जुलाई 2017

'हमें पहुंच पर आधारित विभिन्न प्रकार के नवप्रवर्तन (इनोवेशन) चाहिए'

टाटा सन्स के अध्यक्ष श्री एन चंद्रशेखरन कहते हैं, इंडिया इंक के इनोवेशन का फोकस उत्पादों एवं सेवाओं तक पहुंच की समस्या के हल पर होना चाहिए

टाटा संस के अध्यक्ष श्री एन चंद्रशेखरन को हाल ही में कॉरपोरेट लीडरशिप के लिए प्रतिष्ठित ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (एआईएमए) जेआरडी टाटा अवार्ड से सम्मानित किया गया। कॉरपोरेट लीडरशिप के लिए 1996 में शुरू हुआ जेआरडी टाटा अवार्ड हर साल भारत के सर्वाधिक बेहतरीन कॉरपोरेट लीडर को प्रदान किया जाता है।

टाटा सन्स के अध्यक्ष श्री एन चंद्रशेखरन भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी से एआईएमए जेआरडी टाटा अवार्ड ग्रहण करते हुए

पुरस्कार वितरण समारोह में बोलते हुए भारत के माननीय उपराष्ट्रपति महोदय ने इंडिया इंक की नवप्रवर्तन लाने की क्षमता तथा मूल्य एवं नवाचार पर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी होने का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि केवल लागत पर प्रतिस्पर्धी होना पर्याप्त नहीं है बल्कि भारतीय कंपनियों को आर&डी पर भी अपना निवेश बढ़ाना चाहिए।

श्री चंद्रशेखरन इस बात से सहमत थे कि इंडिया इंक को विशुद्ध अनुसंधान पर अधिक निवेश करना चाहिए, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि भारत के आगे मुख्य चुनौती है उत्पाद एवं सेवाओं तक पहुंच की और इस समस्या का हल ढूंढना इंडिया इंक का मुख्य फोकस होना चाहिए। ‘विशुद्ध अनुसंधान तो होना ही चाहिए लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण है ऐसा इनोवेटिव मॉडल तैयार करना जो यह सुनिश्चित करे कि हमारे पास जो कुछ भी हो वह सबकी पहुंच में हो। ‘हमें पहुंच पर आधारित विभिन्न प्रकार के नवप्रवर्तन (इनोवेशन) चाहिए’, श्री चंद्रशेखरन ने कहा।

स्वस्थ्य सेवा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए श्री चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत केवल अधिक संख्या में डॉक्टर तैयार अपनी स्वास्थ्य सेवा की समस्याओं को सुलझा नहीं सकता क्योंकि अपनी विशाल जरूरत को पूरा करने के लिए यह पर्याप्त संख्या डॉक्टरों का निर्माण नहीं कर सकता। ‘इसलिए, विशेषज्ञों तक पहुंच प्रदान कीजिए’, उन्होंने कहा। उन्होंने बताया कि कौशल का विकास करना यह सुनिश्चित करने का मूल है कि विशेषज्ञ साधारण कार्यों तक ही सीमित न रहें बल्कि उनके पास अधिक संख्या को रोगियों को देखने और अनुसंधान करने का समय हो।

अतीत में कॉरपोरेट लीडरशिप के लिए जेआरडी टाटा अवार्ड पाने वाले कॉरपोरेट लीडर्स हैं आदित्य विक्रम बिड़ला, दीपक पारेख, एनआर नारायणमूर्ति, आनंद महिंद्रा, केवी कामथ और सुनील मित्तल। श्री चंद्रशेखरन को यह अवार्ड टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस में उनकी उपलब्धियों के लिए प्रदान किया गया।

मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन सर्विसेस के अध्यक्ष और एआईएमए के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट टी मोहन दास पई ने श्री चंद्रशेखरन को अवार्ड मिलने पर बधाई दी और कहा, ‘श्री चंद्रा ने एक ग्लोबल बिजनस खड़ा किया है और दुनिया की दूसरी सर्वाधिक मूल्यवान सेवा कंपनी का निर्माण किया है। उन्होंने लागत के बूते नहीं, बल्कि मूल्य (वैल्यू) के बल पर जीता है।’

एआईएमए के प्रेसिडेंट सुनील कांत मुंजाल ने श्री चंद्रशेखरन की उनके शानदार नेतृत्व के लिए तारीफ की। उन्होंने इस बात की सराहना की कि श्री चंद्रशेखरन का तरीका ऐसा था कि लोग प्रेरित हों न कि उन्हें हासिल करने की ओर धकेला जाए।

‘मूलतः, नेतृत्व का काम होता है लोगों के अंदर ऐसी चिनगारी पैदा करना जिससे वे असाधारण लक्ष्य के साथ आगे बढ़ें,’ श्री चंद्रशेखरन ने भारत को विकसित देश बनाने की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षा की सराहना करते हुए कहा।

श्री चंद्रशेखरन ने एआईएमए को अवार्ड का नाम जेआरडी टाटा के नाम पर रखने के लिए धन्यवाद दिया जिन्होंने समूह का पांच दशकों तक नेतृत्व किया था। टीसीएस में शामिल होने के बाद जेआरडी टाटा से अपनी एकमात्र मुलाकात को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘मुझे केवल एक बार उन्हें दूर से देखने का अवसर मिला था और मुझे नहीं पता था कि 30 साल बाद मुझे समूह का नेतृत्व करने का मौका मिलेगा।’ उन्हेंने उस स्तर और मूल्य वाला नेतृत्व करने की आकांक्षा जताई जो श्री टाटा को प्रिय था।