जुलाई 2015 | आर मुकुंदन

एक नया समीकरण उभर रहा है

आर मुकुंदन कहते हैं कि, बी2बी तथा सी2सी से आगे उत्पाद सामग्री तथा विपणन रणनीतियां, मानव-से-मानव संपर्क में फिट होने के लिए बनाई जा रही हैं

हमारे समय के तेजी से बदलते बाज़ार में बाज़ार खंडों के बीच की पंक्तियां तेजी से धुंधला रही हैं। आज के बी2बी (व्यवसाय से व्यवसाय) तथा बी2सी (व्यवसाय से उपभोक्ता) ग्राहक कुछ समान जमीन साझा करते हैं: दोनो ही सूचित तथा परिष्कृत हैं, दोनो के पास उद्यम से अपेक्षाओं का एक मजबूत सेट है जिसके साथ वे व्यवसाय करते हैं। ये ग्राहक ब्रांड की अपनी छाप बनाते हैं जिसका आधार वह अनुभव होता है जो ब्रांड उनकी अपेक्षाओं के संबंध में प्रदान करते हैं। वह तथा ब्रांड का वादा। एक अनुभव जो ग्राहक की अपेक्षाओं से अधिक होता है वह ग्राहक संतुष्टि को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण कारक होता है। 

बी2सी कंपनियों को एहसास हो गया है — आधुनिक मीडिया की तात्कालिक प्रकृति तथा ई-कामर्स व्यापार की गतिविधि के कारण — अच्छी विश्लेषिकी और अंतर्दृष्टि के माध्यम से ग्राहक संतुष्टि को बढ़ाने से काफी राजसव बढ़ता है। जबकि, एक अकेला बी2बी संबंध अक्सर लाखों डॉलर के बराबर होता है और बी2बी कंपनियां, ग्राहक अनुभवों को इष्टतम करके असाधारण मूल्य पैदा कर सकती हैं। यह लोकप्रिय दृष्टिकोण के विपरीत है, जैसा कि बी2सी क्षेत्र में होता है।

टाटा केमिकल्स में हमने संगठन के इर्द-गिर्द एक मजबूत ग्राहक-केन्द्रित संस्कृति विकसित की है। ऐसा हमने, अपने ग्राहकों की भिन्न-भिन्न जरूरतों की समझ के विकास पर सतत रूप से ध्यान केन्द्रित करके किया है। यह एक ऐसी संस्कृति है जो हमें हमारे मिशन वाक्य तथा दीर्घ कालीन रणनीति की लाइन पर हारे ग्राहक वादे को पूरा करने में सक्षम करती है।  

जबकि पंक्तियां धुंधली हो सकती हैं, फिर भी एक अंतर बना रहता है जो बी2बी व बी2सी खरीदारों को अलग करता है जिनसे हम भावनात्मक रूप से अलग-अलग स्थानों पर मिलते हैं। इसलिए, खरीदार के किसी खंड के लिए विपणन रणनीति अपनाते समय मिलती हुई हो सकती हैं लेकिन इन रणनीतियों के हृदय में ये काफी भिन्न होती हैं।

बी2बी खरीदार, समय व धन बचाने के लिए खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। समझा जा सकता है कि बी2बी खरीदारी मजबूत तर्कों तथा निम्न निजी जोखिम पर आधारित होती है जबकि बी2सी खरीदारी भावनाओं तथा पैसों के मूल्य प्रस्ताव पर आधारित होती है। किसी बी2बी ग्राहक को उत्पाद बेचने में उत्पाद या सेवा के तर्क व गुण तथा समय, धन व संसाधनों की बचत के लिए खरीदार की संगणनात्मक जरूत की समझ का रेखांकन शामिल होता है। इसके ठीक विपरीत एक बी2सी खरीदारी का अर्थ है उत्पाद के लाभों पर ध्यान केन्द्रित करना।

 सारांश यह है कि बी2बी वबी2सी दोनो ही खंडों में खरीदार उत्पाद के बारे में भावनात्मक परिप्रेक्ष्य पर स्थिर हो जाता है। हालांकि, यहां पर जिस बात को याद रखने की जरूरत है, वह ये है कि व्यापार मानवों द्वारा संचालित होते हैं इसलिए संचार को जटिल नहीं होना चाहिए। बी2बी तथा बी2सी के बीच का रास्ता बनाने का अब एक नया ट्रेंड सामने आ रहा है: एच2एच या मानव से मानव संबंध।

यह वो गतिकी है जिसमें खरीदारों को विशेष जरूरतों वाले मानव के रूप में देखा जाता है। इसिलए उत्पाद सामग्री तथा विपणन रणनीतियों को ऐसी जरूरतों के अनुसार डिज़ाइन करने की जरूरत होती है।

आर मुकंदन टाटा केमिकल्स के प्रबंध निदेशक हैं

यह मुख्य लेख का सारांश है, जो टाटा समूह की ग्राहक-केन्द्रित संस्कृति के बारे में कवर स्टोरी का एक हिस्सा है, जिसे टाटा रिव्यूके जुलाई 2015 संस्करण में शामिल किया गया है।
टाटा में ग्राहक केन्द्रीयता पर चेयरमैन का संदेश
हरीश भट्ट: यह संस्कृति का हिस्सा है
डॉ राल्फ स्पेथ: आनंदित करने के लिए डिज़ाइन किया हुआ
भास्कर भट्ट: किसी वृत्त के केन्द्र में
जगुआर लैंड रोवर: पहिए पर कौन है?
टाइटन कंपनी: स्टाइल में वज़न
टाटा मोटर्स: लॉन्ग ड्राइव के लिए तैयार
टाटा मोटर्स: एक स्वस्थ जुनून
टाटा ग्लोबल बेवरेजेस: कनेक्शन स्वादिष्ट है
टाटा केमिकल्स: पुल निर्माण के लिए होते हैं
टाटा पावर: स्नेह सृजन भी
टाटा कम्युनिकेशन्स: गुनगुनाने के लिए एक टेलीकॉम धुन
रैलीस: अच्छी हवा की कटाई
टाटा स्काई: सिग्नल स्पष्ट हैं
जुस्को: एक अलग कार्रवाई
टाटा स्टील: स्टील से बने बंधन