जून 2017 | हरीश भट

पूछताछ करने वाला दिमाग

मार्केटिंग पेशेवर के रूप में सफल होने के लिए जिज्ञासा एक प्रमुख जरूरी गुण है, टाटा सन्स के ब्रांड कस्टोडियन हरीश भट अपनी नई किताब दी क्यूरियस मार्केटर में कहा है

लेखक हरीश भट में मार्केटिंग पेशेवर के रूप में सफलता के निर्माण के लिए उत्सुक नुस्खा - जिज्ञासा पैदा करें, है। दी क्यूरियस मार्केटर में शामिल लगभग 50 लेखों में से प्रत्येक उनकी अवलोकन की गहरी भावना तथा लोगों, स्थानों तथा चीजों के साथ क्यों और कारण में खोजबीन करने की इच्छा को दर्शाता है जिनसे उनका दैनिक जीवन में सामना होता रहता है और जो विश्वासपूर्वक साबित करता है कि उसका मंत्र काम करता है। ब्रांड के निर्माण में समृद्ध अनुभव के 30 वर्षों के कैरियर में श्री भट ने अनेक वरिष्ठ पदों पर काम किया है: वे टाटा ग्लोबल बेवरेजेस के प्रबंध निदेशक रहे हैं, टाइटन कंपनी के घड़ियों तथा ज्वेलरी व्यापार के मुख्य परिचालन अधिकारी रहे हैं और इस समय टाटा संस में ब्रांड कस्टोडियन हैं।

इस किताब में वे एक बहुत रोचक अंतर्दृष्टि पेश करते हैं जिसे उन्होने मार्केटियर — अधिक सटीक रूप से, एक जिज्ञासु मार्केटियर — के रूप में अपनी यात्रा में हासिल किया है, और जिनको मूल रूप से दी हिन्दू बिजनेस लाइन के लिए उनके कॉलम में लिखे गए थे।

श्री भट समझाते हैं कि वे सहानुभूति और व्यवसायिक कौशल के साथ क्यों जिज्ञासा को, महान मार्केटिंग व्यंजन के निर्माण में डाले जाने वाले गुप्त रस की जरूरी सामग्री मानते हैं। "मुझे यकीन है कि जिज्ञासा उन सबसे महान गुणों में से एक है जो किसी मार्केटियर के पास हो सकता है क्योंकि वह हमें सीखने के लिए प्रोत्साहित करता है। नया ज्ञान मस्तिष्क को जगाता व उत्तेजित करता है...जबकि दूसरी ओर नई सीख की कमी के कारण क्रमिक मानसिक ठहराव और यहां तक कि शोष भी हो सकता है — जे कि किसी मार्केटियर के लिए कतई खुशनुमा प्रस्ताव नहीं है, जिसकी चुस्त बुद्धि अक्सर उसकी सबसे बड़ी संपत्ति होती है। "

सफल कैरियर के निर्माण की तैयारी करने वाले सभी युवा मार्केटियर्स के लिए श्री भट के पास निम्नलिखित सलाह है:

  • जान लीजिए कि आपको सब कुछ नहीं पता है।
  • हर समय सवाल पूछिए।
  • बिना निर्णय लिए, गहन रूप से सुनिए।
  • उत्सुक और ताजी दृष्टि से ग्राहकों का अवलोकन करें।
  • नए अनुभवों की तलाश करें, नए लोगों से मिलें।
  • अनपेक्षित का स्वागत करें।
  • पढ़ें, पढ़ें और पढ़ें।

चेतावनी: श्री भट की सलाह का उत्साह के साथ पालन शुरु करने से पहले, इस किताब के उपसंहार में उनकी बेटी गायत्री के विचारों को पढ़ लें: वह स्वीकार करती है कि 'जिज्ञासु मार्केटियर' होना किसी के पेशेवर जीवन को महत्वपूर्ण रूप से बेहतर कर सकता है, लेकिन वह ये भी कहती है कि "ये आपके निजी जीवन को पूरी तरह से नष्ट कर देता है"। उनके शब्दों में, "जिज्ञासा की यात्रा पर निकलनेसे पहले आपसे मेरा आग्रह होगा कि इसके अपरिहार्य परिणाम को जान लें।"

अंश:

सॉक्ड — उपलब्ध सभी रंगों से

भास्कर भट टाइटन कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं, जो कि भारत की सबसे सफल लाइफस्टाइल कंपनियों में से एक है। इस इंटरप्राइस का पिछले कई बरसों से विशिष्ट रूप से नेतृत्व करने के लिए उनको कारपोरेट क्षेत्र में काफी सम्मानित दृष्टि से देखा जाता है। यदि आप उनसे मिलते हैं तो आप उनकी बड़ी चमकदार आँखों, विचारशील प्रतिक्रियाएं और आपके कहे को उनके द्वारा ध्यान से सुने जाने को देखेंगे। आप उनकी शांत और प्रतिष्ठित पोशाक को भी नोटिस करेंगे जो अक्सर चेक वाली शर्ट और औपचारिक पतलून के साथ काले चमड़े के जूते के रूप में होगी।

हाल ही में हालांकि मैने उनके आउटफिट में एक महत्वपूर्ण बदलाव पर ध्यान दिया। उन्होने चमकीले रंग के मोज़े पहनने शुर कर दिए हैं। एक मीटिंग में उनके बगल में बैठते हुए मैने देखा कि वे फिरोज़ा पट्टी वाले चमकीले गुलाबी रंग के मोजे पहने हुए थे। यह मुझे काफी असामान्य लगा, इसलिए मैने उनसे इसका कारण पूछ लिया। 'मैं पुराने सादे ग्रे और काले मोजो से बोर हो गया था,' उन्होने जवाब दिया। 'इसलिए मैं नजदीकी शोरूम मे गया, जहां मुझे डिस्प्ले पर रखे रंगीन मोजे काफी अच्छे लगे। जानते हो, ये मोज़े ऑफिस में मेरे लंबे समय को चमकीला एहसास देते हैं।' उन्होने मेरे साथ कुछ बेहद आकर्षक विचार साझा किए कि क्यों ये रंगीन मोजे उनको काफी अपील करने लग गए हैं, जिसे मैं इस लेख के बाद में बताउंगा।

हर जगह रंगीन मोजे

इसी बीच मैने अपने चारो ओर रंगीन मोजे देखने शुरु कर दिए। मेरे कई दूसरे सहकर्मियों ने ऐसे मोज पहनने शुरु कर दिए जो लाल, पीले या नारंगी रंग के थे, एक विशेष मामले में उनमें सिल्वर का शेड था। वे सामान्य कारपोरेट लोग थे, आप मेरा मतलब समझ रहे होंगे - वे एक्जीक्यूटिव जो ग्रे तथा नीली शर्ट पसंद करते हैं और हमेशा परंपरागतवादी, औपचारिक ड्रेस पहनते हैं। वे अभी भी औपचारिक शर्ट और पतलून पहनते हैं लेकिन उनके मोजे पूरी तरह से बदल गए हैं - वे चमकदार, भड़कीले और रंगीन हो गए हैं। मैं आश्चर्यचकित था कि मेरे सहकर्मियों ने एपने मोजे क्यों बदल दिए?

फिर अचानक यह पेचीदा विषय मेरे जीवन में दाखिल हुआ। आम तौर पर मैं सिर्फ काले और नीले मोजे पहनता था। दरअसल बरसों से मैने इन दो रंगों को पूरी संतुष्टि के साथ पहना था। दो नहीने पहले, मेरी पत्नी मेरी जगह पर खरीदारी करने गयी और एक गहरी मुस्कान के साथ मेरे पास लौटी। उन्होने कहा, 'देखो मैंने तुम्हारे लिए क्या खरीदा है'। 'रंगीन मोजे! मुझे लगता है ये आपको कम बोरिंग व्यक्ति बनाएंगे।' एक जोड़ा गहरे बैगनी रंग का था। दूसरे जोड़े पर एक ही मोजे में तीन बेहतरीन रंग - नीले, पीले और लाल थे। तीसरे जोड़े पर गुलाबी व हरी पट्टियां थी। कुछ अनुनय के साथ, मैंने ये मोज़े पहनना शुरू कर दिया। अब, मुझे मानना होगा कि मैं उनको पसंद करने लगा हूं।