टाटा सेंट्रल आर्काइव्ज़

टाटा सेंट्रल आर्काइव्ज़ भविष्य की पीढ़ियों के लिए टाटा की समृद्ध इतिहास के संरक्षण के लिए उत्‍तरदायी है। यह सूचना, पत्राचार, फोटोग्राफ, पुरस्कार, ट्राफी, पदक, प्रशंसा पत्र, पेंटिंग्‍स, वीडियो एवं ऑडियो क्लिप आदि का विशाल संग्रह है।

किसी संगठन के इतिहास को संरक्षित करने में अभिलेखागार एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। टाटा रिकॉर्ड्स के स्टोरहाउस को स्थापित करने का विचार मूलरूप से जेआरडी टाटा ने प्रस्तुत किया था: ऐसा तब हुआ था जब जमशेदजी नुसेरवानजी टाटा के पहले उद्यम - दी इम्प्रेस मिल्स नागपुर के शताब्दी उत्सव को मनाने के लिए समूह के इतिहास को लिखने का काम सौपा जा रहा था। उस समय जेआरडी ने अभिलेखों के केन्द्रीय स्वामित्व की कमी को महसूस किया।

टाटा सेंट्रल आर्काइव्ज़ (टीसीए) को जेआरडी टाटा द्वारा जनवरी 1991 में बॉम्बे (अब मुंबई) में आरंभ किया गया था; 1997 में यह टाटा सर्विसेस का एक विभाग बन गया। 2001 में अभिलेखागार को पुणे ले जाया गया। टाटा मैनेजमेंट ट्रेनिंग सेंटर के हरे भरे परिसर में टीसीए का औपचारिक उद्घाटन 13 फरवरी 2001 को टाटा सन्स के चेयरमैन रतन टाटा द्वारा किया गया था।

भविष्य की पीढ़ियों के लिए टाटा के समृद्ध इतिहास को संभालने का जिम्मा टीसीए के पास है। यह जानकारियों की खान, महत्वपूर्ण दस्तावेजों का भंडार है, जिसमें पत्राचार, फोटोग्राफ, पुरस्कार, ट्रॉफियां, मेडल, साइटेशंस, पेंटिंग, वीडियो व ऑडियो क्लिप, आदि शामिल है ये सभी टाटा संगठन तथा उसकी बहुमुखी गतिविधियों के जन्म तथा विकास से संबंधित हैं।   

टाटा के इतिहास के अलावा यह अभिलेखागार, भारतीय औद्योगिकीकरण पर अनेकों दस्तावेजों को सहेजे हुए है तथा इसमें दादाभाई नौरोजी व महात्मा गाँधी जैसे राष्ट्रीय नेताओं के साथ पत्राचार भी रखे हुए हैं। यह सामग्री शोधकर्ताओं तथा इतिहासकारों के लिए बेहद उपयोगी है जो कितने ही सालों के संरक्षित अभिलेखों को देख सकते हैं।  उदाहरण के लिए, अभिलेखागार के सबसे पुराने दस्तावेज जमशेदजी टाटा के पहले उद्यम सेंट्रल इंडिया वीविंग एंड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी से संबंधित हैं जो 1875 के हैं।

टीसीए ने पुराने अभिलेखों की बहाली और संरक्षण में महत्वपूर्ण विशेषज्ञता विकसित की है। यह उन बड़े व्यावसायिक तथा अभिलेख संस्थानों के लिए एक बड़ी चुनौती है जो ऐतिहासिक, भावनात्मक, वित्तीय तथा कानूनी लिहाज से बहुमूल्य कागज, चमड़े की जिल्दसाजी, फोटोग्राफ, पेंटिंग, आदि वाली अभिलेख सामग्री की देखभाल के लिए इन-हाउस प्रक्रिया का विकास करना चाहते हैं। टीसीए द्वारा दी जाने वाली सेवाओं में से एक इस विषय पर कार्यशालाएं तथा प्रशिक्षण देना शामिल है।

टीसीए के मुख्य उद्दश्यों में से एक, जन्म से लेकर अब तक के समूह के इतिहास में एक अंतःदृष्टि प्रदान करना है तथा उन लोगों के गुणों की सराहना करना है जिन्होने इसे आकार दिया।  ये अभिलेख, कर्मचारियों को न केवल उनके संगठन के इतिहास व परम्परा में अंतःदृष्टि प्रदान करते हैं बल्कि वे शोधकर्ताओं व विद्यार्थियों के लिए जानकारी का एक केन्द्रीय बिंदु भी हैं।

The re-created office of JRD Tata

इन अभिलेखों में जमशेदजी एन टाटा तथा जेआरडी टाटा से संबंधित अभिलेखों का स्थान गौरवशाली है। प्रदर्शनी हॉल में जमशेदजी नौशेरवानजी टाटा (1839-1904) के जीवन को प्रदर्शित किया गया है, जो कि टाटा घराने के संस्थापक थे तथा उसका विशेष फोकस उनके औद्योगिक कार्यों व परोपकारी कार्यों पर हैं। प्रदर्शन को कई खंडों में वर्गीकृत किया गया है जिसमें टाटा परिवार, जमशेदजी के जीवन के चरण, तीन टेक्सटाइल मिलें, एस्प्लांडा हाउस, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेस, टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी, ताज महल होटल तथा टाटा इलेक्ट्रिक कंपनी शामिल हैं।

एक और दिलचस्प प्रस्तुति जेआरडी के मुंबई ऑफिस का सटीक प्रतिरूप तथा उनके मेडलों जैसे भारत रत्न, यूएन जनसंख्या पुरस्कार तथा पद्म विभूषण का प्रदर्शन शामिल है। अन्य महत्वपूर्ण प्रदर्शित वस्तुओं में भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन को जेएन टाटा एन्डाउमेंट स्कॉलरशिप दिए जाने से संबंधित मूल अनुबंध तथा यादगार निशानियां जैसे जमशेदजी टाटा द्वारा उपयोग की गयी कुर्सियां शामिल हैं। बहाल किए गए फोटो तथा संबद्ध दस्तावेज प्रत्येक खंड की गहराई को बढ़ा देते हैं।
 
टीसीए ने टाटा कंपनियों के विभिन्न ऑफिसों मे बिखरे दस्तावेजों को एक जगह पर ला दिया है।  कुछ अभिलेख पिछली शताब्दी के शुरुआती सालों के हैं। दस्तावेजों को पहले फ्यूमिगेट किया जाता है तथा फिर विशेष सुरक्षा के लिए लैमिनेट किया जाता है। सूचना प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रहे बदलावों के साथ बने रहने के लिए टीसीए ने संदर्भ सामग्री का कम्प्यूटरीकरण शुरु किया है। महत्वपूर्ण तथा बहुत उपयोग वाले दस्तावेजों को कम्प्यूटर में तथा माइक्रोफिल्म में सहेजा जाता है। दस्तावेजो को रखने वाले कार्ट के बॉक्सों को खास तौर पर दीमक से बचाव वाला बनाया जाता है। अभिलेखागार में सावधानी के साथ संरक्षित फाइलो में इतिहास कीमती स्वरूप में रखा रहता है।