पूर्व अध्यक्ष

विगत 100 से अधिक वर्षों में टाटा समूह का नेतृत्व करने वाले महापुरुषों की प्रोफाइल

जमशेदजी टाटा:टाटा समूह के संस्थापक ने 1870 के दशक में मध्य भारत की एक कपड़ा मिल से अपने उद्यम की शुरुआत की। उनकी सशक्त दूरदर्शिता ने भारत के इस्पात और ऊर्जा उद्योगों को प्रोत्साहित किया, तकनीकी शिक्षा की नींव डाली और देश को पिछड़ेपन से औद्योगीकरण की ओर छलांग लगाने में सहायता प्रदान की।

 

 

सर दोराबजी टाटा (चेयरमैन, टाटा सन्स: 1904 – 1932): टाटा स्टील तथा टाटा पावर की स्थापना के द्वारा, जमशेदजी  टाटा के इन ज्येष्ठ पुत्र ने अपने पिता के महान स्वप्न को साकार करने में सहायता की। यह उनके ही नेतृत्व में संभव हुआ कि परोपकार की टाटा की परंपरा निभाते हुए टाटा की प्रथम धर्मार्थ संस्था सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट का गठन किया गया।

 

 

सर नौरोजी सकलतवाला (चेयरमैन, टाटा सन्स: 1932 – 1938):सर दोराबजी टाटा के बाद, 1932 में सर नौरोजी सकलतवाला टाटा समूह के अध्यक्ष बने। सर दोराबजी के सहयोगी निष्ठावान अधिकारी तथा एक कुशल खिलाड़ी के रूप में प्रख्यात सर नौरोजी को उनकी सोच तथा अन्य सभी बातों से ज्यादा कर्मचारियों के कल्याण को प्राथमिकता देने की अभिलाषा के लिए जाना जाता था।

 

 

जे आरडी टाटा (चेयरमैन, टाटा सन्स: 1938 – 1991):टाटा समूह के इन पूर्व अध्यक्ष ने 1932 में इस उपमहाद्वीप के नागर विमानन क्षेत्र में एक एयरलाइन की शुरुआत कर अग्रणी की भूमिका निभाई, जिसे आज एयर इंडिया के रूप में जाना जाता है। यह जेआरडी द्वारा परंपराओं से अलग हटकर प्राप्त की गई उन कई उपलब्धियों में से केवल एक है, जिन्होंने लगभग आधे से ज्यादा दशक तक समूह की नियति को निर्देशित किया था, और जिन्हें इन कार्यों की वजह से हमेशा याद किया जाएगा।

 

 

रतन टाटा (चेयरमैन, टाटा सन्स: 1991 – 2012): रतन एन. टाटा 1991 से लेकर 2012 तक टाटा समूह की प्रोमोटर होल्डिंग कंपनी टाटा सन्स के अध्यक्ष रहे थे। इनके कार्यकाल के दौरान समूह का राजस्व कई गुना बढ़कर 2011-12 में कुल $100 बिलियन से अधिक हो गया। अधिक पढ़ें

 

 

सायरस पी मिस्त्री (चेयरमैन, टाटा सन्स: 2012 – 2016): सायरस पी मिस्त्री, दिसंबर 2012 से अक्टूबर 2016 तक टाटा संस के चेयरमैन रहे। पहले वे शपूरजी पलूनजी समूह के प्रबंध निदेशक थे। अधिक पढ़ें