जुलाई 2015 | भास्कर भट्ट

वृत्त के केन्द्र में

भास्कर भट्ट कहते हैं, ग्राहक, एक हितधारक से कहीं अधिक है वह एक ऐसी चीज़ है जिसको चारों ओर किसी संगठन की पारिस्थितिकी विकसित होती है

1990 के अंत तक व्यवसाय की दुनिया को यह एहसास नहीं हुआ था कि किसी कंपनी के ग्राहक केवल विपणन विभाग की संपत्ति नहीं होते हैं बल्कि वे सारी इकाई की जिम्मेदारी होते हैं। इस ग्राहक की जरूरत को समझना इस समय के बाद से अधिक महत्वपूर्ण हो गया।

इसके बाद से ग्राहक को शामिल करने वाले अनेक वाक्यांशों का निर्माण शुरु हो गया। ग्राहक केन्द्रियता, ग्राहक फोकस, ग्राहक चलित तथा ग्राहक उन्मुखीकरण वे वाक्यांश हैं जो कंपनियों द्वारा इस महत्वपूर्ण हितधारक के व्यवहार का वर्णन करने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

कंपनी के साथ लेनदेन करते समय, ग्राहक कंपनी के बाहर के पर्यावरण का हिस्सा होता है और इसलिए इनको एक विशिष्ट हिधारक कहा जा सकता है जिसे अन्य सभी हितधारक — शेयरधारक, कर्मचारी, ऋणदाता, व्यापार सहयोगी तथा साझीदारी — तृप्त करना चाहते हैं क्योंकि उनका कल्याण उसके द्वारा निर्धारित होता है।

जबकि कारपोरेशन, जिनके साथ इंटरफेस करते हैं उन हितधारकों के प्रति अपनी प्राथमिकता अलग-अलग रख सकते हैं, लेकिन ग्राहक ही वह है जो हमें प्रांसगिक बनाए रखता है। इसलिए कंपनी की पूरी पारिस्थितिकी के लिए उसकी ओर उन्मुख होना जरूरी है, जिससे कि उस व्यक्ति को केन्द्र में रखा जा सके।

इस बात के पर्याप्त प्रयास हैं कि ग्राहक की ओर संगठन का उन्मुख होना जितना अधिक होगा, उतना ही अधिक कंपनी लंब समय तक समृद्ध व स्थिर रहेगी। इस संदर्भ में जो कंपनियां दिमाग में आती हैं वेहैं सिंगापुर एयरलाइंस, वॉल्ट डिज़्नी & कं, मैकडॉनल्ड्स और घर पर अमूल व एशियन पेंट्स।

ग्राहक की ओर मजबूत उन्मुखीकरण हासिल करने के लिए कई सारी बातों के साथ कंपनी के भीतर कम से कम निम्नलिखित अभ्यास चाहिए:

ग्राहको को सतत रूप से सुनने व उनकी व्यक्त और अव्यक्त जरूरतों और आकांक्षाओं की निगरानी के लिए मजबूत प्रक्रियाएं। उत्पादों तथा सेवाओं का विकास, विज्ञापन, वितरण चैनल, मूल्य निर्धारण आदि ऐसी प्रक्रियाओं के संभावित परिणाम होते हैं।

अपने ग्राहकों का सामना करने वालों (कर्मचारी तथा सहयोगी) को संतुष्टि का उच्च स्तर प्रदान करने वाले संगठन ग्राहक की निष्ठा कमाते हैं।

ग्राहकों को खुश रखने के अभिनव तरीकों को खोजने का संगठन के भीतर एक जुनून।

उभरती अर्थव्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में सेवाओं के उभरने से भी पारंपरिक कंपनियों में ग्राहक अभ्यासों में स्वागत योग्य परिवर्तन आये हैं। इससे यह समझ पैदा हुई है कि पूरे वृत्त को बंद करने के लिए — संचार से खरीदारी अनुभव से उपयोग अनुभव से बिक्री पश्चात अनुभव — संगठन से समान ध्यान की जरूरत है। संभावना के लिए कुछ भी नहीं छोड़ा जा सकता है।

मोबाइल तथा इंटरनेट के माध्यम से संचार की सरलता तथा उसमें आयी विस्फोटक तेजी ने कंपनियों के लिए चुनौतियों तथा अवसरों, दोनो को प्रस्तुत किया है। व्यापार के इस नए विश्वव्यापी तरीके में, किसी कारपोरेशन का पारिस्थितिकी तंत्र मात्र एक वृत्त न हो कर डिजिटल सह ब्रिक-व-मोर्टार स्थान होता है। इन दोनों स्थानों में ग्राहक सर्वोच्च होता है।

भास्कर भट्ट टाइटन कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं

यह मुख्य लेख का सारांश है, जो टाटा समूह की ग्राहक-केन्द्रित संस्कृति के बारे में कवर स्टोरी का एक हिस्सा है, जिसे टाटा रिव्यूके जुलाई 2015 संस्करण में शामिल किया गया है।
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