन लेते हैं।

इस चुनौती को आप किस तरह से संबोधित कर रहे हैं?
शुरुआत में हमारी डिजिटल उपस्थिति न के बराबर थी, लेकिन अब ये बदल रहा है। हमने अपनी वेबसाइट को फिर से लॉन्च किया है जो अब काफी बेहतर लग रही है। हमने समझा कि लोग निर्णय लेने से पहले देखना व जानना चाहते हैं, तो हमने अपनी साइट व होटलों के वर्चुअल टूर तैयार किए।

हमने अपने डिजिटल पेजों पर विभिन्न स्वतंत्र रेटिंग को शामिल किया तथा ट्रैवेल एजेंटों द्वारा दी जा रही प्राइसिंग पर भी जानकारी दी। हम अपने ग्राहकों के साथ पारदर्शिता के साथ पेश आते हैं; हम उनको अपनी वेबसाइट पर बने रहने के कई कारण देते हैं। हमने संर्च इंजन इष्टतमीकरण तथा डिजिटल मार्केटिंग पर काफी खर्च किया है और जल्दी ही मोबाइल ऐप भी जारी करने वाले हैं।

एयरबीएबी जैसे कुछ लोग आतिथ्य व्यवसाय को किस तरह से प्रभावित करते हैं?
एयरबीएबी एक अद्भुद मॉडल है, लेकिन यह अभी भारत में हमारे लिए कोई खतरा नहीं है (क्योंकि सुरक्षा व स्वच्छता यहां पर एक चिंता है)। लेकिन एयरबीएबी तथा इस तरह के लोग अमरीका, यूरोप व अन्य जगहों में उद्योग के लिए समस्या बन रहे हैं। कुछ यूरोपीय शहरों में एयरबीएबी पेंटहाउस व शैटउस का प्रस्ताव कर रहे हैं तो यह हमारे बाजार को किसी दिन चोट पहुंचा सकता है, लेकिन अभी नहीं।

सच यह है कि जब एक बार आप एयरबीएनबी रूम ले लेते हैं तो आप काफी हद तक स्वतंत्र हो जाते हैं। कोई भी आपकी मेहमान नवाज़ी नहीं करता और न ही आपसे उलझता है। हमारे मेहमान हमारे साथ प्रतिष्ठा के लिए, सातत्य के वादे के लिए, सुरक्षा व सम्मान के लिए और मेहमान नवाज़ी के लिए रहते हैं।

इंडियन होटल्स के जिंजर मॉडल के साथ क्या हो रहा है?
हमें जिंजर को और अधिक हिप बनाने की जरूरत है। मुंबई में जिंजर होटल के एक नए मॉडल पर हम अभी काम कर रहे हैं और मेरा वादा है कि यह काफी मजेदार होगा। हमें बुनियादी चीजों को सही करना है, हालांकि उसका अर्थ है बेहतर कमरे, बाथरूम व बिस्तर। बजट होटलों को बोरिंग नहीं होना चाहिए।