नवम्बर 2017

जब आदिवासी उद्यमी बनते हैं

टाटा प्रॉजेक्ट्स कम्यूनिटी डेवलपमेंट ट्रस्ट प्रोग्राम की बदौलत आंध्रप्रदेश की आदिवासी महिलाएं उद्यमिता से उत्पन्न सशक्तिकरण की खुशी का अनुभव कर रही हैं

कभी-कभी, एक उद्यमी को थोड़े प्रोत्साहन की जरूरत पड़ती है। आंध्रप्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में, जो विशाखापत्तनम के निकट स्थित है, यहां 30 आदिवासी महिलाएं हैं, जो इस बात को प्रमाणित करेंगी।

कुछ महीने पहले तक, सावारा तथा जाथापु जनजातियों की ये महिलाएं सीधी-सादी घरेलू स्त्रियां थीं, जो शायद ही कभी अपने घर और रसोई से बाहर निकल पाई थीं। आज, ये स्मार्ट उद्यमों में संलग्न हैं जिन्हें ये अपने उद्यम, टीमवर्क और स्वामित्व के महत्व को समझकर चला रही हैं, अपने ब्रांड को आगे बढ़ाने में लगी हैं और अपने परिवारों के जीवनस्तर को बेहतर बना रही हैं।

यह बदलाव टाटा प्रॉजेक्ट्स कम्यूनिटी डेवलपमेंट ट्रस्ट (TPCDT) के अभ्यास का परिणाम है जिसका लक्ष्य है, अपने उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP) के अंतर्गत आदिवासी महिलाओं का सशक्तिकरण करना। 2012 में प्रारंभ, इस कार्यक्रम की सफलता के कारण इसे 2014 में तृतीय वार्षिक ग्रीनटेक CSR अवार्ड्स समारोह के दौरान सम्मानित किया गया, जहां इसे सम्मान का प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

श्रीकाकुलम में, इस कार्यक्रम का संचालन ट्रस्ट के निगरानी सहभागी स्वयंसेवी संगठन (), एक्शन इन रूरल टेक्नोलॉजी एंड सर्विसेज (ARTS) के माध्यम से किया जाता है; यह EDP टाटा प्रॉजेक्ट के समर्थन कार्रवाई प्रयास का एक अंग है।

TPCDT’ का उद्देश्य है, अनुसूचित जाति तथा जनजाति सहित, सामाजिक तथा आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों को आय उपार्जन अवसर उपलब्ध कराना। इस उद्देश्य की प्राप्ति में EDP प्रारूप सहायक है। मंजूवाणी नयनी, प्रबंध ट्रस्टी, TPCDT, कहती हैं, “यह’ समय भारत’के आदिवासियों को उनके बकाया चुकाने का है। हमें उम्मीद है कि हमारे प्रयासों से उन्हें लघु-स्तरीय उद्यम चलाने तथा आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी जिससे वे लाभान्वित होंगे।”

पंख देना

EDP का उद्देश्य है पिछड़े हुए समुदायों में उद्यमिता को प्रोत्साहन प्रदान करना। इस कार्यक्रम के तहत लोगों को अपने व्यवसाय शुरू करने और चलाने के लिए आवश्यक हुनर और जानकारी से लैस किया जाता है। “अगर उनकी क्षमताएं व्यवस्थित रूप से विकसित की जाएं, तो बाकी सब अपने आप हो जाता है, ” सुश्री नयनी आगे कहती हैं।

इसका पहला 10 दिवसीय कार्यक्रम उद्घाटन श्रीकाकुलम में 16 अक्टूबर, 2016 को आयोजित किया गया। इसके तहत 30 महिला प्रशिक्षुओं को मार्केटिंग तथा ब्रांडिंग की मूलभूत जानकारियों के साथ शामिल किया गया, और उन्हें लघु-स्तरीय उद्यमों को चलाने में आवश्यक होनेवाले उद्यमिता तथा प्रबंधकीय कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को यह भी सिखाया गया कि कैसे मार्केंटिंग अवसरों की पहचान करें, एक छोटा व्यवसाय स्थापित करें. औद्योगिक इकाई चलाएं, तथा व्यावसायिक वातावरण के बदलावों को समझें। इसके अलावा, इस EDP के तहत उन्हें उन सरकारी योजनाओं के प्रति जागरुक बनाया गया जिससे वे लाभ उठा सकते हैं, और उन्हें दिखाया गया कि कैसे वे प्रॉजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें, बाजार सर्वेक्षण करें तथा कार्ययोजनाएं बनाएं।

प्रतिभागियों की पृष्ठभूमि को देखते हुए, यह जरूरी था कि प्रशिक्षण को सरलतम बनाए रखा जाए। इसे पेपरिंग सत्र के दौरान खेल और मजे के द्वारा किया गया जिसमें महिलाओं को बेहतर तथा ज्यादा सुविधाजनक तरीके से जानकारियां समझने और आत्मसात करने में सहायता मिली। महत्वपूर्ण रूप से, यह प्रशिक्षण सत्र महिलाओं में आत्मविश्वास तथा सकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करने में सहायक रहा।

सोच में बदलाव लाना महत्वपूर्ण था। हालांकि महिलाओं ने मुख्यतः ‘खेल-खेल’ में सीखने की विधि का आनंद लिया, लेकिन उनमें से कई अब भी व्यापार में अंतिम रूप से उतरने के बारे में आशंकित थीं; उन्होंने इससे पहले कभी अपने घर से बाहर काम नहीं किया था। वास्तव में, उनमें से कई ने तो अपने प्रशिक्षक रवि कुमार से यह अनुरोध किया कि वे व्यवसाय उपक्रम का संचालन करें और उन्हें उसमें दैनिक मजदूरी पर काम दें। प्रशिक्षण टीम ने उनका भय दूर करते हुए उन्हें अपनी चिंताएं बताने के लिए कहा; चर्चा तथा परामर्श के माध्यम से टीम ने उन्हें अपनी चिंताओं का समाधान करने में सहायता की।

सामूहिक प्रगति

EDP कार्यक्रम का विचार TPCDT’ द्वारा स्थानीय जरूरतों को पहचानने से पैदा हुआ। 2014 से, श्रीकाकुलम जिला टाटा प्रॉजेक्ट’ के सामाजिक उद्यमिता कार्यक्रम से लाभान्वित हो रहा है जिसके तहत यहां के गांवों के लिए पेयजल मुहैया कराया गया है। इन गांवों में से एक के दौरे के दौरान, सुश्री नयनी तथा TPCDT टीम ने देखा कि यहां मूलभूत संरचना तथा बाजार समर्थन का अभाव है जो सामाजिक-आर्थिक विकास के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है।

खेती मुख्य आजीविका थी और इससे बहुत कम आमदनी थी। हालांकि स्थानीय किसान कई तरह की फसलें उपजाते थे जैसे अनानास, काजू तथा हल्दी, लेकिन अपने उत्पादन का मुश्किल से कुछ ही हिस्सा बेच पाते थे; बाकी बेकार हो जाता था और फेंक दिया जाता था। “वे थोड़ा उत्पादन अपने साथी ग्रामीणों को बेचते थे। लेकिन इसका अधिकांश रखा रह जाता था क्योंकि वे बड़े बाजार तक नहीं पहुंच पाते थे, ” सुश्री नयनी स्पष्ट करते हुए कहती हैं। और सबसे बुरा, कि जिस दाम पर किसान अपनी उपज बेचने के लिए तैयार थे वह रकम बहुत कम होती थी, क्योंकि वे बड़े थोक बाजार में प्रचलित दरों के बारे में नहीं ’जानते थे।

गांव की घरेलू महिलाओं को खेती से कम आमदनी की भरपाई करने के लिए कपड़े सीने जैसे छोटे-मोटे काम करना पड़ता था। लेकिन यह आमदनी भी उनके परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं होती थी।

टाटा प्रॉजेक्ट्स ने एक योजना शुरू की जिसका मकसद जिले की ग्रामीण आबादी को लाभ पहुंचाना था। इस परियोजना में भागीदार एनजीओ, ARTS ने इलाके की 30 महिलाओं का चयन करने में सहायता की, और उनमें से प्रत्येक 10 को लेकर समूह बनाया गया। इन 30 महिलाओं को इसके पहले कौशल कार्यक्रम में सम्मिलित किया गया है। एक समूह को बाजरा तथा अन्य अनाजों के प्रसंस्करण और बिस्कुट बनाने के लिए, दूसरे को काजू तथा तीसरे को हल्दी प्रसंस्करण के लिए चुना गया।

ये 30 महिलाएं लगभग एक हजार किसान सहकारी समितियों से जुड़ी थीं। महिलाएं किसानों से कच्चा माल प्राप्त करती हैं, उन्हें तैयार करती हैं और तैयार माल को लाभ लेकर बेचती हैं। इससे यह कार्यक्रम हर किसी के लिए फायदेमंद बन गया है क्योंकि इससे दरअसल खेती की उपज की बर्बादी रुक जाती है। TPCDT ने नासिक, महाराष्ट्र के एक खरीदार से करार किया है, जो तैयार माल का पूरा लॉट खरीद लेता है।

महिलाओं को अपने उद्यम शुरू करने तथा बनाने के लिए उपलब्ध सरकार’की ऋण योजनाओं का लाभ मिलने से प्रोत्साहन मिला। उत्पादों की बिक्री से मिले लाभ को, महिलाओं में बराबर बांटा गया, लागत काटकर जैसे- कर्ज की किस्त तथा खर्चों को ध्यान में रखा गया।

महिलाओं ने खुद से अपना व्यवसाय चलाना सीखा। हर प्रसंस्करण समूह में काम को दो शिफ्टों में बांटा गया जिसमें एक बार में पांच महिलाओं को काम पर लगाया गया, जिसमें उन्हें काम करते हुए निजी जिम्मेवारियों के बीच संतुलन बनाने की छूट दी गई। हाल में, सूती दस्ताने में टांके लगाने का एक काम आया है, जिसके लिए 10 महिलाओं के एक अतिरिक्त समूह का गठन किया गया है।

“नासिक के खरीदार ने हमें आश्वस्त किया कि अगर हम अपने उत्पाद की ब्रांडिंग कर सकें और गुणवत्ता बरकरार रखें, तो वह इसे दुबई निर्यात करने में मदद करेगा, ” सुश्री नयनी कहती हैं। हालांकि उन्हें एक व्यवसाय पूर्णतः स्थापित करने में एक वर्ष का समय लग सकता था, लेकिन इस समाचार से उनमें अपने उत्पाद के उत्पादन और गुणवत्ता में बेहतरी लाने के लिए कठोर परिश्रम करने का उत्साह पैदा हुआ है।

एक नया ब्रांड नाम NEEV (जो नेचर, एडुकेशन, एम्पावर तथा वैल्यू से मिलकर बना है) तथा इसका लोगो बनकर तैयार है। TPCDT ने 15 महिलाओं के एक क्षेत्र भ्रमण की योजना बनाई है जिसके साथ उनके प्रशिक्षक तथा ARTS से एक समन्वयक भी होंगे, वे खरीदार’की नासिक प्रसंस्करण इकाई में जाएंगे, जहां बिस्कुट बनता है और काजू के सामानों का प्रसंस्करण होता है। एक वृहत स्तरीय प्रसंस्करण इकाई को देखने से महिलाओं को संवृद्धि तथा विस्तार के लिए नए विचार सोचने की प्रेरणा मिलेगी। सुश्री नयनी इसे स्पष्ट करती हैं: “हम उन्हें अपने काम में और ग़ुणवत्ता को सुधारने में लगाए रखना चाहेंगे।” टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज’ के वयस्क साक्षरता कार्यक्रम को महिलाओं के लिए चलाने की भी योजना बनाई गई है जिससे वे व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन में और भी आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर बनें।

बड़े सपने देखें

TPCDT’के इस हस्तक्षेप की सफलता विस्मयकारी रही है। आज, ये आदिवासी महिलाएं हर माह औसतन रु. 10,000 की आमदनी कर रही हैं, अपने तथा अपने प्यारों के लिए बेहतर भविष्य के सपने देख रही हैं। उनकी प्रारंभिक उद्यम सफलता ने उन्हें अपने परिवारों में अत्यधिक सम्मानित बना दिया है, और समाज में उनकी हैसियत में भी इजाफा हुआ है। “जिस स्तर पर आज वे व्यवसाय चला रही हैं, वह छोटा हो सकता है, लेकिन उनकी प्रेरणा तथा कठोर परिश्रम करने की उनकी इच्छा को छोटा नहीं कहा जा सकता, ” सुश्री नयनी कहती हैं। EDP के योगदान को साबित करते हुए, ये महिलाएं इसकी मिसाल हैं कि समय पर सहायता और जानकारी मिलने से कैसे ग्रामीण जीवन में बदलाव लाया जा सकता है।

इस प्रयास का विस्तार श्रीकाकुलम, राजामुंद्री तथा पूर्वी गोदावरी जिले के अन्य आदिवासी इलाकों में भी किया जा रहा है, ताकि और ज्यादा संभावित उद्यमियों को सहायता और प्रोत्साहन दिया जा सके। EDP में नामांकन के लिए इन जिलों में महिलाओं के समूहों को पहले ही तैयार किया जा चुका है। TPCDT की टीम उस तंत्र का उपयोग करने पर चर्चा कर रही है जिससे ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को स्थानीय उपज वाले उत्पादों के प्रसंस्करण और मार्केटिंग से आमदनी के अवसर प्राप्त करने में सहायता मिले। “हम कुछ और जिलों में डब्बाबंद अनानास तथा कद्दू के चिप्स बनाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं, ” सुश्री नयनी कहती हैं।

श्रीकाकुलम के लाभान्वितों के लिए, टाटा प्रॉजेक्ट्स का ’ EDP हस्तक्षेप एक जीवनरेखा साबित हुआ जिसने उन्हें सामाजिक तथा आर्थिक असुरक्षा से उबार लिया। हल्दी प्रसंस्करण यूनिट में एक महिला उद्यमी उपलब्धि और सशक्तिकरण की मिली-जुली भावना प्रदर्शित करती है, जब वह कहती है “आदिवासी की विजय”, या, जैसा कि इसे मूल तेलुगु में पढ़ा जाएगा, “जय आदिवासी!”