जनवरी 2015 | क्रिस्टाबेले नोरोन्हा

'टीजीबी के साथ साझेदारी ने मूल्यवर्धन किया है'

सबल ब्रांड, संधारणीय व्यवहार और संतुष्ट कार्यदल - इन तीनों ही बातों ने सुनिश्चित किया है कि वाटावाला प्लान्टेशन्स, जो कि टाटा ग्लोबल बेव्हरेजेज और सनशाइन हिल्डिंग्स के द्वारा किया गया एक संयुक्त उपक्रम है- श्रीलंका में चाय व्यापार में एक जाना माना नाम बना रहे। कंपनी की वृद्धि के शिल्पी हैं प्रबंध निदेशक विश गोविंदस्वामी, जिन्होंने गुणवत्ता एवं उत्पादन मानकों में महत्वपूर्ण सुधार किया है। उनके नेतृत्व में कंपनी ने कुछेक नये ब्रांड प्रस्तुत किये और साथ ही घरेलु एवं अतंर्राष्ट्रीय बाज़ारों में बाज़ार हिस्सा बढाया है।

इस साक्षात्कार में,क्रिस्टाबेले नोरोन्हा के साथ गोविंदस्वामी टाटा ग्लोबल बेव्हरेजेज के साथ सफल रिश्ता, उत्पादकता, ब्रांडिंग और संधारणीयता के विषय में बातें करते हैं।

क्या आप कंपनी के इतिहास के बारे में तथा टाटा ग्लोबल बेव्हरेजेज के साथ साझेदारी के बारे में विस्तार से बतायेंगे ?
वाटावाला प्लान्टेशन्स, श्रीलंका की एक स्थानीय प्लान्टेशन कंपनी है और कॉलम्बो स्टॉक एक्सचेन्ज पर सूचीबद्ध कंपनी है। 1996 में टाटा ग्लोबल बेव्हरेजेज (टीजीबी) और सनशाइन होल्डिंग्स के बीच एक संयुक्त उपक्रम के रूप में यह कंपनी अस्तित्व में आयी, जिसमें बहुमती शेयर श्रीलंका सरकार के हैं। कंपनी के बागानों में ली जाने वाली तीन मुख्य फसलें हैं चाय, रब्बर और पाम। मुख्य फसल चाय है और कुल 12,000 हेक्टेयर विस्तार में से 6,000 हेक्टेयर विस्तार में चाय उगायी जाती है।

टीजीबी के साथ साझेदारी के परिणाम स्वरूप इनकी वृद्धि में कई गुना इजाफा हुआ है। आप के मुताबिक, इस प्रकार के सफल रिश्तों के लिये सही मिश्र क्या है ?
वाटावाला प्लान्टेशन्स ने चाय व्यापार में अत्यंत अच्छा प्रदर्शन किया है और लगातार जारी रखा है। टीजीबी के साथ साझेदारी ने हमारे ब्रांड में मूल्य वर्धन का काम किया है। वाटावाला की ओर से प्रस्तुत दो अग्रणी ब्रांड ज़ेस्टा और वाटावाला, श्रीलंका के बाज़ार में आज अग्रणी ब्रांड हैं।

यह रिश्ता सफल रहा है क्योंकि दोनों ही भागीदार की सोच रणनीतिक है। टीजीबी की तुलना में हम छोटे खिलाड़ी हैं, लेकिन उन्होंने हमारे परिचालन में दखल नहीं दी है, उनकी अपनी जो शिक्षा, अनुभव रहे हैं उन्हें हमारे साथ बांटें हैं और काम करने की स्वतंत्रता दी है। इससे साझेदारी तथा व्यापार- मूल्यवान बने हैं।

बागानों में उत्पादकता सुधारने हेतु कंपनी ने क्या क्या निवेश किये हैं ?
पिछले 10 वर्षों के दौरान-जब से कंपनी ने अधिग्रहण किया है, हम हमारे कृषि व्यवहारों को निरंतर बेहतर बनाते आये हैं। इससे हमारे चाय पौधों की उत्पादकता बढी है। फसल की छंटाई आसान बनाने हेतु, हमने हमारे लोगों को नये साधनों का इस्तेमाल करने के लिये प्रशिक्षित किया है। फसल कटाई वाले लोग अब चाय बागानों में सुविधापूर्वक घुम सकते हैं। इनकी जीवन गुणवत्ता तथा स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। वे जब काम पर लगे हुए होते हैं, इनके परिवारों और बच्चों की देखभाल की जाती है । इन तमाम कदमों के कारण हमारी उत्पादकता में सुधार हुआ है।

आपका सबसे पहला ब्रांड ज़ेस्टा, कैसे अस्तित्व में आया ?
बात 1997 की है, श्री लंका की चाय कंपनियां अपने तमाम उत्पाद, चाय नीलामी में बेच देती थीं। उस समय, भारत के स्थानीय बाज़ारों में टाटा टी एक अग्रणी चाय पैकर और खिलाड़ी कंपनी थी। हमने उनकी शिक्षा से सीखा, उसे आत्मसात् किया और ज़ेस्टा नाम से अपने पहले ब्रांड का सृजन किया। उस समय तक, श्री लंका में चाय व्यापार में केवल एक ही ब्रांड और खिलाड़ी था-युनिलीवर की लिप्टन। श्री लंका श्रेष्ठ गुणवत्ता की चाय का उत्पादन करके उसे विश्व में भेज रहा था। हम चाहते थे कि श्री लंका के उपभोक्ताओं को, श्री लंका में ही बनी बढ़िया चाय का कप पेश किया जाये। अतः हमने हमारी श्रेष्ठ गार्डन चायों में से एक को पैक किया और इसे नाम दिया ज़ेस्टा। चाय का ग्रेड ब्रोकन ऑरेन्ज पीको फैनिंग्स था, श्री लंका द्वारा उत्पन्न की जाने वाली सभी चायों में यह सर्वोच्च गुणवत्ता की चाय है, और तब से हमने कभी भी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। आज श्री लंका के ब्रांडेड चाय बाज़ार का 30 प्रतिशत हिस्सा हमारे पास है। हम अन्य दो ब्रांड, वाटावाला और रेन कहाता की बिक्री भी करते हैं।

श्री लंका में वॉल्ट्रिम में वाटावाला प्लान्टेशन्स की आधुनिकतम सुविधाएं हैं। क्या आप भविष्य में इसी प्रकार के और भी कारखाने स्थापित करने वाले हैं ?
वॉल्ट्रिम में सुविधा स्थापित करने के लिये, तीन से चार वर्ष पूर्व कंपनी ने $3-4 मिलियन का निवेश किया है। आज, श्री लंका में शायद यह श्रेष्ठ चाय उत्पादन सुविधा है। इसकी रचना इस प्रकार से की गई है कि श्रमिकों तथा मशीनों- दोनों ही को अधिकतम गुणवत्ता मिले तथा चाय का श्रेष्ठ कप भी। हमारा आयोजन है कि भविष्य में हम इसी प्रकार के और कारखाने विकसित करें।

आप किस प्रकार से सुनिश्चित करते हैं कि पर्यावरण, समुदाय और व्यापार के संदर्भ में, बागान संधारणीय बने रहें ?
व्यापार परिचालन संधारणीय तरीके से सुनिश्चित करने के लिये हम अनेक बातों का खयाल रखते हैं। चाय सूखाने के लिये कारखाने में ड्रायर का इस्तेमाल किया जाता है। पहले यूं होता था कि ड्रायर के इंधन के लिये वृक्ष काटे जाते थे। हमारी ज़मीन के 500 हेक्टेयर विस्तार में हमने कैलिएन्ड्रा नामक एक विशेष प्रजाति उगायी है। अब कैलिएन्ड्रा के टुकड़ों का इस्तेमाल, ड्रायर के लिये इंधन के रूप में किये जाने से इंधनलकड़ी पर पहले जो निर्भरता थी, वो कम हो गई है। इसी प्रकार चाय से मिलने वाले अपशिष्ट में से ईंटे बना कर के भी ड्रायर के लिये इस्तेमाल में लिया जाता है।

बारिश के मौसम में पहाड़ियों की चोटी की ज़मीन का नदी में कटाव हो जाता है। ज़मीन के संरक्षण हेतु हमने, बागान के चारों ओर वेटीवर नामक बारहमासी ऊंची घास उगायी है । इससे चोटी की ज़मीन टिकी रहती है और कटाव नहीं होता। जहां भी संभव हो, बागान में हम पुनःचक्रीकरण करते हैं, नष्टप्रायः सामग्री का इस्तेमाल करते हैं।

मानव संसाधन का विकास करना, हमारी रगों में ही है। हम कड़ी मेहनत करते हैं ताकि सुनिश्चित हो कि हमारा कार्यदल संधारणीय है औऱ आगे बढ़ रहा है। उनकी देखभाल करना और घर पर तथा कार्यस्थल पर उनकी जो ज़रूरतें हों, उन्हें पूरा करना अहम बात है। और किसी भी बात से ज़रूरी है कि आपको अपने कर्मचारिओं के प्रति न्यायी होना है। आज, वर्ष-दर-वर्ष के आधार पर, कंपनी का 5 प्रतिशत लाभ, श्रमिकों के साथ बांटा जाता है। वे कंपनी के शेयरधारक हैं, कंपनी के कुल शेयर का 10 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारिओं के पास है। ।

व्यापार और आखरी छोर के ग्राहक के लिये, रेनफोरेस्ट प्रमाणपत्र का अर्थ क्या है ?
भविष्य में उत्पाद की बिक्री, रेनफोरेस्ट अलायंस तरीके से की जाने लगेगी। 2016 तक सारे चाय ब्रांड, जैसे कि टेटली, रेनफोरेस्ट अलायंस प्रमाणपत्र द्वारा प्रमाणित हो जायेंगे। वाटावाला प्लान्टेशन्स ने इस पहल को गंभीरता से लिया हुआ है। हमारे छः बागान रेनफोरेस्ट अलायंस प्रमाणपत्र प्राप्त हैं और बाकियों को भविष्य में प्रमाणित किया जायेगा।

कंपनी या फिर बाग़ान के लिये इसका मतलब होता है कि जमीन संरक्षण, वन्य जीवन संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और निपटान, अच्छे कृषि व्यवहारों, अच्छे उत्पादन व्यवहारों एवं मानव संसाधन विकास के लिये वो पूरी तरह अपना जिम्मा निभाती है। पर्यावरण, लोग और उत्पादों का ध्यान रखने की यह एकीकृत प्रक्रिया है। बात जब चाय की- कृषि उत्पाद- की हो, हमें सुनिश्चित करना होता है कि उत्पादन के दौरान हम समग्र रूप से पर्यावरण का ध्यान रखते हैं, क्योंकि उत्पाद बनाने के लिये हम उसका इस्तेमाल करते हैं। यानी कि उत्पादन का यह संपूर्ण एकीकृत तरीका है।

आखरी उपभोक्ताओं के लिये रेनफोरेस्ट अलायंस प्रमाणपत्र, यह जानने का ज़रिया है कि उत्पाद की प्राप्ति कहां से की गई है। वे जो भी उत्पाद खरीदते हैं, उस प्रत्येक के बारे में पता लगा सकते हैं। ग्राहक जान पाते हैं कि वे जो चाय खरीदते और पीते हैं उसे संधारणीय व्यवहारों से उत्पन्न किया गया है।

टीजीबी ब्रांड पोर्टफोलियो के अन्य कोई उत्पाद की बिक्री करने की योजना है ?
स्थानीय बाज़ार में टेटली ब्रांड लाने के लिये हम टीजीबी के साथ काम कर रहे हैं। श्रीलंका में चाय की आयात करने की अनुमति नहीं है। हमें नियमनों के मुताबिक काम करना होगा कि कैसे ब्रांड को सिलोन चाय के साथ या फिर अंतर्राष्ट्रीय चायों के साथ पैक किया जाय। हम जल्द ही श्रीलंका के ग्राहकों के लिये टाटा वॉटर प्लस और हिमालयन वॉटर प्रस्तुत करने की मंशा रखते हैं।