अप्रैल 2017

हरित आश्रयों का निर्माण

टाटा कंपनियों ने अपने संसाधन और ज्ञान का उपयोग विभिन्न भूभागों में पारिस्थितिकी पुनर्निर्माण और जैवविविधता संरक्षण के लिए किया है

पेड़ एवं वनस्पति तथा उन्हें संपोषित करने वाला ईकोसिस्टम (पारिस्थितिकी) वे आधार हैं जिसपर दुनिया की खाद्य श्रृंखला टिकी हुई है, ये ऊर्जा देने वाले वे अंतर्भूत कारक हैं जो पृथ्वी पर जीवन के संवर्धन को संभव बनाते हैं। वे कुदरती रूप से कार्बन का अवशोषण करते हैं, वे ऑक्सीजन का निर्माता होते हैं, लाखों किस्म के प्राकृतिक संसाधनों का सृजन करते हैं और मानव तथा अन्य प्राणियों के जीवन का मूलाधार होते हैं। दुर्भाग्य से, जो प्रकृति वनस्पति और प्राणि दोनों को इस पृथ्वी पर फलने-फूलने की सुविधा देती है वही आज जलवायु परिवर्तन तथा मनुष्य की अथाह उपभोग आकांक्षा के कारण संकटग्रस्त हो रही है।

टाटा समूह तथा इसकी अनुषंगी इकाइयां लंबे समय से विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न प्रॉजेक्ट के लिए संसाधन एवं जानकारी मुहैया करते रहे हैं जिनमें शामिल हैं वानिकी कार्यक्रम और हरियाली बढ़ाने के प्रयास से लेकर पारिस्थिकी नवसृजन तथा जैवविविधता संरक्षण तक के प्रयास। टाटा कंपनियों द्वारा जिन प्रॉजेक्ट को सहायता उपलब्ध कराई जा रही वे उस समग्र प्रयास के लिहाज से सागर में बूंद के समान हैं जो हमारे द्वारा जीव जगत को पहुंचाई गई क्षति की भरपाई करने के लिए किया जाना आवश्यक है। इस सचाई से इन उद्यमों के प्रयासों का महत्ब कम नहीं हो जाता बल्कि इससे पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके अनेक प्रयासों की अनिवार्यता सिद्ध होती है।

  • विशिष्ट पर्यावरण क्षेत्र में कार्य, टाटा पावर, महाराष्ट्र, भारत

    पिछले 30 साल में टाटा पावर ने भारत के विशिष्ट पर्यावरण वाले पश्चिमी घाट क्षेत्र में 1.8 करोड़ से अधिक पौधे वल्वहान डैम इलाके तथा मुल्शी एवं मावाल इलाकों में अपने जलविद्युत केंद्र के आस-पास लगाए गए हैं। इस प्रयास ने इस इलाके के जल सोतों को पुनर्जीवन प्रदान किया है और स्थानीय वनस्पतियों एवं जीवों के संरक्षण के लिए मददगार साबित हुआ है।

  • जैवविविधता का संरक्षण, टाटा केमिकल्स, गुजरात, भारत

    टाटा केमिकल्स ने गुजरात के मीठापुर के अपने सोडा एश संयंत्र स्थल के पास 150 एकड़ का संरक्षित वनस्पति उद्यान विकसित किया है। इस संरक्षित उद्यान में 21 प्रजातियों के स्थानीय वनस्पति तथा 114 से अधिक अन्य प्रजातियों की वनस्पतियां उगती हैं। इस उद्यान में तकरीबन 70 प्रजाजियों के पक्षी आते हैं जिनमें हूबरा बुस्टर्ड, यूरेशियन हॉबी तथा मार्श हैरियर जैसे संकटग्रस्त प्रजाति शामिल हैं। यह इलाका मॉनिटर लिजर्ड, दुर्लभ स्टार कछुआ, सियार, जंगली सूअर तथा नीलगाय का भी घर है। कंपनी अब मीठापुर इलाके में 100 एकड़ से अधिक ज्वार मडफ्लैट पर मैंग्रोव की पुनर्स्थापना की प्रक्रिया में संलग्न है। अन्य प्रमुख प्रॉजेक्ट है वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया तथा गुजरात राज्य वन विभाग के साथ मिलकर मीठापुर प्रवाल भित्ती (कोरल रीफ) की पुनर्स्थापना।

  • कोरल पुनर्स्थापन, ताज समूह, मालदीव्स

    कोरल प्रसार और पुनर्जीवन कोरल रीफ की जैवविविधता को बढ़ाने के प्रयास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा। ताज समूह का ‘रीफ रिचार्ज’ प्रॉजेक्ट 2011 में ताज एक्जॉटिका रिजॉर्ट तथा स्पा एंड ओसन डाइव मालदीव्स के संयुक्त प्रयास के रूप में शुरू किया गया जिसका उद्देश्य है रिजॉर्ट के आस-पास प्रवाल आच्छादन को बढ़ाना तथा स्थानीय रीफ पर प्रवाल की स्वस्थ वृद्धि को बढ़ावा देना। इस प्रॉजेक्ट के तहत लगून में नई प्रवाल वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए धातु के फ्रेम का इस्तेमाल किया जाता है। रिजॉर्ट के पास कोरल गार्डन कहे वाले इलाके में 200 से अधिक फ्रेम स्थापित किए जा चुके हैं। भारी संख्या में मछलियों एवं कछुओं के आगमन के साथ इस इलाके की जैवविविधता स्तर में इजाफा देखा गया है।

  • आर्द्रभूमि के लिए प्रयास, टाटा मोटर्स, पुणे, भारत

    पुणे के अत्यंत शहरीकृत पिंपरी-चिंचवड औद्योगिक क्षेत्र के मध्य में 1160 एकड़ में टाटा मोटर्स संयंत्र स्थित है। संयंत्र के अंदर कंपनी ने झाड़-झंखार भरे एक उजाड़ इलाके को प्राकृतिक आर्द्रभूमि पर्यावास के रूप में बदल दिया है जो 245 एकड़ में फैला है। इस पर्यावास की योजना निर्माण संयंत्र के साथ ही शुरू की गई थी। वर्षा जल संग्रह के लिए एक डैम निर्मित किया गया। इससे बने झील में अब 6 करोड़ गैलन पानी एकत्र होता है जिससे हरित आच्छादन को बनाए रखने में मदद मिलती है। चट्टानों को काटा गया और उपजाऊ मिट्टी डालकर वृक्षों के वृद्धि लायक जमीन तैयार की गई। आज टाटा मोटर्स संयंत्र में छह जल स्रोत हैं, सरकंडे के जंगल वाला एक दलदली इलाका है, एक खुला झाड़भूमि है और एक इलाका घने पेड़ों से भरा है जिसमें लगभग 1,50,000 वृक्ष लगाए गए हैं। आर्द्रभूमि 150 से अधिक प्रजातियों के पक्षियों को आकर्षित करती है और लगभग तकरीबन 60 प्रकार की तितलियां हैं। पुणे के औद्योगिक इलाके के बीचो-बीच हराभरा क्षेत्र के कुदरती ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र की तरह है और प्रवासी पक्षियों के लिए तो जैसे स्वर्ग ही है।

  • दलदल की सेना, टाटा स्टील प्रॉसेसिंग एन्ड डिस्ट्रीब्यूशन, सुंदरवन, भारत

    ‘400 स्कूली बच्चियों की सेना’ ग्रीन राइनोस ने टाटा स्टील प्रॉसेसिंग एन्ड डिस्ट्रीब्यूशन को सुंदरवन इलाके की जैवविविधता को बचाने के प्रयास में मदद की है जिसे यूनेस्को द्वारा एक ग्लोबल बायोस्फियर रिजर्व घोषित किया गया है। इस इलाके पर निर्भर एक विशाल जनसंख्या का वास स्थल यह सुंदरवन का प्राकृतिक ईकोसिस्टम क्षरण की प्रक्रिया से गुजर रहा है। जलवायु परिवर्तन ने भी इसकी वृद्धि में अपना योगदान दिया है। ग्रीन राइनो ने अब तक 15,000 पेड़ लगाए हैं और सुंदरवन को एक सदाबहार, प्रदूषणमुक्त क्षेत्र के रूप में विकसित करने को प्रयासरत है जहां स्थानीय वनस्पति एवं जीव-जंतु फले-फूलें।

अधिक जानकारी के लिए टाटा रिव्यू का 2017 अंक पढ़ें