टाटा मेडिकल सेंटर

भारत में कोलकाता स्थित टाटा मेडिकल सेंटर कैंसर शोध, निदान और उपचार का एक अत्याधुनिक केंद्र है।

टाटा मेडिकल सेंटर (टीएमसी) का उद्घाटन 16 मई, 2011 को रतन टाटा द्वारा किया गया था। यह विशेषकर पूर्वी एवं पूर्वोत्तर भारत और बांग्लादेश के कैंसर रोगियों की मदद करने के लिए लक्षित एक परोपकारी पहल है। इस केन्द्र का नेतृत्व इसके निदेशक डॉ मेमन चांडी द्वारा किया जाता है।
 
टीएमसी का कथित मिशन के कैंसर रोगियों की इलाज और रोकथाम को बढ़ावा देना और उनके लिए पुनर्वास एवं उपचारात्मक देखभाल प्रदान करना है। कैंसर से पीड़ित बच्चों पर विशेष जोर दिया जाएगा। टीएमसी एक गुणवत्तापूर्ण कैंसर-देखभाल फैसिलिटी है जो पूरी तरह से नहीं लेकिन विशेष रूप से क्षेत्र के गरीबों की आवश्यकताओं को पूरा करता है। परियोजना के पहले चरण में 170 रोगियों के लिए स्थान है, और अतिरिक्त 150 रोगियों (इन आंकड़ों में वाह्यरोगी शामिल नहीं हैं।) के लिए क्षमता विस्तार करने का प्रावधान है। लगभग 50 प्रतिशत बेड वंचितों के मुफ्त इलाज के लिए निर्धारित किए गए हैं। शेष 50 फीसदी रोगी रियायती या भुगतान श्रेणियों के होंगे, और उपार्जित धन का उपयोग संस्था का सहयोग करने के लिए किया जाएगा। केंद्र के बाकी खर्च धर्मार्थ दानों द्वारा पूरे किए जायेंगे।

कोलकाता के बाहरी इलाके राजारघाट में स्थित इस संस्थान तक कोलकाता शहर और शहर के हवाई अड्डे से आसानी से पहुँचा जा सकता है। केंद्र में जल्दी ही प्रेमाश्रय नामक एक आश्रय घर होगा, जो मरीजों और उनके रिश्तेदारों के लिए मुफ्त आवास एवं भोजन प्रदान करेगा।
 
टीएमसी का प्रबंधन टाटा मेडिकल सेंटर ट्रस्ट द्वारा किया जाएगा, जिसका गठन इसी उद्देश्य के लिए किया गया है। केन्द्र में बाह्य रोगी, अंतःरोगी, चिकित्सकीय, नैदानिक, टेलीमेडिसिन और अन्य सेवायें उपलब्ध हैं।

शीर्षस्तरीय निदान एवं उपचार सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए टीएमसी में अत्याधुनिक उपकरण मौजूद हैं। इसमें, सर्जरी, विकिरण कैंसर विज्ञान, चिकित्सा कैंसर विज्ञान, पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, मनोरोग विज्ञान एवं चिकित्सा सामाजिक कार्य जैसी विभिन्न धाराओं के विशेषज्ञों से युक्त रोग प्रबंधन टीमें हैं।

परियोजना के लिए रु. 350 करोड़ का वित्त पोषण और रु. 40 करोड़ का अतिरिक्त कोष जमा, टाटा ट्रस्ट, विभिन्न टाटा कंपनियों तथा टाटा समूह की प्रमोटर होल्डिंग कंपनी, टाटा संस, द्वारा प्रदान किया गया था। भारत और विदेश से कई शुभचिंतकों ने इस नेक काम के लिए योगदान दिया। इसके अलावा, भारत सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार ने भी इस परियोजना में सहयोग किया।

टीएमसी का लक्ष्य एक ऐसा संगठन बनना है, जो कैंसर के क्षेत्र में सेवाओं, शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्ट हो। 3 लाख से अधिक भारतीय कैंसर से पीड़ित हैं, लेकिन इस रोग के साथ जीने वालों के इलाज के लिए सुविधाएं बहुत कम हैं। इस केंद्र ने एक सपने को हकीकत में बदल दिया है, जिसमें कई लोगों ने योगदान दिया है और टाटा की परोपकार की परंपरा में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।