अक्तूबर 31, 2017

गिरीश कर्नाड को टाटा लिटरेचर लाइव! से सम्मानित किया जाएगा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 2017

मुंबई: बहुप्रतिष्ठित भारतीय नाटककार, अभिनेता, फिल्म निर्देशक, तथा लेखक गिरीश कर्नाड को टाटा लिटरेचर लाइव! सम्मान देने की घोषणा हुई है। 2017 का लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड। यह पुरस्कार श्री कर्नाड को टाटा लिटरेचर लाइव! के वार्षिक पुरस्कार समारोह आयोजन में प्रदान किया जाएगा, जिसका आयोजन 19 नवंबर, 2017 को नेशनल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स (NCPA), नरीमन प्वाइंट, मुंबई में किया जा रहा है।

टाटा लिटरेचर लाइव! के पूर्व प्राप्तकर्ता लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, एक सम्मान है जिसे भारतीय साहित्य जगत में श्रेष्ठतम योगदान को सलामी देने और उसका उत्सव मनाने के लिए स्थापित किया गया है, जिसके तहत 2016 में अमिताव घोष, 2015 में किरण नागरकर, 2014 में एमटी वासुदेवन नायर, 2013 में खुशवंत सिंह, 2012 में श्री वीएस नॉयपाल तथा 2011 में महाश्वेता देवी को सम्मानित किया जा चुका है।

एक रोड्स स्कॉलर, श्री कर्नाड का जन्म 1938 में हुआ और उन्होंने 1960–63 के दौरान ऑक्सफोर्ड के लिंकन तथा मैग्डालेन कॉलेजों में दर्शन, राजनीति, तथा अर्थशास्त्र का अध्ययन किया, तथा दर्शन, राजनीति शास्त्र एवं अर्थशास्त्र में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की। वे पांच दशकों से ज्यादा समय से लेकर अबतक कई पुरस्कार प्राप्त नाटकों तथा फिल्मों का लेखन करते रहे हैं।

प्रतिष्ठित पद्मश्री तथा पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित, श्री कर्नाड को उनके नाटकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय रूप से सम्मानित किया जाता है जैसे कि अभूतपूर्व ययाति (1961) , ऐतिहासिक में तुगलक (1964) , तथा उनके तीन मौलिक कार्य हयवदन (1971) , नागा-मंडला(1988) तथा तालीडंडा (1990) हैं, जो लोकगाथाओं, मिथक तथा इतिहास को वर्तमान-समय आधुनिक मानव के संघर्ष से जोड़ते हैं।

खुद को दिल से एक नाटककार और भाग्यवश एक अभिनेता मानते हुए, उन्होंने कई अवसरों पर अभिव्यक्त किया है कि एक नाटक की संरचना और शिल्प में कुछ ऐसा है जिसमें वे मदद नहीं कर सकते। अपनी कला के उस्ताद, श्री कर्नाड के काम को प्रतीक-पटुता, चुस्त दृष्टांत तथा नाटकीयता के लिए सराहा जाता है, जिससे वे दर्शकों को 50 वर्षों से भी ज्यादा समय से रोमांचित करते आ रहे हैं। उनकी 2012 की श्रेष्ठतम कृति, बेंदा कालू ऑन टोस्ट, जिसके अब मराठी तथा अंग्रेजी संस्करण उपलब्ध हैं, को उसके कई सामयिक मुद्दों के शानदार चित्रण के लिए व्यापक रूप से सराहना मिली है, जिसके तहत शहरी आप्रवासन, पर्यावरण की क्षति तथा उपभोक्तावादी रुझान के मुद्दे उठाए गए हैं।

श्री कर्नाड ने कहा, “अगर एक कवि, एक उपन्यासकार, एक निबंधकार या एक व्यक्ति/महिला किसी को संबोधित एक प्रेमपत्र लिख रहा/रही है। अगर वह अपने सामनेवाले तक अपने भाव पहुंचाने में और उससे हामी भरवाने में सफल हो जाता/जाती है, तो वह सफल है। नाटक लिखना, या दूसरी ओर, दर्शकों- कुछ को या कुछ सौ लोगों को भी संबोधित करना, जो उस वक्त अलग-अलग माहौल से उसे सुनने के लिए आए हुए हैं, उसे चुनौती दे रहे हैं कि वह उनका ध्यान अपनी ओर बांधे रखे- और उसको उस जमावड़े के  हर सदस्य की अपेक्षा पर खरा उतरना है, एक साथ और सार्थक रूप से। इसके अलावा, इस पेशे में इतने ज्यादा अलग-अलग क्षेत्रों के पेशेवरों की जरूरत होती है जो अपना बेहतरीन योगदान दे सकें- निर्देशक, क्रू, यहां तक कि पोशाक सहयोगी या प्रॉम्पटर। इसी वजह से थियेटर इतनी जटिल दुनिया है, शब्दों द्वारा रची गई मानवीय संबंधों की एक जटिल बुनावट, और यही वजह है कि, जब इन सब के अंत में, कोई यह कहता है कि वह सफल हुआ, तो यह इतना मार्मिक अनुभव होता है। यही कारण है कि जब टाटा लिटरेचर लाइव!   ने मुझे एक नाटककार के रूप में सम्मानित किया, तो मैंने एक के बाद एक आनेवाली  लहरों की गर्मी से अपने आप को ढका हुआ अनुभव किया- जो भाषाओं, संस्कृतियों, यहां तक कि  पीढ़ियों से भी परे हैं- जो मुझे कहती हैं, “बहुत बढ़िया!” कोई इससे ज्यादा और क्या चाहेगा? यही वह क्षण है जिसके लिए नाटककार जीता है।”

वैश्विक रूप से साहित्य तथा कला के प्रति उनके अमूल्य योगदान को सम्मानित करते हुए, श्री कर्नाड को 1999 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। वे भारतीय सिनेमा की दुनिया में भी सक्रिय रहे हैं जहां उन्होंने कन्नूरू हेग्गादिथि (1999) , का निर्देशन किया है, तथा इकबाल (2005) तथा लाइफ गोज़ ऑन (2009) में अभिनय किया है। विगत में, उन्हें चार फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिले हैं, तीन श्रेष्ठ निर्देशक के लिए- कन्नड़ के लिए वंश वृक्ष (1972) , कड्डू (1974) , ओंडानोंडु कालाडल्ली (1978) तथा एक श्रेष्ठ पटकथा- गोधूलि के लिए बी.वी. कारंत के साथ 1980 में।

अनिल धारकर, टाटा लिटरेचर लाइव! के संस्थापक तथा निर्देशक ने कहा, “हम टाटा लिटरेचर लाइव! से पुरस्कृत के रूप में कर्नाड के नाम की घोषणा करते हुए पूरी तरह रोमांचित हैं। लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 2017 उनका काम, जिसने 60 के दशक में ही आधुनिक भारतीय नाट्यलेखन के आनेवाले युग के संकेत दे दिए थे, ने भारतीय कला तथा साहित्य जगत को स्वरूपित तथा उन्नत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हम आशा करते हैं कि वे फेस्टिवल में हमारे साथ होंगे।”

हरीश भट, ब्रांड कस्टोडियन, टाटा संस ने कहा, “फेस्टिवल में गिरीश कर्नाड की मेजबानी करना और उन्हें टाटा लिटरेचर लाइव! भेंट करने का अवसर मिलना एक सौभाग्य का विषय है। इस वर्ष का लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, साहित्य और सिनेमा में उनकी सक्रिय और बहुविध भूमिकाओं को सम्मानित करते हुए प्रदान किया गया है।  वे हमारी पीढ़ी की एक हस्ती हैं, नाट्यलेखक के रूप में यादगार तथा प्रभावशाली योगदान के द्वारा।”

स्थापना के बाद से, टाटा लिटरेचर लाइव! मुंबई लिटफेस्ट ने उभरते तथा स्थापित दोनो तरह के भारतीय लेखकों की उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए पुरस्कारों की स्थापना की है। अतिविशिष्ट कार्यों की सराहना तथा मान्यता के लिए दस पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे– द टाटा नेक्सन लिटरेचर लाइव! फर्स्ट बुक पुरस्कार और दी टाटा लिटरेचर लाइव! फिक्शन तथा नन-फिक्शन श्रेणियों में बुक ऑफ द इयर पुरस्कार; टाटा कैपिटल लिटरेचर लाइव! बिजनेस बुक अवार्ड; टाटा लिटरेचर लाइव! पोएट लौरियट अवार्ड; टाटा लिटरेचर लाइव! लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड; टाटा लिटरेचर लाइव! पब्लिशर ऑफ द इयर अवार्ड तथा द बिग लिटल बुक अवार्ड्स लेखकों तथा इलस्ट्रेटर के लिए, लिटरेचर-फॉर-चिल्ड्रेन श्रेणी में।

भारत का एक श्रेष्ठतम, तथा मुंबई का सबसे बड़ा साहित्यिक उत्सव, टाटा लिटरेचर लाइव! मुंबई लिटफेस्ट शहर के सांस्कृतिक कैलेंडर को चिह्नित करने के लिए वापस लौट आया है, 16 से 19 नवंबर, 2017 तक। चार दिनों तक, यह उत्सव दो परिसरों में आयोजित होने जा रहा है: NCPA, नरीमन प्वाइंट (16-19 नवंबर, 2017) तथा पृथ्वी थियेटर, जूहू (18 तथा 19 नवंबर, 2017) – दुनिया भर से चुने हुए लेखकों के जमावड़े को एक साथ लाते हुए।

टाटा लिटरेचर लाइव! के बारे में अधिक विवरण के लिए। मुंबई लिटफेस्ट 2017, कृपया देखें फेस्टिवल वेबसाइट, फेसबुक पेज और इस आयोजन को फॉलो करें ट्विटर पर।

यहां प्रवेश निःशुल्क है और पहले आओ पहले पाओ आधार पर होगा।

टाटा समूह, टाटा लिटरेचर लाइव का शीर्षक प्रायोजक है! दि मुम्बई लिटफेस्ट। टाटा नेक्सन, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) तथा टाटा कैपिटल सह-प्रायोजक हैं, तथा लैंडमार्क इसका नॉलेज पार्टनर है। इस उत्सव की अवधारणा श्री धारकर की है, संस्थापक तथा उत्सव निर्देशक, टाटा लिटरेचर लाइव!, जो टाटा समूह के सहयोग से इस उत्सव का आयोजन करते हैं।