टाटा टाइटन्स

खुद के लिए रुपए कमाने और औरों के लिए संपदा पैदा करने में अंतर है। यह एक ऐसे व्यवसायिक घराने की कहानी है जिसने देश के लिए संपदा का निर्माण किया है। यह संघर्ष, उत्कंठा, रोमांच व उपलब्धि की कहानी है। यह हमारे मार्गदर्शक प्रवर्तकों की कहानी है।

जमशेदजी टाटा: टाटा समूह के संस्थापक ने 1870 के दशक में मध्य भारत की एक कपड़ा मिल से अपने उद्यम की शुरुआत की। उनकी सशक्त दूरदर्शिता ने भारत के इस्पात और ऊर्जा उद्योगों को प्रोत्साहित किया, तकनीकी शिक्षा की नींव डाली और देश को पिछड़ेपन से औद्योगीकरण की ओर छलांग लगाने में सहायता प्रदान की।

 

 

सर दोराबजी टाटा (चेयरमैन, टाटा सन्स: 1904 – 1932): टाटा स्टील तथा टाटा पावर की स्थापना के द्वारा, जमशेदजी  टाटा के इन ज्येष्ठ पुत्र ने अपने पिता के महान स्वप्न को यथार्थ में बदलने में सहायता की। यह उनके ही नेतृत्व में संभव हुआ कि परोपकार की टाटा की परंपरा निभाते हुए, टाटा की प्रथम धर्मार्थ संस्था, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट का गठन किया गया।

 

 

 

सर रतन टाटा: जमशेदजी  टाटा के इन छोटे पुत्र के व्यक्तित्व में, आम लोगों के संघर्ष के प्रति उनकी संवेदना तथा उनके द्वारा अपनी यथेष्ट समृद्धि का उपयोग कर आम लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार की अभिलाषा अभिव्यक्त होती थी। अपने सारे जीवन में परोपकारी रहे इस शख्स ने एक ट्रस्ट निधि की स्थापना की जो कि “सीखने में विकास के तथा मानव पीड़ा में राहत तथा सार्वजनिक उपयोगिता के अन्य कार्यो” के लिए है। सर रतन टाटा ट्रस्ट आज टाटा के ट्रस्टों में दूसरा सबसे बड़ा ट्रस्ट है।

 

 

सर नौरोजी सकलतवाला (चेयरमैन, टाटा सन्स: 1932 – 1938): सर दोराबजी टाटा के बाद, 1932 में सर नौरोजी सकलतवाला टाटा समूह के अध्यक्ष बने। सर दोराबजी के सहयोगी निष्ठावान अधिकारी तथा एक कुशल खिलाड़ी के रूप में प्रख्यात सर नौरोजी को उनकी सोच तथा अन्य सभी बातों से ज्यादा कर्मचारियों के कल्याण को प्राथमिकता देने की अभिलाषा के लिए जाना जाता था।

 

 

जेआरडी टाटा (चेयरमैन, टाटा सन्स: 1938 – 1991): टाटा समूह के इन पूर्व अध्यक्ष ने 1932 में इस उपमहाद्वीप के नागर विमानन क्षेत्र में एक एयरलाइन की शुरुआत कर अग्रणी की भूमिका निभाई, जिसे आज एयर इंडिया के रूप में जाना जाता है। यह जेआरडी द्वारा परंपराओं से अलग हटकर प्राप्त की गई उन कई उपलब्धियों में से केवल एक है, जिन्होंने लगभग आधे से ज्यादा दशक तक समूह की नियति को निर्देशित किया था, और जिन्हें इन कार्यों की वजह से हमेशा याद किया जाएगा।

 

 

नवल टाटा: व्यवसाय, खेल, प्रशासन तथा श्रमिक संबंधों के क्षेत्र में नवल टाटा के कई योगदान रहे, जिन्होंने उन समाजों और समुदायों को लौटाने की टाटा की भावना को बेहतर तरीके से अभिव्यक्त किया, जहां टाटा के उद्यम विकसित हैं।