सितम्बर 2017

पशु देखभाल का एक नया मानक

डॉ. लॉरिन डी वारनिक, कारनेल के कॉलेज ऑफ वेटनरी मेडिसिन के डीन, कारनेल में अपने कामकाज, और भारत में पशु-स्वास्थ्य सेवा तथा नवी मुंबई में स्थापित होनेवाले आगामी टाटा ट्रस्ट्स मल्टी-स्पेशियलिटी वेटनरी हॉस्पीटल के बारे में बताते हैं

पशु स्वास्थ्यसेवा टाटा ट्रस्ट के लिए एक नया लक्षित क्षेत्र है, जिसका उद्देश्य कारनेल विश्वविद्यालय के सहयोग से मुंबई में पशुचिकित्सा तथा सेवा की अवसंरचना स्थापित करना है। क्रिस्टाबेल नोरोन्ह ने, भारत के पशुस्वास्थ्य परिदृश्य में अपनी राय बनाने के लिए डॉ. लॉरिन डी वारनिक, कारनेल के कॉलेज ऑफ वेटनरी मेडिसिन के डीन से संपर्क किया।

डॉ. वारनिक गत वर्ष डीन बने और इसके पहले कई सालों से अंतरिम डीन थे। एक कारनेल विशेषज्ञ के रूप में, उन्होंने पशुचिकित्सा शिक्षा के लिए 2007 से ही सहायक डीन के रूप में, और 2012 से कारनेल यूनिवर्सिटी फॉर एनिमल्स के निदेशक के रूप में सेवा प्रदान की है। वे औषधालय तथा उत्पादन औषधि के प्रोफेसर हैं, और उनके शोध आंत के जीवाणुओं से संबद्ध हैं जैसे सालमोनेला, जो एक से दूसरी प्रजाति में फैल सकते हैं और मानव रोगों के भी कारण बन सकते हैं। उन्होंने औषधिरोधी जीवाणु के उद्भव पर भी शोध किया है।

इस साक्षात्कार में, उन्होंने अनेक विषयों के बारे में अपनी राय व्यक्त की है जैसे करनेल में उनका काम, भारत को गुणवत्तापूर्ण पशु स्वास्थ्यसेवा के लिए एक सस्ता मॉडल क्यों चाहिए होगा, और किस प्रकार स्थापित होनेवाला केंद्र इस दिशा में एक कदम है। संपादित अंश:

आप कारनेल से 20 वर्षों से एक या अनेक पदों पर कार्यरत रूप में जुड़े हुए हैं। क्या आप अपने कैरियर की खास बातें बताएंगे?
मेरी एक खासियत रही है छात्रों के साथ बातचीत करने का मौका। अपने कैरियर के ज्यादातर भाग में, मैंने स्थानीय फार्मों में बड़े पशु चिकित्सा औषधि तथा शल्यचिकित्सा के लिए अपनी चिकित्सा सेवा तथा परामर्श प्रदान किए हैं। छात्रों को डायग्नोस करते सीखते और हमारे सामने चुनौती के रूप में आने वाली बीमारियों का इलाज करते देखना हमेशा फायदेमंद रहा।

डॉ. वार्निक ने भारत भर में पशु स्वास्थ्यसेवा में उन्नति के लिए पशुचिकित्सकों के लिए शैक्षणिक अवसर जारी रखने के महत्व पर बल दिया

जब हम वाहन चलाकर एक से दूसरे फार्म तक जाते, तो इस बीच मैं छात्रों से उस मामले के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सवाल-जवाब करता जिसे हम इसके पहले देखकर आये होते थे। छात्रों के पास कैरियर के लक्ष्य, पाठ्यक्रम के साथ अनुभव, कॉलेज के बारे में अपनी राय कायम करने और सामान्य तौर पर इस पेशे के बारे में बातें करने का काफी समय होता था। उस वक्त, आखिरकार छात्र यह भूल जाते कि मैं भी वहीं हूं, और इस वजह से उनकी बातें खुलकर होने लगतीं। मैंने सुना कि कॉलेज में वस्तुतः क्या चल रहा था, उनकी पेशेवर भलाई-बुराई- यह छात्र जीवन की एक बेहद महत्वपूर्ण समझ थी। सैकड़ों पशुचिकित्सा छात्रों के साथ बातचीत से मुझे जो समझ मिली, वह कॉलेज प्रशासन में मेरी सेवा के लिए एक बढिया नींव साबित हुई। डीन के रूप में अपनी भूमिका में, मैंने यह सुनना जारी रखा कि छात्र क्या बातचीत और महसूस करते हैं, यह उनके साथ अनुभवों के बारे में साफ-साफ और खुली बातचीत के लिए बेहद जरूरी भी है।

मेरी एक और खासियत रही है कि मुझे शोध करने और स्नातक छात्रों के मेंटर बनने के अवसर मिले हैं। मेरा शोधकार्य पशुओं में जीवाणु संक्रमण पर केंद्रित रहा है जो मनुष्यों में भी फैल सकता है। हमने जीवाणु में प्रतिसूक्ष्मजीवी क्षमता के उद्भव और प्रसार के बारे में अध्ययन किया है- यह एक महत्वपूर्ण पशु तथा मानव स्वास्थ्य संबंधी मुद्दा है, - जिसके तहत महामारी अध्ययन तथा सूक्ष्मजीवी जेनेटिक तकनीकों के सामंजस्य का उपयोग किया जाता है। यह बेहद फायदेमंद है कि एक चिकित्सकीय समस्या को पशु चिकित्सकों तथा किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना गया, और तब इसके अनुसंधान के लिए शोधकार्यों आयोजित किए गए।

आप एक वर्ष से डीन हैं और उससे पहले कई वर्षों से अंतरिम डीन रहे हैं। एक पशुचिकित्सा कॉलेज में डीन के रूप में आपके जीवन का कौन सा दिन खास था?
डीन का काम विविधता और चुनौतियों से भरा होता है- इसमें हर दिन अपने साथ कई तरह की गतिविधियां लेकर आता है, जिसके तहत कॉलेज के निर्देशन के बारे में जरूरी फैसलों से लेकर पूर्वछात्रों, सरकारी प्रतिनिधियों या राष्ट्रीय संगठनों के सामने अपने कार्यक्रमों का प्रस्तुतिकरण करना शामिल है।

मेरा काफी समय तो शिक्षक के रूप में व्यस्त होता है। चाहे वह विभागीय बैठकों, प्रस्तुतियों या उन गतिविधियों में शामिल हो, जो बहाली, सेवाअवधि या प्रोन्नति से संबंधित हो, लेकिन एक डीन निश्चित ही ऐसा व्यक्ति है जो कॉलेज के अनुशासन के सभी पहलुओं के बारे में गहराई से सोचता रहता है, और शिक्षण प्रयासों में सहयोग के लिए आवश्यक वित्त-प्रबंध, सुविधाएं, प्रौद्योगिकियां तथा अन्य जरूरतों की व्यवस्था कर सकता है। डीन प्रबंधन के लिए शिक्षकों की आवाज का माध्यम है, और वह उनके महत्वपूर्ण रूप से आवश्यक कार्य की तात्कालिकता और योग्यता को अभिव्यक्त करने की क्षमता है।

उसका दूसरा महत्वपूर्ण सरोकार छात्रों पर केंद्रित है। चाहे कक्षा के नियोजन लक्ष्यों को निर्धारित करने में सहायता करके, या कॉलेज की विशिष्ट हैसियत को बनाए रखने तथा उसमें और वृद्धि करने के लिए, या छात्रों के साथ मिलकर उनके अनुभवों को जानने के द्वारा, हर तरह से एक डीन उन्हें अपने क्षेत्र में और अधिक अभ्यासी तथा जानकार के रूप में विकसित बनाने के लिए उनसे अवश्य ही जुड़ा रहता है।

कारनेल यूनिवर्सिटी स्थित कॉलेज ऑफ वेटनरी मेडिसिन बिल्डिंग

मैंने भी कॉलेज के पूर्वछात्रों तथा अन्य समर्थकों से जुड़कर उनसे उपहार तथा वित्तीय सहायता हासिल करने में अपना समय दिया ताकि शोध के लिए डॉलर, छात्रवृत्तियां तथा आधारभूत परियोजनाओं के लिए धन मुहैया कराया जा सके जिससे शिक्षकों और छात्रों के पास उनकी अकादमिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधन हों।

कारनेल में, और खासतौर पर कॉलेज ऑफ वेटनरी मेडिसिन में, हमारे समुदाय में काम के लिए समय तय होता है, चाहे यह स्थानीय स्तर पर हो, क्षेत्रीय, राज्य स्तर पर या उससे भी आगे। हमारे पास बड़े अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम हैं, इसलिए मेरे कार्यदिवस के तहत हर रोज अंतर्राष्ट्रीय सहभागियों के साथ संपर्क करना, दुनियाभर से मिलने आनेवाले आगंतुकों की मेजबानी तथा अमेरिका और दुनियाभर के गंतव्यस्थलों की यात्रा करने के कार्य सम्मिलित हैं।

मेरे अधिकतर दिवस कर्मचारियों की समस्याओं को सुलझाते हुए तथा हमारे लिए एक अच्छा कार्यस्थल बनाने में व्यस्तता के साथ बीतते हैं।

डॉ. वार्निक ने भारत भर में पशु स्वास्थ्यसेवा में उन्नति के लिए पशुचिकित्सकों के लिए शैक्षणिक अवसर जारी रखने के महत्व पर बल दिया

मैं भी अपने शोधकार्य पर कार्य करता रहता हूं जिसके तहत मैं साल्मोनेला महामारी और आंत के जीवाणुओं में प्रतिसूक्ष्मजीवी प्रतिरोध पर काम करता रहता हूं, और मैं पशु औषधि, महामारी विज्ञान तथा पशुचिकित्सा व्यवसाय प्रबंधन से संबद्ध मुद्दों पर भी कुछ शिक्षण कार्य करता हूं।

भारत में पशु स्वास्थ्यसेवा के क्षेत्र का आप कैसे आकलन करते हैं? इसमें स्पष्ट रूप से क्या कमियां हैं और इन कमियों को पाटने के लिए क्या किया जाना चाहिए?
फिलहाल, भारत में पशु स्वास्थ्यसेवा को व्यापक बनाने के लिए महत्वपूर्ण आवश्यकताएं तथा अवसर मौजूद हैं। यही वजह है कि टाटा ट्रस्ट ने पशु चिकित्सा मानकों को बदलने के साथ ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्यसेवा के स्तरोन्नयन के लिए आवश्यक मूलभूत संरचना बनाने में निवेश का निर्णय किया है जो काफी महत्वपूर्ण है। उनके प्रयास, और साथ ही सहयोगी संगठनों तथा सरकार के सहयोग से, पशुचिकित्सा क्षमता में वृद्धि होगी और पशु स्वास्थ्यसेवा में नवाचार की त्वरित शुरुआत हो पाएगी। कारनेल यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ वेटनरी मेडिसिन इस महत्वपूर्ण प्रयास का अंग बनकर प्रसन्नता का अनुभव करता है।

निरोधक औषधियों की उपलब्धता में सुधार, जो पशु तथा मानव दोनों के लिए लाभदायक हों, एक महत्वपूर्ण समस्या है जिसपर तुरंत ध्यान दिया जाना चाहिए। शायद इसका एक बेहतरीन उदाहरण है कि किस प्रकार विश्वव्यापी रैबीज टीकाकरण कार्यक्रम से एक ऐसी बीमारी को कम करने में सहायता मिली जिससे हर वर्ष 59,000 लोग मरते हैं- जिसमें किसी भी अन्य देश की अपेक्षा सबसे अधिक 20,000 लोग अकेले भारत में अकालमृत्यु के शिकार होते हैं। मुंबई में इस नए मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पीटल की स्थापना से, सहचर पशुओं के लिए एक सस्ते, उच्चगुणवत्तायुक्त मेडिकल देखभाल के मॉडल की उपलब्धता के द्वारा इस दिशा में आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी, और ऐसा करते हुए, पशु कल्याण तथा मानव स्वास्थ्य में भी उन्नति हो पाएगी।

पशु चिकित्सा एक त्वरित परिवर्तनशील पेशा है, तथा इसमें कार्यरत पशुचिकित्सकों तथा तकनीशियनों के लिए कई प्रकार के शैक्षणिक अवसर, प्रशिक्षण, कार्यशालाएं तथा कार्यक्रम उपलभ कराते रहने की बेहद आवश्यकता है। सौभाग्यवश, इनमें से कई अवसर नई टाटा ट्रस्ट परियोजना के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे।

भारत में पशुओं के लिए आवश्यक विशेषज्ञ औषधि का सबसे सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र क्या हो सकता है?
पशुओं की विभिन्न स्वास्थ्यसेवा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, यह आवश्यक है कि इलाज का एक मिश्रण प्रदान किया जाए जैसे अस्थिचिकित्सा, ऑन्कोलॉजी, दंतचिकित्सा, डर्मेटोलॉजी तथा ट्रॉमा शल्यचिकित्सा आदि। तेजी से स्वास्थ्यलाभ के लिए जितनी जरूरी चिकित्सकीय विशेषज्ञता और बचावकारी स्वास्थ्यसेवा है उतना ही जरूरी है पशु देखभाल तथा पोषण के बारे में पशुपालकों को शिक्षित करना। मुंबई का नया पशुचिकित्सा हॉस्पीटल तथा आपातसेवा क्लीनिक ये दोनों सेवाएं प्रदान करेगा। इसके अलावा, यह क्लीनिक इस क्षेत्र में सीखने के लिए प्रतिभागी पशुचिकित्सकों तथा तकनीशियनों के लिए कई तरह के प्रशिक्षण भी मुहैया कराएगा, जिससे देशभर में इसका प्रचार-प्रसार हो सकेगा।

ज्ञान के संदर्भ में भारत के पास पशुचिकित्सा विज्ञान को देने के लिए क्या है? उदाहरण के लिए, क्या यहां उष्णकटिबंधीय रोगों के इलाज पर या दुधारुपशु देखभाल के बारे में कोई विशेष जानकारी उपलब्ध है जो भारत में खोजा गया है?
भैंस तथा डेयरी दुधारुपशु पालन में नए दृष्टिकोणों से लेकर विशिष्ट रोगों के इलाज तक में- जैसे सींग का कैंसर- भारत के पशुचिकित्सकों तथा किसानों के पास प्रभूत मात्रा में जानकारी है जिसे दुनिया के पशुचिकित्सा समुदाय के साथ बांटा जा सकता है।

पशुपालन गतिविधियों में नवाचार- जैसे गुजरात का पशु छात्रावास- बेहद नवीन उद्यम है और यह भारत के ग्रामीण किसानों को आर्थिक उन्नति प्रदान करता है, और साथ ही खाद्य गुणवत्ता में सुधार और पशुपालन उत्पादों में धारणीयता भी लाता है। सहकारी दुधारुपशु प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के इस प्रकार के प्रयासों को अन्य देशों में उन समस्याओं के समाधान के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है जो दुनियाभर के छोटीजोत वाले किसानों में आमतौर पर पाए जाते हैं।

इसके अलावा, सहचर पशुओं की तेजी से बढ़ती हुई आबादी के साथ, भारत इस क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने के लिए बेहद अनुकूल स्थिति में है।

यहां और ज्यादा पशु देखभाल केंद्रों तथा अस्पतालों की बेहद जरूरत है। अभी भी, आयस्तर (खासतौर पर डेयरी तथा पॉल्ट्री किसानों में) काफी नहीं है कि वे स्वास्थ्यसेवा का खर्च वहन कर सकें। इस दोषपूर्ण चक्र को तोड़ने के लिए क्या किया जा सकता है?
टाटा ट्रस्ट ने भारत के पशुचिकित्सकों तथा तकनीकीशियनों या सहायक-पशुचिकित्सकों की क्षमता में वृद्धि के लिए प्रयास के क्षेत्र में पहला कदम बढ़ा दिया है। एक ऐसी व्यवस्था में प्रशिक्षित पशुचिकित्सा स्वास्थ्यसेवा पेशेवरों की सहायता के द्वारा, जिससे उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा प्रदान की जा सके, यह परियोजना बल को कई गुना बढ़ानेवाली होगी, जिसके प्रभाव आशाजनक रूप से संपूर्ण भारत में परिलक्षित होंगे।

यहां बेहद आवश्यक स्वास्थ्यसेवा जरूरतों के लिए सहजता से उपलब्ध सस्ते समाधानों के पहचान की संभावनाएं भी खासतौर पर मौजूद हैं। हमारे कॉलेज के शिक्षकों तथा कर्मियों के पास अमेरिका में तथा अंतर्राष्ट्रीय रूप से क्लीनिकल देखभाल तथा शिक्षा प्रदान करने के क्षेत्र में हमारे अनुभवों के आधार काफी कुछ जानकारियां देने के लिए हैं, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि भारत के पशुचिकित्सकों तथा पेशेवरों के साथ निकट रूप से संबद्ध होकर कार्य करें ताकि हम स्थानीय़ परिदृश्य और जरूरतों के बारे में समझ सकें जिससे हमारे सहयोग के परिणामस्वरूप प्रभावी तथा धारणीय कार्यक्रम बन सकें।

इस संदर्भ में, मुंबई में पशु अस्पताल के लिए क्या योजनाएं हैं?
यह नया मुंबई पशुचिकित्सा अस्पताल तथा आपातसेवा क्लीनिक सहचर पशुओं के लिए आवश्यक कई प्रकार की सेवाओं के क्षेत्र में काम करेगा। यह पशुओं के लिए उच्चगुणवत्ता की चिकित्सा प्रदान करेगा जिसके तहत विशेषज्ञ सेवाएं सम्मिलित होंगी जैसे अस्थिचिकित्सा, इमेजिंग, दंतचिकित्सा, ट्रॉमा सर्जरी तथा अन्य इलाज। यहां इसके अलावा हर समय आपात सेवा तथा बचावकारी औषधि भी प्रदान की जाएगी, खासतौर पर उन पशुओं के लिए जिनका कोई औपचारिक मालिक नहीं है जो उनके लिए भुगतान कर सके।

इस तरह से, यह एनिमल केयर सेंटर पशु के साथ समुदाय के लिए भी सेवा प्रदान करेगा। और यह कार्य करते हुए, यह वे मानक भी स्थापित करेगा जिनके आधार पर भारत के पशुचिकित्सा उद्योग को काम करना चाहिए।

कार्यबल के परिप्रेक्ष्य में, यह अस्पताल तथा क्लीनिक कार्यरत पशुचिकित्सकों तथा तकनीशियनों के लिए शिक्षा तथा प्रशिक्षण के अवसर मुहैया कराएगा। इससे न केवल उपलब्ध स्वास्थ्यसेवा विकल्पों में वृद्धि होगी, बल्कि इससे देशभर में इनकी पहुंच भी बढ़ेगी।