जनवरी 2016 | फिलिप चाको

पुनर्परिभाषित लोकोपकार

टाटा ट्रस्ट ने एकीकरण, प्रौद्योगिकी के उपयोग, समर्थन, साझेदारी आदि के माध्यम से - अपने अनेक परोपकारी प्रयासों के प्रभाव को गहन बनाने के लक्ष्य से नवीनीकरण का मार्ग निर्धारित किया है

आप किसी लोकोपकार के ऐसे विचार को और भी बेहतर कैसे बनाते हैं जिसने पूरे भारत के लिए एक सदी से भी अधिक समय से असंख्य लोगों तथा समुदायों की सेवा की है एवं उनको स्थिरता प्रदान किया है? यह वो प्रश्न था जिसे टाटा ट्रस्ट ने दो वर्ष पूर्व स्वयं से तब किया था जब इसने अपने समर्थन से चलने वाले असंख्य सामाजिक उत्थान के कार्यक्रमों की प्रभावकारिता और प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए एक अभ्यास शुरू किया।

स्वास्थ्य व शिक्षा से आजीविका तथा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन जैसे अनेक क्षेत्रों की व्यापक श्रंखला में भारत के जरूरतमंदों के बीच अनेक लोगों को सहायता का हाथ बढ़ाते हुए परोपकार के कार्यों में टाटा ट्रस्ट अनुकरणीय हैं

अनेक चर्चाओं और वाद-विवाद के बाद हासिल उत्तर, उस नवीनीकरण के आधार बने हैं जिसने भारत के सबसे बड़े, सबसे व्यापक तथा आनुषंगिक चैरिटेबल फाउंडेशन को नई दिशा प्रदान की है। टाटा ट्रस्ट का मूल प्रयोजन तथा अधिदेश अपरिवर्तित बना रहा जो कि उन लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर करना है, जिनको यह छूता है।

यही वह कारण है जिसे टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा द्वारा 1892 में स्थापित किए गए सबसे पहले ट्रस्ट, जेएन टाटा एन्डाउमेंट के समय से पोषित किया जाता रहा है। टाटा परिवार के सदस्यों द्वारा आने वाले वर्षों में अन्य अनेक दूसरे लोकोपकारी संस्थान स्थापित किए गए।

इन विभिन्न ट्रस्टों द्वारा सामुदायिक विकास परियोजनाओं को संचालित करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को प्रदान किए गए वित्तीय समर्थन -यह उनके लोकोपकारी कार्यों का पसंदीदा तरीका था - ने पिछले दशकों में उत्कृष्ट परिणाम दिए हैं। लेकिन क्या ये आगे लंबी दूरी तय कर सके? क्या उनके प्रयासों का प्रभाव अधिक हो सकता था? क्या वे तत्कालीन समय की विकासपरक चुनौतियों के प्रति अधिक फुर्तीले व संवेदनशील हो सके? क्या वे सामूहिक छतरी के नीचे विचार व कार्य कर सके?

ये उन सवालों में से कुछ सवाल थे जिन्होंने दिसंबर 2012 में टाटा समूह के चेयरमैन के रूप में सेवानिवृत्त होने के बाद रतन टाटा के दिमाग में घर कर रखा था। श्री टाटा, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन थे और उन्होंने इस भूमिका का निर्वाह करना जारी रखा, लेकिन अब वे इस समूह के एकाधिक संघटकों के संचालन हेतु अपना पर्याप्त समय व ऊर्जा देने में सक्षम थे।

ट्रस्ट के संचालन में श्री टाटा की गंभीर संलग्नता ने उस संस्थान पर गहरा असर डाला, जो अपने निर्माताओं की विरासत के प्रति वफादार रहते हुए अपने कामकाज के तरीकों को लेकर काफी हद तक सेट हो गया था। श्री टाटा का मानना था कि रूपांतरण न सही, लेकिन बदलाव तो होने ही चाहिए जिससे कि प्रभाव की दृष्टि से ट्रस्ट की प्रतिष्ठा में अधिक वृद्धि हो। उनका यह मानना भी था कि ट्रस्ट के क्रियाकलापों का समय समय पर मूल्यांकन जरूरी है और वह भी किसी ऐेसे मूल्यांकनकर्ता द्वारा जो इस घेरे से बाहर का हो।

लोकोपकारी संगठनों के मूल्यांकन तथा सलाह देने का कार्य करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय अलाभकारी संस्था, ब्रिजस्पैन ग्रुप को मूल्यांकन के लिए नियुक्त किया गया। इन्होंने उन कार्यों में से अधिकांश का समर्थन किया जिनको ट्रस्ट पहले से कर रहा था लेकिन और भी क्या बेहतर किया जा सकता है इस पर बुद्धिमान सलाह भी दी।

टाटा ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य तथा टाटा समूह के लंबे समय तक कारपोरेट दिग्गज रहे आरके कृष्ण कुमार कहते हैं, “हम देखना चाहते थे कि क्या हमको अपना ध्यान-क्षेत्र बदलना होगा अथवा हमें हमारे अनुदानों के लिए नए क्षेत्रों की तलाश करनी होगी। हम जो कुछ अच्छा कर रहे थे उसे जारी रखना चाहते थे। लेकिन हम आज के राष्ट्र निर्माण के मामलों तथा कमियों पर भी विचार करना चाहते थे।”   

अब विकास में सीधी भागीदारी आवश्यक है जो जमीन पर गतिविधि के रूप में दिखे। यह पहले से चली आ रही परिपाटी की तुलना में एक क्रांतिकारी बदलाव है, जहां पर ट्रस्ट द्वारा संसाधनों को एनजीओ के हाथों में सौंप दिया जाता था तथा उन संसाधनों को लागू किए जाने की निगरानी की जाती थी।

टाटा ट्रस्ट के कार्यकारी ट्रस्टी, आर वेंकटरमणन  का नजरियाट्रस्ट की प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट है। "यदि आप इस मूल बात को समझ जाएं कि हम किसको लाभ देने का प्रयास कर रहे हैं और हम क्यों वजूद में हैं तो एक सीधी रेखा हमें जमशेदजी टाटा व उनके सिद्धांतों तक ले जाएगी। यह उस मूलभूत सिद्धांत को प्रस्तुत करती है जिसमें हमारा वजूद उन लोगों के समुदायों के जीवन की गुणवत्ता में अंतर लाना है जिनकी हम सेवा कर रहे हैं।

अपने लोकोपकारी प्रयासों के लिए टाटा ट्रस्ट के पास एक ‘पीला (यलो) कार्ड’ एजेंडा है। यह वाक्यांश पीले कागज के उस टुकड़े से प्रकाश में आया जिस पर श्री टाटा ने निम्नलिखित पांच बिंदु लिखे थे: बेहतर पैमाना; मापने योग्य प्रभाव; परियोजनाओं को समर्थन देने की निर्धारित अवधि; यह सुनिश्चित करना कि ट्रस्ट द्वारा समर्थन हटा लेने पर ये परियोजनाएं खुद को सहारा दे सकें; और वैश्विक साथियों और सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ बेंच मार्किंग, जिसका एक हिस्सा सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध प्रौद्योगिकी हासिल करना है।

वृहन मुंबई के नगर निगम के साथ सहयोग में टाटा ट्रस्ट ने साफ-सफाई के काम में अमानवीय, असुरक्षित तथा अशोभनीय कार्य स्थितियों को समाप्त करने के लिए मिशन गरिमा कार्यक्रम को विकसित किया है

टाटा ट्रस्ट द्वारा निर्धारित क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण एक ऐसा दृष्टिकोण है जो किसी क्षेत्र विशेष के गांवों के समूहों में किसी सामाजिक उत्थान से संबंधित पहल को कई विषयगत क्षेत्रों – उदा., स्वास्थ्य, आजीविका, शिक्षा आदि का आपसी संबंध - वाले कार्यक्रमों से जोड़ने के लिए कहता है।।

टाटा ट्रस्ट के कार्यक्रम निदेशक अरुण पांधी कहते हैं, “समय के साथ लोकोपकार भी अपने आप में विकसित हुआ है।  हम अब संस्थानों के निर्माण पर ध्यान नहीं देते हैं। इसके अलावा, हमारे दान की निधि भी काफी बढ़ गयी है, यह 1996 में लगभग रु.4 करोड़ थी जो अब प्रतिवर्ष रु.7 अरब हो गयी है।”

लोकोपकार के क्षेत्र में टाटा ट्रस्ट की साख व्यापक स्तर पर है जिसे वर्षों के प्रयास से अर्जित किया गया है, इसके द्वारा पूरे भारत में फैले समुदायों के जीवन और रहन-सहन के स्तर को बेहतर बनाने में सहायता की गयी है। पुनर्परिभाषित टाटा ट्रस्ट के पास पहले से कहीं अधिक कार्य करने तथा अधिक लोगों तक पहुंचने का विश्वास व संभावना है।

यह लेख टाटा रिव्यू के जनवरी 2016 संस्करण में टाटा ट्रस्ट के बारे में प्रकाशित कवर स्टोरी का एक हिस्सा है:
'टाटा ट्रस्ट को अपने आप को अद्यतन बनाए रखना होगा'
रतन टाटा, चेयरमैन टाटा ट्रस्ट, ने ट्रस्ट के विकसित होते परोपकार संबंधी दृष्टिकोण, भविष्य की प्रगति तथा भारत के सामने खड़े प्राथमिकता वाले मामलों के बारे में बात की
स्वाद भरा समाधान
टाटा ट्रस्ट की एक विशिष्ट सार्वजनिक-निजी साझीदारी ने यह सुनिश्चित किया है कि हजारों आदिवासी बच्चे संपूर्ण आहार का आनंद लें
आहार के बढ़ते कदम
भारत में कुपोषण से निपटना एक अहम जरूरत है, और यह टाटा ट्रस्ट द्वारा ध्यान केंद्रित किए जाने वाले क्षेत्रों में से एक है
शुद्ध लाभ पक रहे हैं
टाटा ट्रस्ट द्वारा अपने सहयोगियों के साथ मिलकर गुजरात में चलाए जाने वाले क्लीन कुकिंग और इंटरनेट जागरुकता कार्यक्रम से संगठन की मंशा और उसके प्रभाव का पता चलता है
रचनात्मक बढ़त की खोज में
टाटा ट्रस्ट अपने कार्यक्रमों की पहुँच और कार्यान्वयन को विस्तारित करने का प्रयास करता है जिसके लिए प्रौद्योगिकी और समाधानों में नवप्रवर्तन अनिवार्य है
उत्थान के लिए शिक्षा प्रदान करना
टाटा ट्रस्ट के समर्थन से संचालित परियोजना का आभार, जिसके माध्यम से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में शिक्षण केन्द्रों का प्रसार हुआ है
पूंजी तथा उत्कृष्टता
समुदाय के जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में टाटा ट्रस्ट की पहलों को जोड़ने से लाभार्थियों को लाभ प्रदान करने की दिशा में सफलता मिली है
आशाओं की फसल, भरपूर लाभ
महाराष्ट्र के अंदरूनी हिस्सों में संचालित टाटा ट्रस्ट की एक पहल हजारों गरीब किसानों को सहायता प्रदान करती है, जिन्हें पारंपरिक खेती से हटने के लिए और अधिक लाभदायक फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है
ग्रामीण समृद्धि
टाटा ट्रस्ट का ग्रामीण आजीविका एवं समुदाय पोर्टफोलियो का लक्ष्य बहुत से उपायों के माध्यम से गरीबी में कमी करना है
कदम-दर-कदम भविष्य का निर्माण
टाटा ट्रस्ट के समर्थन ने विशेष रूप से गुजरात में हजारों प्रवासियों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां सुरक्षित करने, वित्तीय सुरक्षा पाने तथा अपने जीवन को रूपांतरित करने में सक्षम किया है
ग्रामीण रुग्णता का एक शहरी संस्करण
टाटा ट्रस्ट ने अपना ध्यान शहरी गरीबी तथा आजीविका पर एक ऐसे मसले के रूप में केन्द्रित किया जिसे एक ऐसे समय केन्द्रित दखल की जरूरत थी, जब अधिकांश लोकोपकारी एजेंसियां ग्रामीण गरीबी पर अपना ध्यान केन्द्रित कर रही थीं
प्रवाह के विपरीत जाना
उत्तराखंड के उत्तुंग गिरि शिखरों पर जल को अमृत माना जाता है और टाटा ट्रस्ट तथा उसके सहयोगियों द्वारा इसे लोगों तक पहुँचाने में दी जाने वाली सहायता ने लोगों के जीवन और उनकी किस्मत को बदल दिया है
अधिकतम सदुपयोग अभियान
टाटा वॉटर मिशन, टाटा ट्रस्ट में निहित सामाजिक विकास क्षमताओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लक्ष्य से प्रेरित है
ताल पुनर्जीवित
टाटा ट्रस्ट के प्रयास से गुजरात के कच्छ में शुरू हुई एक परियोजना द्वारा कौशल का अभ्यास करने वाले संगीतकारों के लिए नए अवसर पैदा कर इलाके की लोक संगीत परंपरा को पुनर्जीवित किया जा रहा है
विस्तृत किया गया कैनवास
टाटा ट्रस्ट का मीडिया, कला एवं संस्कृति थीम भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण करने और उसे साकार करने वाले लोगों पर केंद्रित है