जनवरी 2016 | नितिन राव

स्वाद भरा समाधान

टाटा ट्रस्ट की एक विशिष्ट सार्वजनिक-निजी साझीदारी ने यह सुनिश्चित किया है कि हजारों आदिवासी बच्चे संपूर्ण आहार का आनंद लें

हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब एक दिन;
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास, हम होंगे कामयाब, एक दिन।

पूरी दुनिया के स्वतंत्रता आदोलनों के प्रसिद्ध स्वतंत्रता गीत की हमेशा याद रहने वाली यह धुन, महाराष्ट्र के नाशिक जिले के इगतपुरी तालुका के मुंढ़ेगांव के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) के प्रांगण से गूंज रही है।

संपूर्ण आहार का आनंद लेते हुए महाराष्ट्र में मुढ़ेगांव के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के विद्यार्थी

राज्य के कठोर आदिवासी पट्टी में रहने वाले गरीब परिवारों से संबंधित स्कूल की लगभग 40 बच्चियां यादें ताजा कर देने वाले तरीके से इस शक्तिशाली गीत को प्रस्तुत कर रही हैं। 500 से अधिक विद्यार्थी - जिनमें लड़के व लड़कियां दोनों हैं - आदिवासी बच्चों के लिए बने आवासीय स्कूल में अध्ययन कर रहे हैं। कठोर खेतों में काम करते या दूर के शहरों में प्रवासी श्रमिकों के रूप में काम करने वाले उनके माता-पिता के लिए अपने बच्चों को इस आवासीय विद्यालय में छोड़ना एक साहसी निर्णय था।

विद्यार्थियों को गुणवत्तापरक शिक्षा, छात्रावासों में रहने की जगह तथा सबसे महत्वपूर्ण रूप से पोषक भोजन मिलता है।

भारत सरकार का जनजातीय कार्य मंत्रालय अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के लाभ के लिए EMRS तथा आवासीय आश्रम विद्यालयों को चलाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है। महाराष्ट्र में चार अंग्रेजी माध्यम के एकलव्य आवासीय विद्यालय हैं, जिसमें से एक मुंढ़ेगांव में है।

जून में, महाराष्ट्र सरकार ने पालघर जिले में मुंढेगांव व कांबलगांव में दो केंद्रीकृत रसोईघर - अन्नपूर्णा किचन - स्थापित करने के लिए टाटा ट्रस्ट तथा बेंगलुरू स्थित एनजीओ अक्षय पात्र के साथ एक सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया। इस विशिष्ट सार्वजनिक-निजी साझीदारी का लक्ष्य राज्य के EMRS तथा आश्रम स्कूलों के छात्रों को सम्पूर्ण आहार प्रदान करना है।

नाशिक तथा पालघर रसोईघरों के टाटा ट्रस्ट एक्ज़ीक्यूटिव इंचार्ज मनोज कुलकर्णी कहते हैं: “आधुनिक केंद्रीकृत रसोईघर, जिसमें आधुनिकतम उपकरण लगे हैं, हर रोज 20,000 भोजन बनाने की क्षमता रखती है। इस समय हम 50 किमी के दायरे में स्थित इस स्कूल तथा नौ अन्य संस्थानों के 3,500 छात्रों की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, जिसमें आश्रम विद्यालय भी शामिल हैं।”

इस रसोईघर को टाटा ट्रस्ट से धन मिल रहा है तथा इस परियोजना का तकनीकी सलाहकार अक्षय पात्र है। विद्यालय के सहायक अध्यापक, शिवाजी पाटिल कहते हैं: “इन विद्यार्थियों में से अनेक ऐसे गांवों से आते हैं जहां पर कुपोषण एक बेहद आम समस्या है। यहां पर उनको जो स्वस्थ भोजन मिल रहा है उससे वे ऊर्जावान हैं और कक्षा में अपना प्रदर्शन सुधार रहे हैं।”

मुंढ़ेगांव विद्यालय का भवन एवं परिसर काफी सुंदर हैं। पहले यह विद्यालय नाशिक में एक किराए के परिसर में था, लेकिन पिछले वर्ष विद्यार्थियों को नवीनतम परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था।

यह संपूर्ण आहार निश्चित रूप से विशेष परिवर्तनकारी रहा है। कक्षा आठ की एक विद्यार्थी मनीषा भैरव कहती है,"यहां पर दिया जाने वाला भोजन मुझे पसंद है; यह पौष्टिक है। हमारे शिक्षक हमें अधिक सब्जियां खाने के लिए कहते हैं।" मनीषा, जिसके माता-पिता किसान हैं, आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी में बोलती है जो एक ऐसी भाषा है, जिससे उसके परिवार में कोई भी परिचित नहीं है।  वह इंजीनियर बनना चाहती है।

मनीषा की ही तरह लता सासने, जिसने अभी-अभी लंच समाप्त किया है तथा अपने दोस्तों के साथ खेलने जाना चाहती है, भोजन की गुणवत्ता की सराहना करती है। उसके माता-पिता भी दूर गांव में खेतों में काम करते है और लता शर्माते हुए बताती है कि वह एक शिक्षिका बनना चाहती है। हमंत खाडे भी आठवीं का विद्यार्थी है तथा सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहता है। वह कहता है,“मैं नाशिक के कॉलेज में जा कर अपनी इंजीनियरिंग करुंगा ।"

ये विद्यार्थी एक बड़े से हॉल के फर्श पर बैठ कर अपने भोजन का आनंद लेते हैं। भोजन सादा सा है – चपाती, सब्जी, चावल व दाल। आहार की परोसी गयी मात्रा बड़ी है और बढ़ते बच्चे बेसब्री से खाना खा रहे हैं। बाद में वे बर्तन धोते हैं और उन्हें रसोईघर में वापस कर देते हैं।

इस विद्यालय के केन्द्रीय रसोईघर में चार चावल पकाने के बर्तन हैं, हर एक की क्षमता 600 लीटर है। दाल के लिए दो बर्तन हैं, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 1,200 लीटर है। श्री कुलकर्णी स्वच्छता के पहलू पर जोर देते हैं। रसोईघर में आने वाले हर व्यक्ति को बालों को कैप से ढंकना होता है, हाथ को कीटाणुनाशक (सैनिटाइज़र) से साफ करना होता है तथा सुनिश्चित करना होता है कि सफाई बरकरार रहे।

वे कहते हैं, “हमारे पास गुणवत्ता नियंत्रण करने वाले कर्मचारी हैं जो सामग्री तथा उन स्थलों की जांच करते रहते हैं जहां पर अनाज व सब्जियां तथा दूसरे सामान रखे जाते हैं। हम सभी अच्छे विनिर्माण अभ्यासों का पालन करते हैं।” रसोई को अच्छी तरह से साफ किया जाता है और दूर स्कूलों के लिए भोजन ले जाने वाले मिनी ट्रकों को भी खाने के पैकेट रखे जाने से पहले साफ किया जाता है।

दूर-दराज के गांवों में पले बढ़े होने के कारण अधिकांश बच्चे उनको दिए जाने वाले खाने से परिचित नहीं होते हैं। श्री कुलकर्णी उस समय को याद करते हैं जब अक्टूबर में नाश्ते में रसोईघर ने इडली और सांबर (लोकप्रिय दक्षिण भारतीय व्यंजन) देना शुरु किया था, अधिकांश बच्चे इसे छूने को तैयार नहीं थे, क्योंकि इन्होंने इस व्यंजन को पहले कभी नहीं खाया था।

वह याद करते हुए कहते हैं, “उन्होंने सांबर तो पी लिया लेकिन इडलियां छूने से इंकार कर दिया। मुझे उनको बताना पड़ा कि ये दक्षिण भारत का एक लोकप्रिय व्यंजन है तथा यह पौष्टिक व स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।” और अब वे चाव के साथ इडली खाते हैं और उनमें से कई तो एक बार में छः इडली तक खा जाते हैं। यह कुछ ऐसी प्रतिक्रिया है जो सभी जुड़े हुए लोगों के मुंह में बेहतरीन स्वाद का सुख देती है!

यह लेख टाटा रिव्यू के जनवरी 2016 संस्करण में टाटा ट्रस्ट के बारे में प्रकाशित कवर स्टोरी का एक हिस्सा है:
पुनर्परिभाषित लोकोपकार
टाटा ट्रस्ट ने एकीकरण, प्रौद्योगिकी के उपयोग, समर्थन, साझेदारी आदि के माध्यम से - अपने अनेक परोपकारी प्रयासों के प्रभाव को गहन बनाने के लक्ष्य से नवीनीकरण का मार्ग निर्धारित किया है
'टाटा ट्रस्ट को अपने आप को अद्यतन बनाए रखना होगा'
रतन टाटा, चेयरमैन टाटा ट्रस्ट, ने ट्रस्ट के विकसित होते परोपकार संबंधी दृष्टिकोण, भविष्य की प्रगति तथा भारत के सामने खड़े प्राथमिकता वाले मामलों के बारे में बात की
आहार के बढ़ते कदम
भारत में कुपोषण से निपटना एक अहम जरूरत है, और यह टाटा ट्रस्ट द्वारा ध्यान केंद्रित किए जाने वाले क्षेत्रों में से एक है
शुद्ध लाभ पक रहे हैं
टाटा ट्रस्ट द्वारा अपने सहयोगियों के साथ मिलकर गुजरात में चलाए जाने वाले क्लीन कुकिंग और इंटरनेट जागरुकता कार्यक्रम से संगठन की मंशा और उसके प्रभाव का पता चलता है
रचनात्मक बढ़त की खोज में
टाटा ट्रस्ट अपने कार्यक्रमों की पहुँच और कार्यान्वयन को विस्तारित करने का प्रयास करता है जिसके लिए प्रौद्योगिकी और समाधानों में नवप्रवर्तन अनिवार्य है
उत्थान के लिए शिक्षा प्रदान करना
टाटा ट्रस्ट के समर्थन से संचालित परियोजना का आभार, जिसके माध्यम से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में शिक्षण केन्द्रों का प्रसार हुआ है
पूंजी तथा उत्कृष्टता
समुदाय के जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में टाटा ट्रस्ट की पहलों को जोड़ने से लाभार्थियों को लाभ प्रदान करने की दिशा में सफलता मिली है
आशाओं की फसल, भरपूर लाभ
महाराष्ट्र के अंदरूनी हिस्सों में संचालित टाटा ट्रस्ट की एक पहल हजारों गरीब किसानों को सहायता प्रदान करती है, जिन्हें पारंपरिक खेती से हटने के लिए और अधिक लाभदायक फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है
ग्रामीण समृद्धि
टाटा ट्रस्ट का ग्रामीण आजीविका एवं समुदाय पोर्टफोलियो का लक्ष्य बहुत से उपायों के माध्यम से गरीबी में कमी करना है
कदम-दर-कदम भविष्य का निर्माण
टाटा ट्रस्ट के समर्थन ने विशेष रूप से गुजरात में हजारों प्रवासियों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां सुरक्षित करने, वित्तीय सुरक्षा पाने तथा अपने जीवन को रूपांतरित करने में सक्षम किया है
ग्रामीण रुग्णता का एक शहरी संस्करण
टाटा ट्रस्ट ने अपना ध्यान शहरी गरीबी तथा आजीविका पर एक ऐसे मसले के रूप में केन्द्रित किया जिसे एक ऐसे समय केन्द्रित दखल की जरूरत थी, जब अधिकांश लोकोपकारी एजेंसियां ग्रामीण गरीबी पर अपना ध्यान केन्द्रित कर रही थीं
प्रवाह के विपरीत जाना
उत्तराखंड के उत्तुंग गिरि शिखरों पर जल को अमृत माना जाता है और टाटा ट्रस्ट तथा उसके सहयोगियों द्वारा इसे लोगों तक पहुँचाने में दी जाने वाली सहायता ने लोगों के जीवन और उनकी किस्मत को बदल दिया है
अधिकतम सदुपयोग अभियान
टाटा वॉटर मिशन, टाटा ट्रस्ट में निहित सामाजिक विकास क्षमताओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लक्ष्य से प्रेरित है
ताल पुनर्जीवित
टाटा ट्रस्ट के प्रयास से गुजरात के कच्छ में शुरू हुई एक परियोजना द्वारा कौशल का अभ्यास करने वाले संगीतकारों के लिए नए अवसर पैदा कर इलाके की लोक संगीत परंपरा को पुनर्जीवित किया जा रहा है
विस्तृत किया गया कैनवास
टाटा ट्रस्ट का मीडिया, कला एवं संस्कृति थीम भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण करने और उसे साकार करने वाले लोगों पर केंद्रित है