जनवरी 2016 | नितिन राव

आहार के बढ़ते कदम

भारत में कुपोषण से निपटना एक अहम जरूरत है, और यह टाटा ट्रस्ट द्वारा ध्यान केंद्रित किए जाने वाले क्षेत्रों में से एक है

भारत में होने वाली पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की कुल मौतों में से लगभग 45 प्रतिशत मामलों के लिए कुपोषण जिम्मेदार है – यह आंकड़ा भारत के सबसे शर्मनाक आंकड़ों में से एक है। निम्नलिखित की तरह सिर्फ चेतावनी के लिए: भारतीय बच्चों में से लगभग 40 प्रतिशत का विकास अवरुद्ध है जिसकी वजह से उनकी संज्ञानात्मक बुद्धि और उत्पादकता जीवनपर्यंत प्रभावित होती है; पांच वर्ष से कम आयु के लगभग 70 प्रतिशत बच्चे एनीमिया (यानी खून की कमी से) ग्रस्त हैं, इस आबादी में भारत के उच्चतम आय समूहों के बच्चे भी हैं।

महाराष्ट्र सरकार, टाटा ट्रस्ट तथा बंगालुरू की एनजीओ अक्षय पात्र के बीच की साझीदारी का परिणाम, केन्द्रीकृत रसोई राज्य में आश्रम स्कूलों में विद्यार्थियों को पोषक आहार प्रदान करती है

कुपोषण इतना महत्वपूर्ण मुद्दा है जिसके नतीजे एक राष्ट्र के समग्र आर्थिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने के लिए बाल मृत्यु दर से परे भी बहुत दूर तक फैले हुए हैं। साक्ष्यों से पता चलता है कि बच्चों को उनके जीवन के पहले हजार दिनों में – यानी गर्भधारण से दो वर्ष की आयु तक - सही पोषण मिलने से हर साल 1 मिलियन से अधिक जानें बचाई जा सकती हैं,  तथा मधुमेह (डाइबिटिज़) जैसी बीमारियों के पैदा होने के जोखिम को कम किया जा सकता है, इसके अलावा देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में साल-दर-साल 11 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो सकती है। यह भारत के कुपोषण के बोझ के व्यापक और खतरनाक परिणाम थे, जिसने टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन रतन टाटा को कुपोषण को एक प्राथमिकता क्षेत्र बनाने के लिए प्रेरित किया।

यह पोषण पहल एक छोटे से कार्यबल (टास्क फ़ोर्स) के रूप में कुछ वर्ष पहले शुरू हुई जो सीधे श्री टाटा और कार्यकारी ट्रस्टी आर वेंकटरमन को रिपोर्ट करती थी। श्री टाटा के अनुसार, बड़े पैमाने पर समस्या की मौजूदगी एवं उसकी जटिलता चुनौती तो थी ही, यह भी चिंताजनक था कि सरकार द्वारा कई वर्षों से प्रदान किए जा रहे समाधान भी कारगर नहीं थे। 

इसके जवाब में, कार्यबल ने अन्य समाधान तलाशने शुरू किए। श्री वेंकटरमन कहते हैं: “पोषण के मुद्दे में भोजन अनुपूरक (सप्लिमेंट) उपलब्ध कराने के अलावा भी ध्यातव्य बाते हैं। इसमें समग्र स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली, स्वच्छ जल की उपलब्धता, आहार आवश्यकताओं के बारे में जागरूकता, स्वच्छता आवश्यकताएं तथा आजीविका के अवसर भी जुड़े हुए हैं।” 

विभिन्न हितधारकों के साथ कई बार विचार-विमर्श करने के बाद, ट्रस्ट ने दो अत्यंत भिन्न दृष्टिकोणों के जरिए कुपोषण के मुद्दे से निपटने का फैसला किया।

उनमें से एक तरीका एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से विकास-अवरोध तथा अपक्षय के उन मुद्दों पर ध्यान देना है जिनमें मातृत्व देखभाल, जल और साफ-सफाई, पर्याप्त विविधता के साथ भोजन की उपलब्धता और सही देखभाल प्रदान करने वाली प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करने पर ध्यान दिया जाना है। 

दूसरा तरीका सूक्ष्म-पोषक आधारित हस्तक्षेप - जैसे कि स्कूलों में मध्याह्न भोजन (मिडडे मील) पकाने में आयरन-फोर्टिफाइड नमक का उपयोग करना – पर केन्द्रित करना था तथा इसे एक ऐसे स्तर तक ले जाना था जहां एनीमिया से निपटने के में यह व्यापक प्रभाव तथा महत्वपूर्ण परिणाम प्रदर्शित करेगा।

टाटा ट्रस्ट ने कई समाधानों का परीक्षण करना शुरू कर दिया है, जो समस्या के बहुआयामी प्रकृति के अनुकूल है। अधिकांश परियोजनाएं केंद्र या राज्य सरकारों के साथ साझेदारी में हैं, जो बड़े पैमाने पर और दीर्घकालिक स्थिरता को सुनिश्चित करती हैं।

पोषण परियोजनाओं में से एक गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) के उपचार से संबंधित है, जो हर साल आठ मिलियन बच्चों को प्रभावित करता है। इसका विशिष्ट उपचार - जो कि अस्पताल में भर्ती होना है - वंचित समुदायों के लिए एक किफायती समाधान नहीं है। वैश्विक साक्ष्य बताते हैं कि SAM के 80 प्रतिशत मामलों को सामुदायिक स्तर पर प्रबंधित किया जा सकता है । हालांकि, भारत में इस के लिए कोई मानकीकृत प्रोटोकॉल नहीं है और टाटा ट्रस्ट ने इसका समाधान खोजना शुरू कर दिया है।

इसने महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में एक त्रि-भुजीय परीक्षण परियोजना शुरू की है, जिसमें SAM मामलों में विभिन्न ऊर्जा-युक्त खाद्य पदार्थों के उपयोग का परीक्षण करना शामिल है। इस कार्यक्रम में 100,000 से अधिक बच्चों की जांच की जा चुकी है और अब तक लगभग 10,000 अत्यधिक कुपोषित बच्चों का उपचार किया गया है।

कुपोषण से निपटने का एक अन्य आवश्यक पहलू प्रमुख भोजन के सुदृढ़ीकरण (फ़ोर्टिफ़िकेशन) के माध्यम से विटामिन और खनिज की कमी को नियंत्रित करना है। नमक और खाद्य तेल, अपनी उच्च घरेलू पैठ एवं सार्वभौमिक उपभोग के कारण आयरन, आयोडीन, विटामिन ए और डी की आपूर्ति के उत्कृष्ट वाहक हैं।

टाटा ट्रस्ट के लिए, सुदृढीकृत प्रमुख खाद्य पदार्थों का संवर्धन करना एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है, चूँकि इस विधि से अत्यंत किफायती कीमत पर आबादी में सूक्ष्मपोषण की स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है।

वर्तमान में, पोषण परिणाम को प्रभावित करने वाले सभी कारकों का विश्लेषण करने के लिए कोई मजबूत संदर्भ-विशिष्ट उपकरण मौजूद नहीं हैं। टाटा ट्रस्ट ने इस उपकरण के विकास के लिए बेंगलुरू स्थित सेंट जॉन्स रिसर्च इंस्टिट्यूट के साथ साझेदारी की है। इस परियोजना का प्रथम चरण महाराष्ट्र में नंदुरबार और राजस्थान में सिरोही में शुरू किया जाएगा।

संक्षेप में, ट्रस्ट द्वारा बड़े पैमाने पर, महत्त्वपूर्ण प्रभाव और निरंतरता प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है। श्री टाटा की दृष्टि और व्यक्तिगत प्रतिबद्धता से प्रेरित पोषण पहल का लक्ष्य उन लाखों बच्चों में वास्तविक और प्रत्यक्ष अंतर पैदा करना है, जो आज जन्म लेने वाले हैं और भविष्य में भारत की शक्ति बनेंगें।

विश्लेषण एवं वकालत
हस्तक्षेप एवं प्रभाव, पोषण पहल का केंद्रबिंदु है तथा इसे वकालत और विश्लेषणों के सहवर्ती कारकों द्वारा समर्थन मिल रहा है। ट्रस्ट ने द इंडिया न्यूट्रिशन इनिशिएटिव (TINI) की स्थापना की है, जो पोषण को समर्थन प्रदान के लिए समर्पित मंच है। इसने विशेषज्ञों के समूह को इकट्ठा किया है जो 14 सूक्ष्म-पोषक तत्वों से शुरू करके सभी पोषण-संबंधी कार्यक्रमों पर ट्रस्ट को सलाह देगा।

प्रभाव को मापने के लिए विश्लेषण का बढ़ता उपयोग एक दिलचस्प साइडबार है। ट्रस्ट ने पाया है कि इस मार्ग को अवरोधित करने वाले मुख्य खंडों में से एक अद्यतित और विश्वसनीय डेटा की कमी है। श्री वेंकटरमन कहते हैं, “हम एक सार्वजनिक डोमेन डेटा पोर्टल बनाना चाहते हैं, जो सरकारी स्रोतों, संस्थाओं, गैर-लाभकारी संस्थानों, आदि से डेटा एकत्र करेगा और इसे एक पठनीय और दृश्य प्रारूप में रखेगा ताकि इसे हर वह व्यक्ति पढ़ सके, जो पोषण के क्षेत्र में काम करता है।”

यह लेख टाटा रिव्यू के जनवरी 2016 संस्करण में टाटा ट्रस्ट के बारे में प्रकाशित कवर स्टोरी का एक हिस्सा है:
पुनर्परिभाषित लोकोपकार
टाटा ट्रस्ट ने एकीकरण, प्रौद्योगिकी के उपयोग, समर्थन, साझेदारी आदि के माध्यम से - अपने अनेक परोपकारी प्रयासों के प्रभाव को गहन बनाने के लक्ष्य से नवीनीकरण का मार्ग निर्धारित किया है
'टाटा ट्रस्ट को अपने आप को अद्यतन बनाए रखना होगा'
रतन टाटा, चेयरमैन टाटा ट्रस्ट, ने ट्रस्ट के विकसित होते परोपकार संबंधी दृष्टिकोण, भविष्य की प्रगति तथा भारत के सामने खड़े प्राथमिकता वाले मामलों के बारे में बात की
स्वाद भरा समाधान
टाटा ट्रस्ट की एक विशिष्ट सार्वजनिक-निजी साझीदारी ने यह सुनिश्चित किया है कि हजारों आदिवासी बच्चे संपूर्ण आहार का आनंद लें
शुद्ध लाभ पक रहे हैं
टाटा ट्रस्ट द्वारा अपने सहयोगियों के साथ मिलकर गुजरात में चलाए जाने वाले क्लीन कुकिंग और इंटरनेट जागरुकता कार्यक्रम से संगठन की मंशा और उसके प्रभाव का पता चलता है
रचनात्मक बढ़त की खोज में
टाटा ट्रस्ट अपने कार्यक्रमों की पहुँच और कार्यान्वयन को विस्तारित करने का प्रयास करता है जिसके लिए प्रौद्योगिकी और समाधानों में नवप्रवर्तन अनिवार्य है
उत्थान के लिए शिक्षा प्रदान करना
टाटा ट्रस्ट के समर्थन से संचालित परियोजना का आभार, जिसके माध्यम से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में शिक्षण केन्द्रों का प्रसार हुआ है
पूंजी तथा उत्कृष्टता
समुदाय के जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में टाटा ट्रस्ट की पहलों को जोड़ने से लाभार्थियों को लाभ प्रदान करने की दिशा में सफलता मिली है
आशाओं की फसल, भरपूर लाभ
महाराष्ट्र के अंदरूनी हिस्सों में संचालित टाटा ट्रस्ट की एक पहल हजारों गरीब किसानों को सहायता प्रदान करती है, जिन्हें पारंपरिक खेती से हटने के लिए और अधिक लाभदायक फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है
ग्रामीण समृद्धि
टाटा ट्रस्ट का ग्रामीण आजीविका एवं समुदाय पोर्टफोलियो का लक्ष्य बहुत से उपायों के माध्यम से गरीबी में कमी करना है
कदम-दर-कदम भविष्य का निर्माण
टाटा ट्रस्ट के समर्थन ने विशेष रूप से गुजरात में हजारों प्रवासियों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां सुरक्षित करने, वित्तीय सुरक्षा पाने तथा अपने जीवन को रूपांतरित करने में सक्षम किया है
ग्रामीण रुग्णता का एक शहरी संस्करण
टाटा ट्रस्ट ने अपना ध्यान शहरी गरीबी तथा आजीविका पर एक ऐसे मसले के रूप में केन्द्रित किया जिसे एक ऐसे समय केन्द्रित दखल की जरूरत थी, जब अधिकांश लोकोपकारी एजेंसियां ग्रामीण गरीबी पर अपना ध्यान केन्द्रित कर रही थीं
प्रवाह के विपरीत जाना
उत्तराखंड के उत्तुंग गिरि शिखरों पर जल को अमृत माना जाता है और टाटा ट्रस्ट तथा उसके सहयोगियों द्वारा इसे लोगों तक पहुँचाने में दी जाने वाली सहायता ने लोगों के जीवन और उनकी किस्मत को बदल दिया है
अधिकतम सदुपयोग अभियान
टाटा वॉटर मिशन, टाटा ट्रस्ट में निहित सामाजिक विकास क्षमताओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लक्ष्य से प्रेरित है
ताल पुनर्जीवित
टाटा ट्रस्ट के प्रयास से गुजरात के कच्छ में शुरू हुई एक परियोजना द्वारा कौशल का अभ्यास करने वाले संगीतकारों के लिए नए अवसर पैदा कर इलाके की लोक संगीत परंपरा को पुनर्जीवित किया जा रहा है
विस्तृत किया गया कैनवास
टाटा ट्रस्ट का मीडिया, कला एवं संस्कृति थीम भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण करने और उसे साकार करने वाले लोगों पर केंद्रित है