टाटा ट्रस्ट

टाटा के स्थापकों ने कई ट्रस्टों की स्थापना की और उन ट्रस्टों के माध्यम से अपनी अधिकांश संपत्ति भारत और भारत की जनता के कल्याण के लिए दान दे दी। आज ये टाटा ट्रस्ट समूह की प्रोमोटर स्वामित्व वाली कंपनी टाटा सन्स के 66 प्रतिशत शेयरों को नियंत्रि‍त करते हैं। इस संपत्ति से अर्जित संपदा विभिन्न प्रकार के क्षेत्रों में कई तरह के हितों, संस्थानों और व्यक्तियों की सहायता करने के काम आती है।

टाटा ट्रस्ट परोपकार की एक ऐसी असाधारण गाथा के गुमनाम नायक हैं जिसने असंख्य तरीकों से भारत और उसके नागरिकों को समृद्ध किया है।

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट की स्थापना सन् 1932 में सर दोराबजी टाटा द्वारा की गई थी, और यह भारत का सबसे पुराना और बड़ा कल्याणकारी संगठन है।

सर रतन टाटा ट्रस्ट (www.srtt.org )समूह के स्थापक जमशेतजी टाटा के सबसे छोटे पुत्र सर रतन टाटा के निधन के बाद 1918 में इस ट्रस्ट की रचना हुई थी। उनके वसियतनामे के अनुसार यह ट्रस्ट काम करता है। सर रतन टाटा एक ऐसे ट्रस्ट की स्थापना करना चाहते थे जो “शिक्षा, पढ़ाई और उद्योग में उसकी तमाम शाखाओं को आधुनिक बनाने में सहायक सिद्ध हो।

जेएन टाटा ऐंडाउमेंट की स्थापना 1892 में टाटा समूह के संस्थापक श्री. जमशेदजी टाटा ने की थी, ताकि युवा व्यक्ति विश्व के बेहतरीन विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित हो सके। प्रतिवर्ष यह एंडोमेंट लगभग 120 विद्वानों का चयन करता है।