जनवरी 2016 | सिन्थिआ रोड्रिग्स

उत्थान के लिए शिक्षा प्रदान करना

टाटा ट्रस्ट के समर्थन से संचालित परियोजना का आभार, जिसके माध्यम से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में शिक्षण केन्द्रों का प्रसार हुआ है

नेल्सन मंडेला ने कहा था, “शिक्षा वह सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिसका इस्तेमाल दुनिया को बदलने में किया जा सकता है।” गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने की वजह से मदरसों में पढ़ने वाले 70,000 से अधिक बच्चो की जिन्दगी में महत्वपूर्ण बदलाव को देखा जाना - श्री मंडेला के उक्त कथन की सत्यता को प्रमाणित करता है।

उत्तर प्रदेश के टिकैतगंज में एक स्कूल में बच्चे कक्षा में ध्यान लगा कर पढ रहे हैं

मुस्लिम बच्चों, खास तौर से लड़कियों के लिए मदरसे स्वाभाविक शैक्षिक विकल्प हैं। इस स्थिति की जिम्मेदारी कुछ हद तक सरकारी स्कूलों तक आसान पहुंच का न होना है। यह वह जगह है, जहाँ वे गणित, विज्ञान और भाषा में बुनियादी योग्यता के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा प्राप्त करते हैं। ये संस्थान समुदाय का एक अभिन्न अंग हैं।

हालांकि, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के छह दशक बाद भी इन संस्थानों के लिए पर्याप्त समर्थन की कमी के कारण, मदरसे अभी भी अपने छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में कार्यरत एक संगठन, नालंदा रिसोर्स सेंटर फॉर एजुकेशनल इनोवेशन एवं प्लानिंग ने इन बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का फैसला किया। इस दिशा में आरंभिक प्रयासों के बीच, नालंदा ने शिक्षकों के लिए एक प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया।

टाटा ट्रस्ट द्वारा समर्थित तथा मदरसा शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत सात गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) में से एक, नालंदा 1996 से ही बेहतर शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने तथा क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ने के लिए रचनात्मक हस्तक्षेप (क्रिएटिव इंटरवेंशन) बनाने में लगा हुआ है। यह बिहार और झारखंड के अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश के सीतापुर, बाराबंकी और बहराइच जिलों में कार्यरत है।

टाटा ट्रस्ट की एसोसिएट डायरेक्टर, तारा सबावाला कहती हैं, “हमारा इरादा उन बच्चों तक पहुँचने का है, जो मदरसों में हैं। उन अधिकांश क्षेत्रों में जिनमें हम काम कर रहे हैं, मदरसे बच्चों के लिए उपलब्ध एकमात्र शैक्षणिक विकल्प हैं।”

नालंदा ने यह महसूस किया कि मदरसा छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने का एकमात्र तरीका गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को उनके पास ले जाना है। इस परिवर्तन के सबसे महत्वपूर्ण घटक मुद्दरिस (मदरसा शिक्षक) होंगें, जिन्हें अधिक प्रभावी शिक्षण देने में सक्षम बनाने हेतु फ्लैशकार्ड, शिक्षण-अधिगम सामग्री, आदि सहित गैर-परंपरागत शिक्षण साधनों का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। मुद्दरिस को बाल मनोविज्ञान के बारे में भी बताया गया।

नालंदा के कार्यकारी निदेशक, प्रभात झा कहते हैं, “समाज के वंचित वर्गों के बच्चों के जीवन को छूने के लिए, टाटा ट्रस्ट ने हमारी सोच को नया स्वरूप देने में मार्गदर्शन दिया और हमें बाल-केंद्रित अध्यापन कला को अपनाने के लिए राजी किया। हमारा उद्देश्य विज्ञान, गणित और भाषाओं के शिक्षण के साथ-साथ, मदरसों में दी जाने वाली धर्मनिरपेक्ष शिक्षा, दुनियावीतालीम को बढ़ाने के लिए तकनीकी और शैक्षणिक समर्थन प्रदान करना है।” 

मजे की बात है कि, नालंदा ने मदरसा कार्यक्रम को अकस्मात्‌ शुरू किया। 2001 में, श्री झा राज्य सरकार के जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम के एक भाग के रूप में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस आयोजन में, उन्होंने बहुत से तरीकों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी, जिनके उपयोग से शिक्षा को बच्चों के लिए और अधिक रोचक बनाया जा सकता है।

सत्र के दौरान उपस्थित कुछ मुद्दरिस उनकी बातों में रुचि ले रहे थे, किन्तु वे इस बात को लेकर संशय में थे कि मदरसा प्रबंधन शिक्षण की ऐसी अपरम्परागत विधियों के लिए अनुमति देगा या नहीं। अपनी आशंकाओं के बावजूद, उन्होंने श्री झा को अपने मदरसे के प्रबंधन से बात करने के लिए आमंत्रित किया।

इसके बाद की बातचीत का परिणाम यह हुआ कि नालंदा को बाराबंकी जिले के मसौली ब्लॉक में एक मदरसे में अपना कार्यक्रम आरंभ करने के लिए आमंत्रित किया गया। इस तरह के हस्तक्षेप की भारी जरूरत के अहसास के साथ-साथ उनके हस्तक्षेप के प्रभाव की समझ ने नालंदा को एक ऐसा कार्यक्रम तैयार करने के लिए प्रेरित किया जो मदरसों में प्राथमिक शिक्षा की एक औपचारिक प्रणाली स्थापित करने के द्वारा गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने में मदरसे के बच्चों की मदद करेगा।

आज ऐसे 460 से अधिक मदरसे हैं, जिन्हें नालंदा के हस्तक्षेपों से लाभ हुआ है। वे मौलवी जो इन मदरसों के प्रमुख हैं, वे श्री झा और उनकी टीम से मिल कर और अपनी दैनिक दिनचर्या के दौरान प्राप्त सुझावों को शिक्षण में शामिल करने का प्रयास करते हैं।

नालंदा की उपलब्धि इस मायने में महत्वपूर्ण थी कि यह प्रचलित नजरिए को बदलने में कामयाब रहा। मौलवियों ने इस बात को समझा कि पुरानी प्रणालियाँ अब कारगर नहीं हैं तथा इसमें संशोधन करना समय की मांग है, इस दृष्टि से नालंदा द्वारा सुझाई गई अपरंपरागत विधियों को एक मौका दिया जा सकता है।

टाटा ट्रस्ट के प्रयास उत्तर प्रदेश, बिहार तथा झारखंड के मदरसों में शैक्षिक नवजागरण ला रहे हैं

नालंदा के हस्तक्षेपों का महत्व जल्द ही मदरसों की प्रबंधन टीमों द्वारा भी स्वीकार किया गया, जिनमें से कइयों को सहायता का अनुरोध करने के लिए नालंदा के कार्यालय बुलाया गया। अब मदरसा कार्यक्रम को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी हो गया था। श्री झा और उनकी टीम ने उन मौलवियों का चयन किया, जो सर्वाधिक उत्साही और प्रतिबद्ध थे और उन्हें रिसोर्स पर्सन के रूप में प्रशिक्षित किया; उन्हें विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया ताकि उनके संस्थान मॉडल मदरसों के रूप में कार्य कर सकें।

हाल ही में, नालंदा ने शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक को शामिल करना शुरू किया है। दस मदरसों ने ITE [शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक के लिए एकीकृत दृष्टिकोण] के उपयोग का लाभ उठाना शुरू कर दिया है। यह कार्यक्रम शिक्षण गतिविधियों को डिजाइन करने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण देता है, ताकि छात्र स्कूली विषयों में अपनी समझ को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का उपयोग कर सकें।

नालंदा ने, मदरसों में प्राथमिक शिक्षा की सर्वोत्तम विधियां तथा मदरसा शिक्षा में प्राथमिक-स्तर के पाठ्यक्रम में एकरूपता, जैसे विषयों पर राष्ट्रीय स्तर के वार्षिक सेमिनारों का आयोजन भी किया है।

वह प्रभाव जिसे नालंदा ने हासिल किया है, अभी भी आवश्यकता की अधिकता को देखते हुए सागर की एक बूंद के समान है। केवल उत्तर प्रदेश में ही लगभग 100,000 से अधिक मदरसे हैं। बहुत कुछ किया जाना बाकी है, और टाटा ट्रस्ट द्वारा समर्थित नालंदा, एक समय में एक मदरसे को विशिष्ट बनाने के लिए उत्सुक है।

यह लेख टाटा रिव्यू के जनवरी 2016 संस्करण में टाटा ट्रस्ट के बारे में प्रकाशित कवर स्टोरी का एक हिस्सा है:
पुनर्परिभाषित लोकोपकार
टाटा ट्रस्ट ने एकीकरण, प्रौद्योगिकी के उपयोग, समर्थन, साझेदारी आदि के माध्यम से - अपने अनेक परोपकारी प्रयासों के प्रभाव को गहन बनाने के लक्ष्य से नवीनीकरण का मार्ग निर्धारित किया है
'टाटा ट्रस्ट को अपने आप को अद्यतन बनाए रखना होगा'
रतन टाटा, चेयरमैन टाटा ट्रस्ट, ने ट्रस्ट के विकसित होते परोपकार संबंधी दृष्टिकोण, भविष्य की प्रगति तथा भारत के सामने खड़े प्राथमिकता वाले मामलों के बारे में बात की
स्वाद भरा समाधान
टाटा ट्रस्ट की एक विशिष्ट सार्वजनिक-निजी साझीदारी ने यह सुनिश्चित किया है कि हजारों आदिवासी बच्चे संपूर्ण आहार का आनंद लें
आहार के बढ़ते कदम
भारत में कुपोषण से निपटना एक अहम जरूरत है, और यह टाटा ट्रस्ट द्वारा ध्यान केंद्रित किए जाने वाले क्षेत्रों में से एक है
शुद्ध लाभ पक रहे हैं
टाटा ट्रस्ट द्वारा अपने सहयोगियों के साथ मिलकर गुजरात में चलाए जाने वाले क्लीन कुकिंग और इंटरनेट जागरुकता कार्यक्रम से संगठन की मंशा और उसके प्रभाव का पता चलता है
उत्थान के लिए शिक्षा प्रदान करना
टाटा ट्रस्ट के समर्थन से संचालित परियोजना का आभार, जिसके माध्यम से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में शिक्षण केन्द्रों का प्रसार हुआ है
पूंजी तथा उत्कृष्टता
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आशाओं की फसल, भरपूर लाभ
महाराष्ट्र के अंदरूनी हिस्सों में संचालित टाटा ट्रस्ट की एक पहल हजारों गरीब किसानों को सहायता प्रदान करती है, जिन्हें पारंपरिक खेती से हटने के लिए और अधिक लाभदायक फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है
ग्रामीण समृद्धि
टाटा ट्रस्ट का ग्रामीण आजीविका एवं समुदाय पोर्टफोलियो का लक्ष्य बहुत से उपायों के माध्यम से गरीबी में कमी करना है
कदम-दर-कदम भविष्य का निर्माण
टाटा ट्रस्ट के समर्थन ने विशेष रूप से गुजरात में हजारों प्रवासियों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां सुरक्षित करने, वित्तीय सुरक्षा पाने तथा अपने जीवन को रूपांतरित करने में सक्षम किया है
ग्रामीण रुग्णता का एक शहरी संस्करण
टाटा ट्रस्ट ने अपना ध्यान शहरी गरीबी तथा आजीविका पर एक ऐसे मसले के रूप में केन्द्रित किया जिसे एक ऐसे समय केन्द्रित दखल की जरूरत थी, जब अधिकांश लोकोपकारी एजेंसियां ग्रामीण गरीबी पर अपना ध्यान केन्द्रित कर रही थीं
प्रवाह के विपरीत जाना
उत्तराखंड के उत्तुंग गिरि शिखरों पर जल को अमृत माना जाता है और टाटा ट्रस्ट तथा उसके सहयोगियों द्वारा इसे लोगों तक पहुँचाने में दी जाने वाली सहायता ने लोगों के जीवन और उनकी किस्मत को बदल दिया है
अधिकतम सदुपयोग अभियान
टाटा वॉटर मिशन, टाटा ट्रस्ट में निहित सामाजिक विकास क्षमताओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लक्ष्य से प्रेरित है
ताल पुनर्जीवित
टाटा ट्रस्ट के प्रयास से गुजरात के कच्छ में शुरू हुई एक परियोजना द्वारा कौशल का अभ्यास करने वाले संगीतकारों के लिए नए अवसर पैदा कर इलाके की लोक संगीत परंपरा को पुनर्जीवित किया जा रहा है
विस्तृत किया गया कैनवास
टाटा ट्रस्ट का मीडिया, कला एवं संस्कृति थीम भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण करने और उसे साकार करने वाले लोगों पर केंद्रित है