जनवरी 2016 | नितिन राव

ग्रामीण समृद्धि

टाटा ट्रस्ट का ग्रामीण आजीविका एवं समुदाय पोर्टफोलियो का लक्ष्य बहुत से उपायों के माध्यम से गरीबी में कमी करना है

इस पोर्टफोलियो के लाभ पूरे भारत में अधिक निर्धनता वाले ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के एक वर्ग पर देखे गए हैं। समुदाय-आधारित स्थापित संस्थाओं के नेटवर्क के माध्यम से कार्य करने और उन्हें सफल उद्यमों तक ले जाने के द्वारा व्यवस्थित एवं निरंतर विकास को सुनिश्चित किया गया है।

राजस्थान में झाकोदियानाथा गाँव में पके हुए रसदार टमाटरों की अपनी फसल के साथ खड़ा एक किसान

साझेदारी करने वाले संगठनों की तकनीकी और संस्थागत क्षमताओं का निर्माण करना, ट्रस्ट के विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों से बाहर निकलने और नए क्षेत्रों में स्थानांतरित होने से संबंधित कार्यक्रमों को करने की स्वीकृति प्रदान करता है। एकीकरण - जो पिछले कुछ वर्षों के दौरान ‘ग्रामीण आजीविका एवं समुदाय’ (RLC) पोर्टफोलियो का एक प्रमुख विषय रहा है - ने बड़े पैमाने पर सहयोगितापूर्ण कार्यों में संगठनों, परियोजनाओं और समुदायों को एक साथ ला दिया है।

एकीकरण की आवश्यकता के बारे में बताते हुए कार्यक्रम के निदेशक अरुण पांधी कहते हैं, “उदाहरण के लिए, यदि स्वच्छता का अभाव है या यदि आपका प्रभाव माताओं और स्कूलों पर नहीं है, तो सिर्फ पोषण (न्यूट्रिशन) के लिए काम करना पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा, यदि परिवार वहां से इसलिए पलायन कर रहे हैं क्योंकि वहाँ आजीविका का कोई साधन नहीं है, तो ऐसी जगहों पर हमारे कार्यक्रमों से कम लाभ होता है।”

टाटा ट्रस्ट द्वारा संचालित योजनाओं का संयुक्त वार्षिक बजट रु.7 बिलियन है और इसमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से 800 लोग कार्यरत हैं। श्री पांधी कहते हैं, “मानव संसाधन आधार और प्रारूप के उस प्रकार के साथ, वहां कुछ स्पष्ट डिलिवरेबल्स होने चाहिए।” इसका उद्देश्य जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार लाना है। “यदि समुदाय कुछ बुनियादी स्तर तक समृद्ध है, तो विकास संबंधी हस्तक्षेपों को बेहतर सफलता मिल सकती है।”

RLC पोर्टफोलियो के तहत संचालित गतिविधियां विभिन्न भागीदारों के साथ संचालित की जाती हैं और आधा दर्जन से अधिक क्षेत्रीय पहलों के अंतर्गत आती हैं। उनमें शामिल हैं- मध्य भारत पहल, सुखी बलीराजा पहल और खरश विस्तारोत्थान योजना।

मध्य भारत पहल इस क्षेत्र में आदिवासी विकास के मुद्दों के लिए एक व्यापक प्रतिक्रिया प्राप्त करने की तलाश का परिणाम है। यहां समुदाय गरीबी में जीते हैं और उन्हें अक्सर भोजन के अत्यधिक अभाव का सामना करना पड़ता है। कलेक्टिव्स फॉर इंटिग्रेटेड लिवलीहुड इनिशिएटिव्स (CInI), जमशेदपुर - जो कि ट्रस्ट की नोडल एजेंसी है - इस पहल को आधार प्रदान करती है।

अगले चार वर्षों (2016-20) के दौरान, इस पहल का प्रयास 300,000 परिवारों को अपरिवर्तनीय ढंग से गरीबी से बाहर लाने का प्रयास करते हुए चार मध्य भारतीय राज्यों (झारखंड, उड़ीसा, गुजरात और महाराष्ट्र) के 45 ब्लॉकों में परिवर्तन लाना है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य मांग-प्रेरित और बाजार-उन्मुख विकास के माध्यम से ‘लखपति किसानों’ का निर्माण करना है।

2008 में स्थापित सुखी बलीराजा पहल (SBI), विदर्भ के इन छह जिलों में प्रचलित कृषि संकट को समाप्त करने पर केंद्रित है: अमरावती, यवतमाल, वाशिम, वर्धा, बुल्धाना और अकोला। यह कार्यक्रम सामूहिक रूप से 1,400 गांवों वाले 56 क्लस्टरों के 260,000 घरों को कवर करता है।

खरश विस्तारोत्थान योजना पहल क्षेत्रीय परियोजनाओं के माध्यम से और राज्य सरकार के साथ समन्वय में गुजरात के समुद्र तटीय क्षेत्र में समुद्री जल के प्रवेश से संबंधित मुद्दों का निपटान करती है। इसने 17 से अधिक सहभागी संगठनों के साथ साझेदारी स्थापित करने में मदद की है, और विभिन्न लवणता निरोधक पहलों के माध्यम से इसके अंतर्गत 10 तटीय जिलों में 450 से अधिक लवणता प्रभावित गांवों वाले आठ क्लस्टरों के लगभग 151,000 परिवारों को कवर किया गया है। तटीय लवणता निरोधक प्रकोष्ठ यानी कोस्टल सैलिनिटी प्रीवेंशन सेल (CSPC) इस पहल के लिए नोडल संगठन है।

2001 में शुरू की गई हिमोत्थान परियोजना मध्य हिमालय में प्रमुख ग्रामीण विकास के कुछ मुद्दों पर ध्यान देने पर केंद्रित है, जो ज्यादातर पारिस्थितिकी एवं आर्थिक रूप से टिकाऊ आजीविका की दिशा में कार्य करने वाले सतत सामुदायिक संस्थानों का विकास करने से संबंधित है। 2007 में, ट्रस्ट ने हिम्मोत्थान को अपना समर्थन दिया जो इस पहल के लिए नोडल एजेंसी है । हिमोत्थान परियोजना के अंतर्गत चलाई जा रही गतिविधियों में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश राज्यों के 528 गांवों वाले 39 क्लस्टरों के लगभग 42,000 परिवारों को कवर किया जाता है।

उत्तर-पूर्व पहल में वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड के 18 जिलों में फैले 226 गांवों में रहने वाले लगभग 6,400 परिवारों को शामिल किया गया है। यह पहल ग्रामीण समुदायों की आजीविका से जुड़ी चुनौतियों पर ध्यान देती है। ट्रस्ट द्वारा समर्थित नॉर्थ ईस्ट इनिशिएटिव डेवलपमेंट एजेंसी, इस पहल के लिए नोडल एजेंसी है।

रिवाइविंग द ग्रीन रिवॉल्यूशन नामक पहल, प्रचलित चावल-गेहूं एकल-फसल प्रणाली के नकारात्मक प्रभाव से निपटने के लिए पंजाब में फसल विविधीकरण का समर्थन करती है, खासकर उत्पादकता बढ़ाने के लिए विभिन्न फसलों में एकीकृत उत्पादकता प्रबंधन पर भी ध्यान केंद्रित करती है। सफल हस्तक्षेपों और उल्लेखनीय प्रभाव के बाद, टाटा ट्रस्ट ने इस पहल के संचालन क्षेत्र को तमिलनाडु में भी विस्तृत किया है, जहां समान कृषि मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है।

वर्तमान में, ट्रस्ट के परियोजना क्षेत्रों में कृषि एवं संबंद्ध हस्तक्षेपों के माध्यम से दोनों राज्यों के 731 गांवों सहित 29 क्लस्टरों से लगभग 77,000 लाभार्थियों को शामिल किया गया है, इन हस्तक्षेपों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया है और छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका के निर्माण के उद्देश्य पर लक्ष्यित हैं। रिवाइविंग द ग्रीन रिवॉल्यूशन सेल, इस पहल के लिए नोडल संगठन है।

गुजरात में साजोई गाँव में तोड़ने को तैयार पपीतों की अपनी फसल के साथ खड़ी एक किसान

साख से विकास (SSV) - राजस्थान सूक्ष्म वित्त पहल अपने पहले कदम के रूप में, बचत, सस्ते ऋण एवं बीमा की बुनियादी वित्तीय सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के द्वारा ग्रामीण समुदायों द्वारा सामना किए जाने वाले जटिल आजीविका मुद्दों पर ध्यान देने का प्रयास करती है। इसके बाद मुख्यधारा के बैंकों और सरकारी कार्यक्रमों के साथ ब्रिज लिंकेज और मौजूदा एवं नए आजीविका स्रोतों से प्राप्त रिटर्न को बढ़ाने में मदद करने के लिए हस्तक्षेपों का सहारा लिया जाता है।

SSV द्वारा अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास निधि (IFAD), राजस्थान सरकार और टाटा ट्रस्ट द्वारा संयुक्त रूप से वित्त पोषित मिटिगेटिंग पोवर्टी इन वेस्ट राजस्थान (MPower) परियोजना के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। SSV और MPower के तहत संचालित फ़ील्ड परियोजनाओं में सामूहिक रूप से 2775 गांवों में फैले 10,672 स्वयं सहायता समूहों में व्यवस्थित 130,000 से अधिक परिवारों को शामिल किया गया है।

इस आधार पर टाटा ट्रस्ट के काम के प्रभाव की व्याख्या करते हुए, श्री पांधी कहते हैं, “हमारी शक्ति हमारी पीछे की कड़ियों में निहित है। अकेले हमारे आजीविका और शिक्षण कार्यक्रमों में ही 4 मिलियन लोगों को कवर किया गया है। इस देश में हमारे जैसी बहुत थोड़ी एजेंसियां या संस्थान हैं।” 

यह लेख टाटा रिव्यू के जनवरी 2016 संस्करण में टाटा ट्रस्ट के बारे में प्रकाशित कवर स्टोरी का एक हिस्सा है:
पुनर्परिभाषित लोकोपकार
टाटा ट्रस्ट ने एकीकरण, प्रौद्योगिकी के उपयोग, समर्थन, साझेदारी आदि के माध्यम से - अपने अनेक परोपकारी प्रयासों के प्रभाव को गहन बनाने के लक्ष्य से नवीनीकरण का मार्ग निर्धारित किया है
'टाटा ट्रस्ट को अपने आप को अद्यतन बनाए रखना होगा'
रतन टाटा, चेयरमैन टाटा ट्रस्ट, ने ट्रस्ट के विकसित होते परोपकार संबंधी दृष्टिकोण, भविष्य की प्रगति तथा भारत के सामने खड़े प्राथमिकता वाले मामलों के बारे में बात की
स्वाद भरा समाधान
टाटा ट्रस्ट की एक विशिष्ट सार्वजनिक-निजी साझीदारी ने यह सुनिश्चित किया है कि हजारों आदिवासी बच्चे संपूर्ण आहार का आनंद लें
आहार के बढ़ते कदम
भारत में कुपोषण से निपटना एक अहम जरूरत है, और यह टाटा ट्रस्ट द्वारा ध्यान केंद्रित किए जाने वाले क्षेत्रों में से एक है
शुद्ध लाभ पक रहे हैं
टाटा ट्रस्ट द्वारा अपने सहयोगियों के साथ मिलकर गुजरात में चलाए जाने वाले क्लीन कुकिंग और इंटरनेट जागरुकता कार्यक्रम से संगठन की मंशा और उसके प्रभाव का पता चलता है
रचनात्मक बढ़त की खोज में
टाटा ट्रस्ट अपने कार्यक्रमों की पहुँच और कार्यान्वयन को विस्तारित करने का प्रयास करता है जिसके लिए प्रौद्योगिकी और समाधानों में नवप्रवर्तन अनिवार्य है
उत्थान के लिए शिक्षा प्रदान करना
टाटा ट्रस्ट के समर्थन से संचालित परियोजना का आभार, जिसके माध्यम से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में शिक्षण केन्द्रों का प्रसार हुआ है
पूंजी तथा उत्कृष्टता
समुदाय के जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में टाटा ट्रस्ट की पहलों को जोड़ने से लाभार्थियों को लाभ प्रदान करने की दिशा में सफलता मिली है
आशाओं की फसल, भरपूर लाभ
महाराष्ट्र के अंदरूनी हिस्सों में संचालित टाटा ट्रस्ट की एक पहल हजारों गरीब किसानों को सहायता प्रदान करती है, जिन्हें पारंपरिक खेती से हटने के लिए और अधिक लाभदायक फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है
कदम-दर-कदम भविष्य का निर्माण
टाटा ट्रस्ट के समर्थन ने विशेष रूप से गुजरात में हजारों प्रवासियों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां सुरक्षित करने, वित्तीय सुरक्षा पाने तथा अपने जीवन को रूपांतरित करने में सक्षम किया है
ग्रामीण रुग्णता का एक शहरी संस्करण
टाटा ट्रस्ट ने अपना ध्यान शहरी गरीबी तथा आजीविका पर एक ऐसे मसले के रूप में केन्द्रित किया जिसे एक ऐसे समय केन्द्रित दखल की जरूरत थी, जब अधिकांश लोकोपकारी एजेंसियां ग्रामीण गरीबी पर अपना ध्यान केन्द्रित कर रही थीं
प्रवाह के विपरीत जाना
उत्तराखंड के उत्तुंग गिरि शिखरों पर जल को अमृत माना जाता है और टाटा ट्रस्ट तथा उसके सहयोगियों द्वारा इसे लोगों तक पहुँचाने में दी जाने वाली सहायता ने लोगों के जीवन और उनकी किस्मत को बदल दिया है
अधिकतम सदुपयोग अभियान
टाटा वॉटर मिशन, टाटा ट्रस्ट में निहित सामाजिक विकास क्षमताओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लक्ष्य से प्रेरित है
ताल पुनर्जीवित
टाटा ट्रस्ट के प्रयास से गुजरात के कच्छ में शुरू हुई एक परियोजना द्वारा कौशल का अभ्यास करने वाले संगीतकारों के लिए नए अवसर पैदा कर इलाके की लोक संगीत परंपरा को पुनर्जीवित किया जा रहा है
विस्तृत किया गया कैनवास
टाटा ट्रस्ट का मीडिया, कला एवं संस्कृति थीम भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण करने और उसे साकार करने वाले लोगों पर केंद्रित है