ट्रस्ट की परंपरा

टाटा ट्रस्ट परोपकार की एक ऐसी असाधारण गाथा के गुमनाम नायक हैं जिसने असंख्य तरीकों से भारत और उसके नागरिकों को समृद्ध किया है।

जमशेदजी टाटा, टाटा समूह के संस्थापक, और उनके पुत्र दोरब और रतन ने भारत और इसके लोगों की अधिक से अधिक भलाई के लिए अपने द्वारा संस्थापित कई ट्रस्टों के लिए अपने व्यक्तिगत धन दिए। टाटा के ट्रस्ट टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं, जो इस समूह की संस्थापक धारक कंपनी है।

इस संपत्ति से अर्जित धन विभिन्न व्यापक क्षेत्रों में विभिन्न कारणों, संस्थाओं और व्यक्तियों का समर्थन करता है। यह ट्रस्टीशिप का सिद्धांत समूह के कार्यकलाप की उन विधियों का निर्धारण करता है जिसके माध्यम से टाटा को एक अद्वितीय आभा प्राप्त होती है: पारिभाषिक रूप से पूंजीपति, किंतु चरित्र से समाजवादी।

ट्रस्टों के बारे में
दो मुख्य ट्रस्ट हैं जिनका परिचालन टाटा ट्रस्ट की छत्रछाया तले होता है:

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट तथा सहयोगी ट्रस्ट (एसडीटीटी)
इन ट्रस्टों के तहत व्यापक रूप से सम्मिलित क्षेत्र हैं:  प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा ग्रामीण आजीविका; शहरी गरीबी तथा आजीविका; शिक्षा; स्वास्थ्य; नागरिक समाज, प्रशासन तथा मानवाधिकार; तथा मीडिया, कला और संस्कृति। व्यक्तियों के लिए विनियोजन चिकित्सा अनुदानों और यात्रा या शिक्षा अनुदानों के मदों के तहत किए जाते हैं।

एसडीटीटी के ‘सहयोगी ट्रस्ट’ घटक के तहत सम्मिलित हैं टाटा सोशल वेलफेयर ट्रस्ट, आडी टाटा ट्रस्ट, टाटा एजुकेशन ट्रस्ट, जेआरडी टाटा ट्रस्ट, जेआरडी एंड थेल्मा जे टाटा ट्रस्ट, जमशेदजी टाटा ट्रस्ट, जेएन टाटा एनडाउमेंट, लेडी टाटा मेमोरियल ट्रस्ट, तथा लेडी मेहरबाई डी टाटा एजुकेशन ट्रस्टैं।

जहाँ जेएन टाटा एन्डाउमेंट विदेश में स्नातकोत्तर अध्ययन के लिए होनहार भारतीय छात्रों को ऋण छात्रवृत्ति प्रदान करता है, वहीं जेआरडी टाटा ट्रस्ट भारत में अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति देता है। लेडी टाट मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय दोनों प्रकार से छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती है, जिनके माध्यम से ल्यूकेमिया तथा अन्य रक्त-संबंधी बीमारियों में शोध को सहायता प्रदान की जाती है और जिनका उद्देश्य अन्य रोगों से पीड़ित मानव समाज को राहत प्रदान करना है। इसके अलावा, एक युवा शोधकर्ता पुरस्कार किसी पंचवर्षीय डॉक्टर-पश्चात शोध परियोजना हेतु वार्षिक रूप से प्रदान किया जाता है।

लेडी मेहरबाई डी टाटा एजुकेशन ट्रस्ट छात्रवृत्ति युवा भारतीय महिला स्नातकों को विदेशों में उच्चशिक्षा प्राप्त करने में सहायता हेतु प्रदान की जाती है तथा जेआरडी एंड थेल्मा जे टाटा ट्रस्ट मुख्य रूप से महिला तथा बच्चों के स्वास्थ्य तथा शिक्षा क्षेत्र पर केंद्रित है। बाकी ट्रस्ट आम एजेंडा साझा करते हैं। जमशेदजी टाटा ट्रस्ट, टाटा एजुकेशन ट्रस्ट, टाटा सोशल वेलफेयर ट्रस्ट तथा आरडी टाटा ट्रस्ट समग्र विकास के मसलों पर केंद्रित हैं। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट तथा अन्य सहयोगी ट्रस्टों के बारे में और अधिक पढ़ें >>

सर रतन टाटा ट्रस्ट तथा एलायड ट्रस्ट्स (एसआरटीटी)
एसआरटीटी द्वारा गैर-लाभकारी संगठनों, व्यक्तियों तथा संस्थानों को ग्रामीण आजीविका तथा सामुदायिकता; शिक्षा; नागरिक समाज और प्रशासन की उन्नति; कला, शिल्प तथा संस्कृति; और खेल के क्षेत्रों में सहायता प्रदान की जाती है। सर रतन टाटा ट्रस्ट एंड एलायड ट्रस्ट्स के बारे में और अधिक पढ़ें >>

टाटा ट्रस्टों की स्थापना के पीछे की कहानियाँ

टाटा समूह के संस्थापक, जमशेदजी टाटा ने परंपरागत चैरिटी को नए मायने दिए- उनके शब्दों में: "हम लोगों के बीच अधिक मात्रा में एक प्रकार की चैरिटी आम है... यह पैबंद परोपकार है जो निर्वस्त्रों को वस्त्र देती है, गरीब को खिलाती है और रोगियों की सेवा करती है। मैं महान कार्य की निंदा से काफी दूर हूं जिसमें अपने किसी निर्धन या पीड़ित साथी मदद की आवश्‍यकता होती है। [तथापि] जो चीज किसी राष्ट्र या किसी कौम को उन्नत करती है, वह इसके सबसे कमजोर और असहाय सदस्यों को सहारा देना नहीं, बल्कि इसके श्रेष्ठ और सर्वाधिक प्रतिभावान सदस्यों को उन्नत बनाना है, जिससे उन्हें राष्ट्र की महान सेवा करने के योग्य बनाया जा सके।"

कहानियां


स्वास्थ्य सुविधा के लिए ललक
कोलकाता का टाटा मेडिकल सेंटर पूर्वी भारत और पड़ोसी देशों के कैंसर रोगियों के लिए जीवनरेखा के समान है और इसने इस रोग से जूझ रहे रोगियों के उपचार और सेवा के नए मानदंड प्रस्तुत किए हैं।
कला संरक्षण को मिला बढ़ावा।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट द्वारा समर्थित एक कला संरक्षण परियोजना, भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को संभव बना रहा है, जिसमें पुनर्नवीकरण को प्रोत्साहित करते हुए, देशी संरक्षण विधियों का पुनःप्रवर्तन किया जा रहा है।