अप्रैल 2017

भारतीय विज्ञान संस्थान (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस) को भारत के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय का रैंक

एक शताब्दी से भी अधिक समय से भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलौर, जिसकी स्थापना टाटा संस्थापक जमशेदजी टाटा द्वारा की गई थी, भारत में वैज्ञानिक शोध में उत्कृष्टता का पर्याय है

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc/आईआईएससी) बंगलौर का नाम नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) द्वारा भारत के सर्वोत्तम विश्वविद्यालय और शोध संस्थान के रूप में घोषित किया गया है। भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा स्थापित एनआईआरएफ की ओर प्राप्त यह रैकिंग संस्थान के तेजस्वी उपलब्धियों और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकीय शोध की प्रेरना देने के लिए अग्रणी स्थान का द्योतक है। यह लगातार दूसरा साल है जब इस संस्थान को इस सम्मान से विभूषित किया गया।

आईआईएससी की स्थापना के पीछे टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी नसरवानजी टाटा की अभिप्रेरण था। ‘भारत की भौतिक व औद्योगिक तरक्की के लिए प्रेरक कारक के रूप में समुन्नत मार्गदर्शन और ज्ञान की सभी शाखाओं में मौलिक अनुसंधान’ के उद्देश्य से जमशेदजी ने इस संस्थान की रूपरेखा 1896 में बनाई थी। यह आज भी भारत में प्रगत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकीय शोध व शिक्षा का अग्रणी संस्थान बना हुआ है।

प्रस्तावित संस्थान के लिए संस्थापक ने 30 लाख रुपए मूल्य की अपनी संपत्ति की आय उपलब्ध कराई थी। 1909 में, जमशेदजी की मृत्यु के बाद उनके बड़े पुत्र सर दोराबजी टाटा ने अपने पिता के सपने को पूरा किया। आईआईएससी बंगलौर में 400 एकड़ के भूखंड पर स्थापित है जो तात्कालिक मैसूर राज द्वारा प्रदान किया गया था और इसे भारत के तात्कालिक औपनिवेशिक सरकार द्वारा वित्तीय सहायत प्रदान की गई थी। छात्रों के पहले समूह का नामांकन 1911 में हुआ।

अपनी स्थापना के बाद 108 साल के दौरान आईआईएससी ने मान्य उपलब्धियों के साथ जमशेदजी के सपने को साकार किया है। ब्रिटेन से प्रकाशित होने वाली टाइम्स हाइअर एजुकेशन की संसार की सर्वोत्तम लघु विश्वविद्यालय 2017 सूची में इसे सर्वोच्च 10 में आठवां स्थान प्राप्त हुआ, और यह सर्वोच्च 10 सी इस सूची में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय संस्थान है।

यह संस्थान भारत की सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक प्रतिभाओं को आकर्षित करता है और देश में शोध छात्रों की एक विशाल संख्या यहां अध्ययनरत होती है। श्री होमी भाभा, श्री विक्रम साराभाई, श्री सतीश धवन और श्री जेसी बोस जैसे भारत के कई महान वैज्ञानिक आईआईएससी के छात्र रहे। अग्रणी वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय शोध एवं शिक्षा में आईआईएससी की निरंतर सफलता भारत में जमशेदजी के सपने का ज्वलंत साक्ष्य है।

संक्षिप्त इतिहास

  • 1889 में बंबई विश्वविद्यालय में आयोजित एक दीक्षांत संबोधन को सुनने के बाद जमशेदजी टाटा के मन में वैज्ञानिक शोध हेतु एक संस्थान की स्थापना करने का विचार आया।
  • आईआईएससी की शुरुआत केवल दो विभागों के साथ हुई थी: जेनरल एंड अप्लायड केमिस्ट्री एवं इलेक्ट्रो-टेक्नोलॉजी।
  • भौतिकी विभाग के स्थापना 1933 में हुई और नोबेल पुरस्कार विभूषित सर सीवी रमण संस्थान के प्रथम भारतीय निदेशक नियुक्त हुए।
  • श्री होमी भाभा, श्री विक्रम साराभाई, श्री सतीश धवन और श्री जेसी बोस जैसे भारत के कई महान वैज्ञानिकों का प्रशिक्षण इस संस्थान में हुआ।
  • इसने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च एवं परमाणु ऊर्जा आयोग जैसी संस्थानों का भी इसने पोषण किया है।