अवकाश प्राप्त चेयरमैन

रतन एन टाटा, टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा सन्स के अध्यक्ष थे। अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल, 1991 से ले कर 28 दिसम्बर, 2012 में उनकी निवृत्ति तक का रहा। वे टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कन्सल्टेंसी सर्विसेज़, टाटा पॉवर, टाटा ग्लोबल बेव्हरेजेज़, टाटा केमिकल्स, इन्डियन होटेल्स और टाटा टेलिसर्विसेज़ जैसी महत्वपूर्ण टाटा कंपनियों के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनकी कार्य अवधि के दौरान समूह का राजस्व कई गुना बढ़ कर, 2011-12 में 100 विलियन $ के पार जा पहुंचा था।

रतन टाटा, भारत और विदेशों के कई विभिन्न संस्थानों के साथ भी जुड़े हैं। भारत में निजी क्षेत्र द्वारा प्रोत्साहित दो सबसे बड़े परोपकारी ट्रस्ट के वे अध्यक्ष हैं। वे भारत के प्रधान मंत्री की व्यापार और उद्योग परिषद (काउन्सिल ऑन ट्रेड एन्ड इन्डस्ट्री) के सदस्य भी हैं। वे कोर्ट ऑफ द इन्डियन इन्स्टिट्यूट ऑफ सायन्स के प्रमुख हैं तथा टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (टाटा फन्डामेन्टल रिसर्च इन्स्टिट्यूट) की प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष हैं। वे बतौर एक ट्रस्टी, कॉर्नेल युनिवर्सिटी एवं युनिवर्सिटी ऑफ सधर्न केलिफोर्निआ के ट्रस्टी मंडल से भी जुड़े हैं। टाटा, एल्को के निदेशक मंडल में भी अपनी सेवा प्रदान कर रहे हैं और मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन, जेपी मोर्गन चेज़, रोल्स-रोयस, टीमेस्क होल्डिंग्स तथा मोनेटरी ऑथोरिटी ऑफ सिंगापोर के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार मंडल में भी शामिल हैं।

रतन टाटा ने 1962 में कोर्नेल युनिवर्सिटी से स्थापत्य में स्नातक की उपाधि (बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर) प्राप्त की। 1962 के आखिर में भारत लौटने से पहले, उन्होंने बहुत थोड़े समय के लिए लोस एन्जलिस में जोन्स एन्ड ईमोन्स के साथ काम किया। 1975 में उन्होंने हार्वर्ड बिज़नस स्कूल से अडवान्स्ड मैनेजमेन्ट प्रोग्राम पूर्ण किया।

भारत सरकार ने उन्हें अपने सबसे बड़े दूसरे क्रम के नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से 2008 में सम्मानित किया है। उन्हें भारत के और विदेशों के कुछ विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट की उपाधियां भी प्राप्त हुई हैं।