जनवरी 2015 | गायत्री कामथ

कॉफी की सुगंध, ब्रांड का अहसास

टाटा स्टारबक्स ने भारत में अपनी मौजूदगी को सशक्त करते हुए और ब्रांड अनुभव को सच्चाई और मजबूती प्रदान करते हुए दो वर्ष बिताए हैं

भारत में किसी भी स्टारबक्स आउटलेट पर आएं और यहां भी आपको दुनिया के किसी भी अन्य आउटलेट की तरह भीड़ लगी हुई दिखेगी। अपने घर और कार्यस्थल के बाद कॉफी चेन का परिसर लोगों लिए उनकी पसंदीदा ‘तीसरी जगह’ की तरह है जहां, लोग कॉफी के साथ चैटिंग, ब्राउजिंग और काम कर रहे हैं। अक्टूबर 2012 में भारत में शुरू होने के दो वर्षों के भीतर, स्टारबक्स की मौजूदगी छः शहरों में बढ़कर 59 स्टोर तक पहुंच गई है- मुंबई, दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, बंगलुरु, चेन्नई, पुणे तथा हैदराबाद। लेकिन अगर और ज्यादा भारतीय शहरों को भी ध्यान से देखें, तो दुनिया की सबसे बड़ी कॉफी श्रृंखला इस बात के लिए लगातार प्रयास कर रही है कि स्टारबक्स के अनुभवों में निरंतरता और स्थायित्व बना रहे।

टाटा स्टारबक्स के सीईओ अवनी दावदा इस बारे में बताती हैं कि स्टारबक्स का अनुभव औरों से अलग कैसे है
टाटा स्टारबक्स की सीईओ, अवनी दावदा कहती हैं कि इस दौरान विकास के अनुभव ‘शानदार’ रहे हैं। “पिछले दो वर्ष अविश्वसनीय रूप से प्रशंसनीय विकास यात्रा के रहे हैं, और यह मुख्यतः इस वजह से कि कैसे हमने इस प्रतिष्ठित, अंतर्राष्ट्रीय और बेहद प्रशंसनीय ब्रांड को भारत में जीवंत किया। बड़े महानगरों को अपनी श्रृंखला के तहत पहले शामिल करना हमारी ब्रांड रणनीति का केंद्र रहा जिससे स्टारबक्स अपने ग्राहकों की दिनचर्या में पसंदीदा तीसरे स्थान का दर्जा हासिल करने में कामयाब रहा है। “हम उन स्थानों पर मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं जहां हमें स्टारबक्स ब्रांड की ख्याति का फायदा मिल सके। महानगरों में विस्तृत संभावनाएं हैं। हमने इस सतह को खरोंचा भर है”, सुश्री दावदा कहती हैं। महानगरों में, स्थान के चयन का एक तरीका है। “हम किसी शहर में आवासीय और व्यावसायिक के मिले-जुले स्वरूप वाले इलाकों में निवेश करते हैं,” वे कहती हैं।

महानगरीय उपस्थिति मजबूत हो जाने के बाद अब यह कॉफी श्रृंखला 50 से अधिक बड़े भारतीय शहरों और महानगरों में अपना विस्तार करना चाहती है जहां लोग इसके नाम से परिचित तो हैं, लेकिन इसे अपने को मजबूती से वहां स्थापित करना है। दूसरे स्तर के ये शहर और महानगर भी स्टारबक्स के विकास को वही रफ्तार देंगे, जो इसने महानगरों में हासिल किया है। “हर शहर की अपनी बाजार क्षमता है, यानी इसमें समाने लायक स्टोर की संख्या। शहर आर्थिक और अवसंरचना विकास के विभिन्न चरणों में हो सकते हैं, लेकिन उनमें स्टारबक्स ब्रांड को देखने के तरीके में समानता है,” सुश्री दावदा कहती हैं।

मानवीय संपर्क
भारत में कैफे की भीड़ से भरे बाजार के बावजूद, वे कहती हैं कि टाटा स्टारबक्स इसे एक स्वस्थ प्रतियोगिता मानता है, चाहे यह कोई घरेलू बाजार में विकसित किस्म से हो या किसी वैश्विक श्रृंखला से। फिर भी, वे यकीन करती हैं कि टाटा स्टारबक्स, अपने प्रतिष्ठित ब्रांड और कॉफी विरासत के साथ भारत में कॉफी पीने के अनुभव को पुनः पारिभाषित कर सकता है।” और हो सकता है कि यह एक संयोग हो, लेकिन जब से टाटा स्टारबक्स ने बाजार में प्रवेश किया है, हर श्रृंखला ने अपने उत्पाद प्रस्तावों और स्टोर के वातावरण को आक्रामक तरीके से फिर से डिजाइन किया है। “हम इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत उच्च मानदंड पेश करते हैं और इससे बाजार में एक फर्क पैदा होता है,” सुश्री दावदा दावा करते हुए कहती हैं।

टाटा स्टारबक्स में सबसे प्राथमिक चिंता यह है कि ब्रांड के महत्व को कैसे बरकरार रखा जाए और ब्रांड की साख भारतीय ग्राहकों की बढ़ी हुई उम्मीदों के अनुसार बनाई जाए, न कि आंकड़ों में इतनी ज्यादा बढ़ोत्तरी, जैसे कि स्टोर की संख्या, पहुंच और बाजार में भागीदारी बढ़ाना। “हमारे लिए, जो सबसे महत्वपूर्ण है, वह है कॉफी का एक बढ़िया प्याला और एक बेहतरीन कॉफी हाउस अनुभव पेश करना, जिसके साथ मानवीय संस्पर्श हो। यही इस ब्रांड का आधार है, और यही ग्राहकों की अपेक्षा भी है”

स्टारबक्स के लिए भारत में, वास्तव में विकास केवल बाजार के लिहाज से या आपूर्ति श्रृंखला के तर्कों से नहीं, बल्कि लोगों द्वारा मिले सम्मान से तय होगा। आखिर में, स्टारबक्स के लिए फर्क लाने वाला मुख्य कारक, इसका ब्रांड अनुभव है, जिसे पूर्णरूप से मानवीय संस्पर्श देने के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। जैसा कि सुश्री दावदा कहती हैं, स्टारबक्स के लिए लोग ही इसका सबसे बड़ा विभेदक कारक है। और यह था वह संदेश, जिसपर स्टारबक्स के चेयरमैन हॉवर्ड शुल्ज ने बल दिया, जब उन्होंने मुंबई में ब्रांड की शुरुआत के मौके पर भारतीय कर्मचारियों को संबोधित किया था। उन्होंने कहा कि अब यह उनकी जिम्मेवारी है कि वे कंपनी की सफलता को बढाएं और इसे विकसित करें; क्योंकि ये स्टोर के भागीदार ही थे, जो ब्रांड अनुभव प्रदान करने के लिए आखिरकार जिम्मेवार होंगे।

सुश्री दावदा कहती हैं, “हम अपने कर्मचारियों को अपना भागीदार मानते हैं, क्योंकि वे व्यवसाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।” इन भागीदारों को, जिनकी संख्या भारत में अभी 1,100 है, इनसे अपेक्षित भूमिका में उपयुक्तता के लिए कठोर प्रशिक्षण दिया गया है। इनके प्रशिक्षण के अंत में, मिसाल के तौर पर, अग्रणी कर्मचारियों से यह अपेक्षा रखी जाती है कि वे कॉफी के प्रति उत्साहित हों और ग्राहकों को सही पेय चुनने में मदद करें। “हमारे लोगों के प्रति प्रतिबद्धता ही हमारे ब्रांड की आधारशिला है। उन्हें वास्तविक ब्रांड अनुभव पर स्थायी रहने के लिए प्रेरित करना ही चुनौती है”, सुश्री दावदा स्पष्ट करती हैं। कंपनी कई तरह की योजनाओं के द्वारा कर्मचारियों को रोके रखने में निवेश करती है, जिसके तहत कॉफी संबंधी प्रशिक्षण के अलावा वित्तीय लाभ, स्वास्थ्य लाभ तथा कैरियर में प्रगति शामिल हैं।

भारतीय अहसास
एक वैश्विक श्रृंखला, स्टारबक्स ने भारत में यथासंभव स्थानीय होने को महत्वपूर्ण माना है। भारतीय ग्राहकों के आतिथ्य का तात्पर्य स्थानीय संदर्भ में स्टारबक्स अनुभव निर्मित करना है। इसे अंजाम देने का एक तरीका इंडियन अरेबिका कॉफी को प्रमुखता देना है। टाटा स्टारबक्स के लिए इसके स्रोत टाटा के कॉफी बागान हैं, जहां से इन बीजों को प्राप्त कर कूर्ग में स्टारबक्स तथा टाटा कॉफी के संयुक्त परिसर में भूना और पैक किया जाता है। कंपनी ने इंडियन एस्टेट ब्लेंड नाम से एक खास मिश्रण भी तैयार किया है, जिसे 15 एशियन बाजारों को निर्यात भी किया जा रहा है और जो अमेरिका में भी ऑनलाइन उपलब्ध है। “हमने भारतीय स्वाद और ग्राहकों की चाहत को समझने में समय दिया। हम अपने साथ पहले से तैयार मेनू लेकर यहां नहीं आए। हमने टाटा कॉफी जैसे विशेषज्ञों से साझीदारी की और हमने इन विशेषज्ञताओं का उपयोग बेहतरीन स्वादों के विकास में किया।”

स्टारबक्स अनुभव- एक ऐसी जगह जहां लोग चैट, ब्राउज और काम कर सकते हैं
एक खास स्टारबक्स आउटलेट के डिजाइन में भारतीय और महानगरीय तत्वों का मिश्रण किया गया है। प्रत्येक आउटलेट को एक खास स्वरूप दिया गया है और यह स्टारबक्स के सज्जा दिशानिर्देशों के अंतर्गत स्थानीय रूप से प्राप्त अनूठी विशेषताओं को दर्शाता है। सुश्री दावदा के अनुसार, भारतीय ग्राहक भी अच्छी कॉफी के उतने ही कद्रदान हैं, जितने कि अंतर्राष्ट्रीय कॉफी पीनेवाले। “मुझे अचरज होता है कि लोग क्यों ऐसा कहते हैं कि भारतीय ग्राहक दूसरों के मुकाबले कीमत को लेकर ज्यादा सतर्क होते हैं। हां, भारतीय लोग कीमत को लेकर सतर्क होते हैं पर वे सस्ती ताजगी नहीं चाहते। वे अन्य विकसित बाजार के ग्राहकों की तरह ही केवल अच्छे कद्रदान हैं, जो ब्रांड से उसी स्तर की अपेक्षाएं रखते हैं।”

भारत में ये अपेक्षाएं और भी ज्यादा हो सकती हैं, क्योंकि टाटा स्टारबक्स यहां एक साथ दो वैश्विक ब्रांडों की पहचान रखते हैं। और जब ये ब्रांड मूल्यों तथा समाज को प्रतिदान के समान सैद्धांतिक धरातल पर अवस्थित हों। कॉफी का भावनात्मक स्रोत इसे बेहद महत्वपूर्ण बना देता है। स्टारबक्स ‘फेयर ट्रेड एंड कॉफी एंड फार्मर इक्विटी’ (सीएएफ और इक्यूट) प्रैक्टिसेज’ का सदस्य है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि किसानों का शोषण नहीं होता और बागानों में पर्यावरण के सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है। विश्वस्तर पर, स्टारबक्स को कोस्टारिका के एक फार्म में आमंत्रित किया गया है जहां ये पहुंच रहे हैं और उन समस्याओं के बारे में जानकारी हासिल कर रहे हैं जो दुनियाभर में कॉफी की फसल के साथ जुड़ी हैं।

हैसिंडा अल्सेशिया में, जो कोस्टारिका में 600 एकड़ का एक कॉफी फार्म है, कॉफी के ऐसे बीज उगाने के प्रयास चल रहे हैं जो फसल में लगने वाली बीमारियों से लड़ सकें। इस आर एंड डी परिसर का लक्ष्य है, खेती में बेहतर गतिविधियों को दुनिया भर के कॉफी बागानों के साथ साझा करना। इसका उद्देश्य है सीएएफ और इक्यूट गतिविधियों की सहायता में अपनी भूमिका निभाना, और उन रणनैतिक लक्ष्यों के लिए काम करना जो कॉफी उत्पादन के लिए उत्तरदायी नैतिक स्रोतों से जुड़े हैं।

“भारत में स्टारबक्स ने टाटा के साथ साझेदारी की है, जिनकी समाज, समुदाय और पर्यावरण के प्रति बेहद प्रतिबद्धता रही है।” सुश्री दावदा स्पष्ट करती हैं। एशिया की सबसे बड़ी बागान कंपनी, टाटा कॉफी विभिन्न तरह के पर्यावरणीय प्रमाणन धारण करते हैं, जिनमें इस सहभागिता को बल देनेवाले प्रमाणपत्र भी शामिल हैं। टाटा स्टारबक्स, कर्नाटक के कूर्ग फाउंडेशन के साथ मिलकर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के एक स्कूल- स्वस्थ की सहायता करते हैं।

भारत में अपनी बढ़ती हुई उपस्थिति के साथ, इस क्षेत्र में स्टारबक्स की कहानी व्यावसायिक रणनीति और परिचालन सफलता के सही सम्मिश्रण से युक्त प्रयास की कहानी लगती है।